# Ep 52 - KAAL KOTHRI | SPOOKCAST ORIGINAL STORY | Horror Story | Hindi Horror Podcast |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 23 Jul 2025, 30 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/105866827/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-6-23%2F404380766-44100-2-b73e0eb17c99e.m4a

Story: A Story about an innocent man who was wrongly convicted of a brutal murder and hanged. His soul never found peace. And now the Jail is Haunted. Listen to this Original Audio Cinema Style Story by Spookcast to know how he takes his revenge. Will he come back for revenge? To know more, listen to this story! | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana |Haunted School | Haunted Hostel |Haunted Jail | Narrated by : Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:01] कहानी शुरू करने से पहले एक छोटा सा डिस्क्लेमा आज की कहानी सिर्फ
[0:06] मेच्युर ऑडिएंस के लिए है। इसमें कुछ डिस्टर्बिंग और ट्रैफिक
[0:09] सीन्स है, जो हर किसी के लिए सूटेबल नहीं है।
[0:13] अगर आपको अनकंफर्टेबल फील हो तो आप इस कहानी को स्किप कर सकते
[0:17] हैं। लिसनर्स डिस्क्रीशन इस
[0:19] स्ट्रिक्टली अडवाइसेड यह कहानी पूरी फिक्शनल है।
[0:23] जो भी नाम, जगह या करैक्टर्स आप इसमें सुनेंगे वो सिर्फ
[0:28] एंटरटेनमेंट और स्टोरी टेलिंग के लिए इस्तेमाल किए गए हैं।
[0:32] यह पॉडकास्ट सुसाइड क्राइम्स प्लिंड बिलीव्स पिचक्राफ्ट जादू?
[0:37] तंत्र, मंत्र या किसी भी तरह की स्मोकिंग या ड्रिंकिंग हैबिट्स को
[0:42] प्रोमोट नहीं करता। हमारा इरादा किसी भी रिलिजन
[0:46] कास्ट, स्टेट या कंट्री को हर्ट करना नहीं है।
[0:49] थैंक यू। सुनते रहिये पोककास्ट अवि और
[0:55] मंजिल के साथ। जय हिन्द सर।
[1:12] जय हिन्द प्रसाद क्या स्टेटस है? सर सर सब अंदर ही है नॉट रिंगिंग
[1:19] आप आप जल्दी चलिए। हाथ चालू पर स्टेटस क्या है?
[1:23] कोई बचा है क्या? मीडिया वाले भी पहुँचते ही होंगे।
[1:27] पुलिस कमिश्नर परमार का ये सवाल सुन सीनियर इंस्पेक्टर प्रसाद कुछ
[1:32] सेकण्ड्स के लिए चुप रहे। प्रसाद कोई बचा है कि नहीं?
[1:37] नहीं सर, कोई नहीं बचा वो सब। मेरा मतलब है कि सारी लाशें उसी
[1:43] कमरे में हैं। ये सुनते ही कमिश्नर साहब का
[1:46] चेहरा सफेद पड़ गया, उनकी आँखों में एक जाना पहचाना डर का साया
[1:51] साफ नजर आ रहा था। हे भगवान फिर से।
[1:56] ये कहकर कमिश्नर ने साहब ने खड़े उस इमारत की तरफ देखा वहाँ उनके
[2:02] सामने। अंधेरे की चादर में लिपटा खड़ा था
[2:06] शमशेरबाद जेलहाउस, ब्रिटिशर्स के जमाने में बना कॉन्क्रीट और लोहे
[2:11] का एक पुराना जंग परांठा चाप जो एक समय में एक बड़ा सा जेल हुआ
[2:17] करता था। पर आज?
