# Ep 79 - LAVAARIS LAASH - PART 1 | SPOOKCAST ORIGINAL STORY | HINDI HORROR STORY | MURDAGHAR STORY |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 9 May 2026, 41 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/119738389/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2026-4-11%2F423919680-44100-2-0a74bf788b9b4.mp3

Story: A medical student. An unclaimed corpse. And a presence that slowly refuses to leave. When Shaurya and his friends begin dissecting an unidentified female cadaver in their medical college dissection hall, it all feels like a normal part of MBBS life… until strange things begin to happen. The sharp smell of Formaldehyde. Wet, gurgling breaths in the middle of the night. And a crushing weight that can be felt… but never seen. Lavaaris Laash is a slow-burn atmospheric horror story about guilt, loneliness, and a presence that doesn’t haunt you from a distance… IT STAYS! | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana |Chakwa | Chakhwa |Chakva | Chalava | Brahmarakshas | Munjya | Brahadaitya |Ambulance Horror | Driver Story | Hindi Horror Story | Horror Stories | Narrated by : Manjila Sound Design and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Share your incidents with us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:10] मैं हूँ मंजुला और आप सुन रहे हैं इस फोरकास्ट।
[0:22] दोस्तों नमस्कार, कैसे हैं आप सब? बहुत दिनों बाद मैं वापस लौटी
[0:27] हूँ। आप सब के लिए एक ओरिजिनल स्टोरी
[0:30] के साथ पिछले कुछ दिनों से गर्मी बहुत ज्यादा है और इसी वजह से
[0:35] मुझे हीट श्रोक हुआ था। जीस वजह से मैं इस हालत में नहीं
[0:39] थी की मैं माईक के सामने बैठ पाऊँ या आपके लिए कोई और नया एपिसोड ला
[0:44] सकूँ। बहुत लोगों के मैसेज आए जिसके लिए
[0:47] बहुत बहुत शुक्रिया। आप लोग हमेशा ऐसे ही मेरे साथ बने
[0:51] रहिए आज की कहानी शुरू करने से पहले मुझे।
[0:56] आप सबके साथ एक इम्पोर्टेन्ट अपडेट शेयर करना था।
[0:59] रिसेंटली यूट्यूब ने मेरे चैनल के मोनेटाइजेशन एंड मेम्बरशिप को
[1:04] सस्पेंड कर दिया है। ये कह कर की मेरा कॅन्टेंट
[1:07] इनॉथेंटिक या मास प्रोड्यूस्ड है सच कहूं तो।
[1:12] मेरे जैसे एक छोटे से रैटर के लिए यह सुना काफी डिसकरेजिंग है
[1:17] क्योंकि आप सब जो मेरी कहानियों यहाँ सुनते हो उसे मास्क
[1:21] प्रोड्यूस करना इम्पॉसिबल है। इन कहानियों के पीछे मेरी घंटों
[1:26] की मेहनत होती है। राइटिंग नैरेशन साउंड डिज़ैन ये
[1:30] सब करने में काफी टाइम के साथ साथ पैसे भी लगते हैं।
[1:35] एंड यूट्यूब और स्पॉटिफाइ ही वो दो प्लैटफॉर्म्स हैं जो मुझे इस
[1:38] बुक कास्ट के लिए जरूरी टूल्स सस्टेन करने में मदद करते हैं।
[1:43] सो, मेरे जैसे डेढ़ साल पुराने छोटे पोडकास्ट के लिए।
[1:47] इस स्टेज पर आकर मोनेटाइजेशन का रुखना काफी बड़ा सेटबैक है।
[1:52] मैंने यूट्यूब की इस डिसीजन के अगेंस्ट अपील डाली है।
[1:56] पर मैं आगे क्या करूँगी? आई ऍम स्टिल थिंकिंग अबाउट इट एंड
[2:00] तब तक, आई रियली नीड युअर सपोर्ट गाइज़ एंड डोन्ट वोर्री मैं आपसे
[2:05] पैसे नहीं मांग रही? बस इतनी सी रिक्वेस्ट है कि अगर
[2:09] आपको मेरी कहानियों मेरा काम पसंद है तो मुझे प्लीज़ स्पॉटिफाइ पर
[2:13] सुनिए, मुझे स्पॉटिफाइ पर फॉलो कीजिए ताकि आपको मेरे हर नए
[2:18] एपिसोड का नोटिफिकेशन आए। बिकॉज़ मोर थान 1919 5% ऑफ मैं
[2:22] लिस्टनर्स हॅव नॉट फॉलोड मी ऑन स्पॉटिफाइ।
[2:26] एक और चीज़ जो आप कर सकते हैं वह अपने फ्रेन्डस के साथ मेरे
[2:30] स्पॉटिफाइ लिंक को शेयर करना ताकि नए लोग मेरे इस पॉडकास्ट के साथ
[2:34] जुड़ सके। स्पेशल वो लोग जो मुझे यूट्यूब पर
[2:37] सुनते हैं इट्स ए हम्बल रिक्वेस्ट आईस दट।
[2:40] आप लोग मुझे स्पॉटिफाइ पर आकर सुनिए क्योंकि जब तक ये अपील का
[2:44] कोई आउटकम नहीं आता। आई विल नॉट बी पोस्टिंग ऑन
[2:47] यूट्यूब आज तक आपका सपोर्ट ही है, जिसने इतने कम समय में मुझे
[2:52] इंडिया के टॉप हॉरर पोडकास्ट में पहुंचाया है एंड आई नो यू गाइज़
[2:57] विल कंटिन्यू सपोर्टिंग मी? मेरे जैसे और भी बहुत सारे
[3:01] राइटर्स हैं जो जेन्यूइनली स्टोरीज़ लिखते हैं।
[3:05] पर इस वक्त इस एआई ऑटोमेशन वेव और यूट्यूब प्लेटफार्म पॉलिसी के बीच
[3:10] वो भी स्ट्रगल कर रहे हैं। सो एस एन इंटेलीजेंट ऑडिएंस आप सब
[3:15] से मेरी एक ही रिक्वेस्ट है कि ऐसे राइटर्स और क्रिएटर्स को
[3:18] सपोर्ट करिए जो ओरिजिनल कॅन्टेंट बनाते हैं, ना कि एआई जेनरेटर।
[3:24] अगेन आप को अपने दोस्तों के साथ शेयर करके, मेरी कहानियों
[3:28] स्पॉटिफाइ पर सुनकर और मुझे स्पॉटिफाइ पर फॉलो करके अपना
[3:32] सपोर्ट मुझे दे सकते हैं। गाइस थैंक यू पिछले डेढ़ साल से
[3:37] हमेशा मेरे साथ रहने के लिए चलिए अब आज की कहानी शुरू करते हैं।
[3:43] एक ओरिजिनल स्टोरी जो मैंने बड़े प्यार से आप सब के लिए लिखी है।
[3:55] शौर्य को पहले लगा कि वह सपना देख रहा था, लेकिन उसके साथ जो हो रहा
[4:01] था। वो सच था, उसकी आँखें खुली हुई थी
[4:08] पर उसका जिस्म बिल्कुल बेजान पड़ा था।
[4:12] मानो से स्लीप पैरालिसिस हुआ हो और सबसे ज्यादा डर इस बात का था
[4:19] कि राहत क्यों? उस अंधेरे में?
