# EP44- BHAIRAV - Part 3 | FULL EPISODE | SPOOKCAST ORIGINAL STORY |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 19 May 2025, 1 h 16 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/102887952/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-4-19%2F400586604-44100-2-298c9ce9c913b.m4a

Part 3 Time Stamp : 44:14 In this Episode, a mangled body of Shankar is found outside the dreaded Shamshan Ghat of the village, where tantrik Bhairav lives with his scary dog Bhola. Who killed Shankar? Does the 14 Day curse actually work? Did Shankar die because of that? What role does Bhairav and his dog Bhola play in his death? Listen to this original story to find out the truth. Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! Send your stories on our Whatsapp number 9767916545. Leave a msg or a voice note and we will get back to you. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Haunted Village | Haunted House | Haunted Flat | Tantrik |Shamshaan | Tantra | Aghori Baba | Sadhu | Narrated by : Manjila STORY and SOUND : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay Music used by Vivek Abhishek : SUBSCRIBE us on YOUTUBE: https://bit.ly/3qumnPH Follow on Facebook: https://bit.ly/33RWRtP Follow on Instagram: https://bit.ly/2ImU2JV Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:03] दोस्तों नमस्कार, फर्स्ट ऑफ़ ऑल, सॉरी फॉर दी डिले ऑन थिस एपिसोड।
[0:08] मेरी थोड़ी तबियत खराब थी और इस वजह से मैं लास्ट पार्ट रिकॉर्ड
[0:12] नहीं कर पा रही थी। पर आज अब सुनने वाले हैं भैरव
[0:16] पार्ट थ्री इस कहानी का आखिरी। खौफनाक भाग सबको आसानी हो इसलिए
[0:23] मैंने तीनों पार्ट्स को एक साथ इसी एपिसोड में रखा है।
[0:27] अगर आप इस कहानी को पहली बार सुन रहे हैं तो आप आज के एपिसोड को
[0:31] स्टार्टिंग से सुन सकते हैं और जो लोग पार्ट वन और पार्ट टू ऑलरेडी
[0:35] सुन चूके हैं। वो डिस्क्रिप्षन में दिए गए टाइम
[0:38] स्टाम्प से पार्ट थ्री सुन सकते हैं।
[0:41] आज की कहानी शुरू करने से पहले वहीं छोटा सा डिस्क्लेमर है।
[0:46] यह कहानी इंटेंस और एक्स्ट्रीम ग्राफिक एलिमेंट से भरी है, जो
[0:50] कुछ लोगों के लिए काफी डिस्टर्बिंग हो सकती है।
[0:53] तो अगर आप कमजोर दिल की है। या ग्राफिक हॉरर सीन्स को
[0:56] बर्दाश्त नहीं कर सकते तो आप आज की कहानी स्किप कर सकते हैं।
[1:02] बट फॉर ऑल दोज़ लिसनर्स हूँ एन्जॉय सच स्टोरीज़ कीप लिसनिंग
[1:08] सुनते रहिए स्पोक कास्ट अभी और मंजिला के साथ।
[1:22] सुबह के 4:00 बज रहे थे, हल्की हल्की बारिश हो रही थी।
[1:28] आसमान काले बादलों से भरा हुआ था पर शमशान घाट के पास भीड़ बढ़ती
[1:34] जा रही थी। कुछ भीगते हुए लोग एकदम खामोश थे।
[1:39] कुछ। तभी आवाज में बात कर रहे थे वहाँ
[1:43] आए कुछ नए जिज्ञासु लोग रास्ते की तरफ एक नजर देख कर घबराहट से
[1:48] कांपते हुए पीछे हो रहे थे। कुछ अपनी आँखों और मुँह को कपड़े
[1:52] से ढक रहे थे पर एक चीज़ जो सबकी आँखों में थी हवा में थी वो था
[1:59] डर। हे खौफ हर किसी की नजर एक ही जगह
[2:06] टिक्की हुई थी शमशान के बाहर रास्ते के बीच में और वहाँ जमीन
[2:13] पर पड़ी हुई थी शंकर की लाश या फिर कहूं?
[2:18] उसकी मांस के कुछ टुकड़े जिसे देख कर ऐसा लग रहा था मानो किसी जानवर
[2:24] ने उसे नोंच खाया हो। वो दृश्य भयावह था।
[2:28] शंकर का आधा चेहरा गायब था, एक आग बाहर निकली थी, दूसरी गायब थी।
[2:35] आधे दांत टूटे हुए थे उसके होंठ। नाक एक गाल गायब थे, मानो किसी
[2:43] जानवर ने उसे चबाकर खा लिया हो। गले से मांस के लंबे लंबे टुकड़े
[2:48] लटक रहे थे जैसे किसी ने मांस को नोचा हो।
[2:52] शरीर का चमड़ा गले से खींचकर पेड़ के नीचे फाड़ कर अलग किया गया था।
[2:59] पेट फटा हुआ था, कुछ अंदरूनी अंग गायब थे, कुछ रास्ते पर इधर उधर
[3:04] बिखरे पड़े थे। शंकर की आंधी आटे खींच कर बाहर
[3:09] निकाली गई थी। चारों तरफ खून और मांस के टुकड़े
[3:13] फैले हुए थे। हवा में फैली खून की गंध।
[3:17] बर्दाश्त करनी मुश्किल हो रही थी। अब हल्की हल्की बारिश अब भी हो
[3:26] रही थी। खून बारिश के पानी के साथ मिलकर
[3:30] सड़क के किनारे से नालियों में बह रहा था।
[3:33] शंकर के बचे हुए शरीर में। कोनी से नीचे का एक हाथ गायब था।
[3:40] थोड़ी दूर पर उसका वो हाथ हाथी खाई हालत में पड़ा था।
[3:45] उसके दूसरे हाथ की मुठी बंद थी। उस बंद हथेली में से बाहर कुछ
[3:51] निकला हुआ था। कुछ काले बाल।
[3:55] पर वो कोई इंसान के बाल नहीं थे बल्कि छोटे छोटे बालो का एक
[3:59] गुच्छा था। जैसे वो किसी जानवर के हो मानो
[4:04] मरने से पहले खुद को बचाते वक्त शंकर ने उस जानवर के शरीर से वो
[4:09] बाल नोच कर अलग किया। हो?
[4:21] छवि शंकर का सबसे करीबी दोस्त दौड़ता हुआ वहाँ पहुंचा।
[4:28] उस भायावह दृश्य को देख भीड़ में वो बस ठिठुरता हुआ खड़ा था।
[4:34] उसे अपनी आँखों पर बिल्कुल यकीन नहीं हो रहा था।
[4:38] ये। ये मांस के टुकड़े, ये ये शंकर था
[4:43] उसका दोस्त शंकर तभी उसके पैर के नीचे कुछ चिपका उसने झुककर नीचे
[4:51] देखा। मांस का एक छोटा सा टुकड़ा उसकी
[4:55] चप्पल के नीचे चिपक गया था। उसके दोस्त के शरीर का एक टुकड़ा
[5:02] देखते ही रबी गोली आ गई। वो खुद को संभाल नहीं पाया और उस
[5:06] रोड के किनारे दौड़ा। उलटी कर जब वह पीछे मुड़ा, लोगों
[5:12] की उस भीड़ में उसने उसे देखा। काली धोती, शरीर पर राख, माथे पर
[5:22] लंबी लंबी जटाएँ, गले और हाथों में रुद्राक्ष की मालाएं और आँखों
[5:28] में एक अजीब सी शांति। चेहरे पर एक संतुष्टि की वही
[5:34] तांत्रिक था। भैरव जिसे उसे और शंकर ने दो
[5:39] हफ्ते पहले देखा था। भैरव चुपचाप एक जगह खड़े होकर
[5:43] शंकर की लाश को देख रहा था। उसके चेहरे पर एक हल्की सी
[5:48] मुस्कराहट थी और उसके बगल में था भोला।
[5:53] भैरव का भेड़िए जैसा दिखने वाला काला कुत्ता जो कुछ दिनों पहले मर
[5:59] चुका था जीसको मरते हुए रवि ने अपनी आँखों से देखा था वो कुत्ता
[6:06] आज जिंदा था और उस लोगों के भीड़ के बीच में भैरव के पास बैठा हुआ
[6:12] था। और भैरक भैरक पड़े आराम से उसके
[6:16] माथे पर प्यार से अपना हाथ फेर रहा था।
[6:21] इससे पहले की रवि वहाँ से भाग पाता।
[6:24] अचानक भोला की चमकती लाल आंखें रवि के ऊपर पड़ी सीधा उसके अंदर
[6:30] तक झांकते हुए। और अगले ही पल भैरव ने भी रवि की
[6:35] तरफ मुड़कर देखा। भैरव अब हंस रहा था, उसके मुँह पर
[6:42] एक पेशाची खासी थी। पान से रंगे उसके कंधे दांत साफ
[6:48] नजर आ रहे थे और खोला। वो अपनी लंबी लाल जीप बहार कर
[6:54] चुपचाप रवि को घूरे जा रहा था। रवि ने जैसे ही इन दोनों को उसे
[7:00] घूरते हुए देखा उसका पूरा शरीर डर से जम गया।
[7:04] डर से उसकी आवाज गले में ही अटक गई।
[7:08] उसके हाथ पैर कांपने लगे। और उसके दिमाग में एकदम से सब कुछ
[7:13] वापस आने लगा। उन 14 दिनों की कहानी जब उसके
[7:18] दोस्त शंकर ने उस कुत्ते को मारा था और भैर भैर जाग उठा था।
[7:32] शंकर और रवि एक ही गांव के दो पुराने दोस्त थे।
[7:37] हर सुबह दोनों साथ ही खेत जाते वहाँ काम करते और शाम को एक ही
[7:42] साइकिल पर घर लौटते। उनकी जिंदगी बहुत ही सादगी भरी
[7:47] थी। कई बार शाम को काम खत्म कर लौटते
[7:50] समय उन्हें अक्सर देरी हो जाती और फिर मजबूरी में उन्हें वह रास्ता