[2:19] उसकी दीवारें टूटी थी और आसपास गृह पौधों और पेड़ की बेलों ने
[2:24] उसे ढक दिया था। सर चले।
[2:27] प्रसाद की आवाज सुन कमिश्नर साहब ने खुद को संभालना, अपने हाथ में
[2:32] पगड़ी दौड़ ज्वॉइन की और सब आगे बढ़ने लगे।
[2:36] उस पुराने बंद जेल हाउस के नॉर्थ की तरफ।
[2:39] जहाँ पिछले कई दशकों से इतनी मौतें हुई थी कि कोई भी वहाँ पैर
[2:44] रखने से पहले 1000 बार सोचता था। जेल के अंदर कोई रौशनी नहीं थी।
[2:53] जगह जगह कोरिडों में बुल स्टाफ खड़ा था हाथ में टॉर्च लिए।
[2:57] और सबके चेहरे पर वही खौफ साफ नजर आ रहा था।
[3:02] नॉर्थ विंग इस कॉरिडोर में पहुंचते ही जो चीज़ कमिश्नर साहब
[3:06] ने सबसे पहले महसूस की वो थे एक तेज गंध, ताजा खून की गंध जो सेल
[3:13] नंबर 17 से आ रहे थे। बहुत से पुलिसकर्मी।
[3:17] और मेडिकल स्टाफ उस कमरे के बाहर खड़े थे।
[3:20] वही शापक कमरा जिसकी बदौलत शमशेरबाग जेल हॉउस को बंद करना
[3:26] पड़ा था। इस कमरे को सब कालकोटरी कहते थे।
[3:31] बरस पहले उस कमरे में फांसी की सजा में ले कैदियों को रखा जाता
[3:36] था। उनकी फांसी से पहले वो एक छोटा सा
[3:39] कमरा था जिसकी पत्थर से बनी मोटी दीवारें थी और छत 20 फिट ऊंची।
[3:46] उस काल कोठी में ना कोई खिड़की थी ना कोई सुविधा।
[3:50] अंदर आने का दरवाजा भी इतना छोटा था कि झुक कर अंदर जाना पड़ता था।
[3:56] कमिश्नर साहब ने सीनियर इंस्पेक्टर प्रसाद को अंदर जाने
[3:59] का इशारा किया और वह उसके पीछे पीछे उस कमरे में घुसे।
[4:06] अंदर बिल्कुल खूब अंधेरा था। बस टॉर्च की रौशनी में थोड़ा बहुत
[4:11] दिख रहा था। खून की गंध अब बिल्कुल तेज हो गई
[4:15] थी। कमिश्नर साहब ने उस छोटे से कमरे
[4:18] के जमीन पर टॉर्च मारी, जमीन और दीवारों पर बहुत सारा खून था और
[4:24] चारों ओर टूटा फूटा इक्विपमेंट और सामान पड़ा था पर लाशें लाशें
[4:30] कहीं नहीं थी। उन्होंने सीनियर इंस्पेक्टर
[4:34] प्रसाद की ओर देखा और पूछा। प्रसाद बॉडीस कहाँ है?
[4:39] ये सवाल सुन प्रसाद ने अपनी टॉर्च की रौशनी को एक दीवार के बिल को
[4:45] ऊपर की ओर मारा और कमिश्नर साहब ने जो देखा वो देख उनका मुँह खुला
[4:52] का खुला रह गया। वह दीवार के कुछ।
[4:55] 15 फिट ऊपर चार लाशें लटक रही थी। ऐसा लग रहा था मानो हर लाश को पीठ
[5:04] के बल किसी चीज़ पर टांगा गया था। शायद कोई कील या कोई नौकली चीज़
[5:11] पर सबसे डरावनी चीज़। सबसे डरावनी चीज़ थी उन लाशों के
[5:16] चहरे उन सब लाशों के चहरे किसी ने एक छिलके की तरह खींच कर उतार कर
[5:23] उनके गले के पास लटका दिए थे। उन लाशों से बहते खून से उस खाल
[5:28] कोठरी की दीवार लाल हो चुकी थी। खून रिसकर।
[5:32] ज़मीन पर गिर रहा था। कमिश्नर साहब ये दृश्य देखकर बुरी
[5:37] तरह हिल गए। उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं
[5:41] हो रहा था। सर सर फोर एंड 16 बाहर ही खड़ी है
[5:46] लाशों को लाशों को नीचे उतरवाऊं क्या?
[5:51] हाँ प्रसाद। नीचे उदाहरण लाशों को और उनकी
[5:57] उनकी फैमिलीज़ को भी इन्फॉर्म करो।
[5:59] बॉडी की जो हालत है ऐडेंटिफिकेशन कराना ही पड़ेगा।
[6:04] फिर कुछ सोच कर वो बोले। लेकिन लेकिन इनकी इक्विपमेंट्स का
[6:09] है ये। ये तो कोई यूट्यूबर्स थे ना?
[6:12] हाँ सर आपने सही कहा कि ये तेजस माथुर और उसकी टीम है।
[6:18] वो एक मशहूर गोष्टांटिंग ब्लॉगर है।
[6:21] मतलब मतलब था यहाँ लाइव स्ट्रीम कर रहा था, हजारों लोग उसे लाइव
[6:27] देख रहे थे, सर। फिर अचानक स्ट्रीम बीच में ही।
[6:30] बंद हो गई जब। कुछ फॉलोवर्स को इनकी कोई अपडेट
[6:34] नहीं मिली। तब किसी ने जाके पुलिस को फ़ोन
[6:36] किया और हम लोग यहाँ पहुंचे। लाइव स्ट्रीम इस मनहूस काल कोठरी
[6:41] में लाइव स्ट्रीम भगवान आजकल के बच्चे इनके इनके कैमरा में कुछ।
[6:48] कैप्चर नहीं हुआ क्या? नहीं सर, हमने चेक किया पर सारा
[6:53] इक्विपमेंट खराब हालत में ही मिला है।
[6:55] हमें चली हुई वायरस, गला हुआ प्लास्टिक देखिए जमीन पर सब पड़ा
[7:00] है सर। पूरा डेटा करप्ट हो चुका है।
[7:03] बस एक चार से पांच सेकंड की क्लिप रिट्रीवर की है।
[7:06] टीम ने। लाइव स्ट्रीम बंद होने से पहले ये
[7:09] देखिए सर। ये कहकर प्रसाद ने कमिश्नर साहब
[7:13] को वो फुटेज दिखाया। उस फुटेज में तेजस मथुर और उसकी
[7:18] दो टीम मेंबर्स के चेहरे साफ दिख रहे थे।
[7:21] वो उस काल कोठरी के बीच में खड़े थे।
[7:24] एक सेकंड के लिए एक अजीब सी आवाज आई और कैमरा ऊपर छत की और बैन हुआ
[7:30] और वहाँ छत से छत से किसी के दो पैर झटपटाते हुए नीचे आते दिखे और
[7:37] ये देख अगले ही पल्स सब चिल्लाने लगे और फिर एक स्टैटिक के साथ।
[7:43] एकदम से फुटेज बंद हो गया। कमिश्नर साहब ने उस फुटेज को
[7:47] दोबारा प्ले किया, उसे ध्यान से देखा।
[7:51] उन पैरों में कुछ अजीब था। ऐसा लग रहा था कि वह पैर किसी
[7:56] जिंदा आदमी के नहीं थे, किसी लाश के थे।
[8:01] पर फुटेज में वो पैर हिल रहे थे और अगले ही पल कमिश्नर साहब को
[8:07] जैसे सब समझ में आ गया। विक्रम सहाय।
[8:10] उन्होंने धीरे से कहा। क्या सर?