[4:22] कोई अनजान चीज़ चुपचाप उसके सीने के ऊपर लेटी हुई थी।
[4:35] कुछ देर पहले तक सब ठीक था। रात किए 9:00 बज रहे थे, जब शौर्य
[4:41] अपने हॉस्टल रूम में लौटा था। हॉस्टल के उस पुराने कमरे में एक
[4:46] कोने में लगे अपने बिस्तर पर लेट कर वो ह्यूमन एनाटोमी की किताब
[4:51] पढ़ रहा था। एक फर्स्ट ईयर एम बी बीएस
[4:54] स्टूडेंट जिसके लिए इंसानी जिस्म ए पढ़ाई का हिस्सा बन चुका था।
[5:01] उसका रूममेट कुणाल आज भी। हमेशा की तरह कमरे में नहीं था।
[5:06] उसका बिस्तर बिखरे कपड़ों और किताबों से भरा पड़ा था।
[5:11] शौर्य कुछ देर तक तो मन लगाकर पढ़ाई करता रहा पर फिर धीरे धीरे
[5:18] किताब में लिखे लब्ज़ उसके आँखों के सामने धुंधले पड़ने लगे।
[5:25] और वो नीन कियागोश में खो गया। उसकी आग लगी हुई थी कि तभी उसे
[5:34] एकाएक महसूस हुआ कि किसी ने बिल्कुल गीले ठंडे हाथों से उसके
[5:41] एक पैर को छुआ था। और इससे एहसास के होते ही वो घबरा
[5:45] कर तुरंत टूटकर बैठ गया। उसने अपने आसपास देखा पर कमरा
[5:55] बिल्कुल खाली था। ना उसका रूममेट कुणाल वापस आया
[5:59] था, ना उसके रूम में कोई और था। पर उसके पैर के उस हिस्से पर सच
[6:05] में कुछ चिपचिपा लगा हुआ था। शौर्य ने उसे छुआ और एक तीखी नाक
[6:13] को चुगने वाली केमिकल की गंध उसके सांसों में घुलने लगी वो।
[6:21] उस गंध को अच्छी तरह से पहचानना था।
[6:25] यह फॉर्मल रिहाइप की गंध थी। एक ऐसा केमिकल जो मुर्दाघर में
[6:32] इस्तेमाल होता है लाशों को सड़ने से बचाने के लिए।
[6:40] शौर्य का डर से गला सुख गया, वो केमिकल इतनी रात को उसके पैर पर
[6:47] कैसे लगा था? वो तो सुबह लैब में गया था फिर वो
[6:52] बदबू अभी उसके कमरे में कैसे आ रही थी?
[6:56] और सिर्फ आज ही नहीं पिछले कुछ रातो से जब भी।
[7:00] वो अकेला होता फॉर्मलिटी हाइट की, पर वो बिना वजह उसके कमरे में भर
[7:06] जाती। लेकिन आज आज कुछ अलग हो रहा था।
[7:12] आज उस केमिकल की सिर गंध नहीं। आज उसके पैर पर फॉर्मलिटी हाइट
[7:18] लगा हुआ था। की बदबू पिछली रातों के मुकाबले
[7:22] बहुत ज्यादा तेज़ थी। इतनी तेज़ की शौर्य को लग रहा था
[7:27] कि वो किसी लाश के बिल्कुल पास बैठा था।
[7:32] वो डरते डरते बिस्तर से नीचे उतरा उसने लाइट्स ऑन की।
[7:38] सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। जब कहीं कुछ अजीब नहीं दिखा तब
[7:43] उसने खुद को हर रोज़ की तरह शांत किया।
[7:46] समझाया कि ये सब शायद उसके दिमाग का खेल था।
[7:50] वो एक मेडिकल स्टूडेंट था। मेडिकल स्टूडेंट्स को ये गंध आना
[7:55] नॉर्मल था क्योंकि वो। दिन में लाशों पर काम करते थे और
[8:00] कई बार नहाने के बाद भी वो बदबू उनके शरीर से नहीं छूटती थी।
[8:07] उस बदबू की आदत होने में बहुत स्टूडेंट्स को बहुत ज्यादा समय लग
[8:11] जाता था और शायद इसीलिए उसे आज कल ये गलतफहमी हो रही थी।
[8:17] की उसके कमरे से भी फॉर्मल्डिहाइड की गंध आती है।
[8:22] वो खुद को किसी तरह समझा कर अपने बिस्तर पर लौटा।
[8:27] कंबल, ओड़ा और आंखें बंद करके दोबारा सोने की कोशिश करने लगा।
[8:37] क्नॉइस लेकिन वो गलत था, कुछ मिनट बीते और उसकी आंख फिर लगी ही थी
[8:45] की एक आवाज ने उसे फिर से जगा दिया।
[8:57] एक गीली सांस की आवाज़ जैसे कोई सांस लेने की कोशिश कर रहा हो।
[9:05] ऊपर पूरी सांस ले नहीं पा रहा। हो और।
[9:11] वो डरावनी आवाज़ उसके बिस्तर के नीचे से आ रही थी।
[9:18] वो आवाज़ सुन शौर्य का जिस्म दर्द से अकड़ गया।
[9:23] उसने हिलने की कोशिश की, लेकिन उसका जिस्म अब उसके कंट्रोल में
[9:28] नहीं था। वो ना उठ पा रहा था, ना कुछ कर पा
[9:32] रहा था और वो डरावनी आवाज। अब धीरे धीरे उसके करीब आती जा
