# Ep 63 - LAAL SANDOOK - Part 1 | SPOOKCAST ORIGINAL STORY | Horror Story | Hindi Horror Podcast |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 26 Dec 2025, 38 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/113139691/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-11-26%2F415034568-44100-2-0d8c7bf7572c1.mp3

Story : A Horror Love Story about a couple where a partner decides to never leave.. Even after her death! To know the full story… listen to this Original Audio Horror Story by Spookcast. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Chudail | Chureil |Halloween Special | Shakchunni | Haunted School | Haunted Hostel |Haunted Jail | Dayan |Murder | Narrated by : Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com/ or DM us on Instagram @spookcastoriginals Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:05] दोस्तों नमस्कार, मैं हूँ मंजुला और आज की कहानी शुरू करने से पहले
[0:10] बस एक छोटा सा डिस्प्ले हुआ। आज की कहानी सिर्फ मेच्योर ऑडिएंस
[0:15] के लिए है। इसमें।
[0:17] कुछ बहुत ही डिस्टर्बिंग और ट्रैफिक सीन्स हैं, जो हर किसी के
[0:20] लिए बिल्कुल सूटेबल नहीं है। सो लिसनर्स डिस्क्रेशन इस ट्रिक
[0:24] क्लियरडवाइज़ सुनते रहिए स्पूकास्ट अवि और मंजिल के साथ सो
[0:34] चलिए। अब बिना किसी डेयरी के आज का
[0:37] एपिसोड शुरू करते हैं। सुरेश अपनी प्लेट उठाकर किचन की
[0:48] तरफ जा रहा था कि अचानक उसका फ़ोन बजने लगा कोई?
[0:54] अननोन नंबर था पर उसने फिर भी उठा लिया।
[0:58] हैलो हैलो कौन बात कर रहा हैं? क्या क्या सुरेश कुमार जी से बात
[1:02] हो रही हैं? एक भारी आवाज आई दूसरी तरफ से।
[1:06] हाँ जी, सुरेश बोल रहे हैं बोलिए। सुरेश जी मैं सीनियर कॉन्स्टेबल
[1:11] हरिराम सिंह बोल रहा हूँ। प्रीत कंठ थाने से आपने कुछ दिन
[1:16] पहले मिस्स कंप्लेंट की थी ना अपनी बीवी पूनम के नाम की।
[1:23] सुरेश का दल एक पल के लिए रुखसा गया।
[1:26] 14 दिन पहले। उसने सच में प्रीतगंज थाने में
[1:30] अपने बीवी की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
[1:34] जी जी जी सर सर बोलिए। उसकी आवाज कांप रही थी।
[1:40] अब। हाँ।
[1:42] तो सुनिए आपकी बीवी मिल गई है। वो जो पुराना वाला प्रीतम पूरा बस
[1:49] स्टॉप है ना? वहाँ पर मिली वो आज सुबह आप।
[1:54] आप जल्दी से पुलिस स्टेशन आकर उन्हें ले जाइए, समझे?
[1:58] ये शब्द सुनते ही सुरेश के हाथ से फ़ोन गिरते गिरते बचा।
[2:04] मिल गई है। मतलब कैसे?
[2:06] वो कैसे मतलब वो? उसके मुँह से सफाई से शब्द तक
[2:12] नहीं निकल रहे थे। अरे भाई देखो, हम बहुत बीज़ी हैं।
[2:16] इतने सवाल का जवाब फ़ोन पर नहीं नहीं सकते सवालों के जवाब चाहिए
[2:21] तो था नहीं अब। ये कहकर कांस्टेबल ने फ़ोन कट कर
[2:25] दिया। सुरेश वहीं खड़ा रह गया।
[2:29] फ़ोन हाथ में लिए उसकी सांसे अब तेज चल रही थी।
[2:34] पूनम पूनम बह गई है कर कर कैसे? इस इस बात का क्या मतलब है?
[2:42] सुरेश पास ही रखे चेयर पर लगभग गिरते गिरते बैठे एकाजीत सा डर
[2:48] धीरे धीरे उसके सीने में फैलने लगा।
[2:52] क्या कोई क्या कोई उसके साथ मजाक कर रहा था या फिर या फिर पुलिस ने
[2:57] किसी और औरत को यू नाम समझ लिया था?
