Podcasts · Religion & Spirituality · Society & Culture
Amritvani - Sant Kabir, Mira
Yatharth Geeta
97 episodes
This Podcasts covers inexplicable messages of great saints - Sant Kabir, Mira by Swami Adgadanand.
Episodes page 2 of 2
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Geeta saransh
‘‘गीता सारांश’’- इसमें आप इतना समझ लेंगे कि मूलतः गीता का सारांश क्या है। #Krishna #Sadhguru #Bhagavadgita #Gita #Karma
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Jiv ka uddhar
‘‘जीव का उद्धार कैसे हो’’ – यह जीव जन्म जन्मान्तरों से शरीरों की यात्रा करता चला आ रहा है | एक परमात्मा में समर्पण, साधन करने से ही जीव का उद्धार संभव है | #Sadhguru #Happiness #Peace
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Murti pooja
‘‘मूर्ति-पूजा’’- मूर्तिपूजा का क्या औचित्य है ? यह कहाँ तक साथ देती है ? प्रस्तुत है इसे स्पष्ट करने का प्रयास । #Murti #Puja #Sadhguru #Devi #Devta
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Manas me nari
“मानस मैं नारी”- नारियों के प्रति विश्व में कभी मान तो कभी अपमान होता आया है; किन्तु भारतीय मनीषियों की दृष्टि में नारी का वही स्थान है जो पुरुष का रहा है। नारी की गरिमा, नारी की महिमा प्रस्तुत कैसेट में द्रष्टव्य है।…
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Santo yah murdoka gav
‘‘सन्तो ! यह मुर्दों का गाँव।’’- वैदिक महर्षियों ने संसार को मृत्युलोक कहा था। संत कबीर कहते हैं- लोक तो बड़ा शब्द है। संसार तो मुर्दों का एक गाँव मात्र हैं। क्योंकि ब्रह्माण्ड अनन्त है। संसार एक ऐसी लता है जो आगे कोपल…
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Gaiya ek
‘‘गइया एक विरंचि दियो है’’- गाय को लेकर भारत में आन्दोलन होते रहते हैं किन्तु आध्यात्मिक शास्त्रों में गाय मनसहित इन्द्रियों का सम्बोधन है। इन इन्द्रियों की प्रबलता, इनका उद्दीपन, इन पर विजय का चित्रण इस भजन में…
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Swarth
‘‘स्वार्थ’’- समाज में स्वार्थ गर्हित है किन्तु स्वार्थ का विशुद्ध अर्थ स्वयं का अर्थ अर्थात् स्व-स्वरूप की जागृति तथा उसकी उपलब्धि है। #Kabir #Mira #Sadhguru
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Shankar ka swarup
‘‘शंकर का स्वरूप’’- शंकर आदि सद्गुरु हैं। वे गुरु क्यों और कैसे हैं- देखें। शिव तत्त्व प्रत्येक जीव में विद्यमान हैं। एक परमात्मा का चिंतन उन्नत होने पर ‘‘शंका अरिः स शंकर’’ शंकाओं से परे शिवतत्व में स्थिति मिल जाती…
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Vishvakarma
‘‘विश्वकर्माः’’- गीता में भगवान् कहते हैं- मेरे तेज के अंश मात्र से सृष्टि का सृजन, पालन और परिवर्तन होता ही रहता है, अतः विश्वकर्मा नाम का अलग से कोई भगवान नहीं है। भगवान ही विश्वकर्मा हैं। #Sadhguru #Vishwakarma #Puja
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Saraswati
‘‘सरस्वती’’- ‘स’ अर्थात् वह परमात्मा! उसके रस में सराबोर करने वाली जागृति सरस्वती है, जो परमात्मा से संचालित है। यदि वे संचालन नहीं करते तो अलग से सरस्वती नाम की कोई शक्ति नहीं है। #Sadhguru #Saraswati #Puja
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Kundalini
‘‘कुंडलिनी’’- योग-पथ की क्रमोन्नत सात भूमिकायें हैं। एक भूमिका से दूसरी अवस्था का सन्तरण कुंडलिनी जागृति है जिसकी अंतिम श्रेणी पार कर लेने पर स्थिति है, जहाँ जन्म-मृत्यु का क्रम समाप्त हो जाता है। यह सद्गुरु प्रदत्त…
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Daras diwana bavla