[7:57] लेना पड़ता। वह मनहूस रास्ता शमशान घाट वाला
[8:02] जो दोनों या फिर कहूं पूरे गांव वालों के लिए एक आतंक था।
[8:07] सब उस रास्ते से शाम के बाद गुज़रने से डरते थे पर शॉर्टकट
[8:13] होने के कारण शंकर और रवि कई बार उसी रास्ते से घर लौटते थे।
[8:19] यह पुराना टूटा फूटा पत्थर का रास्ता था, जिसके दोनों तरफ सूखे
[8:25] हुए पेड़ थे। और बीच में शमशान घाट की जमीन
[8:29] जहाँ से हर रात कुछ अजीबो गरीब आवाजें सुनाई देती थी जिसे सुनकर
[8:36] लोगों को अक्सर खिंचाव महसूस होता था।
[8:40] एक अजीब सा डर महसूस होता था। गांव वालों का कहना था।
[8:45] की श्मशान में रहता था। एक काली शक्तियां को पूजने वाला
[8:49] कपालिक भैरव, काले भगवा वस्त्र, लाल टीका, गले में हजारों
[8:55] रुद्राक्ष, लंबी जटाएं, शरीर पर राग और दो आंखें जो किसी के
[9:01] अंतरात्मा तक को पढ़ ले। उसके चेहरे पर शांति थी, लेकिन
[9:06] आँखों में एक ऐसा तेज था जो इंसानों में नहीं होता और भैरव उस
[9:12] शमशान में अकेले नहीं रहता था। उसके साथ रहता था उसका सेवक, उसका
[9:18] रक्षक एक विशाल काला कुत्ता भोला। भोला का शरीर काले बालों से ढका
[9:28] हुआ था। आँखें, लाल और चाल ऐसी जैसे
[9:32] साक्षात काल जमीन पर चल रहा है। वो इतना बड़ा था कि लोग कहते कि
[9:38] वो कुत्ता नहीं, शायद कुछ और था, कुछ बहुत बुरा।
[9:43] कहा वालों का मानना था कि भोला को भैरव ने ही तंत्र विद्या से जन्म
[9:48] दिया था। भैरव के साथ वह जब भी रहता तब
[9:52] उसका स्वभाव बहुत शांत होता पर अगर भैरव की पूजा विधियों में कोई
[9:58] विघ्न डालता या भैरव को परेशान करता उससे बुरा बर्ताव करता।
[10:03] तो उसका बदला भोला लेता। रात होते ही वो शमशान के बाहर
[10:09] अंधेरे में बैठा रहता। वो किसी आदमखोर जैसा भयानक बन
[10:15] जाता। उसका रूप और भी विकराल हो जाता।
[10:19] उसकी वो भयानक लाल आँखें। उस शमशान के अंधेरे में भी हमेशा
[10:24] उस रास्ते से आते जाते लोगों को चमकते हुए दिखती।
[10:30] अगर कोई शमशान से आ रही आवाजों को सुनने के लिए वह ज्यादा देर रुकता
[10:36] तो भोला की आवाज उसकी खुराहट से उसके पैर कांप जाते।
[10:43] शमशान के अंधेरे में उन लाल आँखों को देख और उसकी कुर्राहट सुन
[10:48] कितने ही लोग अक्सर भाग खड़े होते थे वहाँ से और फिर इस रास्ते पर
[10:53] कभी नहीं लौटते और अगर कोई दोबारा लौटता तो भोला उनको सबक सीखाता।
[11:01] उन्हें काटने को दौड़ता, शरीर के अलग अलग हिस्सों से मांस काटकर
[11:06] अलग कर देता और उन्हीं के सामने उनका मांस खाता।
[11:13] इसीलिए गांव वाले वहाँ जाने से डरते थे और रात के बाद उस रास्ते
[11:19] से गुजरना। बना था पर शंकर और रवि अभी जवान
[11:27] थे। रवि को इन बातों से डर लगता था,
[11:31] पर शंकर उसके अंदर अजीब सी क्यूरियोसिटी थी।
[11:35] फसल कटाई का समय चल रहा था। और इसीलिए न चाह कर भी पिछले कुछ
[11:41] दिनों से उन दोनों को रोज़ देरी हो रही थी और शंकर और रवि इस
[11:46] रास्ते से ही घर लौट रहे थे। रात में जब भी वह दोनों साइकिल से
[11:51] उस रास्ते से घर लौटते, शमशान के अंधेरों से मंत्रों की आवाज सुनाई
[11:56] देती। दूर कहीं हवन की अग्नि दिखाई देती
[12:01] और शंकर का मन शमशान के अंदर क्या चल रहा है ये देखने के लिए खिंचा
[12:07] चला जाता पर हर बार रव्यू से टाटकर साइकिल से उतरने नहीं देता।
[12:13] कई बार उस अंधेरे में उन दोनों ने।
[12:16] तो लाल चमकती आंखें भी देखी थीं और एक भारी सी गुरहट भी सुनी थी।
[12:22] उन्हें पता था उस भैरव का खूंखार कुत्ता बोला उन दोनों पर नजर रख
[12:28] रहा था पर उन दोनों ने उस रास्ते से घर लौटना बंद नहीं किया।
[12:38] एक राग रवि और शंकर उस रास्ते से लौट रहे थे।
[12:42] आज भी श्मशान के अंदर से बहुत सी अजीब आवाजें आ रही थी।
[12:47] मंत्रों की आवाज के साथ किसी जान के चिल्लाने की आवाज आ रही थी
[12:53] शायद। किसी जानवर की बली होने वाली थी।
[12:56] वहाँ उस जानवर की आवाज सुनकर रबी के पैर ठंडे पड़ गए थे।
[13:02] उसने डर के मारे सैकल की स्पीड बढ़ाने की कोशिश की।
[13:06] पर शमशान के ठीक बाहर पहुँचकर उसकी सैकल की चेन उतर गई।
[13:13] रवि बहुत घबरा गया, वो तुरंत साइकिल से उतरा और चैन ठीक करने
[13:18] लगा। उस जानवर की आवाज अब और भी तेज हो
[13:22] गई थी। शंकर की क्यूरियोसिटी बढ़ने लगी।
[13:26] उसने मौका देखते ही शमशान की दीवार के पास रुक कर अंदर झांकना
[13:32] शुरू किया। जैसे ही रवि ने साइकिल की चैन
[13:35] चढ़ाई उसने शंकर को अंदर झांकते देखा।
[13:39] शंकर तू पागल हो गया क्या? चुपचापचो यहाँ से जल्दी?
[13:45] लेकिन शंकर नहीं रुका। वो अब भी अंदर झांक रहा था और
[13:51] तभी। हवा जैसे भारी सी हो गई और साइकिल
[13:56] से करीब 15 फिट उरी पर गुर्राता हुआ एक काला भेड़िए जैसा कुत्ता
[14:03] रास्ते के पास चलकर आया, उसकी आंखें अंगारों की तरह लाल चमक रही
[14:08] थी और उसके दांत पूरे बाहर थे। मुँह से लाल टपक रही थी।
[14:14] उसके वो शंकर और रवी की तरफ देखकर भयानक तरीके से गुजराने लगा रवी
[14:22] के गले से यह शब्द निकले शंकर भी अब साइकिल के पास पहुँच चुका था।
[14:27] बोला उसे इतने गुस्से से घूर रहा था।
[14:30] की शंकर अगले ही पहल कैरियर पर बैठ गया।
[14:33] उन दोनों के पैर कांप रहे थे और तभी भोला के गले से एक ऐसी आवाज
[14:39] एक ऐसी चीख निकली जिसने उन दोनों के शरीर को ठंडा कर दिया।
[14:46] वो धीरे धीरे कुर्राता हुआ। उनके साइकिल के पास आ रहा था।
[14:51] पता नहीं रवि को हिम्मत कहाँ से आई।
[14:53] उसने पैडल पर पैर रखा और हवा की गति से वहाँ से निकल गया।
[14:59] घर पहुंचने तक दोनों डर से चुप थे।
[15:03] आज तक खाली भोला के बारे में उन लोगों ने सुना था।
[15:07] आज साक्षात देख भी लिया। दोनों ने उस रात फैसला किया कि
[15:14] फिर दोबारा उस शमशान वाले रास्ते से कभी नहीं जाएंगे।
[15:22] पर होने को कौन टाल सकता। है।
[15:26] कुछ 10 दिन बीते होंगे कि घर लौटते समय उन दोनों को बहुत
[15:31] ज्यादा देरी हो गई। रवि की माँ की तबियत भी खराब थी
[15:35] सो घर जल्दी पहुंचना जरूरी था। बहुत विचार विमर्श करने पर उन
[15:40] दोनों ने फैसला किया कि वह दोनों एक आखिरी बार।
[15:44] उस शमशान घाट वाले रास्ते से घर लौटेंगे।
[15:47] शमशान की तरफ मुड़कर एक बार भी नहीं देखेंगे और फुल स्पीच से
[15:52] सैकल भगाते हुए वहाँ से निकल जाएंगे।
[15:54] पर हम अक्सर जैसे सोचते हैं ऐसा हमेशा थोड़ी ना होता है।
[16:03] शंकर और रवि तेजी से श्मशान वाले रास्ते की ओर बढ़ रहे थे।
[16:08] आज किसी भी हालत में वो दोनों भोला का सामना नहीं करना चाहते
[16:13] थे। गांव वाले हमेशा वैसे भी कहते थे
[16:16] कि भोला पहली बार तो छोड़ देता है और दूसरी बार।
[16:21] दूसरी बार बहुत ही कम लोग थे जो भोला से बचकर लौटे थे।
[16:26] जैसे जैसे श्मशान का वो रास्ता पास आते जा रहा था, उन दोनों की
[16:31] दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी। उन दोनों ने बड़ी तेजी के साथ
[16:36] श्मशान क्रॉस किया। और मन ही मन भगवान को धन्यवाद कर
[16:43] ही रहे थे कि अचानक एक आवाज हुई, रवि का बैलेंस दिख रहा और दोनों
[16:50] साइकिल से जमीन पर गिर पड़े। रवि की साइकिल की चेन उस पथरीले
[16:56] रास्ते पर आज उतरी नहीं थी। आज वो टूट गई थी।
[17:03] उन दोनों ने साइकिल से उतरकर एक दूसरे को देखा।
[17:06] दोनों की शक्ल पर खौफ साफ नजर आ रहा था।
[17:11] श्मशान की साइकिल से कुछ 10 से 15 फिट की दूरी पर ही था और इससे
[17:16] पहले। कि वो क्या करें?