[3:00] वो सोचने लगा। उसके दिमाग में 1000 तरह के सवाल
[3:04] उठ रहे थे। अब ए खामोश अनजानी से डर ने अब
[3:09] उसको जकड़ लिया था। सुरेश का पूरा पतन पसीने से तर हो
[3:15] गया था। वो बिना कुछ सोचे सीधा छत की तरफ़
[3:19] जाने वाली सीढ़ियों की तरफ़ दौड़ा और उस कमरे के सामने आकर रुक गया
[3:28] वो कमरा जिसे उसने 14 दिन पहले बंद किया था।
[3:40] वो उस दरवाजे को खोलना चाहता था। अंदर सब ठीक है या नहीं चेक करना
[3:46] चाहता था पर उसके हाथ कांप रहे थे।
[3:49] उसने हाथों से धीरे से दरवाजा खोला और अगले ही पल एक।
[3:59] तेज बहुत तेज केमिकल और ब्लीच की बदबू सीधा उसकी नाक से टकराई।
[4:05] वो खांसने लगा, उसकी आंखें और नाक जलने लगे।
[4:10] जलन की वजह से आँखों से पानी निकलने लगा।
[4:14] उस कमरे में बिल्कुल अँधेरा था, दोपहर होने के बावजूद क्योंकि
[4:20] उसने 14 दिन से सभी लकड़ी की खिड़कियाँ बंद रखी थीं।
[4:25] सुरेश की नजर अब सीधी कमरे के कोने में गई।
[4:30] वहाँ जहाँ वो पुराना लाल संदूक रखा था।
[4:34] उसके ऊपर लगातार का शीट फिसलकर अब बगल में जमीन पर पड़ा था।
[4:41] उस लाल संधू को देख सुरेश का गला सूख गया।
[4:46] वही लोहे का पुराना भारी भरकम लाल संधू जो सालों से उसके पास था
[4:51] उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा।
[4:54] पर उसने हिम्मत की और धीरे धीरे उस लाल संदूक की तरफ बढ़ने लगा।
[5:01] वो नीचे झुका और अपने काकते हाथ संदूक की तरफ बढ़ाया और उस संदूक
[5:07] के ताले को छुआ उसने। ताला बिलकुल वैसे ही लगा हुआ था
[5:13] जैसे उसने 14 दिन पहले लगाया था। इसका मतलब 14 दिन से उसे किसी ने
[5:19] नहीं खोला था। शायद मैं ज्यादा सोच रहा हूँ शायद
[5:23] पुलिस ने किसी और औरत को पूर्णम समझा होगा।
[5:27] सुरेश धीरे से बड़बड़ाया। उसे पुलिस स्टेशन दोबारा जाने का
[5:32] बिल्कुल मन नहीं था। पर अगर अगर वो पुलिस स्टेशन नहीं
[5:36] गया तो फिर तो फिर सब को शॉक हो जाएगा।
[5:40] उसने एक बार फिर उस लाल संदूक की तरफ देखा और फिर कमरे से बाहर
[5:45] निकल कर दरवाजा बंद कर दिया। सुरेश ने खुद को संभालना।
[5:51] इस तरह से डरने से बात बिगड़ सकती थी।
[5:54] वो धीरे धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरा।
[5:57] तैयार हुआ घर के सभी दरवाजे, खिड़कियां सब बंद किए ताकि
[6:02] केमिकल्स की बदबू बाहर न जाए और फिर प्रीतगंज थाने की तरफ चल
[6:08] पड़ा। थोड़ी देर बाद वह प्रीत कश थाने
[6:16] के बाहर खड़ा था। एक लंबी सांस लेकर वह अंदर चला
[6:21] गया पर जैसे ही वह अंदर गया। एक अजीब सी ठंड उसके पूरे बदन में
[6:29] दौड़ गई, क्योंकि वहाँ कॉन्स्टेबल की टेबल के पास एक बेंच पर।
[6:36] एक औरत बैठी थी। उस औरत का सर एक हरे दुपट्टे से
[6:41] ढका हुआ था और उसने। एक हरे रंग की सलवार कमीज पहनी
[6:46] हुई थी। उस औरत को देख सुरेश के हाथ पैर
[6:51] ठंडे पड़ने लगे क्योंकि वो सलवार कमीज को बहुत अच्छे से पहचानना
[6:56] था। उसने खुद वो सलवार कमीज अपने
[7:00] हाथों से अपनी बीवी पूनम के लिए सिली थी।
[7:04] सोरत ने अब अपना सर ऊपर किया और उन दोनों की नजरें मिलीं और सुरेश
[7:11] के शरीर में सुरेश के शरीर में बिजली दौड़ गई।
[7:17] उसका पूरा बदन कांपने लगा। और वो झटके से कॉन्स्टेबल के
[7:22] सामने वाली कुर्सी पर गिरकर बैठा। वो औरत बिल्कुल पूनम की तरह लग
[7:29] रही थी। वही चेहरा, वही हाइट और उसकी कलाई
[7:34] पर वही हरा सुरेश लिखा हुआ टैटू। जो पूनम ने उसी के सामने पिछले
[7:41] साल प्रीतगंज के मेले में बनवाया था।
[7:44] वो औरत सुरेश को देख कुछ नहीं बोली ना मुस्कराई वो बस खामोश थी,
[7:51] सुरेश जी कांस्टेबल की आवाज गरज करायी।
[7:55] जी सर। ये।
[7:58] आपकी दीदी हैं पूनम। सुरेश की नजर फिर से उस औरत की
[8:03] कलाई पर गई वो टैटू, वो टैटू झूठ नहीं बोल सकता।
[8:08] जी जी सर, ये ये मेरी बीवी है सर। उसके मुँह से शक निकले पर आवाज
[8:16] बिल्कुल कांप रही थी। कॉन्स्टेबल ने एक लंबी सांस भरी।
[8:21] देखो तुमसे उम्र में थोड़ा बड़ा हूँ इसलिए एक बात कह रहा हूँ तुम
[8:27] दोनों अब भी जवान हो, पूरी जिंदगी पड़ी है तुम्हारे सामने लड़ाई
[8:32] झगड़े तो रोज़ की बातें हैं ये सब कुछ तो होता ही है।
[8:37] घर जाओ और प्यार से रहूं, समझे क्यों?