[8:13] कुछ नहीं प्रसाद बाहर चलो फॉरमॅलिटीस पूरी करते हैं और हाँ
[8:18] सबसे कह दो। कोई इस कमरे में विक्रम सहाय का
[8:22] नाम किसी भी हालत में न ले, किसी भी हालत में नहीं समझे और हाँ
[8:28] फॉरमॅलिटीस पूरी करके इस रूम को तुरंत सील करवाओ।
[8:33] ये कहकर कमिश्नर साहब कालकोठरी से बाहर निकले और अपनी कार की तरफ
[8:38] चले गए। काम एलोकेट करने के बाद वो कार
[8:42] में बैठे उस जेल को देखते रहे। वो समझ चूके थे कि विक्रम सहाय
[8:48] शहीद आज भी वहाँ था पर वो आज भी अपनी मौत का बदला ले रहा था।
[8:55] वहाँ बैठे बैठे कमिश्नर साहब, उन अनगिनत मौतों को याद करते रहे जो
[9:00] स्काल कोठरी और जेल के नॉर्थ विंग में हुई थी।
[9:03] जेल बंद होने के बाद भी पर ये सारी घटनाएं शुरू हुई थी।
[9:08] कुछ साल पहले नहीं, कुछ दशकों पहले 1945 में।
[9:17] शमशेरबाग जेल बाकी जेलों की तरह ही एक बहुत बड़ा और पुराना जेल
[9:23] था, लेकिन 1945 में सब कुछ बदल गया।
[9:27] उस साल एक आदमी उस जेल में लाया गया।
[9:30] उसका नाम था विक्रम सहाय विक्रम। कोई अपराधी नहीं था।
[9:36] वो एक सीधा साधा दर्जी था। स्कूल की यूनिफॉर्म से लेकर शादी
[9:40] के कपड़े वो सब कुछ सिलता। उसकी छोटी सी दुकान थी, रोज़ काम
[9:45] करता, मंदिर जाता और अपनी बेटी को प्यार से पालता उसकी बीवी।
[9:51] कई सालों पहले ही गुजर चुकी थी उसकी पूरी दुनिया।
[9:54] सिर्फ उसकी 10 साल की बेटी थी, लेकिन फिर 1 दिन सब कुछ बदल गया।
[10:01] एक अमीर आदमी के बेटे की लाश पास ही के जंगल में मिली।
[10:05] उसके सीने पर अजीबो गरीब निशान कटे हुए थे और उसकी आँखों में
[10:10] घुसी हुई थी। एक सिलाई की कैंची।
[10:15] शहर में आग सी लग गई, लोगों में आक्रोश था, पुलिस पर प्रेशर बढ़
[10:20] रहा था पर सबूत कुछ था नहीं। तब उन्होंने एक आसान निशाना छोड़ा
[10:26] विक्रम सहाय उसने कुछ दिन पहले ही इस परिवार के लिए कपड़े सिले थे
[10:32] और बस। इतना ही काफी था।
[10:35] रात के अंधेरे में बिना कोई सवाल जवाब किए उसे उठाकर ले जाया गया।
[10:41] उसकी दुकान तोड़ दी गई और उसकी बेटी को उससे अलग कर किसी दूर के
[10:47] रिश्तेदार के पास भेज दिया गया। उसकी पूरी दुनिया देखते ही देखते
[10:51] उसकी आँखों के सामने। बिखर गई पुलिस स्टेशन में उसे मार
[10:55] मार के पूछ्ताछ की गई और वो सिर्फ चिल्लाता रहा मैंने।
[11:00] कुछ नहीं किया। मैंने कुछ नहीं किया साहब वो
[11:03] कैंची मेरी नहीं है, मैं एक निर्दोष बच्चे को क्यों मारूंगा?