[17:18] वो सोच भी पाते। अगले ही पल उन दोनों को शमशान की
[17:22] उस गाढ़ी अंधेरे में दो ला ला के चमकते हुए दिखाई दी।
[17:29] फिर वो भयंकर कुर्राहट की आवाज। अगले ही पल भोला का काला विशालकाय
[17:34] शरीर उस रास्ते के ऊपर था। दात बहार और कुर्राहट की तेज आवाज
[17:42] और फिर अगले ही पल वो हवा की रफ्तार से दौड़ता हुआ आया और शंकर
[17:48] पर टूट पड़ा। शंकर और रवि दोनों पागलों की तरह
[17:59] डर से चीखने लगे। होला ने शंकर के पैर में अपने
[18:03] दांत काट दिए और एक मांस के टुकड़े को खींच कर निकाल लिया।
[18:09] शंकर दर्द से चीख पड़ा। होला ने उसके पैरों को अपने
[18:14] दांतों में अब दबोच रखा था। उसके नोंकीले दात और जीभ शंकर के
[18:18] खून से लाल हो चूके थे। उसकी वो वीभत्स को राहत और शंकर
[18:24] के चित्तकार से पूरा शमशान और आसपास का इलाका गूंज रहा था।
[18:30] रवि रवि पास ही खड़े डर से कांप रहा था।
[18:34] वो क्या करे? उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था
[18:37] क्योंकि उसे पता था की अगला नंबर शायद उसी का था, कभी भूला नहीं।
[18:43] शंकर का पैर छोड़ा, उसके हाथ को काटना शुरू।
[18:46] किया। शंकर ने खुद को बचाने के लिए अपने
[18:50] दूसरे हाथ से पास ही में पड़े एक पत्थर को उठाया और ज़ोर से भोला
[18:56] के सिर पर दे मारा। भोला की एक दर्दनाक चिटका से पूरा
[19:03] श्मशान गूंज उठा। शंकर अब उठ खड़ा।
[19:06] हुआ। वो गुस्से से कांप रहा था।
[19:10] उसने ज़ोर से चीखकर वो पत्थर भोला के शरीर पर फिर पटक दिया।
[19:16] फिर एक और बार फिर एक और बार हर बार के साथ होला की हड्डियों
[19:22] चटकने लगी। उसका चेहरा चितड़ा चितड़ा हो गया
[19:27] था। आँखें बाहर लटक रही थी।
[19:30] उसके चपड़े और दांत के टुकड़े सड़क पर बिखरे थे।
[19:33] छाती की हड्डियों टूटकर चमड़े के बाहर निकल गई थी।
[19:38] भूला का पेट अब फट चुका था और अंदर के कुचांग बाहर निकल आए थे।
[19:43] ऐसा लग रहा था मानो किसी ने सड़क पर एक बाल्टी भर के खून, चमड़े और
[19:48] मांस के टुकड़े फैला दिया हो। पर शंकर शंकर रुक नहीं पा रहा था।
[19:55] शंकर के दिमाग में अब सिर्फ गुस्सा था।
[19:59] उसके दिमाग में नफरत भरी थी। वो खुद को किसी भी हालत में रोक
[20:03] नहीं पा रहा था। ये डरावना मंजर और बरदाश न कर
[20:07] पाकर रवि शंकर की तरफ दौड़ा। उसका हाथ खींचकर उसे रोकने की
[20:12] कोशिश करने लगा। शंकर शंकर रुक जा शंकर क्या कह
[20:17] रहा है तू बस कर भाई बोला मर चुका है क्नॉइस।
[20:21] भगवान के लिए रुक जाप। रवि ने उसका कंधा चटकाया शंकर ने
[20:28] पलटकर देखा, उसकी आँखें लाल थीं, सासे फूल रही थी।
[20:33] उसके हाथ में अभी भी भोला के खून से रंगा वो पत्थर था, लेकिन तभी
[20:40] एक आवाज आई क्नॉइस। और दोनों का ध्यान अचानक शमशान की
[20:44] तरफ गया। शमशान के उस पुराने दीवार के पीछे
[20:48] से धुंध के बीच एक साया सामने आ रहा था।
[20:53] बैरम लम्बा। कद राख से भरा शरीर।
[20:58] लंबी जटाएं और आँखें ऐसी लाल कि जैसे आँखों में खून उतर आया हो।
[21:04] वो बिना कुछ बोले सीधा भोला की लाश के पास आया।
[21:09] बेहरव का चेहरा बिल्कुल शांत था। वो जमीन पर झुका और बड़े प्यार से
[21:15] भोला के खून से भरे शरीर पर। अपना हाथ फेरा फिर उसने ऊपर देखा
[21:22] शंकर की आँखों में उसकी लाल आँखों में जो गुस्सा था वो शंकर को अब
[21:28] डरा रहा था। शंकर डर से एक कदम पीछे हुआ और
[21:32] भैरा भैरा उठ खड़ा हुआ, पर उसने कुछ नहीं कहा।
[21:37] वो बस खड़ा हुआ और उसने अपनी कमर से एक छोटी सी थैली निकाली जिसमें
[21:42] कुछ राग थी और बिना एक शब्द कहे उसने अपनी आँखें बंद कर कुछ मंत्र
[21:47] पढ़ा और राख शंकर के चेहरे पर फूंक दी।
[21:53] हवा एक दम से ठंडी पड़ गई। शंकर हिल भी नहीं पा रहा था।
[21:58] बस अपनी आँखों की पलकें ज़ोर ज़ोर से झपका रहा था।
[22:01] वो शंकर और रवि दोनों चुपचाप खड़े थे।
[22:04] हिल भी नहीं पा रहे थे भैरव भैरव शंकर के एक दम करीब आया और उसकी
[22:11] आँखों में आंखें डाल बोला। चौथा दिन।
[22:16] बस 14 दिन में तू भी ऐसे ही मरेगा उलटी गिनती शुरू कर शुरू कर गिनती
[22:24] क्योंकि तेरी मौत का तांडव आज रात से शुरू होने वाला है।
[22:37] उसके बाद उसने एक आखिरी बार भोला को देखा और फिर मुड़कर शमशान की
[22:43] तरफ चला गया। रवे डर से कांप रहा था।
[22:46] उसके पैर अपने शरीर का। बाहर तक नहीं उठा पा रहे थे अब।
[22:50] वो डर से रोने लगा कि ये क्या अर्थ हो गया आज?
[22:55] भैरव के कुत्ते को शंकर ने क्यों मार दिया?
[22:58] पर भैरव उसने खड़े खड़े शंकर को श्राप तक दे दिया।
[23:03] अब क्या होगा? उसके साथ वो ये सब सोच कर कांपने
[23:07] लगा पर शंकर वो अभी भी खून से सना एक मूर्ति की तरह।
[23:13] हाथ में पत्थर लिए भोला के लाश के सामने खड़ा था, मानो उसे कोई होश
[23:18] ही न हो। शंकर शंकर चाजरी हासी शंकर।
[23:24] हाँ। शंकर का ध्यान रवि पर था।
[23:27] ऐसा लग रहा था मानो उसने कोई नशा किया हो।
[23:30] वो बहुत ही अजीब बर्ताव कर रहा था।
[23:33] रवि ने अपनी साइकिल उठाई, फिर दूसरी हाथ से शंकर को खींचता हुआ
[23:38] घर ले गया। पूरे रास्ते शंकर ने एक शब्द नहीं
[23:43] कहा। शंकर की मरहम पट्टी कराकर रवि ने
[23:46] उसे उसके घर छोड़ दिया। उस रात होला को मारने के बाद शंकर
[23:56] शरीर के जख्मों के अलावा मानसिक रूप से भी काफी तनाव में था हुए
[24:02] गहरे सदमे में जा चुका था। उसे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा
[24:06] था कि उसने भैरव के उस। बैशाचिक कुत्ते को मार दिया था
[24:11] जिसे कहो वाले शैतान का साक्षात अवतार मानते थे और भैरव उसके वो
[24:18] शब्द, उसकी वो हँसी अब भी उसे डरा रही थी पर फिर उसने खुद को समझाया
[24:25] कि उसने कुछ गलत नहीं किया था। वो अगर भोला को नहीं मारता तो फिर
[24:30] भोला उसे मार देता और खुद को समझाते हुए वो सोने की कोशिश करने
[24:35] लगा। पर कुछ था जो ठीक नहीं था।
[24:39] बस शंकर को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या था?
[24:47] उस राज़ शंकर घर पर अकेला था। उसके घर वाले किसी शादी पर गए थे
[24:52] और पहली बार उसे अकेले डर लग रहा था।
[24:56] उसे ऐसा लग रहा था कि कमरे के अंधेरे में से कोई उसे देख रहा
[25:00] था। वो कई बार पीछे मुड़ा पर कोई
[25:04] नहीं। था।
[25:05] पर वो एहसास की वो अकेला नहीं है। उसे सोने नहीं दे रहा था।
[25:10] रात जैसे जैसे गहरी होती गई, घर के बाहर से हल्की हल्की आवाजों का
[25:16] सिलसिला शुरू हुआ। पहले दरवाजे पर एक अजीब सी खर खर
[25:21] सी आवाज होने लगी जैसे कोई। उस लकड़ी के दरवाजे को नोच रहा
[25:26] हो। शंकर उठकर बैठ गया, फिर उसे ऐसा
[25:31] लगने लगा जैसे कोई उसके कमरे की खिड़की वाले दीवार के पास से पैर
[25:36] घिसट घिसट कर चल रहा हो। शंकर को अब सच में डर लगने लगा।
[25:41] था। ऐसा उसके घर में पहले कभी नहीं
[25:45] हुआ था, सो उसने अपना डर काटने के लिए अपनी खिड़की और फिर घर का
[25:50] दरवाजा खोलकर बाहर देखा पर कहीं कुछ नहीं था।
[25:55] चारों तरफ सिर्फ अंधेरा और एक भयानक सन्नाटा था।
[26:00] दूर गांव में कहीं कुछ कुत्ते रो रहे थे, उसने दरवाजा बंद किया।
[26:05] वह अपने कमरे में लौटा और सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन फिर कुछ ही
[26:11] देर में दोबारा वही आवाजें उसे सुनाई देने लगी।
[26:15] उसने फिर बाहर जाकर देखा पर कहीं कुछ नहीं था।
[26:20] और ये सिलसिला लगभग पूरी रात चला। शंकर को बहुत घबराहट होने लगी।
[26:26] इतनी थकावट और शरीर में इतने दर्द और घाव के होने के बावजूद वो पूरी
[26:32] रात जगा रहा। अगली सुबह जब रवि उससे मिलने आया।
[26:40] शंकर का चेहरा देख उसे चिंता होने लगी।
[26:43] उसने उसे दो 3 दिन खेतों में काम करने जाने से मना किया और आराम
[26:48] करने को कहा और फिर काम पर चला गया।
[26:52] शंकर पूरे दिन सोता रहा ना उसने कुछ खाया ना पिया, बस बिस्तर में
[26:57] एक लाश की तरह पड़ा रहा वो। बस बीच बीच में उसे कुछ डरावने
[27:01] सपने आते तो वो झटके से उठता और फिर दोबारा सो जाता।
[27:09] अगली रात पूरा दिन सोने की वजह से उसे नींद नहीं आ रही थी।
[27:14] आज उसने खिड़की खोल कर रखी थी। ताकि अगर कोई दीवार के उस पार चले
[27:20] तो उसे साफ दिखाई दे। पर आंधी रात।
[27:22] बीतने पर भी न कोई आवाज आई, न उसे खिड़की के बाहर कुछ दिखा।
[27:27] परेशान होकर उसने अपनी आंखें बंद ही की थी कि तभी अचानक खिड़की
[27:33] हिलने लगी। पहले धीरे धीरे।
[27:36] फिर ज़ोर से शंकर ने एकदम से उठकर देखा।
[27:40] बाहर हवा ज्यादा नहीं थी, फिर खिड़की का एक भाग बार बार क्यों
[27:46] रहा था? उसने बिस्तर पर बैठे बैठे खिड़की
[27:49] के बाहर देखा पर उसे कुछ नहीं दिखा।
[27:52] पर जैसे ही। उसने बिस्तर से उतरने के लिए अपने
[27:56] पैर जमीन पर रखे कमरे के अंधेरे कोने से कुछ बड़ा सा तेजी से उसके
[28:02] बिस्तर के नीचे घुस गया। शंकर ने अपने पैर एक दम से ऊपर कर
[28:08] लिए तो तो फिर क्या खिड़की खुली होने की वजह से?