[8:42] समझे कि नहीं? सुरेश ने बस सर हिलाया, पूनम चुप
[8:47] रही। फिर सुरेश ने जल्दी जल्दी कुछ
[8:49] कागजात पर साइन किए और बिना कुछ बोले वो दोनों थाने से बाहर निकल
[8:55] आए। और सुरेश अंदर से हिला हुआ था।
[8:59] उसे उस औरत से बहुत डर लग रहा था कि औरत कौन थी?
[9:04] उसे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। पूनम आगे आगे चल रही थी बस स्टॉप
[9:10] की तरफ और सुरेश वो उससे दूरी बनाकर चल रहा था।
[9:14] उसके पीछे दोनों बस स्टॉप पर पहुंचे और चुपचाप बिना एक शव बोले
[9:20] बस का इंतजार करने लगे। पूनम ने एक बार भी उसकी तरफ नहीं
[9:25] देखा। वो बिल्कुल शांत थी, ना हिल रही
[9:28] थी, ना पल के झपका रही थी। बस वहाँ बस स्टॉप पर खड़े एक
[9:33] मूर्ति की तरह बस का इंतजार करती रही वो और फिर जब बस आयी वो उसमें
[9:40] चढ़ गई। सुरेश भी उसके पीछे पीछे चढ़ा पर
[9:43] उसके साथ नहीं बैठा। वो वो उसे एक सीट पीछे बैठा।
[9:49] 45 मिनट के बाद वो दोनों अपने घर के पास वाली स्टॉक पर पहुंचे।
[9:55] वो दोनों अब अपने घर की तरफ पैदल बढ़ने लगे।
[9:59] पूनम आगे सुरेश उसके पीछे जैसे ही वो अपने गली में घुसे पड़ोसियों
[10:05] की नजरें उन पर दिखने लगी। आखिरकार सबको पता था कि 14 दिन से
[10:11] पूनम लापता थी। कुछ बस घूर रहे थे।
[10:16] कुछ लोग सुरेश को देखकर मुस्कुरा रहे थे सो वो जल्दी जल्दी घर की
[10:22] तरफ बढ़ने लगा पर पूनम वो बस आगे आगे चलती रही।
[10:28] उसे इन चीजों से मानो आज कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था।
[10:32] सुरेश तुरंत दरवाजे के पास गया और उसने लॉक खोला।
[10:38] पूनम अब दरवाजा खुलते ही अंदर चली गई पर वो बैडरूम की तरफ नहीं गई
[10:44] या किचन या बाथरूम की तरफ? वो सीधा सीढ़ियों की तरह पड़ने
[10:50] लगी। वहीं सीढ़ियों जो छत पर जाती थी
[10:54] उस टोज रूम की तरह जहाँ वो लाल संदूक रखा था।
[11:00] सुरेश का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। पूनम कहाँ कहाँ जा रही हो?
[11:06] उसकी आवाज। काँप रही थी।
[11:08] ऊपर ऊपर क्यों जा रही हो पूनम? सुरेश बिल्कुल नहीं चाहता था कि
[11:14] पूनम वहाँ जाए पर पूनम, पूनम कुछ नहीं बोली।
[11:19] वो चुपचाप धीरे धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगी।
[11:26] कुछ मिनट बाद एक आवाज आई, एक ऐसी आवाज।
[11:31] इसे सुनकर सुरेश का पूरा खून ठंडा पड़ गया।
[11:35] वो आवाज उस तो रूम के दरवाजा खोलने की थी।
[11:42] सुरेश वहीं खड़ा रह गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या
[11:47] करे? फाइनली उसने थोड़ी हिम्मत की।
[11:50] वो सीढ़ियों के नीचे आकर खड़ा हो गया।
[11:54] पूनम ऊपर क्या कर रही हो नीचे आ जाओ, पहले पहले थोड़ा नहा धो लो,
[12:01] कपड़े बदल लो नीचे आओ पूनम। पर कोई जवाब नहीं आया।
[12:08] उसने थोड़ी और हिम्मत जोड़ी और आंधी सीढ़ियों चढ़ गया।
[12:15] उसे अब उस टूर रूम का दरवाजा पूरा खुला हुआ दिख रहा था।
[12:20] चेमिकल्स की बदबू अब सीढ़ियों तक आ गई थी।
[12:24] पूनम शायद अंदर थी, उसने कुछ और सीढ़ियों चढ़ीं और उस स्टोर रूम
[12:30] के दरवाजे पर पहुंचा। पूनम उस अंधेरे कमरे के बिल्कुल
[12:36] बीच में खड़ी थी उस लाल संदूक को कूदते हुए।
[12:42] पूनम? तुम नीचे नहीं आओगी क्या?