[11:08] साहब मैंने कोई खून नहीं किया। लेकिन।
[11:12] किसी ने उसकी नहीं सुनी। न्यूसपेपर वालों को विलेन चाहिए
[11:16] था। पब्लिक को इंसाफ और पुलिस को
[11:19] प्रमोशन और विक्रम सहाय उन तीनों के लिए सही बकरा था।
[11:24] उसे बचाने ना कोई वकील आया, ना कोई रिश्तेदार।
[11:28] जब उसे कोर्ट ले जाया गया। उसकी आँखों में तब भी आंसू थे पर
[11:33] वहाँ भी किसी ने उसकी नहीं सुनी। जज ने फाइल बंद की और पब्लिक का
[11:38] आक्रोश देख डेथ वारंट साइन हो गया।
[11:41] कोर्ट ने ना सिर्फ उसकी बेल रिजेक्ट की बल्कि उसकी डेथ को भी
[11:46] फास्ट ट्रैक कर दिया। टु बी हैंग टिल डेथ।
[11:50] और विक्रम सहाय को भेज दिया गया सेल नंबर 17 में जिसे सककाल कोठरी
[11:57] कहते थे, एक ऐसा कमरा जहाँ से लोग सिर्फ एक ही रास्ते निकलते थे।
[12:02] फांसी के रास्ते विक्रम को वह बंद करने के बाद वो हर दिन गुहार
[12:07] लगाता रहा। गार्ड से जेलर से।
[12:10] हर किसी से। मैं निर्दोष हूँ, मैंने कोई खून
[12:14] नहीं किया, मैंने किसी को नहीं मारा, मुझे छोड़ दो मुझे मेरी
[12:19] बेटी से। मिलना है मुझे मेरी।
[12:21] बेटी से मिलना है। लेकिन सुनने वाले सब बहरे हो चूके
[12:25] थे। कुछ गाज उस पर हँसते।
[12:28] और बाकी उसके होने को ही नज़रअन्दाज़ कर देते हैं।
[12:32] और फिर अगस्त के तीसरे शुक्रवार को उसकी फांसी का देना गया।
[12:37] उस दिन पूरे शमशेरबाग जेल हाउस में एक अजीब सी खामोशी थी।
[12:43] सुबह के 3:00 बजे कोच के ऑर्डर के मुताबिक उसकी फांसी तय थी पर उस
[12:49] दिन उस दिन ना विक्रम के हाथ कांपे ना आँखों में कोई डर था, वह
[12:55] बिल्कुल शांत था जैसे उसने अपनी मौत को अपना लिया हो।
[13:00] उसे एग्ज़िक्यूशन चेम्बर ले जाया गया जहाँ सिर्फ गिने चुने लोग
[13:04] मौजूद थे। फांसी देने से पहले।
[13:07] जब जल्लाद उसके चेहरे को काले कपड़े से ढपने के लिए आगे बढ़ा तब
[13:11] विक्रम ने अपना झुका हुआ सर उठाया और जेलर राना की तरफ देख बोला।
[13:17] तुझे पता है मैंने वो खून नहीं किया तेरे पास कोई सबूत तक नहीं
[13:22] फिर भी तुने मेरी फांसी रोकने के लिए कुछ नहीं किया तुम सब।
[13:26] गलत आदमी को लटका रहे हो तुम लोग मेरी मजबूरी पर हँसे मुझे दरिंदा
[13:31] कहा खूनी कहा मुझे अब मैं मैं एक एक से बदला लूँगा, आज मैं अपनी
[13:39] बेटी की कसम खाकर कहता हूँ मैं लौटूंगा और मेरी आत्मा।
[13:45] तुम सब से बदला लेगी इस जेल में हर उस इंसान से जिसने मुझे खूनी
[13:52] समझा। उसकी पूरी बात सुन जेलर राणा हंसे
[13:57] और कहा। बस करो जेलर साहब ये जम्हो बंद
[14:01] करो। विक्रम ने फिर कुछ नहीं कहा।
[14:04] जल्लाद ने काले कपड़े से उसका चेहरा ढका और फिर लिवर खींच दिया
[14:14] और विक्रम हमेशा के लिए शांत हो गया।
[14:22] उसकी फांसी के कुछ घंटों में ही। जेल का काम हमेशा की तरह शुरू हो
[14:26] गया। ना किसी ने कोई अफसोस जताया, ना
[14:29] कोई रोया। सब अपने अपने काम में लग गए पर
[14:33] उसकी मौत के बाद तीसरी रात को नॉर्थ कॉरिडोर में जो हुआ उसने सब
[14:40] को हिला कर रख दिया उस रात। करीब 3:00 बजे के आसपास नॉर्थ
[14:46] कॉरिडोर की कहती अचानक ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगे।
[14:50] जब काज वहाँ पहुंचे तो सारे कहती डरे हुए थे।
[14:53] कुछ डर से रो रहे थे। जब उनसे पूछा गया तो कुछ ने कहा
[14:59] कि उन्होंने कुछ देर पहले। विक्रम सहाय को इस कॉरिडोर में
[15:03] देखा था। दरअसल रात के करीब 3:00 बजे अचानक
[15:07] कॉरिडोर के एंड से बहुत ही डरावनी आवाज आने लगी, जिसे सुनकर कुछ
[15:12] कैदी जाग गए। उन्होंने देखा कि कोई खाल कोठरी
[15:17] के पास से। चुकी उस कोरिडो के बिल्कुल आखिरी
[15:21] में था। उनके सेल की ओर आ रहा था।
[15:24] वो जैसे जैसे करीब आता गया वो डरावनी आवाज बढ़ने लगी और कैदी एक