[28:12] कोई जानवर उसके कमरे में घुसाया था और तभी तभी उसे वो आवाज सुनाई
[28:18] दी। एक अजीब सी आवाज मानो कई नाखूनों
[28:22] से बिस्तर के नीचे की जमीन को खरोंच रहा।
[28:26] था। छोड़ कर एक दम चौखन ना हो गया ये
[28:31] ये क्या था? तो फिर सच में उसके कमरे में उसके
[28:36] बिस्तर के नीचे कुछ था। उसने हिम्मत जुटाई और फिर बिस्तर
[28:42] के नीचे झांक कर देखा। पहले उसे बस अँधेरा देखा और कुछ
[28:47] नहीं। उसने खुद को समझाया और उठकर
[28:51] बिस्तर पर बैठ गया। लेकिन अगले ही पल एक और आवाज आई
[28:56] जैसे कुछ बिस्तर के नीचे से बिस्तर पर लगे लकड़ी के पत्ते पर
[29:01] टकराया। वो तुरंत उठकर दोबारा नीचे झांकने
[29:04] लगा और फिर जो उसने देखा उसने उसे वहीं जमा दिया।
[29:12] उस अंधेरे में तो चमकती लाल आँखें उसे सीधा घूर रही थीं, कुछ वैसी
[29:19] ही आँखें जैसे खोला की थी और फिर वो भयंकर गुर्राट की आवाज उसके
[29:27] कमरे के अंधेरे में गूंजने लगी। शंकर डर से कांप उठा।
[29:32] उसके गले से डर के मारे एक चिपका निकल गई और वो लंगड़ाता हुआ अपने
[29:38] घर से बाहर दौड़ा रवि के घर जाने के लिए पर रवि के घर पहुँचकर उसने
[29:46] रवि को सच नहीं बताया कि उसने भोला को देखा था उसने।
[29:50] सिर्फ ये बताया कि उसके बिस्तर के नीचे कोई जानवर था, जो कुरा रहा
[29:55] था। कुछ देर बाद लाठी लेकर वो रवि के
[29:59] साथ वापस लौटा पर तब तक घर शांत हो चुका था।
[30:03] कहीं कोई जानवर नहीं था, ना बिस्तर के नीचे, ना घर के किसी
[30:08] अंधेरे कोने में। लेकिन रवि को बिस्तर के नीचे एक
[30:12] चीज़ मिली एक काले बालों का गुच्चा।
[30:19] तू ठीक ही कह रहा है कोई जानवर तो गुस्सा कर रहा शायद वो चला गया अब
[30:26] तू एक काम कर। तो खिर्की दरवाजे बंद कर और
[30:28] चुपचाप सोने जाओ समझा। ये कहकर रवि अपने घर लौट गया पर
[30:34] शंकर वो चुप था। क्या उसने सच में भोला को देखा
[30:38] था? उसके दिमाग में भैरव के शब अब
[30:42] गूंज रहे थे। उस रात भी वो सो नहीं पाया।
[30:46] उसकी आंखें लाल थीं, थकान चेहरे पर थी पर अब नींद से को सो दूर
[30:52] थी। हर दिन ये एहसास कि कोई उसे देख
[30:55] रहा है ये बस पड़ता ही जा रहा था। अगला दिन भी पिछले दिनों की तरह
[31:04] ही गुजरा। उसका।
[31:05] पर रात होते ही शंकर ने ताला लगाकर हर खिड़की हर दरवाजा बंद कर
[31:11] दिया। घर का हर कोना चक किया ताकि वो कम
[31:15] से कम अशांति से सो सके। कुछ देर बाद बस चुपचाप घर के कोने
[31:20] में बैठे बैठे उसकी आग लग गई। शंकर खान।
[31:32] करीब 3:00 बजे उसकी आंख खुली। कोई उसे घर के बाहर से पुकार रहा
[31:38] था। उसका नाम ले रहा था कोई शंकर
[31:44] शंकर। झट से उठा और अपनी लाठी उठाई और
[31:49] घर का दरवाजा खोल वो बाहर आया। उसने चारों तरफ देखा बाहर बस खूब
[31:56] अँधेरा था, कहीं कोई नहीं था तभी दूर एक पीपल के पेड़ पर कुछ हलचल
[32:02] हुई। शंकर ने झटके से उधर देखा पेड़ की
[32:06] ताली के ऊपर कोई बैठा था। शंकर बस 11 दिन बाकी है।
[32:21] याद है न तुझे शंकर? हैरव वहाँ पेड़ की उस डाली पर
[32:32] हैरव बैठा था। उसके शरीर और जटाओं पर लगी सफेद
[32:36] राग की वजह से अब वो शंकर को दिख रहा था।
[32:40] उस अंधेरे में भी उसकी आँखें चमक रही थी।
[32:44] शंकर के गले से एक चीख निकली, वो जमीन पर गिर पड़ा।
[32:50] ऐरफ की पेशा चिकासी अभी भी हवा में गूंज रही थी तो उससे शंकर का
[32:56] शरीर सून पड़ चुका था, फूट भी नहीं पा रहा था।
[33:00] उसने धर धर कर फिर से पेड़ की तरफ देखा पर बहरा वो उस पेड़ के डाली
[33:07] के ऊपर नहीं था। वो जमीन पर था और धीरे धीरे
[33:12] मुस्कुराते हुए वो शंकर की तरफ पड़ रहा।
[33:15] था। शंकर अभी भी जमीन पर पड़ा था।
[33:19] मैं चिल्लाना चाहता था, मदद मांगना चाहता था पर उसके गले से
[33:23] सिसकियों के आवाज़ के अलावा कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी।
[33:27] शंकर तुझे क्या लगा तुने भोला को मार दिया तुने बस भोला का शरीर
[33:37] नष्ट किया है? पर उसकी आत्मा, उसकी आत्मा आज ही
[33:42] है ही नहीं और उसके शरीर को मैं जल्दी ठीक करने वाला हूँ।
[33:47] बस तुझे तुझे अपने शरीर की बलि देनी होगी।
[33:52] देगा ना शंकर? अपनी पाप कश्यप करेगा ना शंकर?
[34:00] शंकर के कल से कोई जवाब नहीं निकला।
[34:03] वो बस भैरव के इस रूप को देख कर कांप रहा था।
[34:07] आज उसकी आँखें और लाल थीं, शरीर से एक सड़ी बदबू आ रही थी उसकी और
[34:14] उसकी आवाज़। वो जो कह रहा था उसे सुनकर शंकर
[34:19] पसीने से तरबतर हो चुका था। सुन 3 दिन बाद मुझे खुला को जगाने
[34:26] की प्रक्रिया शुरू करनी है, उसके लिए मुझे तेरा रक्त और मांस उसके
[34:33] कुछ टुकड़े लगेंगे। तू रात को शमशाना जाना नहीं आना
[34:38] चाहे तो भी तू आएगा क्योंकि मैं तुझे बुला रहा हूँ, भैरा बुला रहा
[34:44] है तुझे, भैरा। ये कहकर।
[34:51] भैरव ने अपना हाथ शंकर के माथे पर रखा कुछ मंत्र पड़े फिर उसी हाथ
[34:57] को उसके मुँह पर फेर कर वो उठा और फिर अंधेरे में गायब हो गया।
[35:04] शंकर ने अपने गालों को छुआ। उसके मुँह पर कुछ चिपचिपा लगा था।
[35:09] उसने अपनी उंगलियों को देखा। खून पर लाल नहीं, गाढ़ा सड़ चुका
[35:16] काला खून जिसमें मरे हुए जानवर की बदबू आ रही थी, शंकर डर से रोते
[35:22] रोते कुएं की ओर दौड़ा और अपना मुँह धोकर वो वहीं बेहोश हो गया।
[35:31] सुबह की पहली किरण जब उसके मुँह पर पड़ी, वो उठा और अपने घर
[35:35] पहुंचा। उसके दिमाग में हजारों सवाल थे,
[35:40] क्या उसने कल रात को कोई डरावना सपना देखा था या भैरव सच में?