[12:46] डर से उसकी आवाज फटने लगी थी पर पूनम बिल्कुल चुप थी।
[12:53] सुरेश समझ गया था कि वो सुनने वाली नहीं थी।
[12:56] उसका इस तरह से शांत रहना उसे और ज्यादा डरा रहा था।
[13:02] सुनो, पूनम। मुझे आज रात को कुछ हिसाब किताब
[13:07] का काम है, तो तुम्हें काम करना तुम तुम आज रात दूसरे कमरे में सो
[13:13] जाओ ठीक है, मैं मैं तुम्हारा सामान वहीं रख देता हूँ और अगर
[13:17] तुम्हें कुछ चाहिए तो तो बस मेरे दरवाजे पर दस्तक दे देना ठीक है।
[13:24] फिर सन्नाटा पूनम ने कोई जवाब नहीं दिया।
[13:28] वो पास वहीं खड़े लाल संधू को घूरती रही।
[13:33] पूनम पूनम तुम तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो पूनम?
[13:39] सुरेश ने कांपती हुई आवाज में कहा।
[13:43] और फिर पूनम के गले से एक आवाज निकली एक डरावनी आवाज जिसने सुरेश
[13:51] को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया। मैं मैं इस कमरे में ही रहूंगी
[13:59] तुने। तुमने मुझे यही छोड़ा था ना तो
[14:05] यही मेरा कमरा है, यही मेरी जगह है।
[14:09] और ऐसा कहकर एक झटके से वो सुरेश की तरफ मुड़ी और अजीब तरीके से
[14:15] मुस्कुराने लगी। ये दृश्य देख।
[14:21] सुरेश ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।
[14:24] वो वहाँ से भागा गिरता पड़ता सीढ़ियों से अपने कमरे में घुसा
[14:29] और दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया। उसका पूरा शरीर एक पत्ते की तरह
[14:36] कांप रहा था। कुछ बहुत गलत हो रहा था इस घर
[14:39] में। कि ये उसकी बीवी नहीं हो सकती।
[14:43] उसके दिमाग में हजारों सवाल उबल रहे थे।
[14:47] अब जिनके कोई जवाब नहीं थे, उसके पास वो स्टोर रूम जहाँ लाल संदूक
[14:53] था वो आखिरी जगत थी जहाँ सुरेश चाहता था कि कोई भी जाए।
[14:58] और वह औरत जो खुद को पूनम कह रही थी, वह उस कमरे में थी।
[15:03] उस लाल संदूक के पास सुरेश अपने बिस्तर पर गिर पड़ा।
[15:11] उसकी सासे शांत हुई और देखते ही देखते उसका दिमाग पुरानी यादों
[15:17] में खो गया। सुरेश की यादें ये 3 साल पीछे चली
[15:22] गईं जब उसने पूनम को पहली बार देखा था।
[15:30] वो दिन आज भी उसे याद था जैसे कल ही की बात हो।
[15:36] मानसून का मौसम था। हवा चल रही थी।
[15:39] आसमान उस दिन काले बादलों से घिरा हुआ था।
[15:45] पूनम मास्टर जीके खुले आंगन में अकेले बैठी कुछ सीलने की कोशिश कर
[15:51] रही थी। उस दिन बहुत तेज हवा चल रही थी और
[15:56] पूनम के बाल। बार बार उसके चेहरे पर टकरा रहे
[16:00] थे और वो वो बार बार परेशान हो रही थी।
[16:05] सुरेश दूर खड़ा पूनम को परेशान होता देख मुस्कुरा रहा था।
[16:10] उसे पूनम बहुत ही प्यारी लगी थी। उसकी वो बड़ी बड़ी आंखें और वो
[16:16] मीठा सा। मासूम सा चेहरा जल्द ही उसे पता
[16:20] चला कि पूनम भी उसी की तरह अनाथ थी और वो मास्टरजी से सिलाई सीख
[16:27] रही थी। वहीं जहाँ सुरेश दर्जी का काम
[16:30] करता था, धीरे धीरे उनकी दोस्ती हुई।
[16:34] हँसी मजाक। एक दूसरे को चिढ़ाना परेशान करना
[16:39] खप ये मीठी मीठी तकरार रोकझोंक सच्चे जस्बातों में बदल गई।
[16:44] दोनों को पता ही नहीं चला और वो दोनों एक दूसरे से मोहब्बत करने
[16:50] लगे। चल ठीक?