[15:31] एक करके नींद से जागने लगे। पर फिर जो उन्होंने देखा सब डर से
[15:36] कांप उठे। सब अपने सेल के दरवाजे से पीछे
[15:40] होने लगे। डर से चीखने लगे वो क्योंकि
[15:44] कॉरिडोर एक विक्रम सहायता और वो डरावनी आवाज वो आवाज उसके कने से
[15:51] आ रही थी। उसकी आंखें पूरी तरह से बाहर
[15:55] निकली हुई थी, सफ़ेद। छिप छिपी सुबह कार लिपट चुकी थी
[16:01] और बाहर लटक रही थी। उसके गले पर अब भी फांसी का फंदा
[16:04] बना हुआ था और वो चल ही रहा था वो वो हवा में था जमीन से कुछ तीन
[16:11] फिट ऊपर जैसे रस्सी ने अब भी उसका वजन पकड़ा हुआ हो और वो।
[16:17] धीरे धीरे काल कोठरी से होता हुआ नॉर्थ कॉरिडोर के दूसरे छोर की
[16:22] तरफ जा रहा था। सारे कैदियों ने नॉर्थ कोरिडोर के
[16:26] अलग अलग सेल्स से यही दृश्य देखा। काज भी यह सब सुन बहुत डर गए पर
[16:32] जब। जेल अब भास्कर राणा तक बात पहुंची
[16:35] तो उन्होंने डाट कर बात को टाल दिया।
[16:38] उन्हें इन सब बातों पर ज़रा भी यकीन नहीं था लेकिन बात वहाँ नहीं
[16:43] रुकी। उस दिन के बाद से जेल के अलग अलग
[16:47] कॉरिडोर में हर रात कैदियों को वही डरावनी आवाज सुनाई देने लगी।
[16:52] किसी किसी को विक्रम सहाय दिखने भी लगा और पूरे कैदियों और जेल
[16:57] में एकात्म का माहौल फैल गया। लॉज ब्लॉक के ही एक सेल में सुधीर
[17:08] चक्कू नाम का काफी पुराना ज्ञान लीडर रहता था जिसने काफी साल जेल
[17:13] में अंदर बिताए थे। वो उन लोगों में से था जो जेल में
[17:17] अपना अलग हीरा चलाता था। वह अकेला एक सेल में आराम से
[17:21] रहता, बाकी कैदियों को डरा कर रखता और गार्ड्स भी उसे कुछ कहने
[17:25] से बचते। विक्रम की जेल आने की कुछ ही दिन
[17:28] बाद से सुधीर चक्कू ने उसका मजाक बनाना शुरू कर दिया था।
[17:33] वो जब भी उसे देखता। उसे बुरा भला कहता क्योंकि उसका
[17:36] मानना था कि विक्रम ने ही उस बच्चे को मारा था और अब जेल आकर
[17:41] वो भोला बन रहा था। विक्रम ने कभी उससे कुछ नहीं कहा।
[17:45] वो बस उसके सामने सिर झुकाकर चुप रहता लेकिन सुधीर चक्कू वो चुप
[17:51] नहीं रहा। जब कोर्ट ने विक्रम को फांसी की
[17:54] सजा दी तब तो सुधीर और ज्यादा खुश था और वो सबसे कहने लगा।
[17:59] बोला था ना मैंने खून उसी ने किया है फांसी होने दे साले को तब मज़ा
[18:04] आएगा। विक्रम सहाय की फांसी के बाद भी
[18:08] तो चुप नहीं हुआ क्योंकि उसने अब तक रात को।
[18:12] कुछ डरावना दिखाया सुना नहीं था। उसका मानना था कि कैदी नशा कर
[18:17] बकवास कर रहे थे। रोज़ सूस ने मजाक बनाना बंद नहीं
[18:21] की, ना विक्रम का और ना उन कैदियों का।
[18:24] चू रोज़ दावा कर रहे थे कि उन्होंने विक्रम को वहाँ देखा था
[18:28] या उसकी आवाज सुनी थी। पर अगली रात सुधीर चक्कू का जो
[18:33] हर्ष हुआ उसके बाद जेल में अफरा तफरी मच गई।
[18:38] सुबह जब रूल कॉल्स हुए तब सुधीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
[18:43] काज ने सोचा कि वो अब तक शायद सो रहा होगा लेकिन जब उसका सेल चेक
[18:48] किया गया। तो अंदर का खौफनाक नजारा देख सबका
[18:52] मुँह खुला का खुला रह गया। सुधीर की बॉडी वेंटिलेटर के
[18:57] सलाखों से लटकी हुई थी। उल्टी सर नीचे पैरों पर जमीन से
[19:03] कुछ चार से पांच फुट की उचाई पर और उसका सर।
[19:08] उसका सिर पूरा उल्टा घूमा दिया गया था।
[19:12] उसकी जीभ और आंखें किसी ने निकाल कर जमीन पर फेक दी थी।
[19:16] उसके होंठ और आँखों को किसी ने काले मोटे धावों से सील दिया था
[19:22] और दीवार पर दीवार पर उसी के खून से लिखा हुआ था।
[19:27] मैंने खून नहीं किया। ये ऋषि देख सबल गए सुधीर चक्कू का
[19:33] सेल? रात को बाहर से लॉक था चाबी ये
[19:36] गार्ड्स के पास थी। फिर कोई कैसे रात में उसके सेल
[19:40] में घुसकर उसे इतनी बेदर्दी से मार सकता था?