‘‘दरस दिवाना बावला’’- प्रस्तुत पद में भजन में निमग्न अवधूत के लक्षणों पर प्रकाश डाला गया है। एकांत सेवन, एक परमात्मा में लव लगाकर रहना, सद्गुरु की प्राप्ति से विघ्नों का अंत भजनानन्दियों का मार्गदर्शक भजन है। #Kabir…
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Santo sahaj samadhi bhali
‘‘संतो ! सहज समाधि भली’’- परमतत्त्व परमात्मा सदैव एकरस, सहज है। उसके साथ समत्व प्राप्त होने पर योगी का भजन कैसा होता है ? उसकी रहनी कैसी होती है ? उसकी श्वास सदा भजनमय ही रहती है। #Kabir #Mira #Sadhguru #Samadhi
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Dharmacharan
‘‘धर्माचरण: विचार या विश्वास ?’’- यह एक भक्त के प्रश्न का उत्तर है कि धर्माचरण विचार से होता है या विश्वास से ? भगवान से कुछ परिचय मिलने पर ही विश्वास पुष्ट होता है। बिना प्रमाण के विश्वास होता भी नहीं। कदाचित् है तो…
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Ghungat ke pat khol
‘‘घूँघट के पट खोल’’- अंतःकरण के छल-कपट को घूँघट की संज्ञा दी गयी है। कपट का आवरण दूर करते ही प्रियतम परमात्मा के मिलन का विधान है। भक्ति का दीप जला कर आसन को अचल कर लें, आपके प्रियतम मिलेंगे। #Kabir #Mira #Sadhguru
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Avatar
‘‘अवतार’’- अवतार के विषय में संसार में विलक्षण भ्रान्तियाँ है। वस्तुतः अवतार योगी के हृदय में होता है। जिस परमात्मा की हमें चाह है, जिस सतह पर हम हैं, प्रभु का उसी सतह पर उतर आना और आत्मा से अभिग्न होकर मार्गदर्शन करना…
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Dhyan
‘‘ध्यान’’- जहाँ चित्त को लगाया जाय, उसी में वृत्ति का एकतार चलना ध्यान है। ध्यान किसका करें ? कैसे करें ? इन बिन्दुओं पर प्रकाश डाला गया है। नाम, रूप और ब्रह्मविद्या ध्यान के संवाहक हैं। #Meditation #Yoga #Dhyan
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Aalam hai udasi ka
‘‘आलम है उदासी का’’- यह साधनापरक गजल मिश्रित कव्वाली है। साधना के आरम्भ में ही प्रभु एक झलक दिखा कर चले जाते हैं। तभी तो उन्हें प्राप्त करने की व्याकुलता बढ़ जाती है और साधक प्राप्त करके ही दम लेता है। #Kabir #Mira…
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Dhobiya jal bich
‘‘धोबिया जल बिच मरत पियासा’’- यहाँ संत कबीर ने साधक को धोबी की संज्ञा दी, जो अपने जन्म-जन्मांतरों के दागों की धुलाई स्वयं करने में समर्थ है। ब्रह्म उसी के हृदय में है। भक्तिरूपी जल भी उसके हृदय में है। जल के बीच में भी…
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Bandagi ho us shan
‘‘बन्दगी हो तो उस शान की’’- पूजन का अर्थ आँख मूँदना नहीं। वंदन उस ऊँचाई का हो कि ज्यों-ज्यों शिर झुके प्रभु की अनुकम्पा उतरती जाय, परिस्थितियों में सुधार होता जाय, ईश्वरीय आलोक में साधक अग्रसर होता रहे। #Kabir #Mira…
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Pani bicha min pyasi
‘‘पानी बिच मीन पियासी’’- पूर्व महर्षियों ने ईश्वर को हृदय-देश में प्राप्त किया। उसी ब्रह्मामृत के मध्य रहकर भी आप प्यासे हैं। क्या करें कि वह मिल जाय-वह विधि इसमें प्रस्तुत है। #Kabir #Mira #Sadhguru
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Sasurase gauna ulat chala re
‘‘ससुरा से गवना उलटि चल्यो नैहरवाँ’’- संसार में पड़ा जीव परमात्मा में लव लगाकर अपने स्वरूप नैहर (उद्गम) की ओर चला गया। दृष्टांतों के द्वारा संत कबीर ने जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का चित्रण किया है। #Kabir #Mira…