[16:53] सुरेश ने अपने जमे पैसों से एक छोटी सी दुकान खोली।
[16:58] जब पैसे अच्छे मिलने लगे तब एक पुराना घर खरीद लिया।
[17:02] उसने और अपनी दुकान अपने ही आँगन से चलाने लगा।
[17:07] सब कुछ अच्छा चल रहा था और जल्द ही उसने पूनम को उससे शादी करने
[17:12] के लिए मना लिया। बाबुलम वो भी बहुत खुश थी।
[17:17] वो एक खुशमिजाज लड़की थी। जिंदगी में उसने बहुत दुख देखे थे
[17:23] और इसीलिए छोटी छोटी खुशियों की कदर करना वो जानती थी।
[17:28] उसने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी सारी खुशियां 1 दिन उसकी झोली में
[17:34] आकर गिरेगी। वो सुरेश के प्यार में पागल सी हो
[17:38] गई थी। पूनम हमेशा उसके साथ रहती, उसके
[17:41] लिए खास चीजें करती, वही कपड़े पहनती जो सुरेश सीलता उसके लिए।
[17:47] उसका पसंदीदा खाना बनाती और जब भी वक्त मिलता उससे मिलती और जल्द ही
[17:54] उन दोनों ने शादी भी कर ली। पहला साल खुशियों से भरा हुआ था।
[18:00] एक पल के लिए भी अलग नहीं रह सकते थे वो दोनों सब लोग।
[18:05] उन्हें देखकर बहुत खुश होते सब कहते इन दोनों अनाथों की जोड़ी
[18:11] खुद भगवान ने बनाई है। पूनम बड़े प्यार से घर संभालना और
[18:18] सुरेश अपने ही आंगन में अपनी दुकान चलाता।
[18:22] जहाँ पूरे शहर की औरतें कपड़े सिलवाने आतीं, उसका काम जल्द ही
[18:28] मशहूर हो गया और तू तू से लोग आने लगे और ऐसे ही 1 दिन आई यामिनी
[18:37] यामिनी अलग थी प्रीतगंज की बाकी। सीधी साधी लड़कियों और औरतों से
[18:44] बिल्कुल अलग उसे सुरेश अच्छा लगता था और सबको पता था यामिनी को जो
[18:51] पसंद आता था वो उसे हासिल कर कर ही दम लेती थी।
[18:56] वो सुरेश के पास कपड़े सिल्वाने के बहाने बार बार आने लगी।
[19:01] कभी सच में कपड़े सिलवाने, कभी उससे बातें करने और कभी उसके करीब
[19:07] आने पहले तो सुरेश थोड़ा हिचकिचाया इसलिए नहीं कि उसे ये
[19:12] सब अच्छा नहीं लग रहा था, पर इसलिए कि वो अपने आंगन में ही
[19:17] दुकान चलाता था और पूनम हमेशा आसपास ही रहती थी।
[19:21] उसे हमेशा डर लगा रहता कि यामिनी की इन हरकतों को वे पूनम देखने ले
[19:26] और सच कहूं तो सुरेश को यामिनी की इन हरकतों से मज़ा ही आ रहा था।
[19:33] यामिनी बहुत ही खूबसूरत थी और सुरेश ने कभी सपने में भी नहीं
[19:38] सोचा था। कि इतनी बोल्ड और खूबसूरत औरत उसे
[19:42] पसंद करेगी और वहाँ यामिनी को सुरेश के शादीशुदा होने से भी कोई
[19:48] फर्क नहीं पड़ता था। वो पूनम की कोई परवाह किए बिना हर
[19:54] रोज़ सुरेश से मिलने लगी और जल्द ही चीजें तेजी से।
[19:59] उस रास्ते पर पड़ गए जो किसी भी शादीशुदा जोड़े के लिए गलत था।
[20:05] सुरेश्वर यामिनी एक दूसरे से प्यार कर बैठे।
[20:10] वो पूनम के पीठ पीछे मिलने लगे। कभी खेत में, कभी नदी के किनारे
[20:16] पर पूनम पुनमंधी नहीं थी। उसे जल्द ही समझ आ गया कि चल क्या
[20:23] रहा था पर वो वो सुरेश से बहुत प्यार करती थी।
[20:27] सुरेश ने पिछले कुछ सालों में उसे जितनी खुशी दी थी वो उसे आज तक
[20:33] कभी नहीं मिली थी तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
[20:37] सुरेश को उसने कुछ नहीं कहा। वो तुमसे और ज्यादा प्यार देने
[20:42] लगी, ये सोचकर कि उसका प्यार सुरेश को उसके पास वापस ले आएगा।
[20:48] वो ऐसी चीजें करने लगी जो सुरेश को पसंद था।
[20:51] पूनम को लगता था कि और ज्यादा प्यार जताने से।
[20:55] सुरेश उसके पास वापस लौट आएगा। पर पूनम नादान थे।
[21:00] सुरेश तो बहुत पहले ही उससे बहुत दूर जा चुका था।
[21:05] उसे अब पूनम के प्यार से घुटन महसूस होने लगी थी।
