# 3. A folklore - Blind Sage !

An episode of [Bharat Unscripted](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1831664449), 12 Aug 2025, 6:39.

Audio: https://anchor.fm/s/109bdda30/podcast/play/108790230/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-8-25%2F408113990-44100-2-4c3767b5715c4f07.m4a

An ancient Indian folklore of a king, a missing prince, and a blind sage who saw more than anyone else.

## Transcript

[0:00] भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का स्वागत है।
[0:30] आज की कहानी इतिहास से नहीं है, भारत के फोलक्लोर से है छोटी है,
[0:35] लेकिन सोचने लायक है भारत में कहीं दूर एक प्राचीन राजा।
[0:40] एक बहुत बड़ा और लम्बा युद्ध जीत कर अपने राज्य वापस आए।
[0:45] जीत का सेलेब्रेशन अपने पीक पर था।
[0:47] तभी उसी बीच मंत्रियों को पता लगा कि राज्य का राजकुमार उनके राजा
[0:52] का बेटा कहीं खो गया है। वो बहुत घबरा गए।
[0:57] सोचा पहले ढूंढने की कोशिश की जाए।
[0:59] बिना राजा को बताए ताकि राजा चिंतित ना हो।
[1:03] मंत्रियों ने कुछ सैनिक इकट्ठा किए और जीस रास्ते से वो आए थे।
[1:07] उसी रास्ते के आसपास राजकुमार को ढूंढने को कहा।
[1:10] सैनिक तुरंत अपने घोड़ों पर सवार होकर निकल गए।
[1:13] तलाश में काफी दूर तक पहुंचे, लेकिन राजकुमार नहीं मिले।
[1:19] पर एक पेड़ के नीचे एक ऋषि ध्यान में मग्न मिले।
[1:25] सैनिकों ने जोरदार आवाज़ में उनसे पूछा ऋषि तुने किसी राजकुमार को
[1:30] देखा है? युवा है राजवस्त्र में था, ऋषि ने
[1:35] आँखें बंद रखी, फिर शान स्वर में कहा।
[1:40] मैं तो अंधा हूँ देख नहीं सकता कौन आया या गया, मुझे नहीं पता।
[1:47] सैनिक बिना कुछ कहे आगे बढ़ गए। कुछ समय बाद जब कोई वापस नहीं आया
[1:52] तो मंत्रियों ने सोचा अब खुद ढूंढा जाए राजकुमार को।
[1:57] वो भी निकल गए अपने घोड़ों पर सवार होकर वो भी एस एक्सपेक्टेड
[2:02] उसी पेड़ के पास पहुंचे और उन्हीं ऋषि को देखा।
[2:07] उन्होंने ऋषि से पूछा ऋषि वर क्या आपने हमारे राजकुमार को देखा है?
[2:11] हम बहुत देर से ढूंढ रहे हैं, लेकिन कोई पता नहीं चला।
[2:16] ऋषि ने फिर शांत स्वर में वही कहा, मैं अंधा हूँ, देख नहीं
[2:20] सकता। मंत्री प्रणाम करके आगे निकल गया।
[2:25] जब मंत्री भी बहुत देर तक वापस नहीं आये तो पंडितों ने सोचा कि
[2:29] एक कोशिश वो भी करेंगे, वो भी निकल गए उसी दिशा में।
[2:34] उनको भी वही पेड़, वही ऋषि मिले। पंडितों ने ऋषि को बोला, महर्षि
[2:42] हम हमारे राजकुमार को ढूंढ रहे हैं, आपको कुछ पता है राजकुमार
[2:47] सुबह से मिले नहीं है, हम बहुत चिंतित हैं, कृपया मदद करें ऋषि
[2:52] का जवाब अब भी वही था। मैं कुछ देख नहीं सकता।
[2:58] पंडित भी धन्यवाद देकर आगे निकल गए।