[9:39] रही थी पहले बिस्तर के नीचे, फिर उसके पैरों के पास और फिर उसके
[9:46] करीब और करीब शौर्य को महसूस हो रहा था की उसका कंबल।
[9:53] उसके पैरों के आसपास तम रहा था। जैसे कोई धीरे धीरे उसके पैरों के
[9:59] पास से होकर उसके शरीर के ऊपर चढ़ा हो, पर उसे उसे कोई नहीं दिख
[10:06] रहा था। जीज अब धीरे धीरे उसके शरीर पर
[10:11] रेंगते हुए। उसकी छाती पर आकर बैठ गई।
[10:19] शौर्य पूरी ताकत से मिलने की कोशिश करने लगा पर उसका जल ने उसे
[10:26] अपने नीचे दबा रखा था। साथ ही।
[10:31] फॉर्मल डिवाइड की तेज़ गंध और गहरी होती जा रही थी, जिससे उसका
[10:36] दम घुट रहा था और ठीक उसी का उसे एक और घिनौने बाप का एहसास हुआ।
[10:44] कुछ ठंडा और चुप चुप तरल, धीरे धीरे उसके कम्बल के।
[10:50] अंदर हिस्सा था उसके सीने तक पहुँच रहा था, ठीक वहाँ जाओ।
[10:57] उसे वो वजन फील हो रहा था अपने कुछ ही करो में उसका कंबल अंदर से
[11:03] गीला होने लगा। पहले उसका कंबल और फिर उसका टी
[11:08] शर्ट। ठीक उसी जगह पर जहाँ उसकी छाती पर
[11:13] 25 बैठे हुए थे। शौर्य की आँखों से अब टार के मारे
[11:19] आंसू निकलने लगे। वो ये समझ चुका था की उसके ऊपर
[11:24] फैला वो ठंडा तरल वही केमिकल था फॉर्मल्डिहाइड।
[11:29] जो सिर्फ एक ही जगह पर मिलता था मुल्ता घर में रखी लाशों पर और
[11:37] इसका मतलब था जो चीज़ उसके छाती पर लेटी हुई थी, वो सुन्दा नहीं
[11:45] थी। ये सारी डरावनी घटनाएं उस दिन
[11:56] शुरू हुई थी, जब एनाटॉमी लैब के टेबल नंबर सिक्स पर एक नई लाश को
[12:02] लाया गया था और वो लावारिस लाश शौर्य के ग्रुप को अलॉट हुई थी।
[12:09] एनाटॉमी लैब में कई लावारिस नशे थी।
[12:12] अनक्लेम्ड बॉडीस चीनी पुलिस अथॉरिटीज पढ़ाई और रिसर्च के लिए
[12:18] मेडिकल कॉलेजस को सौंप देती थी। मेडिकल स्टूडेंट्स इन लाशों पर
[12:23] सीखते थे। डायसेक्शन करते थे इंसान के जिस्म
[12:27] को, उसके अंदरूनी हिस्सों रंगों की बनावट को।
[12:31] अंदर से समझते थे। इन लावारिस लाशों को संभाल कर
[12:36] रखने के लिए इन एनाटोमी लैब्स में फॉर्मलडीहाइड नाम के एक तेज
[12:41] केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था ताकि वो लाज काफी दिनों तक ठीक
[12:47] रहे। और स्टूडेंट्स उस पर प्रैक्टिस कर
[12:50] सके। और इसी वजह से एनाटॉमी लैब में
[12:54] हमेशा फॉर्मली हाइट की वो तेज तीखी गंध हमेशा रहती थी जो
[13:00] स्टूडेंट्स और स्टाफ के शरीर पर कपड़ों पर यहाँ तक के दिमाग में
[13:05] भी फंस जाती थी। शौर्य और उसका बैच अब तक इन सब
[13:11] चीजों का काफी हद तक आदी हो चुका था।
[13:14] बट टेबल नंबर सिक्स पर जो नई लाश रखी गई थी वो बाकी लाशों से अलग
[13:20] थी। ये लाश एक जवान लड़की की थी।
[13:25] गले से घुटनों तक एक। गवर से ठकी हुई।
[13:30] उसकी हालत बाकी लाशों से बेहतर थी।
[13:34] उम्र भी शौर्य के ग्रुप के ज्यादातर मेडिकल स्टूडेंट्स से कम
[13:38] थी। शायद उसके पैर के ऊपर लगे टैग पर
[13:42] लिखा था एज 19222। जेंडर के सामने लिखा था ऐफ़ और
[13:49] नाम की जगह नाम की जगह खाली था एक बेनाम लाश उस लाश की त्वचा बिलकुल
[13:58] सफेद थी मोम जैसे चेहरा अब भी ठीक ठाक था पहचान में आ रहा था।
[14:05] और उसके लंबे बाल खुले हुए थे। वो एक सुंदर पुतले की तरह उस टेबल
[14:11] पर लेटी हुई थी। अगर कोई उसे ध्यान से देखता तो
[14:16] उसे तुरंत एहसास होता कि अगर ये लड़की जिंदा होती तो बिल्कुल
[14:22] नॉर्मल लगती। शायद।
[14:24] खूबसूरत भी ये किसी की बेटी थी या बहन पर आज इसकी पहचान खत्म हो
[14:32] चुकी थी। वो सिर्फ एक लावारिस लाश थी और इस