[21:09] वो अब यामिनी से शादी करना चाहता था।
[21:13] दुकान के नाम पर बाजार जाने के नाम पर वो बाहर जाता रहता पर
[21:18] हकीकत में वो यामिनी के साथ रहता। पर जब वो भी काफी नहीं हुआ तो
[21:24] उसने घर की दुकान बंद कर एक और जगह पर दुकान भाड़े पर ली ताकि
[21:29] पूनम उसे परेशान न करे। पर पूनम वो इतनी जल्दी हार नहीं
[21:35] मानने वाली थी। वो सुरेश के लिए दुकान में खाना
[21:39] लेकर जाने लगी। कई बार बिना बताए भी चली जाती और
[21:43] ये सब सुरेश को अब गुस्सा दिला रहा था।
[21:47] मन ही मन उसे पूनम से अब नफरत होने लगी थी।
[21:50] उसे इस रिश्ते में अब घुटन महसूस होने लगी थी।
[21:54] देखते ही देखते उनमें रोज़ लड़ाईयां होने लगीं और फिर एक शाम
[22:00] सुरेश ने उसे कह दिया कि वो उसे छोड़ना चाहता था।
[22:06] यामिनी से शादी करना चाहता था पर पूनम उसे तो ये सब पहले से ही पता
[22:13] था। जीस आदमी को वो इतना प्यार करती
[22:16] थी जिससे उसे इतनी खुशियां मिली थी।
[22:19] वो उसे छोड़ने नहीं वाली थी तो उसने बिना आवाज़ चढाये शांति से
[22:25] सुरेश ने कहा। सुरेश मैं तुमसे प्यार करती हूँ,
[22:29] अपनी अपनी जान से भी ज्यादा तुम ही मेरा परिवार हो तो फिर बताओ की
[22:35] मैं तुम्हें कैसे छोड़ दूं, कोई भला अपने परिवार को छोड़ता है
[22:40] क्या? नहीं सुरेश मैं तुम्हें कभी नहीं
[22:44] छोड़ सकती तुम। तुम यामिनी को छोड़ दो।
[22:49] क्या अब तुम मुझे बताओगी कि मैं क्या करूँ?
[22:53] हाँ अब अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
[22:58] पूनम बर्दाश्त नहीं हो रहा। है।
[23:01] गुस्से में चिल्ला उठा और उसकी तरफ लब का।
[23:06] इतना गुस्से में था कि उसने पूनम की गर्दन पकड़ ली और उसका सिर
[23:11] दीवार पर दे मारा। वहाँ पर जहाँ एक किला नीचे की तरफ
[23:16] निकला हुआ था जब पूनम दीवार से टकरा कर जमीन पर गिरी।
[23:22] टप जाकर सुरेश ने देखा कि उसकी गर्दन से खून की धार बह रही थी,
[23:28] उसे समझ आ गया कि अनजाने में उससे क्या हो गया था।
[23:32] कुछ पल के लिए इतना खून देख वो बहुत घबरा गया पर फिर पर फिर उसके
[23:38] दिमाग में एक चिंगारी सी उठी। अचानक इस तरावने दृश्य के बीच भी
[23:44] उसे एक मौका दिखने लगा पूनम को अपने रास्ते से हटाने का मौका सो
[23:52] वो दूर जाकर खड़ा हो गया पूनम को तड़पता हुआ छोड़कर।
[23:59] ना उसने पूनम को बचाने की कोशिश की ना किसी से मदद मांगी।
[24:05] पूनम का बहुत खून बह चुका था, फर्श खून से लाल हो चुका था।
[24:11] ऊनमक भी जिंदा थी और सुरेश को सुरेश को ये देख कर आपको सहारा
[24:17] था। वो किसी भी तरह पूनम से अपना पीछा
[24:21] छुड़ाना चाहता था सो वो लपककर पूनम के शरीर पर बैठा।
[24:27] उसकी गर्दन को तप तबाता रहा जब तक जब तक पूनम ने हिलना बंद नहीं
[24:34] किया। इतनी आखिरी पैरों में दर्द से
[24:40] पूनम की आँखें और मुँह खुले के खुले रह गए।
[24:44] जीब लड़खड़ाती रही लेकिन सुरेश को कोई फर्क नहीं पड़ा।
[24:51] कुछ ही सेकंड्स में शादी के 18 महीने बाद।
[24:56] पूनम की जान अपने ही घर में चली गई।
[25:00] उस आदमी के हाथों जिसे वो सबसे ज्यादा प्यार करती थी, जिसे वो
[25:08] जिसे वो अपना परिवार बनती थी, बस सुरेश को।
[25:16] उसे कोई पछतावा नहीं था। उसकी तो मानो लॉटरी लग गयी थी।
[25:22] वो अब यामिनी से बिना किसी डर के शादी कर सकता था।
[25:27] वो बहुत खुश था। वो उस लाश के सामने खड़े होकर भी
[25:32] मुस्करा रहा था। और जैसे ही उसकी नजर पूनम की लाश
[25:38] पर पड़ी, चारों तरफ पहले खून पर पड़ी हकीकत का तमाचा उसके चेहरे
[25:44] पर पड़ा। उस लाश का क्या करेगा?