[35:45] रात को वहाँ आया था? उसने आईने में अपना मुँह देखा।
[35:49] उसके मुँह पर तो अब कोई खून नहीं था, लेकिन उसकी सफेद कमीज़ पर कुछ
[35:54] हलके लाल धब्बे थे। उसने अपनी कमीज उतारी और उस दाग
[35:59] को सूंघकर देखा। उस दुर्गंध से उसको उल्टी आगई
[36:04] क्योंकि उसकी कमी से भी मरे हुए जानवर की बदबू आ रही थी।
[36:09] वही बदबू जो कल भैरव के रहते उसने महसूस की थी यानी भैरव भैरव कल
[36:16] रात सच में आया था। उसे 3 दिन बाद यानी भोला के मौत
[36:21] के सातवीं रात को उसे शमशान बुलाया था।
[36:25] उसके खून और मांस की कुछ। टुकड़े लेने के लिए।
[36:29] नहीं, नहीं, मैं शंकर दत्त से चिल्ला उठा, उसने एक दूसरी कमीज़
[36:40] पहनी और वह रवि के घर दौड़ा। वह अपने दोस्त को सब कुछ बताना
[36:44] चाहता था। हाँ।
[36:46] उसे इन सब बातों पर यकीन नहीं था। इससे पहले पर अब अब उसे भी इन
[36:52] बातों पर यकीन हो रहा था। पर जब वह लंगड़ते हुए पहुंचा तब
[36:57] तक देर हो चुकी थी। रवि पहले ही खेत के लिए निकल चुका
[37:01] था। वो अपने दोस्त से उस दिन कुछ नहीं
[37:05] कह पाया। अगले 3 दिन पहले तीन रातों की तरह
[37:11] ही डर से गुजरे। जैसे जैसे एक रात कटती शंकर को
[37:17] लगता वो पागल हो रहा था। उसे अब हर रात अपने घर के बाहर से
[37:22] भोला के गुर्रानी की आवाज सुनाई देती।
[37:26] अभी अपने बिस्तर के नीचे कभी अपने छत से और अगर वो घर से बाहर
[37:31] निकलता तो हवा में भैरव की हँसी की गूंज सुनाई देती।
[37:36] उसे कोई उसे पुकारना एक बार नहीं बार बार।
[37:45] शंकर? शंकर शायद सच में पागल हो रहा था।
[37:51] 7 दिन हो चूके थे ना वो ठीक से सो पा रहा था, ना खा पी पा रहा था।
[37:56] जब भी वो कुछ खाने बैठता, उसे खाने से सड़े मांस की बदबू आती
[38:01] दिन बाद दिन बहुत ही ज्यादा कमजोर होता जा रहा था।
[38:05] सातवें दिन की सुबह रवी उससे मिलने आया।
[38:09] जैसे ही शंकर ने दरवाजा खोला, शंकर की हालत देख रवी हिल गया।
[38:15] शरीर भर के खाओ अब तक नहीं भरे थे उसके वो बहुत कमजोर लग रहा था।
[38:21] आँखों के नीचे काले गड्ढे थे उसके मानो वो बहुत ज्यादा बीमार हो।
[38:25] उसे देख लग रहा था कि वो किसी नशे में धुत था।
[38:29] रवि ने उसे बिठाया फिर पूछा आखिरकार उसके साथ क्या हो रहा था
[38:35] और शंकर ने पिछले छह रातों से हो रही सारी घटनाएं उसे सुनाई।
[38:41] रवि का मुँह सफेद पड़ गया। अगर जो शंकर कह रहा था वो सच था।
[38:47] इसका मतलब आज रात शंकर को शमशान जाकर अपने रक्त और मास की आहूति
[38:52] देनी होगी। और फिर फिर क्या 14 दिन वाली बात
[38:56] भी सच होगी? क्या उसका दोस्त अगले एक हफ्ते
[38:59] में मरने वाला था? ये सब सोच रवि सैम उठा।
[39:03] वो ये सब नहीं होने दे सकता था। अपने दोस्त के साथ सोच ने शंकर से
[39:08] वायदा किया कि जब तक उसका परिवार नहीं लौटता, वो रात को उसके साथ
[39:14] उसके घर में सोएगा। और वो दोनों मिलकर इस भैरव के
[39:17] आतंक का सामना करेंगे और अगले दिन मंदिर में जाकर पंडित जी से भी
[39:22] मिलेंगे। इस मुसीबत का कोई उपाय ढूंढेंगे?
[39:25] वो दोनों ये सब सुनकर शंकर को थोड़ी शांति महसूस हुई उस रात।
[39:34] यानी सातवें दिन की रात को करीब 10:00 बजे रवि के घर आया और दोनों
[39:40] थोड़ी देर बातचीत करते हुए सो गए। शंकर को आज कोई आवाज नहीं सुनाई
[39:46] दी। बस उसे एक डरावना सपना दिखा।
[39:51] वो एक। अंधेरे जंगल में भटक रहा था।
[39:55] अचानक तीन काले कुत्तों का एक झुंड उसके सामने आकर गुराने लगा।
[40:02] शंकर शंकर डर गया और अपनी जान बचाने के लिए वो बहुत तेज भागने
[40:08] लगा। वो भागता रहा तब तक क्नॉइस।
[40:11] जब तक की वो एक अंधेरे गड्ढे में फिसल कर गिर पड़ा और एक झटके से
[40:20] उसकी नींद खुल गई। पर ये क्या रवि कहा था और वो वो
[40:29] कहा था? शंकर घबरा कर उठने लगा पर उसके
[40:33] पैर उसके काबू में नहीं थे। वो एक आसन पर बिना कपड़ों के बैठा
[40:38] था। उसने आसपास देखा और एक क्षण में
[40:42] वो समझ गया कि वो कहाँ था, वो शमशान में था और सामने सामने बैठा
[40:51] था। भैरव मंत्रोच्चारण करता हुआ हवन
[40:58] करते हुए के सामने हवन की अग्नि हवा में लहरा रही थी और के बगल
[41:05] में एक लाल आसन पर रखी थी एक लाश। कोला की लाश 7 दिन बाद उस लाश की
[41:13] हालत और विभत्स हो गई थी। उस पर कीड़े लग चूके थे, मक्खियां
[41:18] भिनभीना रही थी। हवा में हवन की गंध के साथ उस
[41:22] सड़े मांस पिंड की भदपू भर गई थी। पर उन सब चीजों से।
[41:27] भैरव को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
[41:30] वो मंत्रोच्चारण करता, होला के शरीर पर फूलों की पंखुड़ियां
[41:35] डालता और हर बार जब वो ऐसा करता उस लाश की चमड़ी के नीचे कुछ
[41:41] हिलता, जैसे कोई चीज़ उसके अंदर से फिर से।
[41:46] जिंदा हो रही थी। भैरव ने ऊपर देखा और शंकर की तरफ
[41:53] देख बोला। तो क्या होता हैं पता चला तुझे?
[41:59] शंकर को एक पथ समझ नहीं आया की भैरव क्या कह रहा था।
[42:03] उसने जैसे ही कुछ बोलने के लिए अपना मुँह खोला, उसे अचानक एहसास
[42:08] हुआ कि उसके मुँह के अंदर कुछ नरम कुछ पिलबिला सा था नकली पल उसने
[42:14] उसे थूक दिया। क्या समूह पर एक इंसानी ऊँगली का
[42:21] छोटा सा टुकड़ा पड़ा था? घर के अंदर एक खौफ की लहर दौड़
[42:26] गई। उसके मुँह के अंदर इंसानी ऊँगली
[42:30] उसने तुरंत अपने हाथ उठाए अपने मुँह को पोछने के लिए और उसने जो
[42:34] देखा उसके शरीर में डर से एक बिजली दौड़ गई क्योंकि उसके हाथों
[42:40] की सभी उंगलियां। हाथी गायब थी, काटी नहीं गई थी ने
[42:47] दांतों से चबाकर हाथों से अलग किया गया था शंकर को।
[42:54] अब एक भयानक दर्द का अहसास होने लगा।
[42:57] उसके हाथों से खून बह रहा था पर उसे अब धीरे धीरे चक्कर आ रहा था।
[43:02] शंकर तर्मत तुने अपनी इच्छा से अपनी उंगलियां पापों से काट कर
[43:09] अलग की है अपना मास रक्त भुला को अर्पण किया है ये तेरे प्रायश्चित
[43:15] की शुरुआत है, शुरुआत है ये जी जी जी जी।
[43:21] जी। उधर, भैरव एक कटोरी से शंकर की
[43:25] उँगलियों के टुकड़ों को उठाकर भोला के टूटे हुए मुँह में घुसाड़
[43:29] रहा था। उसे शंकर का खून पिला रहा था।
[43:32] वो वो जब जब ऐसा करता भोला का शरीर कांपता जैसे उसमें धीरे धीरे
[43:40] प्राण। वापस आ रहे हो।
[43:43] शंकर डर से कांपने लगा। वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा।
[43:48] दर्द से डर से वो वहाँ से उठकर भागना चाहता था, खुद को बचाना
[43:54] चाहता था पर वो बहुत कमजोर था। उसका बहुत खून बह चुका था।
[44:01] और धीरे धीरे उसकी आँखों के आगे अंधेरा छा गया।
[44:15] रवि गहरी नींद में था। चारों तरफ एक अजीब सी खामोशी थी।
[44:21] अचानक उसकी नींद खुली और अगले ही पल उसे ये एहसास हुआ कि शंकर वहाँ
[44:27] नहीं था। शंकर?