[14:37] टेबल पर बेजान पड़ी हुई थी। भाई, ये थोड़ी बड़ी अलग लग रही
[14:43] है, है ना? किसी ने धीरे से कहा।
[14:48] बिल्कुल स्लीपिंग ड्यूटी। किसी दूसरे स्टूडेंट ने तुरंत बोल
[14:54] दिया शौर्य को छोड़कर सब हंसने लगे और उसलास का नाम फिर वहीं बढ़
[15:00] गया। स्लीपिंग ड्यूटी।
[15:03] कुछ ही देर में डाईसेक्शन शुरू हुआ।
[15:06] शुरू के कुछ मिनट बिलकुल रूटीन थे।
[15:08] प्रोफेसर ने इंस्ट्रक्शंस दिए, सब ने ग्लव्स पहने, टूल्स निकाले और
[15:13] इंस्ट्रक्शंस फॉलो किए। पर जैसे ही प्रोफेसर वहाँ से हटे,
[15:18] एक स्टूडेंट ने उस लाज की कलाई पकड़ी और थोड़ा सा।
[15:23] घूमाकर कहा। भाई लोग ये देखो।
[15:27] सब उस लाश के हाथ के पास जमा होकर उसकी कलाई पर पतले टेढ़े मेढ़े
[15:33] कर्ज के पुराने निशान थे। जैसे किसी ने बार बार एक ही जगह
[15:38] पर सालों पहले छूट पहुंचाई हो और उस पर ऊंची नीची स्किन की परत बन
[15:44] गई हो। कुछ निशान काफी गहरे थे, कुछ
[15:48] पुराने बस सब एक ही कहानी सुना रहे थे।
[15:52] उस स्टूडेंट ने धीरे से अपनी ऊँगली से उस निशान को ट्रेस किया
[15:57] और फिर तुरंत अपना हाथ हटा दिया। ये।
[16:01] ये पुराने इंजरीज हैं। और।
[16:02] खुद बनाए निशान नहीं लग रहा। है।
[16:05] ये बात सुनकर अब जब ध्यान से उस लाश को देख रहे थे, उसी हाथ के
[16:11] ऊपरी हिस्से पर एक गहरा नीला निशान था।
[16:15] किसी चोट का कंधे के पास भी एक गहरा दाग था।
[16:20] और जब एक स्टूडेंट ने उस पर हल्का प्रेशर दिया तो उसने तुरंत हाथ
[16:24] वापस खींच लिया। शिट यह यह फ्रैक्चर है और ये ठीक
[16:30] नहीं हुआ है। पसलियों के पास भी हड्डी का एक
[16:33] हिस्सा उभरा हुआ था जैसे कभी हड्डी टूटी तो थी।
[16:38] पर उसे कभी ठीक से सेट नहीं किया गया था।
[16:42] सिगरेट से स्किन जलाने के भी कई निशान थे।
[16:46] कई काले, नीले दूसरे घाव भी थे उस लाश के शरीर पर और ये सब पुराने
[16:53] घाव थे। उनके ग्रुप में अब पूरी खामोशी छा
[16:57] गई। किसी ने सीधे से कुछ नहीं कहा पर
[17:00] अब तक सब समझ चूके थे कि इस लड़की के साथ सालों से कुछ बहुत गलत हो
[17:06] रहा था। फिर किसी कारणवश इसकी मौत हो गई
[17:11] और कोई इसकी लाश को लेने तक नहीं आया।
[17:16] छोड़ो यार काम खत्म करते हैं, सर आ गए तो फिर डांट पड़ेगी।
[17:22] किसी ने धीरे से कहा और सब वापस काम में लग गए।
[17:26] इस बात को भूलने की कोशिश करने लगे कि लड़की के साथ कुछ बहुत
[17:32] बुरा हुआ था वो। अब बस उनके लिए एक स्पेसिमन थी।
[17:37] एक लावारिस लाश पर शुर इस बात को नहीं भुला पा रहा था।
[17:45] उसकी नजर बार बार उस लड़की के हाथ ऊपर जा रही थी।
[17:50] उसके अलग अलग चोट के निशानों पर और उसे।
[17:54] काफी बुरा लग रहा था। उसे एहसास हो रहा था कि ये लाश
[17:59] कुछ दिनों पहले तक भी जिंदा थी। ये लड़की शायद उसकी छोटी बहन की
[18:05] उम्र की थी और शायद उसके साथ कुछ बहुत बुरा हुआ था।
[18:10] उसे उस लड़की के लिए बहुत बुरा लग रहा था।
[18:15] सेशन लंबा चला और जब खत्म हुआ सब लोग धीरे धीरे बाहर निकल गए पर
[18:22] शौर्य वहीं रुका रहा। नोट्स खत्म करते हुए उस दिन पूरे
[18:27] समय चुप ही रहा। उसे ना वो स्लीपिंग ब्यूटी वाला
[18:31] नाम अच्छा लगा था। और ना कोई मजाक।
[18:36] जब सब बाहर निकल गए तब वो टेबल नंबर सिक्स के पास दोबारा गया और
[18:41] उसने बड़े ध्यान से उस लाश को ठीक से ढका।
[18:46] वो एक पल के लिए रुका और फिर बहुत हल्की आवाज में बोला।
[18:52] हाई। मैं शुर पता नहीं तुम्हारे साथ
[18:57] हुआ क्या? पर जो भी हुआ वो वो नहीं होना
[19:01] चाहिए था। तुम्हें।
[19:03] तुम्हें लेने भी कोई नहीं आया। आई?