[3:04] 1 दिन बीत गया सैनिक, पंडित, मंत्री जो जो निकले थे वो वापस
[3:09] नहीं आए। राजा जब अपनी प्रजा से बात करते
[3:13] करते सेलेब्रेशन खत्म कर अपनी महल पहुंचे तब उनको पता चला कि
[3:17] राजकुमार गायब है। उनके एक मंत्री ने उन्हें बताया
[3:22] कि उन्हें सुबह पता चला था और कुछ सैनिक मंत्री और पंडित राजकुमार
[3:26] को ढूंढने निकले हैं लेकिन लौटे नहीं।
[3:32] राजा बहुत चिंतित हो गए। रात के अंधेरे में उन्हें कुछ
[3:35] दिखना मुश्किल था। रात भर जागते रहे और सुबह होते ही
[3:39] निकल गए खुद अपने बेटे को ढूंढने। राजा को भी राजकुमार मिलने से
[3:46] पहले वही पेड़ के नीचे वही ऋषि मिले।
[3:49] उन्हें देख कर राजा घोड़े से उतरे, ऋषि के चरणों को छुआ और
[3:54] विनम्र हो कर पूछा, महर्षि अगर आपकी साधना में बाधा ना हो तो
[4:00] क्या मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूँ? ऋषि ने हाँ में सर हिलाया।
[4:06] राजा बोले मेरा बेटा कहीं खो गया है।
[4:09] और जो भी उसे ढूंढने गया, अब तक लौट कर नहीं आया।
[4:14] क्या आपको इस विषय में कुछ पता है?
[4:17] क्या आप मेरी मदद कर सकेंगे? ऋषि बोले राजा मैं अंधा हूँ, मुझे
[4:24] कुछ नहीं दिखाई देता। लेकिन हाँ, कुछ समय पहले सैनिक
[4:28] आये थे, फिर कुछ मंत्री। बाद में कुछ पंडित सभी राजकुमार
[4:34] को ढूंढ रहे थे। मुझसे यही प्रश्न पूछ कर इस दिशा
[4:38] आगे निकल गए। राजा ने ऋषि को धन्यवाद कहा और
[4:43] निराश होकर अपने घोड़े की तरफ आगे बढ़े।
[4:47] लेकिन फिर एक बात स्ट्राइक हुई, अगर ये ऋषि अंधे हैं तो इन्हें
[4:52] कैसे पता चला कौन सैनिक था, कौन मंत्री और कौन?
[4:55] पंडित राजा झट से पलटे और शान स्वर में ऋषि से पूछा, मर्शी आपको
[5:03] कैसे पता चला? की मैं राजा हूँ।
[5:06] जब कौन सैनिक था कौन मंत्री आप तो देख नहीं सकते ना?
[5:13] ऋषि मुस्कुराए और बोले भाषा सैनिक आए बिना विनम्रता बिना सोचे सीधा
[5:22] सवाल पूछा। बिना धन्यवाद दिए आगे बढ़कर
[5:27] मंत्री आए थोड़ा संभल के, लेकिन अधिकार के भाव में पंडित आए
[5:33] मर्यादा के साथ और आप अब घोड़े से उतरे, प्रणाम किया, मेरी आज्ञा
[5:39] मांगी, फिर प्रश्न किया। शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते, वो
[5:45] संस्कार दिखाते हैं आपके बोलने का तरीका, आपका व्यवहार सब कहता है
[5:51] कि आप राजा है। थोड़े समय बाद राजा को अपना बेटा
[5:56] एक गुफा में बेहोश मिला। सैनिक या मंत्री वहाँ तक पहुँच
[6:00] नहीं पाए थे। राजकुमार वहाँ कैसे पहुंचा ये बात
[6:04] तो राजा को पता नहीं चली पर इस अंधे ऋषि की छोटी सी बात राजा के
[6:09] जीवन की सबसे बड़ी सीख बन गई रिस्पेक्ट अर्न्स रिस्पेक्ट टोन
[6:17] डिसाइड्स कैरेक्टर। उम्मीद करता हूँ आपको ये कहानी
[6:22] अच्छी लगी होगी। अगली कहानी में मिलेंगे जल्दी।

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