# 16. Yayati , and the curses that rooted the Mahabharat !

An episode of [Bharat Unscripted](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1831664449), 11 Nov 2025, 9:06.

Audio: https://anchor.fm/s/109bdda30/podcast/play/110972513/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-10-10%2F412201421-44100-2-152a047596505.m4a

When Nahush fell to arrogance and Yayati surrendered to desire, their family’s fate was sealed. The choices born from their curses gave us a lineage that would one day fight the Mahabharat and define India’s idea of dharma for all time.

## Transcript

[0:00] भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का स्वागत है।
[0:33] हमारी आज की कहानी थोड़ी सी लंबी है क्योंकि एक नहीं दो राजाओं की
[0:37] है, वो भी ऐसे जिनकी कहानियों से कौरवों और पांडवों का जन्म हुआ।
[0:44] हमने अब तक इस फोरम में ज्यादातर कहानियों सूर्यवंश की सुनी है।
[0:48] मतलब भगवान राम का वंश। भारत के इतिहास में सूर्यवंश से
[0:52] हमें बहुत सारे आदर्श राजा मिले और उनकी बहुत सारी कहानियों जैसे
[0:57] रामायण, हमारी राजा मानदता की कहानी और नाभा की कहानी।
[1:02] ऐसा ही और एक वंश है व्हिच गेव उस दी मोस्ट इंटरेस्टिंग स्टोरी ऑफ
[1:07] दी यूनिवर्स चंद्रवंश पितामह, भीष्म, भगवान कृष्ण, पांडव, कौरव
[1:15] ये सब चंद्रवंश के हैं पर इन सबसे बहुत बहुत पहले।
[1:22] इस वंश में भी अनेक महान राजा हुए।
[1:25] उनमें एक थे राजा नहुष, नहुष की और नहुष के बेटों की कहानी।
[1:31] उन्हें मिला हुआ श्राप इस पोटेंशिअली दी सीड दट गेव उस दी
[1:36] युग ऑफ महाभारत जाने इनकी कहानी महाभारत के युग की शुरुआत का बीज
[1:41] है। नहुष एक बहुत ही पावरफुल और
[1:45] धार्मिक राजा थे। हमारे राजा मान्धता की तरह नहुष
[1:49] भी एक चक्रवर्ती सम्राट थे। भारत भर के राजा और ऋषि उनका भी
[1:54] आदर और सम्मान करते थे पर नहुष की असली इंटरेस्टिंग कहानी शुरू हुई।
[2:01] इंद्र के विपिन वज्र के जन्म के साथ हमने हमारी पिछली कहानी में
[2:06] इंद्र की वृद्धाश्र पर जीत ऋषि दादी जी का सैक्रिफ़ाइस और वज्र
[2:10] का ओरिजिन सुना है। एस ए रिफ्रेशर इंद्र और सारेदेव
[2:15] असुरों के साथ एक युद्ध में हार रहे थे।
[2:19] इस युद्ध में असुरों का लीडर था वृत्र और उसे हराने के लिए ऋषि
[2:23] दादी जी की हड्डियों से ऋषि विश्वकर्मा ने वद्र बनाया।
[2:27] वज्र की मदद से इंद्र ने वृत्र को हरा तो दिया था लेकिन अपनी बार
[2:32] बार होती हार और उनकी हार को जीत में बदलने के लिए ऋषि दादी जी का
[2:36] सैक्रिफ़ाइस। ये सब देख कर इंद्र कुछ दिन के
[2:40] लिए स्वर्ग की जिम्मेदारी संभालने से दूर हो गए थे।