[19:06] ऍम सो सॉरी और। ये कहकर वो वहाँ से निकल गया।
[19:16] उसराद शौर्य ने पहली बार वो तीखी केमिकल वाली कंद अपने कमरे में
[19:22] महसूस की। वो उसराद अपने कमरे में अकेला
[19:28] बिस्तर पर लेटा हुआ था। कमरा शान था।
[19:32] और बिना किसी वजह के उसकी नाक में अचानक फॉर्मल्डिहाइड की गंद आने
[19:37] लगी। पहले उसने सोचा, शायद शायद वो गंद
[19:41] उसके कपड़ों में से आ रही होगी। वो उठकर बैठ गया।
[19:46] उसने अपने हाथ सूंघे, फिर अपनी टी शर्ट फिर कंबल गन्ती।
[19:52] पर पर वो किसी एक जगह से नहीं आ रही थी।
[19:56] ऐसा लग रहा था जैसे वो गंद हवा में घुली हो।
[20:00] वो उठकर खिड़की तक गया, उसने खिड़की खोली, फिर दरवाज़ा सब
[20:06] नॉर्मल था पर गंद जाने का नाम नहीं ले रही थी।
[20:11] कुछ देर बाद वो वापस बिस्तर पर आया और उसने खुद को समझाया कि ये
[20:17] उसके दिमाग का खेल है और फिर वो पढ़ाई में लग गया।
[20:22] शौर्य ने किसी तरह अपना बस ध्यान भटका दिया, पर वो गंध उसके सोने
[20:28] तक। उसके कमरे से नहीं गई।
[20:37] अगली सुबह जब सब एनाटॉमी लैब में मिले तो पहले कुछ देर तक तो रोज़
[20:42] की तरह हँसी मजाक चलता रहा, लेकिन फिर अचानक कुछ अजीब हुआ।
[20:48] वही? तेरे तेरे हाथ पर ये क्या निशान
[20:51] है? एक लड़के ने दूसरे से पूछा उसकी
[20:54] कलाई पर एक पतला सा निशान था, हल्का सा लाल किसी खरोच का।
[21:00] अरे, ये देख मेरी। हाथ पर भी है।
[21:04] किसी दूसरे स्टूडेंट ने कहा उसने अपना हाथ दिखाया।
[21:08] शौर्य के ग्रुप के कुछ और लड़कों ने भी अपने हाथ दिखाए।
[21:13] लगभग सभी के हाथों पर निशान थे अलग अलग जगहों पर, लेकिन एक जैसे
[21:19] लाल खरोचने के निशान और सब हैरान होकर एक दूसरे को देखने लगे।
[21:25] किसी को याद भी है? ये हुआ कैसे?
[21:28] किसी ने पूछा पर किसी के पास कोई जवाब नहीं था।
[21:33] किसी को याद नहीं था कि उन्हें चोट कैसे लगी थी।
[21:37] किसी ने अब मस्ती में कहा। लगता है कल हम सब ने कुछ ज्यादा
[21:43] ही काम कर लिया। काम और हम।
[21:46] मुझे तो लगता है रात को कमरे में कोई भूत नहीं आई थी।
[21:54] शौर्य तेरा। हाथ दिखा तो तुझे?
[21:57] कहाँ चोट लगी है? शौर्य ने अब अपने हाथ देखे पर वो
[22:02] बिलकुल साफ थे। उसके हाथों पर एक भी खरोंच के
[22:06] निशान नहीं थे। लगता है, भूतनी को शौर्य की शक्ल
[22:11] देख कर दया आ गई। सब हंसने लगे तो प्रोफेसर आ गए तो
[22:19] सब इस बात को भूलकर अपने अपने काम में लग गए और बात?
[22:23] वहीं खत्म हो गई। पर ये बात शौर्य के दिमाग में घर
[22:27] कर गई। उसके ग्रुप के सभी लड़कों के हाथ
[22:31] पर एक जैसे चोट के निशान दिए। वो काफी हैरान था पर फिर जैसे
[22:37] जैसे दिन बढ़ा वो भी इस बात को भूल गया।
[22:41] वो चुप ही रहा क्योंकि पूरे समय उसके ग्रुप के लड़के स्लीपिंग
[22:45] ब्यूटी पर अलग अलग मजाक बनाकर हँसते रहे और शौर्य को ये बिल्कुल
[22:51] ठीक नहीं लग रहा था उस रात। शौर्य को फॉर्मल्डिहाइड की वो गंद
[23:00] फहराई और इस बार पहले से थोड़ी तेज उसने परेशान होकर आँखें बंद
[23:08] करने की कोशिश की। पर गंद इतनी करीब महसूस हो रही थी
[23:13] कि उसे लग रहा था। स्कूल उसकी बिल्कुल पास खड़ा था।
[23:20] वो धीरे से ही उठकर बैठा। इस बार उसने अपनी अलमारी खोली,
[23:27] बैग चेक किया, अपने जूतों तक को सूंघकर दिखा क्नॉइस।
[23:31] पर कहीं से उसे गंध का कोई डायरेक्ट सोर्स नहीं मिला।
[23:36] वो थोड़ी देर तक बैठकर सोचता रहा कि उसे ये गंध क्यों आ रही थी और
[23:42] फिर कोई जवाब न सोचने पर वो वापस लेट गया बस उस रात उसे बार बार।
[23:50] ऐसा लगता रहा कि कोई अंधेरे में उसके कमरे के कोने से उसे देख रहा
[23:56] था। अगली सुबह फिर सा एनाटोमी लैब में
[24:06] मिले। पर आज कोई मजाक के मूड में नहीं
[24:10] था क्योंकि आज फिर सबके शरीर पर। नए खरोंच के निशान थे, किसी किसी
[24:17] के तो चेहरे पर भी। तेरे तेरे।
[24:20] गाल पे क्या चोट लगी है? किसी ने पूछा।
[24:24] पता। नहीं शर मैंने नींद में खुद को
[24:28] खरोच दिया होगा। उसने झिझकते हुए कहा सब एक दूसरे
[24:32] को देख रहे थे। किसी के हाथों पर एक से ज्यादा
[24:36] खरोच के निशान थे तो किसी के चेहरे पर।
[24:40] किसी को याद। भी है कि।
[24:42] ये नए चोटे सबको लगी कैसे है? पर सब चुप थे, किसी के पास कोई
[24:49] जवाब नहीं था। ये ये।
[24:51] नॉर्मल नहीं है। किसी ने।
[24:54] उस लाश की तरफ देखकर कहाँ? मतलब?