[19:44] आसपास के सेल में रहने वाले कैदियों ने भी कहा कि उन्होंने
[19:47] रात को कुछ नहीं सुना। थोड़ी देर बाद जेलर भास्कर राना
[19:52] तुरंत आए। बॉडी को नीचे उतारा गया जेलर राना
[19:56] ने सुधीर चकू के होठों और आँखों पर लगे स्टेचेस को ध्यान से देखा।
[20:01] वो काफी साफ। और सिमेटरिक लग रहे थे जैसे किसी
[20:05] दर्जी ने कोई कपड़ा सेला हो और दीवार पर वो लिखावट।
[20:09] ये सब विक्रम सहाय की ओर ही इशारा कर रहे थे जो खुद एक दर्जी था पर
[20:15] कोई मरा हुआ इंसान कैसे किसी को मार सकता था?
[20:18] ये सोच जेलर राना ने खुद को संभालना।
[20:22] और लॉजिक्ली सोचने का फैसला किया पर सुधीर चक्कू के मौत ने अच्छे
[20:27] अच्छों के अंदर डर पैदा कर दिया था।
[20:30] कैदी और गार्ड्स सब खौफ में थे, लगभग हर रात को वैसे ही उस डरावनी
[20:36] आवाज को सुन रहे थे। इतने दिनों से और अब अब एक खून हो
[20:40] गया था वहाँ। वो कहती जो विक्रम सहाय का सबसे
[20:43] ज्यादा मजाक उड़ाया करता था, उसे पे रेहमी से मार दिया गया था।
[20:49] कोई भी कहती अब विक्रम सहाय का नाम अपनी जुबान पर आने तक नहीं दे
[20:54] रहा था। खासकर रात में खास भी।
[20:57] अब नॉर्थ कॉरिडोर के आसपास ड्यूटी करने से कतराने लगे थे।
[21:00] रात को कोई भी अकेले राउंड्स पर नहीं जा रहा था क्योंकि हर रात वो
[21:06] डरावनी आवाज काल कोठी से आती रही और कॉरिडोर में गूंजती रही।
[21:15] जेलर राणा भी वैसे तो विक्रम सहाय की बात को टाल रहे थे पर अब?
[21:20] उनके अंदर भी डर पैदा हो चुका था। हर रात वो ड्यूटी करते वक्त अपने
[21:25] कमरे को लॉक करके बैठने लगे थे और सबसे बड़ी बात वो आदमी जो ड्यूटी
[21:31] के दौरान कभी नहीं पीता था। अब शाम होते ही रम की बोतल खोल कर
[21:37] बैठने लगा था। चिल्लरना ने अब तक खुद ना कुछ
[21:41] देखा था या सुना था पर इतने सारे लोगों को डरता देख टूटता देख
[21:46] टूटता देख वो खुद अंदर से हर दिन थोड़ा थोड़ा टूट रहे थे।
[21:51] डर क्या होता है इसका अहसास उन्हें होने लगा था और जब वो
[21:56] विक्रम सहाय की आखिरी शब्द याद करते तब।
[21:59] उनके पसीने छूट जाते क्योंकि उसने बदला लेने का वादा सच में किया था
[22:05] और उसकी फांसी के पीछे जेलर राना का भी हाथ था।
[22:12] कुछ दिन बाद रात के लगभग 3:00 बजे जेलर भास्कर राना अपने ऑफिस में
[22:17] अकेले बैठे थे। टेबल पर रम की बॉटल आंधी से
[22:21] ज्यादा काली हो चुकी थी और तभी तभी उन्हें अपने दरवाजे पर नॉकिंग
[22:26] की आवाज सुनाई थी। फिर एक डरावनी आवाज वो तुरंत खड़े
[22:32] हो गए और जाकर दरवाजा खोला पर वहाँ वहाँ कोई नहीं था।
[22:37] उन्होंने कॉरिडोर में भी जाकर देखा, वहाँ भी कोई नहीं था पर
[22:41] कॉरिडोर की दूसरी तरफ जेल के ईस्टर्न विंग का गेट जो हमेशा चैन
[22:47] से बंद रहता था, वो आज आधा कोला था।