[25:49] सुरेश जहाँ रहता था वो एक छोटी सी गली थी।
[25:54] सारे घर बिलकुल एक दूसरे से लगे हुए थे।
[25:57] दिन हुए रात वहाँ से उस लाज को बाहर ले जाना नामुमकिन था।
[26:03] कोई ना कोई उसे जरूर देख लेता तो उसने सोचना शुरू किया और फिर उसके
[26:08] दिमाग में एक डरावना प्लान। उसके पास एक पुराना लोहे का लाल
[26:18] संदूक था। काफी पुराना पर बहुत ही मजबूत
[26:23] सुरेश ने सोचा वो उसमें पूनम की लाश को छुपा देगा।
[26:29] पर अगर कुछ दिन बाद लाश से सड़ने की बदबू आने लगे तो तब क्या
[26:35] करेगा? वो आसपास के पड़ोसी तो आसानी से
[26:38] समझ जाएंगे पर कुछ देर सोच उसने एक बहुत ही दरिंदगी से भरा हुआ
[26:46] प्लान बनाया। कुछ ऐसा?
[26:49] जो कोई इंसान सपने में भी नहीं सो सकता।
[26:56] सबसे पहले उसने पूनम की लाश को ले जाकर बाथरूम में रख दिया।
[27:04] पानी से पूरा खून धोकर साफ किया। फिर अगली सुबह ही वो बाहर निकला
[27:12] और घर से बहुत दूर जाकर अलग अलग दुकानों से चॉपर, आरी, दूसरी
[27:18] औजार, चेमिकल्स, ब्लीच और तारपोलिन की शीट ले आया।
[27:24] फिर घर लौटकर उसने वो किया जो किसी इंसान के लिए करना नामुमकिन
[27:30] था। वो अब एक साक्षात हैवान बन चुका
[27:35] था। उसने बाथरूम में जाकर पूनम का सर
[27:40] पहले चौपर से काटकर। शरीर से अलग किया, फिर दुकान से
[27:46] लाये और जारो से उसने शरीर के छोटे छोटे टुकड़े किए।
[27:54] ऐसा करते वक्त उसे कई बार उल्टी आई।
[27:59] मुकुंद। बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था पर वो
[28:03] नहीं रुका। उसने लाश की अंतरियों और बाकी के
[28:07] अंग बाहर निकालकर पहले एसिड में उन्हें पिघलाया और फिर देर रात जब
[28:14] गली में सन्नाटा था, पास के बाद उधर नाले में जाकर।
[28:18] उसने सब कुछ बहा दिया। घर लौटकर वो स्टोर रूम में गया।
[28:25] उसने बहुत सारा सीमेंट खोला। फिर उसने लाल संदूक खोलकर उसमें
[28:33] तारबोलेन की शीट्स अंदर लगाई ताकि सीमेंट सीधा ट्रंक के बेस में लीक
[28:39] ना हो। सुरेश ने अब सीमेंट डालना शुरू
[28:43] किया। परत दर परत एक परत डालता।
[28:48] फिर उसमें पूनम की लाश के कुछ टुकड़े लाश से अब हल्की हल्की
[28:54] सड़क की दुर्गन्ध भी आ रही थी पर सुरेश नहीं रुका।
[28:59] मुँह पर कपड़ा बांधकर वो इस दरिंदगी भरे काम को करता ही रहा।
[29:04] अरे कटे हुए आग, लाल संदूक में भर सब से आखिर में उसने पूनम का कटा
[29:11] हुआ सर सीमेंट में डुबोया। पूनम की आँखें और भी खुले हुए थे
[29:18] पर उसने उन्हें बंद तक नहीं किया। उसने बस उसे सीमेंट में डुबोया।
[29:23] और फिर ऊपर से सीमेंट की आखिरी परत डाल दी और तब तक वहाँ रुका
[29:29] रहा जब तक वो सूखना शुरू नहीं हुआ।
[29:35] अगली सुबह जब सीमेंट फाइनली थोड़ा सूख गया, उसने उस लाल संदूक को
[29:41] ताला लगा दिया। उसे तारपोलिन से ढक दिया।
[29:46] कमरे की सभी लकड़ी की खिड़कियाँ, दरवाजे उसने बंद कर दिए ताकि कोई
[29:52] भी गंध बाहर न जा सके। फिर जमीन पर फैले खून और गंध को
[29:57] केमिकल्स और ब्रीद से साफ किया बाथरूम को भी।
[30:01] और बाकी के घर को फिनाइल से ये सब करने में सुरेश को करीब 2 दिन लगे
[30:08] पर वो रुक नहीं लगा रहा क्योंकि वो गर्मी का मौसम था।
[30:14] लाश 2 दिन में ही सड़ने लगी थी। पूरे घर से मांस सड़ने की बदबू आ
[30:19] रही थी। एक और दिन रुका ताकि प्लीज़ की