[2:45] सभी देवों ने इंद्र को मनाने की बहुत कोशिश की पर वो नहीं माने।
[2:49] इस वक्त भारत के सबसे आदरणीय राजा थे नहुष।
[2:54] उनकी ख्याति सुनकर देवो ने उन्हें स्वर्ग की जिम्मेदारी लेने को
[2:57] कहा। और वो झट से मान भी गए, पर हमारे
[3:01] पौराणिक कहानियों में एक कॉमन थीम है।
[3:04] अच्छे लोग जो करप्ट हो जाते हैं, जैसे ही उन्हें बहुत ज्यादा पावर
[3:07] मिलती है नहुष के साथ भी यही हुआ जो नहुष अब तक धर्म को लेकर चलने
[3:13] वाले आदरणीय राजा थे। वो स्वर्ग में अफसर आए।
[3:16] वेल्थ और प्लेजर्स देखकर अपने मार्ग से चूक गए और डीविएट इतने
[3:22] हुए कि इंद्र का स्वर्ग लेकर ये भी सोचने लगे कि इंद्र की पत्नी
[3:28] भी उन्हीं की है। अपना रौब दिखाने के लिए 1 दिन
[3:33] उन्होंने ऋषियों को आदग्न्या दी। की सारे ऋषि उन्हें कंधे पर उठाकर
[3:37] इंद्र की पत्नी शाछि के पास ले जाए।
[3:40] नहुष को शायद ये लगा की यूनिवर्स के सारे बड़े बड़े ऋषि जब उन्हें
[3:44] लेकर किसी के पास जाएंगे तो इट विल बी एन ऑफर नो वॅन कैन एवर
[3:47] रिफ्यूज़। पर जब उद्देश्य गलत हो और उसे
[3:51] पानी का मार्ग भी गलत हो। तो आउटकम सही नहीं हो सकता।
[3:57] ऋषियों ने इस स्वर्ग के राजा की बात तो मान ली थी पर जब वो उन्हें
[4:01] ले जा रहे थे तब एक अति एक्साइटेड नहुष ने ऋषि अगत्य को जल्दी चलने
[4:06] का इशारा उन्हें पैर मार कर किया। अगत्य जैसे महान ऋषि राजा की
[4:12] आज्ञा का पालन तो करते, लेकिन इतना बड़ा अपमान थोड़ी सहते
[4:17] उन्होंने नौज को शराब दिया कि वो स्वर्ग और ऋषियों के कंधों के आसन
[4:21] को छोड़कर वहाँ से गिरकर हजारों साल तक धरती पर रेंगते हुए
[4:26] रहेंगे। किसी साँप की तरह बस।
[4:31] इससे शुरू हुई एक सीरीज ऑफ़ कॉन्फ्लिक्ट्स एंड जनरेशनल इश्यूस
[4:37] के सबसे बड़े बेटे थे यति। उन्होंने पावर को करप्शन से
[4:41] डायरेक्ट चोरेलेट किया और राज्य त्याग कर सन्यासी बन गए।
[4:47] के राज्य की रिस्पांसिबिलिटी फिर आई उनके दूसरे बेटे पर।
[4:52] ययाति पर ययाति अपने पिता की तरह एक बहुत सक्सेसफुल राजा बने।
[4:58] एंड बिकम ए चक्रवर्ती किंग चंद्रवंश का नाम और ख्याति ययाति
[5:03] ने खूब बढ़ाई। कुछ दिन बीते और उनका विवाह हुआ।
[5:10] शुक्राचार्य की बेटी देवयानी से शुक्राचार्य कौन थे?
[5:14] ये किसी अलग कहानी में जरूर सुनेंगे।
[5:18] देवयानी और एयाति को दो बेटे हुए। कुछ दिन आनंद में बीत गए।
[5:23] थोड़े दिन बाद देवयानी की एक सहेली इनके साथ रहने आई।
[5:28] और चोरी छुपे एयाती ने उस सहेली शर्मिष्ठा से भी विवाह कर लिया और
[5:32] एयाती और शर्मिष्ठा को हुए तीन पुत्र।
[5:37] ये बात जब देवयानी और शुक्राचार्य को पता चली तो उन्होंने एयाती को
[5:40] श्राप दिया कि वो तारूण्य में ही वृद्ध हो जाएंगे।