[24:57] मतलब एक ही तरह की चोट हम सबको कैसे लग रही है रोज़ और और किसी
[25:03] को कुछ कुछ याद भी नहीं है। हाँ।
[25:07] अजीब तो है और ये सब 2 दिन से हो रहा है जबसे।
[25:13] जब से ये नई लाश आई है। किसी और ने कहा और सब सीरियस होकर
[25:19] एक दूसरे को उस लावारिस लाश को देखने लगे।
[25:23] सब चुप थे, परेशान थे तभी किसी ने शौरी की तरफ देखकर कहा।
[25:30] साली इसके हाथ पर। आज भी कुछ।
[25:32] नहीं है। और धीरे धीरे सबकी नजर शौर्य पर
[25:36] गए। ये ये स्लीपिंग ब्यूटी का मजाक
[25:39] नहीं उड़ाता। कहीं कहीं इसीलिए तो ये नहीं बच
[25:44] रहा। फिर सब चुप हो गए, मानो सब सोच
[25:48] रहे हो। शौर्य ने अपने हाथ को ठीक से चेक
[25:52] किया। पर उसे सच में कोई चोट नहीं लगी
[25:55] थी और इस बार उसे कुछ भी अजीब लग रहा था।
[26:00] उसने टेबल नंबर सिक्स पर रखी उस लाश की तरफ देखा, लेकिन अब शौर्य
[26:06] को उस लाश की तरफ देखते हुए भी अजीब लग रहा था।
[26:11] जैसे कुछ। बदल रहा था।
[26:14] दो रात 2 दिन कुछ अजीब हो रहा था। उसके ग्रुप के साथ जो भी उस लाश
[26:19] पर काम कर रहा था, सबके हाथों और शरीर पर चोट के निशान बन रहे थे
[26:25] और एक बात धीरे ही सही पर सबको समझ आ रही थी कि जिन्होंने भी।
[26:31] उसलास का मजाक बनाया था, उस पर हँसा था।
[26:35] उन्हीं के साथ ये सब हो रहा था और शौर्य जो एक बार भी उनके मजाक पर
[26:40] नहीं हँसा था, वो अब तक बिल्कुल ठीक था और ऐसे ही देखते ही देखते
[26:47] एक अनजान डर ने इस। पूरे ग्रुप को खेल लिया।
[26:56] अगले कुछ दिन शौर्य का ग्रुप बिलकुल शांत और सतर्क रहा।
[27:01] सब एनाटोमी लैब तो जा रहे थे पर कोई ना उस लाश को स्लीपिंग ब्यूटी
[27:06] कह कर पुकारना ना कोई उसका मजाक उड़ाता।
[27:09] ना कोई उसके पास अकेले ज्यादा देर रुकता और जल्द ही उन सब के शरीर
[27:16] पर नए खरोंच के निशान बनने बिलकुल बंद हो गए।
[27:20] ये कोई कोइंसिडेन्स था या कुछ और? उन सब को इससे कोई फर्क नहीं पड़
[27:26] रहा था। वो।
[27:27] बस खुश थे कि अब किसी को कोई चोट नहीं लग रही थी।
[27:32] पर शौर्य शौर्य अब भी परेशान था क्योंकि उसके कमरे से हर रात उस
[27:39] गंध का अनाब बंद नहीं हुआ था बल्कि वो पड़ गया था।
[27:45] साथ ही। उसे अब रोज़ ऐसा लगने लगा था कि
[27:49] वो जब भी अकेला होता उसके कमरे में अंधेरे में खड़े होकर कोई उसे
[27:55] खोलता रहता, जिसकी वजह से उसे अब अकेले रहने में डर लगने लगा था।
[28:01] पर उसकी ये बात किसी से नहीं कही। बस खुद को पढ़ाई में बीज़ी कर
[28:06] दिया। ताकि डर कम लगे।
[28:11] कुछ दिन तक तो सब कुछ ऐसे ही चलता रहा।
[28:13] हर एक रात सब कुछ बदल गया उस रात करीबन 11:30 बजे शौर्य।
[28:25] अपने एक दोस्त के कमरे से कुछ नोच लेकर वापस अपने कमरे लौट रहा था।
[28:32] प्रैक्टिकल बाज आ रहे थे इसलिए सब लोग बीज़ी थे और कॉरिडोर बिल्कुल
[28:37] खाली था। चारों तरफ सन्नाटा वो आधे रास्ते
[28:42] पहुंचा ही था कि तभी उसे। एक आवाज सुनाई दी दूर कोई रो रहा
[28:51] था शायद शायद कोई लड़की और ये आवाज सुन वो वही रुक गया।
[28:58] बॉयज हॉस्टल में इतनी रात को किसी लड़की का रोना बिलकुल नॉर्मल नहीं
[29:03] था। शौर्य ने ध्यान से सुना उसने आगे
[29:07] पीछे कॉरिडोर में भी चेक किया पर कही कोई नहीं था पर आवाज़ उसके
[29:14] पीछे से अब भी आ रही थी। कुछ देर के लिए उसे लगा शायद कोई
[29:19] लड़का मस्ती में ऐसी आवाज़ निकाल रहा होगा।
[29:22] तो उसने हकलाते हुए कहा। कौन कौन है वहाँ?