[44:30] रवि ने चिल्लाकर आवाज लगाई। कमरे में अंधेरा था सिर चाँद की
[44:35] हल्की रौशनी खिड़की से अंदर आ रही थी रवि के दिल की धड़कन।
[44:39] एकाएक तेज हो गई। उसने जल्दी से उठकर पत्ती जलाई और
[44:44] उसका शाक यकीन में बदल गया। कमरे और घर का दरवाजा खुला हुआ
[44:51] था। शंकर की चप्पल अभी भी वहीं थी और
[44:55] शंकर उसका कोई अतापता नहीं था। रवि को घबराहट होने लगी।
[45:01] सुबह के करीब पौने 5:00 बज रहे थे पर बाहर अभी भी अंधेरा था।
[45:06] वो जल्दी से बाहर भागा। शंकर शंकर।
[45:10] वो पुकारने लगा, पर कोई जवाब नहीं मिला।
[45:14] रवि का दिल बैठ गया। उसको शंकर के शब्द याद आने लगे।
[45:19] आज ही तो वो काली सातवीं रात थी। आज ही की रात तो भैरव ने शंकर को
[45:25] श्मशान भुलाया था ही, याद आते ही रवि का गला सूखने लगा।
[45:31] एक अनजान डर ने उसे घेर लिया और वो शमशान की तरफ दौड़ा।
[45:41] श्मशान पहुंचते पहुंचते सूरज निकल चुका था।
[45:44] एक हल्की रौशनी चारों तरफ फैली थी।
[45:48] पर जीस चीज़ ने रवि के बढ़ते कदमों को वहाँ रोक लिया।
[45:52] वो थी एक बर्दाश्त न कर पाने वाली गंध, जली हुई लकड़ियां।
[45:59] सड़ा हुआ मांस और खून की मिलीजुली गंध शमशान के बाहर दीवार के इस
[46:06] तरफ कुछ गांव वाले दिखाई दिए। रवि को वो दीवार के अंदर झांक रहे
[46:12] थे और दबी आवाज में कुछ बोल रहे थे।
[46:15] उन गांव वालों के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था।
[46:19] और ये देख रवि को बहुत ज्यादा चिंता होने लगी।
[46:23] वो तेज़ दौड़ता हुआ दीवार के पास पहुंचा पर जैसे ही रवि ने दीवार
[46:27] से अंदर झांकने की कोशिश की, एक गांव वाले ने उसे रोक दिया।
[46:31] अंदर मत देख रवि बेटा शंकर को शंकर को तो इस हालत में नहीं देख
[46:38] पाएगा। ये शब्द रवि के लिए काफी थे।
[46:43] शंकर उसके बचपन का दोस्त था, भाई था उसका।
[46:47] उसने उन लोगों की एक ना सुनी और वो एक पत्थर पर चढ़ा और दीवार के
[46:51] किनारे से शमशान के अंदर झांककर देखने लगा और उसने जो देखा।
[46:58] उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। श्मशान के कोने में जली हुई
[47:04] लकड़ियां, सिंदूर। और कुछ पूजा।
[47:07] का सामान फैला हुआ था। गूंजी हुई आग से हल्का धुंआ उठ
[47:11] रहा था। भैरा वह नहीं था, पर एक पेड़ के
[47:15] नीचे बिना कपड़ों के। शंकर बैठा था, वो शंकर नहीं लग
[47:23] रहा था। उसके शरीर का खून मानो बह गया था
[47:26] और वो कुछ ज्यादा ही सफेद लग रहा था।
[47:30] उसके आसपास की जमीन पूजा का सामान मानव खून से सने हुए थे।
[47:35] खून की गंध हवा में तैर रही थी, उसकी आँखें अंदर धंस गई थी और वो
[47:42] बिना पल के झपकाए किसी चीज़ को चबा रहा था।
[47:48] रवि ने ध्यान से देखा शंकर के चारों तरफ पंख फैले हुए थे।
[47:53] किसी पक्षी के पंख। और उसने दोनों हाथ की हथेलियों से
[47:58] खून से रंगा एक कच्चे मांस का टुकड़ा दबोच रखा था।
[48:02] एक मरा हुआ कबूतर शायर और शंकर शंकर उसे कच्चा खा रहा था, ये
[48:11] देखते ही रवी के पैर कांपने लगे। शंकर जो एक शाकाहारी था, उसे इस
[48:17] हालत में कच्चा मांस खाते देख उसे उल्टी आने लगी।
[48:21] उसने ध्यान से शंकर को देखा। उसकी दोनों हाथों की उंगलियों का
[48:25] आधा हिस्सा गायब था। घाव के अंदर से उंगलियों की हट्टी
[48:29] नजर आ रही थी। कटी हुई उंगलियों से मांस के
[48:33] छिलके लटक रहे थे। उस कबूतर के खून से उसका हाथ,
[48:37] मुँह, दांत, गला सब लाल हो गया था।
[48:41] वो शंकर कम और एक शैतान ज्यादा लग रहा था।
[48:46] शंका रवि के गले से आवाज निकली। इस भयावह दृश्य को देख उसकी आवाज
[48:53] कप रही थी। शंकर ने धीरे से अपना सिर उठाया
[48:57] और दीवार की तरफ देखा। उसकी आँखों में कोई जान नहीं थी।
[49:02] मुझे मांस चाहिए रवि बहुत सारा मांस मुझे ना मुझे मुझे बहुत भूख
[49:09] लगी है रवि। शंकर की बात सुन दीवार के पास
[49:13] खड़े सब गांव वाले एक दूसरे को ढंग से देखने लगे पर रवि गांव
[49:19] वालों की चेतवनियों को नज़रअन्दाज़ करते हुए श्मशान के
[49:23] अंदर गया। वो शंकर के पास बैठा।
[49:27] शंकर चल मेरे साथ। मैं तुझे घर लेने आया हूँ ये सब
[49:32] छोड़ मेरे भाई चंद। रवि की बात सुन शंकर कुछ देर बिना
[49:38] वजह मुस्कुराता रहा मानो उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह से।
[49:45] बिगड़ गया हूँ। खून से रंगे उसके दांतों को देख
[49:49] रवि को डर लग रहा था। शंकर ने कोश्त के टुकड़े से एक
[49:54] आखिरी बार कुछ मांस खाया, पाखी के बचे हिस्से को फेंका और खड़ा हो
[50:00] गया। वह लड़खड़ा रहा था।
[50:03] मुझे मुझे और मांस चाहिए, रवि। बहुत सारा मास बहुत सारा भूला को
[50:10] जगाने के लिए। भोला का नाम सुन रवि की सांस अटक
[50:16] गई। होला को जगाना है का क्या मतलब?
[50:19] ये ये शंकर क्या कह रहा था? रवि ने अगले ही पल खुद को
[50:25] संभालना। उसने शंकर को अपने कंधे पर लटक
[50:29] रहा गमछा पहनाया। उसने शंकर को किसी तरह पकड़ा और
[50:34] शमशान के बाहर ले आया। बाहर खड़े गांव वालों को देख शंकर
[50:40] फिर से मुस्कुराने लगा। शंकर के लाल दात और कटी हुई
[50:44] उंगलियों को देख। कुछ कांव वाले वहाँ से भाग खड़े
[50:48] हुए। शंकर की हालत एक वो समझ चूके थे
[50:52] कि उस पर अभैरव का प्रकोप था और सब जानते थे।
[50:58] भैरव के प्रकोप से कोई जिंदा नहीं बचता।
[51:03] रवि शंकर को कंधे का सहारा देकर। किसी तरह घर के लिए रवाना हुआ।
[51:08] बाकी के गांव वाले दूर से ही उनके पीछे पीछे शंकर के घर तक आए।
[51:14] किसी गांव वाले ने रवि की कोई मदद नहीं की।
[51:18] वो बस दूर खड़े सब कुछ देख रहे थे।
[51:22] गांव वाले जानते थे कुछ। बहुत बुरा होने वाला था।
[51:32] घर लौटकर रवि ने शंकर के शरीर पर लगे खून को साफ किया, उसे साफ
[51:37] कपड़े पहनाए और उसके घाव की मरहम पट्टी की शंकर का शरीर बुखार से
[51:43] तप रहा था। वो मानो बेहोशी की हालत में था।
[51:47] बिस्तर पर लेटते ही उसे नींद आ गई।
[51:50] बस बीच बीच में वो उठता और कुछ बड़बड़ाता और फिर वो दोबारा सो
[51:56] जाता। रवि को अब ही विश्वास नहीं हो रहा
[52:00] था। शंकर की हालत पर ये।
[52:02] उसका वही दोस्त था जो बस एक हफ्ते पहले हँस बोल रहा था और आज आज वो
[52:09] उसे पहचान तक नहीं पा रहा था। उसकी कटी हुई उंगलियों को देख डर
[52:15] लग रहा था। रवि को पिछली राज़ शंकर के साथ
[52:18] क्या हुआ? रवि ये जानना चाहता था पर शंकर
[52:23] उसे बताने की हालत में नहीं था। वो बस पूरा दिन सोता रहा, ना उसने
[52:30] कुछ खाया, ना वो होश में आया। उस रात करीब 1:00 बजे रवि की नींद
[52:42] टूटी, कोई चिल्ला रहा था। वो दौड़ता हुआ शंकर के कमरे में
[52:48] पहुंचा। शंकर अब भी बिस्तर पर था पर उसका
[52:52] शरीर एक धनुष की तरह मुड़ा हुआ था।
[52:56] वो छटपटा रहा था, चीख रहा था वो मानो वो।
[53:00] बहुत दर्द में हो। शंकर शंकर क्या हो रहा है तुझे?
[53:05] फूल शंकर बता मुझे शंकर। पर शंकर की आँखों की पुत्लियां
[53:10] ऊपर चली गई थी। उसकी आँखें बिल्कुल सफेद थीं।
[53:15] वो बस किसी तरह से बोला। बोला बोला, भूका है मुझे, मुझे
[53:21] मांस चाहिए रवि मास। नहीं तो वो मुझे अंदर से खा
[53:25] जाएगा, मेरे शरीर को अंदर से खा जाएगा वो।
[53:30] और ये कहकर दोबारा से उसका शरीर धनुष की तरह उड़ने लगा।
[53:36] उसके गले से तर्दमा चिपका निकलने लगी और तभी।
[53:41] रवि ने शंकर के शरीर की तरफ देखा, शंकर के शरीर के अंदर उसके त्वचा
[53:49] के नीचे कुछ कुछ हिल रहा था। एक कोल मांस का लोतड़ा वो चीज़
[53:55] कभी पेट में, कभी सीने में। तो कभी उसके गले में जाती और शंकर
[54:00] दर्द से चिल्ला उठता मेरे को बिल्कुल समझ नहीं आ रहा था कि वो
[54:04] क्या करे? शंकर की चिपका से पूरा घर गूंज
[54:08] रहा था। उसकी हालत देख रवि की आँखों में
[54:11] आंसू आने लगे। वो बाहर दौड़ा मदद मांगने के लिए।
[54:15] पर किसी गांव वाले ने उसकी कोई मदद नहीं की।
[54:18] कोई शंकर के घर में पैर तक रखने को राजी नहीं था।
[54:23] जब तक रवि लौटा, शंकर शांत हो चुका था।
[54:27] बस जिन जगहों पर शंकर के त्वचा के नीचे वो मांस का लोथड़ा हिल रहा
[54:32] था, वहाँ। अब नए गहरे घाव बन चूके थे मानो
[54:37] सच में उसके शरीर में कुछ था। रवि ने खुद उस चीज़ को हिलते देखा
[54:43] था और वो ये सब देख अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था।
[54:51] रवि बहुत परेशान था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वो
[54:55] क्या करे? शंकर के परिवार को लौटने में अभी
[54:59] भी समय था। कहीं तब तक बहुत देर ना हो जाए।
[55:05] अगले दिन रवि घर के बाहर चौखट पर बैठा था।
[55:09] बिना नींद की रात के बाद। उसका दिमाग अभी भी उलझा हुआ था।
[55:14] 2 दिन हो गए थे श्मशान से उसे लौटे पर उसने ना कुछ खाया था ना
[55:19] कुछ पिया, बस एक लाश की तरह वो बिस्तर पर पड़ा था।
[55:24] अचानक उसके कान में एक दर्दनाक आवाज आई किसी।
[55:31] इंसान की नहीं, शायद किसी जानवर की जो शंकर के घर के पीछे से आ
[55:36] रही थी, कभी बिना कुछ सोचे उस आवाज की तरफ दौड़ा और वहाँ
[55:41] पहुँचकर जो दृश्य उसने देखा उसके पैर वहीं जम गए।
[55:48] शंकर। जो कल तक बिस्तर पर बेहोशी में
[55:52] पड़ा था, जमीन पर नीचे झुका हुआ था, उसके सामने एक बिल्ली पड़ी
[55:58] थी। अभी भी जिंदा पर उसका पेट खुला
[56:02] हुआ था। शंकर के दोनों हाथ बिल्ली के शरीर
[56:05] के अंदर घुसे हुए थे। और वो अंदर से अंगों को बाहर
[56:09] निकालकर खा रहा था। उसके होंठ, तात हाथ सब खून से
[56:15] रंगे हुए थे। वो अपने हाथों से बिल्ली के पेट
[56:18] से निकाले हुए अंगों को बिना किसी झिझक के अपने मुँह में ठूस रहा था
[56:23] मानो वो कई दिनों से भूका हो। शंकर?
[56:27] शंकर रुख जा शंकर क्या कह रहा है तू?