[22:50] इसी गीत से होकर एग्ज़िक्यूशन चेम्बर की तरफ जाया जाता था।
[22:54] चार लोगों को फांसी दी जाती। जहाँ विक्रम साय की भी फंसी हुई
[22:58] थी वो गेट कभी खुला नहीं रहता। पर आज वो खुला था और धीरे धीरे
[23:05] हिल रहा था। पता नहीं जेलर आना को क्या हुआ पर
[23:08] उन्होंने झट से मास्टर कीस उठाई, अपनी टॉर्च ली और वह खुले गेट की
[23:13] तरफ पड़ने लगे। कुछ मिनट बाद।
[23:16] वह एक्सेक्यूशन चेम्बर में थे। वह सब कुछ वैसा ही था जैसा फांसी
[23:21] वाले ने छोड़ा गया था। बस आज वह कोई लाइक्स नहीं थी,
[23:25] चारों तरफ को पन दे रहा था और तभी उन्हें अपने पीछे वो डरावनी आवाज
[23:31] सुनाई दी। वो वो अब धीरे धीरे पीछे मुड़े।
[23:37] वो पीछे मुड़ते ही उन्होंने जो देखा उनके गले से छींक निकल गई
[23:43] क्योंकि उनके पीछे हवा में विक्रम सहाय का शरीर था।
[23:49] उसके गले में अब भी फांसी का फंदा था।
[23:52] आँखें बाहर निकल आई थी। जीप बाहर लटक रही थी और उसके गले
[23:55] से अब ही वो बेहद डरावनी आवाज आ रही थी और वो चिलराना को बहुत ही
[24:03] गुस्से से देख रहा था। चिलराना के पैर कांपने लगे वो वो
[24:08] अपने घुटनों पर गिर गए। विक्रम, विक्रम।
[24:11] मेरी बात सुन विक्रम हाई आई वास् जस्ट।
[24:14] फॉलोयिंग ऑर्डर्स मैंने। मैंने तुम्हें नहीं मारा।
[24:18] राणा की आवाज डर से कप रही थी। विक्रम अब धीरे धीरे उसके पास आया
[24:24] और बोला। लेकिन तुमने रोका भी तो नहीं?
[24:31] तुम्हारी इन्वेस्टिगेशन ना करने की वजह से मुझे सपने खुली समझा
[24:40] अपनी बेटी से मुझे दूर होना पड़ा और अब इसकी सजा अब इसकी सजा
[24:47] तुम्हे मिलेंगे जेलस? इसकी सजा तो फिर मिलेंगे।
[24:53] चीलर राणा डज़ से रोने लगे। प्लीज़ विक्रम प्लीज़ मुझे माफ़
[24:58] कर दो मुझे माफ़ कर दो विक्रम, प्लीज़।
[25:01] विक्रम धीरे से हँसा, फिर बोला। माफी चाहिए।
[25:10] मैं अभी ऐसी गिरगिराता जेलर पर तू दे, पर तुने कुछ नहीं किया।
[25:20] और ये कहकर एक आवाज़ हुई। हर एग्ज़िक्यूशन चेम्बर में लगी
[25:25] रस्सी हवा में उछल कर आई और राना के गले के आसपास झटके में लिपट
[25:30] गई। राना का शरीर पीछे खिसकने लगा उस
[25:34] जगह पर जहाँ फांसी होती थी वो फंदा कसता जा रहा था।
[25:38] उसके गले पर राना चिल्लाता लेकिन उसकी चीख पूरी होने से पहले।
[25:44] विक्रम सहाय ने उसकी जुबान उसकी कली से खींचकर अलग की और जमीन पर
[25:49] फेक दी का मुँह खून से भर गया। उसका शरीर अब वही हवा में लटक रहा
[25:55] था जहाँ विक्रम को फांसी हुई थी, फंदा कसता जा रहा था और वो चटपटा
[26:02] रहा था। उसके पैर हवा में हिल रहे थे और
[26:05] तभी विक्रम ने उसके मुँह के अंदर अपना हाथ घुसाया और बोला।
[26:11] तू जसाद में जब एक गरीब बेगुनाह के लिए घड़ा तक नहीं हो सकता हाँ।
[26:22] तू अपने रीढ़ की हड्डी का क्या करेगा?