[29:28] लेकिन ना किसी ने जवाब दिया ना वो रोने की आवाज़ बंद हुई।
[29:33] शौर्य सोच ही रहा था की वो क्या करे की अचानक उसे वहाँ उस कॉरिडोर
[29:39] में फॉर्मैलटी गंध आने लगी। देखी बिल्कुल।
[29:45] वैसे जैसे एनाटॉमी लैब में होती थी और उसे तुरंत उसन जानवर ने फिर
[29:52] से खेल लिया। उसने दोबारा चेक किया पर कॉरिडोर
[29:57] भी बिल्कुल खाली था। सारे दरवाजे बंद थे।
[30:01] कोई आवाज़ नहीं, कोई हरकत नहीं लेकिन वो रोने की आवाज़, वो रोने
[30:07] की आवाज़ और फॉर्मली हाइक की गंध अब धीरे धीरे उसके करीब आ रही थी।
[30:16] शौर्य के पैर अब डर से मानो भरी जम गए उसका कलह।
[30:21] पूरी तरह से सूख गया। उसने किसी तरह अपने आप को संभालना
[30:26] और तेज चलना शुरू किया और जैसे जैसे वो आगे बढ़ता वो गंध और तेज
[30:33] हो जाती। साथ ही अब एक डरावनी आवाज भी आ
[30:37] रही थी। एक।
[30:40] एक रात ने सांस लेने की आवाज़ जैसे जैसे हवा किसी के गले में
[30:46] उतर गयी हो और वो आवाज़ भी उसके पास आती जा रही थी और वो कोई उसके
[30:54] साथ उसके पीछे पीछे चल रहा हो। शौरी का भाव।
[30:59] डर से पसीना छूटने लगा। वो अब दौड़ने लगा।
[31:05] वो बस किसी तरह अपने कमरे तक पहुंचना चाहता था।
[31:09] वो भाग ही रहा था कि तभी अचानक एकदम से उसके पेट बाहर एक तेज जलन
[31:15] हुई जैसे किसी ने दोनों हाथो से सीधे उसकी पीठ पर ज़ोर से नाखून
[31:22] मारे हो। शौर्य दर्द से चिल्ला उठा वो
[31:28] तुरंत पीछे मुड़ा पर उसके पीछे उसके पीछे कोई नहीं था।
[31:36] वो कॉरिडोर बिलकुल खाली। सारे दरवाजे बंद सब कुछ नॉर्मल
[31:43] दिख रहा था पर उसकी पीठ बुरी तरह से जल रही थी मानो किसी ने अभी
[31:49] उसने बहुत तेज खरोच मारी हो। उसने फिर खुद को संभालना और अपने
[31:55] कमरे की तरफ दौड़ पड़ा। तभी तभी उसके शरीर पर एक और तेज
[32:03] दर्द हुआ और दर्द मुँह दर्द को जलक था।
[32:10] पहले उससे अपने पीठ पर एक भारी सा वजन फील हुआ फिर कोई चीज़?
[32:16] उसके शरीर के और ऊपर चलने की कोशिश करने लगी।
[32:22] तेज नाखून से लगी खरोंच के निशान उसके शरीर पर बनने लगे।
[32:27] फॉर्मल डिहाइड के तेज गंध से उसकी नाक चलने लगी तो आपने सांस लेने
[32:33] की आवाज़? अब बिलकुल उसकी कानों के पास से आ
[32:37] रही थी मानो कुछ हरी सा उसके शरीर पर लिपट चुका था, उसे थामने की
[32:46] कोशिश कर रहा था वो पर वो मुखिया था पर जो भी था वो शौर्य।
[32:53] कोई दिखाई नहीं दे रहा था। उसे बस अपने पीठ पर कंधों पर एक
[33:00] वचन फील हो रहा था और उनका उच्चों से उसे बहुत तेज दर्द हो रहा था।
[33:06] शौर्य दर्द से दर्द से चिल्लाने लगा।
[33:13] दर्द इतना तेज था कि उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा पर कोई
[33:19] उसकी मदद करने नहीं आया। वो बस रोता चिल्लाता अपने कमरे की
[33:25] तरफ बढ़ने लगा पर उसके शरीर पर लदे उस वचन से उसकी स्पीड अब धीमी
[33:31] हो गई थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसके
[33:35] साथ ये हो क्या रहा था? उसे उसे कोई नहीं दिख रहा था पर
[33:41] कोई उसके शरीर से लटका हुआ था। कुछ ऐसा जिससे बहुत गन्दी बदबू आ
[33:49] रही थी। वो बस किसी तरह अपने रूम तक
[33:54] पहुंचा, दरवाजा खोला, अंदर गुस्सा ज़ोर से दरवाजा बंद कर दिया, अंदर
[34:00] बिस्तर पर गुलाल बैठा था। अरे शौर्य तुझे तुझे हुआ क्या है
[34:09] तेरी हालत देख? तेरी 30 शाट इतनी जगह से फटी कैसे
[34:13] है? कुणाल उसकी तरफ दौड़ा, शौर्य वहीं
[34:18] दरवाजे के पास कांपता हुआ खड़ा था चुपचाप शोक में जैसे उसका जिस्म
[34:26] अभी भी समझने की कोशिश कर रहा था की क्नॉइस?
[34:29] अभी जो उसके साथ हुआ वो सच था या कोई सपना?
[34:34] उसकी सांसे अभी तेज़ चल रही थी। उसने खुद को सामने लगे शीशे में
[34:40] देखा और उसे जो दिखा उसने उसे हिला दिया।
[34:46] उसकी टी शर्ट का पिछला हिस्सा। जगह जगह से फटा हुआ था।
[34:51] साथ ही उसकी पीठ पर, गर्दन पर, शरीर पर कई खरोचों के दाग थे।
[34:57] कहीं कहीं से तो खून तक निकल आया था अपने यार बताई का भी हुआ क्या?