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Ras gagan gufa mein
‘‘रस गगन गुफा में अजर झरै।’’- आरंभिक अवस्था के साधक को भजन में आनन्द नहीं मिलता। किन्तु एक ऐसा स्तर आता है ‘गगन गुफा’, उसमें प्रवेश के साथ ही ‘रस अजर झरे’ जिसका नाम ब्रह्मानन्द है वह अजस्र बहता ही रहता है, ईश्वरीय…
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Pranayam
‘‘योगशास्त्रीय प्राणायाम’’- मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार-चतुष्टय अन्तःकरण प्राण कहे जाते हैं। इनके क्रिया-कलाप पर विराम लग जाना प्राणायाम है। मन में न कोई संकल्प उठे और बाह्य वायुमण्डल के संकल्प अन्तःकरण में प्रवेश न कर…
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Ab hum dono kul ujayari
‘‘अब हम दोनों कुल उजियारी’’- ईश्वर-पथ पर कोई निर्गुण उपासक है तो कोई सगुण। कबीर कहते हैं कि अब ऐसी स्थिति आ गयी है कि दोनों कुल अर्थात् सगुण भगवान और निर्गुण ब्रह्म दोनों ही मुझमें प्रकाशित है। दोनों साधना एक ही हैं,…
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Aneko prshna aise hai
‘‘अनेकों प्रश्न ऐसे हैं जो दुहराये नहीं जाते’’- ईश्वरीय पथ में साधन जागृत हो गया, बीजारोपण हो गया तो बीज का नाश नहीं होता, यह दुहराया नहीं जाता। इसी प्रकार बहुत से उत्तर भी ऐसे हैं जो बतलाये नहीं जाते, अनुभवगम्य हैं।…
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Todana tute hua dilko
‘‘तोड़ना टूटे हुए दिल को बुरा होता है’’- मग्न हृदय लोगों को ठेस नहीं पहुँचाना चाहिए। परिस्थिति बदलते देर नहीं लगती अतः हताश नहीं होना चाहिए। इस संसार में जिसका कोई नहीं होता उसका रक्षक परमात्मा स्वयं हुआ करता है।…
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Siddha hai koi atit
‘‘सिद्ध है सोई अतीत कहावै।’’- इस भजन में सिद्ध के लक्षण, गुणातीत के लक्षण, संन्यास की स्थिति, परमहंस के लक्षण विजयाहवन इत्यादि का स्पष्टीकरण के साथ महापुरुष की रहनी का चित्रण है। सन्तों के लिये उपयोगी दिशा-निर्देश है।…
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Payoji maine ram ratan dhan payo
‘‘पायो जी मैंने नाम रतन धन पायो।’’- परमात्मा के अनन्त नाम हैं, सभी एक-दूसरे से बढ़-चढ़कर हैं, किन्तु वास्तविक नाम एक जागृति है जो सद्गुरु द्वारा प्राप्त होती है। इसी संदर्भ में माता मीरा का यह भजन है। नाम को लेकर…
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Ram kahat chal
‘‘राम कहत चल, राम कहत चल भाई रे।’’- संसार में हर कार्य करते समय नाम का स्मरण करते चलो अन्यथा आवागमन के चक्कर में पड़ जाओगे। छूटने में अत्यन्त कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। नाम जपने के लिए कोई जगह अपवित्र नहीं होती। हृदय…
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Sadguru ki hat
‘‘सद्गुरु की हाट’’ – सद्गुरु की हाट सांसारिक भीड़-भाड़ से अलग एकांत जंगल में हुआ करती है, जहाँ जन्म-जन्म के साधनारत पथिक आत्मिक सम्पति का सौदा करते हैं | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Koi apane me dekha
‘‘कोई अपने में देखा’’ – त्रिगुणातीत संत के चरण कमलों को हृदय में देखने से भजन जागृत हो जाता है | भगवान उतना ही बतातें जाते है जितना साधक की क्षमता है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Guru mantra
‘‘गुरु मंत्र’’ – मंत्र न लिखने में आता है न कहने में, बल्कि अनुभवी सद्गुरु द्वारा विरही साधक के ह्रदय में जागृत हो जाता है | #Kabir #Mira #Sadhguru #Mantra
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Ek hi dharma ek hi vrat nema