[56:31] रवि चिल्लाता शंकर ने धीरे से पलटकर देखा।
[56:35] उसके चेहरे पर एक भयानक मुस्कान थी।
[56:40] रवि तू आ गया फूला को मांस चाहिए, भूला भूका है।
[56:46] उसे मांस चाहिए रवि ताजा कच्चमास नहीं तो वो अंदर से मुझे कहा
[56:52] जाएगा, मुझे कहा जाएगा वो। ये कहकर अपना हाथ दुबारा बिल्ली
[56:58] के पेट में डालकर उसका एक और हिस्सा उसने अपने मुँह में डाल
[57:02] दिया। तभी घबराहट में आगे बढ़ा और शंकर
[57:05] को रोकने की कोशिश करने लगा। कर यार ये क्या हो गया है तुझे
[57:09] शंकर? पर जैसे ही उसने शंकर को छूना
[57:13] चाहा, शंकर ने पलटकर उसे धक्का दिया, जमीन पर गिर गया।
[57:18] उसकी आँखें अब सफेद थीं। उसकी ताकत देखकर रवि हैरान था।
[57:24] मुझे मांस खाने से मत रुक, रवि इसी में तेरी भलाई।
[57:29] है। शंकर की बात सुन रवि कोई कंजान डर
[57:33] का अहसास हुआ मनो शंकर उसे कोई धमकी दे रहा हो रवि चुपचाप उठा और
[57:39] आंगन से। बाहर चला गया।
[57:42] उस रात शंकर चुप हो गया था। शायद बिल्ली का वो मांस उसके पेट
[57:48] को भर चुका था। शायद वो भोला या जो भी उसके अंदर
[57:54] था आज के लिए तृप्त हो गया। था।
[57:57] रवि पूरी रात बिना आग बंद किए बाहर बैठा रहा।
[58:01] उसे डर था कहीं शंकर दरवाजा तोड़कर बाहर न निकल जाए।
[58:10] अगले दिन सुबह होते ही रवि दौड़ा दौड़ा गांव के पंडित जी को लेकर
[58:15] आया। घर पहुँचकर पंडित जी ने शंकर के
[58:18] कमरे का दरवाजा खोला, अंदर जैसी गंद थी, उन्होंने नाक पर रुमाल रख
[58:24] लिया। शंकर बिस्तर पर पड़ा था, मानो सो
[58:28] रहा था, वो उसके चेहरे पर सूखे खून के धब्बे थे, कपड़े और बिस्तर
[58:34] भी। खून से सने हुए थे।
[58:36] रवि बेटा इससे पहले बिस्तर से बांधो।
[58:40] पंडित जी ने कहा, बड़ी मुश्किल से रवि ने शंकर को बिस्तर से बांधा,
[58:45] उसकी नींद गहरी थी। शायद थकान के कारण पंडित जी ने
[58:49] अपनी पोटली खोली जिसमें गंगाजल, सिंदूर और कुछ मंत्र के कागज।
[58:53] थे। उन्होंने शंकर के माथे पर गंगाजल
[58:57] छिड़का और मंत्रपाठ शुरू किया। जैसे ही पहला मंत्र पूरा हुआ,
[59:03] शंकर की आँखें एकाएक खुल गई। पंडित चाई हँसे से से छला जा उसकी
[59:12] आवाज। बदल चुकी थी।
[59:14] आज पर पंडित जी ने और ज़ोर से मंत्र पढ़ना शुरू किया।
[59:18] शंकर के चेहरे पर अब वह बार बार गंगाजल छिड़कने लगे।
[59:23] शंकर का शरीर अब फिर से अकड़ने लगा।
[59:26] उसका शरीर धनुष जैसे मरने लगा। उसने दर्द से तड़पते हुए।
[59:32] ज़ोर से चिल्लाना शुरू किया। भूला को मांस चाहिए, भूला को मांस
[59:37] चाहिए। और फिर उसकी त्वचा के नीचे फिर से
[59:42] कुछ हिलने लगा। वहीं मांस का लोथड़ा पहले पेट
[59:47] में, फिर सीने में, फिर गले की तरफ।
[59:51] हर जगह जहाँ से वो चीज़ गुजरती, वहाँ एक उभार सी बन जाती है।
[59:58] पंडित जी ने डर कर एक कदम पीछे। लिया।
[1:00:01] ये ये बहुत ही ताकतवर काले तंज का शिकार है।
[1:00:06] मैं मैं कुछ नहीं कर सकता ऐसे बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकता
[1:00:10] मैं। इसके अंदर जो शक्ति है वो भूखी
[1:00:14] है, इसे अकेला छोड़ दो अकेला छोड़ दो इसे रवि ही नहीं तो ये तुम्हें
[1:00:19] भी खा जाएगा, खा जाएगा ये तुम्हें।
[1:00:23] अचानक शंकर ने अपने हाथों को खींचना शुरू किया।
[1:00:26] रस्सियों को तोड़ने की कोशिश करने लगा वो।
[1:00:29] रवि और पंडित जी उसे रोकने के लिए आगे बढ़े पर उसकी ताकत देखकर सब
[1:00:35] हैरान थे। एक ही झटके में शंकर ने अपने एक
[1:00:38] हाथ को आजाद कर लिया और उसने तुरंत पंडित जी का एक हाथ पकड़
[1:00:43] लिया। वो हंसने लगा।
[1:00:45] और अगले ही पल उसने पंडित जीके हाथ पर ज़ोर से काटा।
[1:00:50] उसके तात पंडित जी की त्वचा में घुस गए और उसने उनके हाथ का एक
[1:00:56] हिस्सा खींचकर बाहर निकाल दिया। पंडित जी की दर्दनाक चितकार कमरे
[1:01:02] में गूंज गई। को पीछे हटने की कोशिश कर रहे थे
[1:01:06] पर शंकर ने उन्हें पकड़ रखा था। वो उनके हाथ से निकले हुए मास्क
[1:01:11] को चबा रहा था। खून उसके होंठों से।
[1:01:14] टपक रहा था। सबे ज़ोर से आगे बढ़ा और किसी तरह
[1:01:20] पंडित जी को शंकर से दूर खींचा पर तब तक।
[1:01:23] शंकर पंडित जीके हाथ से एक बड़ा सा मांस का हिस्सा खा चुका था।
[1:01:29] पंडित जी चिल्लाते हुए कमरे से बाहर भागे।
[1:01:33] शंकर शंकर रुक जा शंकर क्या कर रहा है तू?
[1:01:39] की आवाज कांप रही थी। शंकर ने उसकी तरफ देखा, उसकी
[1:01:44] आँखें पूरी तरह से खाली थी। सभी सभी मुझे भूख लगी है भूख लगी
[1:01:51] है मुझे पूरा भूख है तू तू मुझे अपना मास देखा, कोई देखा तू मुझे
[1:01:59] अपना मास। और ये कहकर एक जानवर की तरह शंकर
[1:02:05] रवी पर लपका। उसने अचानक रवी का हाथ पकड़ लिया।
[1:02:09] रवी ने ज़ोर से हाथ खींचा और शंकर के दांत उसके हाथ में गड़ चूके
[1:02:14] थे। उसने रवी के हाथ का एक मांस का
[1:02:17] टुकड़ा काट लिया और उसे मुस्कराते हुए खाने लगा।
[1:02:23] सबरी की चीख से। पूरा घर काबू।
[1:02:26] था। मैंने कहा था ना तुझे बोला वो कहक
[1:02:31] मुझसे मांस चाहिए खत जामाज़। वो एक पेशाजिक मुस्कान के साथ
[1:02:38] बोला। रवि ने देखा कि शंकर की आँखें
[1:02:42] एकदम सफेद हो गई थी। उसका विवाद शुरू देख वो डर से
[1:02:47] कांप रहा था। वो किसी तरह कमरे से बाहर भागा,
[1:02:52] दरवाजे पर ताला लगाया और फिर वहीं जमीन पर बैठकर रोने लगा।
[1:02:57] शंकर ने आज। उसको खाने की कोशिश की थी।
[1:03:01] ये सोच कर वो डर से परेशानी से दर्द से कांपने लगा।
[1:03:06] ये शंकर तो नहीं था ये ये कुछ और ही था।
[1:03:15] रवि ने अपने घाव पर पट्टी बांधी। शंकर अंदर से दरवाज़ा पीटता रहा
[1:03:23] फिर धीरे धीरे उसकी आवाज कम होती गई।
[1:03:27] पिछले कुछ दिनों में रवि ने जो भी दृश्य देखे थे, उसने उसे मानसिक
[1:03:32] रूप से हिला कर रख दिया था। पंडित जीके शब रवि के कानों में
[1:03:36] गूंज रहे थे। इसे अकेला छोड़ दो अकेला छोड़ दो
[1:03:40] इसे रवि ही नहीं तो ये तुम्हें भी खा जाएगा, खा जाएगा ये तुम्हें।
[1:03:45] पर रवि मानने को तैयार नहीं था। वो अपने दोस्त को ऐसे नहीं छोड़
[1:03:51] सकता था। उसने शंकर को कमरे में बंद कर
[1:03:54] दिया और ये फैसला किया कि वो उसे तब तक बहा नहीं निकलने देगा जब तक
[1:04:00] 14 दिन बीत नहीं जाते जब तक भैरव का प्रकोप खत्म नहीं हो जाता बाकी
[1:04:08] के बचे दिनों में। शंकर की हालत दिन ब दिन खराब होती
[1:04:12] जा रही थी। वो इतना दुबला हो गया था कि उसकी
[1:04:15] हड्डियों साफ नजर आ रही थी। उसके शरीर और उसके कमरे से अब एक
[1:04:20] मुर्दे जैसी बदबू आती थी और हर दिन उसके शरीर पर नए नए घाव दिखाई
[1:04:26] दे रहे थे। हर रात।
[1:04:28] कमरे से बस शंकर की चीखें सुनाई देती और उसे सुनकर गांव वाले अपनी
[1:04:33] खिड़की दरवाजे बंद कर लेते और रवि वो खुद बीमार हो गया था।
[1:04:38] 6 दिन से न नींद न खाना, वो अब डर रहा था अपने ही दोस्त से भैरव से।
[1:04:46] और उस चीज़ से जो शंकर के अंदर थी, चौधरी रात को रवि धक्कर शंकर
[1:04:55] के कमरे के बाहर बैठा बैठा ही सो गया।
[1:04:58] आंधी रात के समय हवा में एक आवाज गूंजे।
[1:05:09] भैरव की आवाज रवि गहरी नींद में था।
[1:05:16] उसे कुछ सुनाई नहीं दिया। भैरव की आवाज जैसे ही हवा में
[1:05:20] गूंजी अगले ही पल शंकर के कमरे का दरवाजा अपने आप खुल गया।
[1:05:27] शंकर उठा और कमरे से बाहर निकला। उसकी आंखें पूरी सफेद थी।
[1:05:34] वो लंगड़ता हुआ अजीब तरीके से घर से बाहर निकला श्मशान और भैरव से