[35:03] टी शर्ट के सामने ये ये क्या लगा हुआ है?
[35:07] क्नॉइस। कुणाल ने उसकी टी शर्ट के सामने
[35:09] कन्धों पर और कन्धों से कमर तक लगे दाग की तरफ इशारा किया और फिर
[35:15] उसे छुआ। शौर्य ने भी उस दाग को शीशे में
[35:20] देखा। फिर उसने उसे अपनी उंगलियों से
[35:23] छुआ और उसकी सास। उसकी सास वहीं रुक गई।
[35:29] वो कुछ और नहीं फॉर्मलडीहाइट था तेरी तेरी टी शर्ट पर इसने रात को
[35:36] फॉर्मलडीहाइट कहा से लगा हैं शौर्य कुणाल ने पूछा शौर्य के पैर
[35:42] अब डर से जवाब दे गए। जमीन पर बैठ कर रोने लगा।
[35:48] अरे भाई भाई क्या हुआ है बता शौर्य तू एनाटोमी लेक्चर लौटा है।
[35:54] क्या? शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि वो
[35:58] कुणाल से क्या कहें? वो उसकी बात पर यकीन थोड़े ही ना
[36:04] करने वाला था। पर कुणाल के बार बार वोट देने पर
[36:09] उसने फाइनली पूरी बात उसे बतायी। मैं मैं जितेन के रूम से मैं
[36:17] जितेन के रूम से लौट रहा था। मुझे।
[36:21] मुझे किसी लड़की के रोने की आवाज सुनाई दी।
[36:25] पर पर कॉरिडोर में कहीं कोई नहीं था।
[36:28] जैसे ही मैं। जैसे ही मैं रूम।
[36:30] की तरफ आने लगा। अचानक अचानक कोई चीज़, कोई चीज़
[36:35] मेरे शरीर पर चढ़ने की कोशिश करने लगी।
[36:38] कुणाल? कुछ कुछ भारी कुछ।
[36:41] कुछ बदबोदार मुझे क्नॉइस। मुझे घर।
[36:44] उठने लगी वो मैं मैं मैं किसी तरह बस किसी तरह भागता दौड़ता रूम में
[36:51] पहुंचाऊ। तू तू ये क्या बोल रहा है?
[36:56] ऐसे कैसे हो सकता है? कौन चल रहा था तेरे ऊपर?
[37:00] पता नहीं कुणाल पर मुझे। मुझे बहुत डर लग रहा है कहीं कहीं
[37:06] वो लाश, वो लाश मेरे पीछे तो। क्या चुप कर शांत हो जाओ अभी अभी
[37:13] तुझे कोई वजन फील हो रहा है क्या? नहीं कमरे में घुसने से पहले शायद
[37:21] वो उतर गई पर क्नॉइस। पर मुझे पता है, मुझे पता है जैसे
[37:26] ही मैं अकेला बैठूंगा वो फिर लौटकर आएगी कुणाल वो फिर लौटकर
[37:32] आएगी। शौर्य की बात सुन कुणाल का चेहरा
[37:36] भी सफ़ेद पड़ गया तेरे तेरे साथ ऐसा ऐसा पहले भी हुआ है क्या?
[37:43] नहीं, ऐसा ऐसा नहीं हुआ। पर पर।
[37:48] जब से जब से वो लास्ट टेबल नंबर सिक्स पर आयी है तब से तब से
[37:54] अक्सर मुझे फॉर्मल डी आई की बदबू आती है।
[37:57] जब मैं जब मैं अकेला उठा हूँ मेरे मेरे शरीर पर, कपड़ों पर।
[38:03] फोर्मलडीहाइड लगा होता है जब की मैं फ्रेश कपड़े पहना होता हूँ,
[38:08] रात को रात को कई बार ऐसा लगता है जैसे।
[38:13] हमारे कमरे में हमारे। कमरे में कोई है कुणाल मैं मैं डर
[38:18] से, मैं डर से पागल हो जाऊंगा कुणाल वो लाश।
[38:22] वो ला शायद मेरे साथ शायद मेरे साथ।
[38:27] तू तू टेंशन मत ले चल पहले तेरी चोट को ठीक करते हैं, फिर सोचते
[38:33] हैं कि क्या करना है? जरूरत पड़ी तो क्लिनिक पर चलेंगे।
[38:38] भाई तू तू डर मत, मैं यहीं हूँ क्नॉइस।
[38:42] कुछ नहीं होगा तेरे साथ कुणाल ने शौर्य की हिम्मत बढ़ाने की कोशिश
[38:47] तो की पर उसके शरीर पर लगे खरोंच देखकर उसकी वो डरावनी कहानी सुनकर
[38:53] और टीशर्ट पर लगे फॉर्मल डिहाइड को सुनकर वो भी अब बुरी तरह से
[39:00] हींग चुका था। दोस्तों आगे क्या हुआ?
[39:10] वो क्या था जिसने शौर्य के शरीर पर करोंच मारी थी, जो उसके शरीर
[39:16] पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था? क्या सच में कुछ था जो शौर्य के
[39:21] करीब आ रहा था? क्या ये सब बस उसका इमेजिनेशन था?
[39:26] शौर्य ने उस लड़की की लाश के साथ हमेशा ठीक से पेश आने की कोशिश की
[39:31] थी तो फिर वो उसके पीछे क्यों थी? सच जानने के लिए देखिए इस कहानी
[39:38] का आखिरी भाग एंड अगेन। आप स्मोक कास्ट को अपने दोस्तों
[39:43] के साथ शेयर करके, स्पॉटिफाइ पर मेरी कहानियों सुनकर और मुझे यहाँ
[39:49] फॉलो करके मुझे अपना सपोर्ट दे सकते हैं।
[39:53] अगले एपिसोड में मैं लौटूंगी इस डरावनी कहानी की आखिरी भाग के
[39:58] साथ। तब तक टेक केयर गाइस।
[40:11] मैं हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पूकास्ट।

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