[5:45] जयाती इससे पहले कुछ रियेक्ट कर पाते या इवन माफी मांग पाते उनका
[5:50] शरीर पल भर में वृद्ध हो गया, हड्डियों कमजोर हो गई, रीढ़ की
[5:56] हड्डी झुक गई एंड ही इन्स्टंटली बिकेम ए रिंकल्ड ओल्ड मैन।
[6:02] एक वृद्ध ययाति फिर शुक्राचार्य के सामने गिड़गिड़ाने लगे।
[6:06] कहने लगे कि उन्हें अभी ज़िन्दगी में बहुत कुछ हासिल करना है।
[6:10] कहने लगे कि इट्स टू सून फॉर हिम टु बी एन ओल्ड मैन पर शुक्राचार्य
[6:14] अपने श्राप से हटने वाले तो थे नहीं।
[6:17] शायद ययाति को थोड़ा और पेन देने के लिए उन्होंने एक पर्याय दिया।
[6:22] एक ऑप्शन कि ययाति अपना यूथ किसी बेटे से स्वप कर लें ताकि वो बेटा
[6:29] जवानी में वृद्ध हो जाए और ययाति उसकी तरह यंग ययाति इतने
[6:36] डेस्पेरेट थे कि बिना पूरी तरह सोचे।
[6:40] सचमुच अपने बेटों को बुलाकर उनसे अपना ओल्ड एज स्वाप करने की
[6:44] रिक्वेस्ट की एंड थिस थिस शेप्ड अप जनरेशन्स एंड दी महाभारती
[6:51] हिस्टरी ययाती ने जब अपने बेटों से पूछा तो सबसे बड़े बेटे ने
[6:56] सबसे पहले इंकार किया। और एक एमोशनली चॉर्ज्ड कयाती ने
[7:00] उन्हें श्राप दे दिया कि ना वो ना उनके कोई भी वंशज भारतवर्ष के
[7:06] राजा बन पाएंगे। ये बेटा था यदु और इनका वंश बना
[7:12] यादव हमारे कृष्ण का वंश। और ये कभी भारतवर्ष के सम्राट
[7:18] नहीं बन पाए। दूसरे, तीसरे और चौथे दूर वसु,
[7:23] ध्रुव्यु और अनु तीनों बेटों ने मना किया।
[7:27] हर एक का रीज़न सेम था। जब तारुने में चीजें हासिल हो तो
[7:32] कोई वृद्धत्व का शाप क्यों ले? हर एक को अपनी अपनी जिंदगी जीनी
[7:37] थी। उन्हें भी ऐसे ही श्राप मिले
[7:40] जिससे वो भारतवर्ष से हमेशा के लिए दूर हो गए।
[7:44] पर जो सबसे छोटा बेटा था वो अपने पिता की डेस्परेशन देख कर हाँ कर
[7:49] गया। उसने अपने पिता की इच्छा को एक
[7:53] पुत्र धर्म की तरह आज्ञा समझा। एक डेस्परेट ययाति श्राप से मुक्त
[7:59] हुए और उनका सबसे छोटा बेटा वृद्ध हो गया।
[8:04] वापस युथ पाकर ययाति खुश तो बहुत थे पर थोड़ी नाखुश भी।
[8:11] थोड़े ही समय बाद समझ गए कि जीवन में सिर्फ एन्जॉयमेंट ही सब कुछ
[8:14] नहीं होता। अपनी गलती की रिस्पांसिबिलिटी
[8:17] लेना और उसे सही करना ये असली योद्धा होता है।
[8:23] ये सच्चा इंसान होता है। उन्होंने शुकराचार्य से माफी
[8:27] मांगी। और अपने बेटे का यूथ उसे वापस
[8:31] दिया। उस छोटे बेटे को राजा बनाया इस
[8:35] बेटे के वंश से आए कई महान योद्धा हैं जिन्होंने भारत का इतिहास
[8:39] बनाया। ये बेटा था पुरु।
[8:43] पुरु के वंश ने दुनिया को दिया भारत और भारत के वंश, जो ने दिया
[8:47] महाभारत अगली कहानी में जल्द मिलेंगे।

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