[1:05:41] बुला रहा था। शमशान पहुँचते ही शंकर ने देखा
[1:05:49] वहाँ वो उसका इंतजार कर रहा था। भैरव भैरव एक प्रचंड अग्नि के
[1:05:59] सामने बैठा मुस्कुरा रहा था। एक बड़ी आग जल रही थी वहाँ जिससे
[1:06:04] पूरे शमशान में एक लाल रौशनी फैल गई थी।
[1:06:08] पास ही में एक पेड़ के नीचे। खून से बना हुआ एक तंत्र मंडल था।
[1:06:14] उसके बीच में एक लाल कपड़े पर भोला का सड़ा हुआ शरीर रखा था।
[1:06:20] हवा में मौत की कण तैर रही थी। इतनी विभत्स की कोई साधारण इंसान
[1:06:26] वह खड़ा तक ना हो पाए। शंकर को देखते ही भैरव का चेहरा
[1:06:31] खुशी से दमक उठा। आ गया शंकर।
[1:06:41] आज तेरा आखिरी बलिदान होगा और फिर होला पुनर्जीवित हो जाएगा।
[1:06:52] शंकर मानो भैरव के वश में ही था। वो चुपचाप वहीं खड़ा रहा।
[1:06:57] भैरव ने उठकर उसके पैर पर रस्सी बांधी फिर उससे उल्टा लटका दिया।
[1:07:03] उस तंत्र मंडल के ठीक ऊपर होला के मुर्दे सड़े हुए शरीफ।
[1:07:08] के ठीकों। पर और फिर शुरू हुआ भैरव का मंत्र
[1:07:13] चार। वो कुछ मंत्र पढ़ता अग्नि में कुछ
[1:07:19] आहुति देता, फिर भोला के शरीर पर कुछ छिड़कता भैरव के राख लगे शरीर
[1:07:24] से आज एक अलग ही तेज निकल रहा था। जैसे जैसे भैरव ने मंत्रोच्चारण
[1:07:32] शुरू किए क्नॉइस। श्मशान में हवा तेज चलने लगी।
[1:07:37] पेड़ हवा में ज़ोर ज़ोर से लहराने लगे, आसमान में बिजली चमकने लगी
[1:07:43] मानो कोई भीषण तूफान आने वाला हो। अब भैरव ने एक शाकू निकाला।
[1:07:51] और शंकर की कलाई पर केहरा चीरा लगाया।
[1:07:54] खून सीधा भोला के बदन पर टपकने लगा।
[1:07:59] भोला तेरे प्रकट होने का समय आ चुका है जीस शरीर में तू है फुआ,
[1:08:06] तुझे अपने अंदर नहीं रख सकता इसलिए मैं।
[1:08:10] भैरव तेरा अववान करता हूँ तेरा अववान करता हूँ मैं भूला प्रकट
[1:08:17] हो, प्रकट हो भूला प्रकट हो। जैसे ही ये शब्द भैरव के मुँह से
[1:08:25] निकले शंकर के पेट में कुचलने लगा।
[1:08:29] है ना कोई? चीज़ उसके अंदर तड़प रही थी।
[1:08:32] बाहर आने के लिए बेचैन थी वो और अचानक एक भयानक चितकार के साथ
[1:08:38] शंकर का पेट फट गया। उसके अंदर से एक काला चिपचिपा
[1:08:44] मांस का गोला बाहर निकला और खून के साथ।
[1:08:49] बाहर छिटककर भोला के मूर्ते शरीर पर गिर गया।
[1:08:54] वो मांस का गोला भोला के सड़े हुए शरीर पर रेंगने लगा जैसे कि वो
[1:08:59] जिंदा हो। वो धीरे धीरे भोला के मूर्ते शरीर
[1:09:04] के मुँह के अंदर घुस गया और अगले ही पल।
[1:09:08] भोला की आँखें खुल गई, उनमें एक लाल ज्वाला जैसी डरावनी चमक थी,
[1:09:16] पैरा खुशी से हँस पड़ा। तू लौट आया मेरा बेटा तू लौट आया
[1:09:25] भुला वाह। बोला जो अब पुनर्जीवित हो चुका
[1:09:30] था। धीरे से उठ उसका शरीर पहले से ही
[1:09:35] सड़ा हुआ था, कमजोर था पर उसकी आंखें एकदम भयानक।
[1:09:41] उसने उठकर एक खतरनाक आवाज निकाली, जिससे पूरा शमशान गूंज उठा।
[1:09:48] और भैरा खुशी से हंसने लगा। शंकर इस सबके बीच में अपने अंतिम
[1:09:56] क्षणों को गिन रहा था। उसके शरीर से बहुत ज्यादा खून बह
[1:10:01] चुका था। भैरव ने रस्सी धीले की और उसे
[1:10:04] नीचे उतारा। परची खुची जान के साथ शंकर रेंगता
[1:10:10] हुआ दर्द में कराहते हुए शमशान से बाहर जाने की कोशिश करने।
[1:10:15] लगा। पर तभी भैरव की आवाज आई।
[1:10:19] कहाँ जा रहा है शंकर तेरा काम अभी खत्म नहीं हुआ।
[1:10:25] है। शंकर ने मुड़कर देखा, भैरवर भोला
[1:10:30] दोनों उसके पीछे खड़े थे। भोला अभी कमजोर है, उसे ताकत की
[1:10:37] जरूरत है। अपनी पूर्ण शक्ति में आने के लिए
[1:10:40] उसे तेरे मांस की जरूरत है। भैरव कि ये शब्द सुनकर शंकर की
[1:10:47] आँखों में आंसू आ गए। वो जानता था कि उसका अंत अब आ
[1:10:53] चुका है और अगले ही पल भोला ने उस पर हमला कर दिया।
[1:10:59] उसके बाद तेज और नुकीले। शंकर के कमजोर शरीर में घुस गए और
[1:11:04] उसे फाड़ने लगे। हर बार कुछ मांस खाकर कोला का
[1:11:10] सड़ा हुआ शरीर ताजा होने लगा। जैसे शरीर में तो बारात से जा ना
[1:11:15] रही हो उसके। शंकर की चितकार शमशान की हवा में
[1:11:19] गूंज रही थी। पर कोई सुनने वाला नहीं था।
[1:11:23] उसे आज देखते ही देखते शंकर के शरीर के टुकड़े टुकड़े हो गए।
[1:11:29] उसकी जान चली गई। ठीक वैसे ही जैसे 14 दिन पहले
[1:11:36] उसने भोला को मारा था। शंकर का मांस खाकर भोला पूरी तरह
[1:11:43] से वापस आ चुका था। मजबूत तंदुरुस्त पहले से भी
[1:11:48] ज्यादा ताकतवर और खौफनाक महरव पास में ही खड़ा एक मुस्कान के साथ
[1:11:54] इसमें पद से दृश्य को टेक रहा था। फिर वो और भोला।
[1:11:58] शमशान में वापस लौट गए और भैरव की पेशा जिख हँसी से पूरा शमशान मंच
[1:12:07] उठा। अगले दिन सुबह जब रवी की आँख खुली
[1:12:17] वो जल्दी से उठकर शंकर के कमरे की तरफ दौड़ा पर दरवाजा खुला था।
[1:12:22] ताला टूट कर जमीन पर पड़ा था। रवि दौड़ता दौड़ता श्मशान पहुंचा
[1:12:28] वह शंकर की छिन्न भिन्न लाश को देख वह कांप गया।
[1:12:33] टल से रोने लगा और तभी उसकी नजर पड़ी भीड़ में खड़े भैरव पर।
[1:12:40] वो शंकर की लाश के टुकड़ों को देख मुस्कुरा रहा था और उसके बगल में
[1:12:46] था। बोला हाँ, बोला सच में लौटाया था,
[1:12:51] वही बोला जिसे शंकर ने उसके सामने इसी जगह पर मारा था।
[1:12:57] रवि को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।
[1:13:00] वो वहाँ से अपने घर भाग आया। वो पूरा दिन अपने कमरे में ही
[1:13:04] बैठा रहा। डर से कांपते हुए उसे हर एक चीज़,
[1:13:09] हर एक घटना याद आ रही थी। आज और ये सब सोच उसे लग रहा था कि
[1:13:14] वो पागल हो जाएगा। रात के करीब 3:00 बजे रवि की आंख
[1:13:21] खुली। उसे एक आवाज सुनाई दी।
[1:13:25] कोई उसके दरवाजे को खरोंच रहा था, बाहर से पंजे से रवि ने डर डर कर
[1:13:32] खिड़की पर जाकर बाहर देखा और वहाँ अंधेरे में।
[1:13:36] वह अंधेरे में भैरव खड़ा था, उसके बगल में था भोला और भोला के मुँह
[1:13:43] से लटक रहा था। शंकर का कटा हुआ सिर से चीख पड़ा
[1:13:51] और तभी भैरव ने हंसते हुए कहा। लवी।
[1:13:56] कहें फूलकु मास चाहिए रविये तेरा मास सुना तुने तेरा मास।
[1:14:18] हे गाइस कैसी लगी ये? भैरव वाली सीरीज?
[1:14:22] हमें व्हाट्सएप, ईमेल या डीएम करके जरूर बताएगा।
[1:14:26] प्लीज़ और हाँ सेंड यू यूनिक एंड स्केयरी इंसिडेंट्स एस वेल वी अरे
[1:14:31] रनिंग शॉट ऑफ़ इंसिडेंट्स फॉर आपबीती गाइस सो, अगर आप लोगों ने
[1:14:35] अपनी स्टोरीज शेयर नहीं किए तो अनफॉर्टुनेटली जल्द ही हमें आपकी
[1:14:40] इस फेवरिट आपबीती सीरीज को बंद करना पड़ेगा।
[1:14:44] सो प्लीज़ डोंट वेट और अपनी कहानियों हमारे साथ जल्द से जल्द
[1:14:48] शेयर कीजिए। यू कैन रीड उस ऑन व्हाट्सएप,
[1:14:51] इंस्टाग्राम, ईमेल और यूट्यूब। डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में है।
[1:14:56] वैसे हमें रेटिंग्स देना फॉलो करना मत भूलिए।
[1:14:59] यह एपिसोड काफी लंबा था, सो वी अरे स्किपिंग दी शौत आउट सेशन फॉर
[1:15:03] थिस वीक वी विल डू इट नेक्स्ट टाइम पाडो फ्राइडेज का भी नया
[1:15:07] एपिसोड लाइव हो चुका है। उसका लिंक भी डिस्क्रिप्षन में है
[1:15:11] सो गो लिसेन टु इट नाउ। सो अगले हफ्ते फिर मिलेंगे मैं
[1:15:15] हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पोक कास्ट अवि और मंजिला के
[1:15:21] साथ। सुनते रहिए स्पोक कास्ट अवि और
[1:15:26] मंजिला के साथ।

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