[26:27] और ये कहकर विक्रम ने उसकी रीढ़ की हड्डी को उसके गले से खींचकर
[26:31] बाहर निकाला और उसके गले के चारों तरफ लपेट दिया और भस्कर राणा की
[26:38] जान तुरंत निकल गई। अगली सुबह जब गार्ड्स ने
[26:43] एग्ज़िक्यूशन चेम्बर का दरवाजा खोला तो जेलर भास्कर राणा की हालत
[26:49] एक सब कांप उठे। उनकी रीढ़ की हड्डी को मुँह से
[26:53] खींच कर बाहर निकाला गया था और उनकी जीप जमीन पर पड़ी थी।
[26:57] और उनकी आंखें अब भी खुली हुई थी, जिनमें डर साफ नजर आ रहा था और
[27:02] पास ही दीवार पर किसी ने जेलर आना के खून से लिखा था मैंने खून नहीं
[27:08] किया। शमशेरबाद जेल हाउस इस हादसे के
[27:11] कुछ महीनों बाद बंद कर दिया गया। जेलर की मौत के बाद।
[27:15] दो गज की भी विभत्य हालत में लाशें मिली।
[27:19] कागजों में स्ट्रक्चरल चैलेंजेस का रीसन लिखकर बात को निपटाया
[27:23] गया। लेकिन असल वजह असल वजह जेल के लोग
[27:27] जानते थे। 1946 के शुरू होते होते जेल को
[27:31] ताला लग गया था, लेकिन वहाँ। शांति कभी नहीं आई।
[27:36] कहते हैं विक्रम सहाय आज भी वहीं है उस कालकोठरी में और वह हर उस
[27:41] आदमी को सजा देता है जो उसे खूनी समझता है।
[27:46] उन योउतुबेर्स के ग्रुप ने भी अपने लाइव स्ट्रीम में उसे एक
[27:50] चाइल्ड गिला कहा था। शायद इसीलिए उन चारों की लाशें भी
[27:55] इतनी खतरनाक हालत में मिली और ये बात वो पांच सेकंड की क्लिप थे।
[28:00] कमिश्नर साहब अच्छे से समझ गए थे हे गाइस कैसे हैं आप सब आई होप यू
[28:08] गाइस लाइक टुडे स्टोरी हमें मैसेज कर कर जरूर बताना।
[28:12] ओके? और हाँ आज के पोल्स में भी
[28:14] पार्टिसिपेट जरूर कीजिएगा। अगर एपिसोड अच्छा लगा हो तो डू इट
[28:18] उस डू फॉलो उस चलिए अब जल्दी से बढ़ते हैं।
[28:22] आज के शूटआउट सेशन की तारीख इस हफ्ते का पहला शूट हो जाता है।
[28:26] सुदीप नेपाली को, जिन्होंने हमें स्पॉटिफाइ पर कॅाटाक्ट किया।
[28:30] थैंक्स फॉर युअर काइंड वर्ड्स सुदीप वी रियली होप दट यू एन्जॉय
[28:33] ऑल आवर स्टोरीज़ कीप लिसनिंग एंड कीप कमेंटिंग ऑन ऑल दी स्टोरीज़
[28:37] दैट यू लाइक हैप्पी टु हॅव यू इन थिस बुकस्ट कम्यूनिटी इस हफ्ते का
[28:41] दूसरा शाउट हो जाता है। राघव चंद्रन को इन्होंने हमें
[28:45] इंस्टाग्राम पर कॅाटाक्ट किया। थैंक्स राघव।
[28:47] एंड थैंक यू फॉर सजेस्टिंग दोज़ क्रियेट, फोर क्लॉथ फॉर आवर
[28:51] फ्यूचर एपिसोड्स ग्लैड टु हॅव यू इन दी कम्यूनिटी माँ ऍम एंड
[28:54] फाइनली आज का फाइनल शाउट हो जाता है सुदीपा गुहाको ये एक सेकंड ईयर
[29:00] की स्टूडेंट है एंड शी लिसटेंस टु स्पूकास्ट वाइल गोइंग टु कॉलेज
[29:04] एंड वाइल कुकिंग डिन्नर हे सुदीपा।
[29:06] थैंक यू फॉर गेटिंग इन टॅच बहुत अच्छा लगता है जब हम लोगों को पता
[29:10] चलता है कि हम लोग आपके डेली रूटीन का कहीं ना कहीं छोटा सा
[29:14] हिस्सा बन चूके हैं। सो थैंक यू सो मच फॉर शेयरिंग थिस
[29:17] विथ उस एंड विथ थिस आज का एपिसोड यहीं खत्म होता है।
[29:21] अगले हफ्ते हम लोग लौटेंगे आप पीती के एक एपिसोड के साथ।
[29:25] यू कैन शेयर युअर इन्सिडेंट्स विथ उस ऑन व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम,
[29:29] ईमेल ऑर यूट्यूब डिटेल्स डिस्क्रिप्शन में है फाडू फ्राइडे
[29:32] का एपिसोड आ चुका है ही इस रिसेंटली कवरिंग सम ऑसम जैपनीज़
[29:37] हॉरर स्टोरीज़ सो गो लिसेन टु इट नाउ अगले हफ्ते फिर मिलेंगे।
[29:42] मैं हूँ मंजुला और आप सुन रहे हैं इस बुक कास्ट।
[29:45] अवि और मंजिला? के साथ सुनते रहिए स्पोक कास्ट
[29:51] अवि और मंजिला के साथ।

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