‘‘एक ही धर्म’’ – सृष्टि में एक ही धर्म है - मन क्रम वचन से पत रखने वाले एक परमात्मा के, उन परम प्रभु के चरणों में अनुरक्ति | #Kabir #Mira #Sadhguru #Dharma #Religion
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Dharma ki pahali sidi
‘‘धर्म की पहली सीढ़ी’’ – धर्म का आरंभ संतो के संग से है तभी सत्संग होता है, धर्म का प्रवेश द्वार यही है | #Kabir #Mira #Sadhguru #Dharma
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Pyas bujhaye bin pani
‘‘प्यास बुझाबै बिन पानी’’ – शरीर की प्यास तो जल से बुझ जाती है किन्तु आत्मा की प्यास जब तक विषय रूपी वारि है नहीं मिटेगी या ब्रह्म पियूष अप्राप्त है तब भी नहीं मिटेगी | कोई सद्गुरु ही इस प्यास को मिटा सकने में सक्षम है…
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Mandir diyana bar
‘‘मंदिर दियना बार’’ – भगवान के लिये विरह वैराग्य और तड़प पैदा हो गयी तो विरहिन को, नाम दीप आलोकित करना चाहिए क्रमश: यह भक्ति मणि के रूप में ढलता जायगा | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Darbar me sacche sadguru ke
‘‘दरबार मे सच्चे सद्गुरु के’’ – सद्गुरु के चरणों का आश्रय लेने वाला सभी चिंताओं से मुक्त हो जाता है, उसकी जिम्मेदारी प्रभु ले लेते हैं | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Kabira kabse bhaya bairagi
‘‘कबिरा कबसे भया बैरागी’’ – सांसारिक से लेकर स्वर्ग तक के प्रलोभनों तथा उन वस्तुओं में आसक्ति का भान न हो तभी सच्चा वैराग्य है | संस्कारों के उन्मूलन तथा प्रभु की प्राप्ति ही योग की पूर्णता है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Dashahara + Navaratri
‘‘दशहरा + नवरात्री’’ – दसों इन्द्रियों से वासनाओं का उन्मूलन दशहरा है | इससे जगत रूपी रात्रि का अवसान और राम राज्य का प्रचंड सूर्योदय हो जाता है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Guru aisa mara baan
‘‘गुरु ऐसा मारा बाण’’ – सद्गुरु के उपदेश हृदय में चुभ जाते हैं जिनसे जनम मृत्यु के कारणों का अंत कराने वाला साधक जागृत हो जाता है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Khayale rind mastana
‘‘खयाले रिंद मस्ताना’’ – सद्गुरु का चिंतन साधक को सदैव मस्ती में डुबाये रखता है | इसके पश्चात भगवान ही साधक को उठाते बैठाते चलाते है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Balihari aise sadguru ki
‘‘बलिहारी ऐसे सद्गुरु की’’ – कर्मों से मुक्ति दिलाने वाले सद्गुरु के प्रति आभार प्रदर्शक भजन है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Umar sab dhokhe mein
‘‘उमर सब धोखे में’’ – जिस कमी की पूर्ति के लिये मानव शरीर मिला उस भजन को न कर जीवन पर्यंत हमने जिनका संग्रह किया धोखा ही निकला | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Sai tera bhed na jane koi
‘‘साई तेरा भेद ना जाने कोई’’ – बाह्य शरीर की धुलाई से अंतर के मैल नही जाते जिनके रहते परमात्मा का दर्शन नहीं हो पाता | भजन में एक दिन की भी कमी एक जनम का कारण होती है इसलिये भजन में लापरवाही नहीं करनी चाहिये | #Kabir…
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Avadgu jivat hi kare aasa
‘‘अवधू जीवत ही कर आसा’’ – जीते जी ही भजन संभव है मरने के पश्चात भजन नहीं होता | जिसने भी पाया जीते जी पाया है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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Sunata hai guru gyani
‘‘सुनता है गुरु ग्यानी’’ – चित आकाशवत होने पर ईश्वरीय शब्द सुनायी पड़ता है जिससे माया का आवरण हल्का होता जाता है | #Kabir #Mira #Sadhguru
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