[30:24] गंध कम हो और सीमेंट थोड़ा और सूख जाए।
[30:28] और फिर उसने शांति से सोच लिया कि सबको क्या कहानी बतानी है।
[30:34] एक ऐसी कहानी, एक ऐसा प्लान जो ऑलमोस्ट परफेक्ट था।
[30:42] वो रोते रोते प्रीतगंज थाने पहुंचा और अपनी बीवी की मिसिंग
[30:46] रिपोर्ट फाइल की। उसने कहा उन दोनों का झगड़ा हुआ
[30:51] था। 2 दिन पहले और फिर पूनम घर छोड़कर
[30:54] चली गई। उसे लगा कि वह वापस चली आएगी
[30:57] क्योंकि पूनम ने पहले भी कई बार उससे लड़ाई की थी और वह घर छोड़कर
[31:02] गई थी, लेकिन फिर एक 2 दिन बाद वह लौट आई थी।
[31:05] बराज 3 दिन बाद भी जब पूनम नहीं लौटी तो वह थाने में रपट लिखने आ
[31:11] गया। उसने थाने में पूनम की फोटो दी।
[31:14] कपड़ों का डिस्क्रिप्षन दिया। वही हरा सलवार कमीज और दुपट्टा,
[31:19] जो उसने मरते वक्त पहना था, उसने सबके सामने नकली आंसू बहाये और
[31:28] फिर घर चला गया। पड़ोसी भी उसकी बात को मान गए।
[31:34] क्योंकि उन सब ने लड़ाईयों की आवाज तो सुनी ही थी और एक मामूली
[31:39] सा दर्जी अपनी प्यारी सी बीवी के साथ कुछ गलत थोड़ी ना करेगा।
[31:44] पड़ोसी उसके लिए रोज़ खाना लाने लगे।
[31:47] दुख जताने लगे। पुलिस भी आई घर पर और सुरेश की
[31:51] नकली आंसू देख पड़ोसियों की बातें सुन।
[31:54] उन्हें भी शक नहीं हुआ। सब कुछ सुरेश के परफेक्ट प्लान के
[31:59] हिसाब से चल रहा था। घर से बदबू पैसे भी कब के जा चुकी
[32:04] थी बदबू बस अब स्टोर रूम में थी और वो तो बंद था।
[32:09] बाहर से सुरेश सबके सामने उदास रहने की अक्टिंग करता।
[32:14] पर अंदर ही अंदर मन में वो सबकी बेवकूफी पर हंसता रहता।
[32:20] क्या बेवकूफ बनाया था उसने सबको? उसने यह सोचा था कि चुपचाप कुछ
[32:26] महीने इंतजार करेगा। जब साहब इस बात को भूलने लगेंगे
[32:30] तब वो यामिनी से शादी कर लेगा। कौन ऊँगली उठाएगा उस पर?
[32:34] हाँ, वो तो विक्टिम था ना उसकी बीवी ने उसे छोड़ा था, वो क्या कर
[32:40] सकता था? क्या परफेक्ट प्लान था सुरेश का
[32:44] वो मन ही मन रोज़ मुस्कुराता रहा और किसी को कुछ नहीं बताया।
[32:50] यामिनी को भी नहीं। पर उसका फूलप्रूफ प्लान उस दोपहर
[32:56] क्रैश हो गया जब उसे पुलिस स्टेशन से फ़ोन आया।
[33:00] उसे अब भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।
[33:05] वो समझ नहीं पा रहा था की उसके साथ पुलिस स्टेशन से आज कौन लौटकर
[33:09] आयी थी, वो कौन थी? क्या उसका दिमाग कोई खेल खेल रहा
[33:14] था? उसके साथ पोत कर बैठ गया और उसने
[33:17] अपना फ़ोन उठाकर देखा ये देखने के लिए कि क्या सच में आज उसे पुलिस
[33:22] स्टेशन से कोई कॉल आया था। पर तभी एक आवाज़ आई।
[33:30] रात के लगभग 11:00 बज रहे थे उस कमरे के ठीक ऊपर स्टोर रूम था वही
[33:37] रूप जहाँ लाल संगम था वहाँ से एक आवाज आ रही थी मानो कोई कुछ भारी
[33:48] सा सामान। कमरे में घसीट रहा हो और अगले ही
[33:51] पल अगले ही पल सुरेश को याद आ गया कि आज वो घर में अकेला नहीं था।
[33:58] बुनम आज उसके साथ थी। ऊपर वाले कमरे में उसके सिर से
[34:03] पसीना छूटने लगा। वो घसीटने वाली आवाज़।
[34:07] बार बार आ रही थी। ऊपर के कमरे से उसका दिमाग कह रहा
[34:11] था कि उसे ऊपर जाकर एक बार चेक करना चाहिए कि स्टोर रूम में हो
[34:16] क्या रहा था? क्या?
[34:17] पूनम क्या पूनम उस लाल संधू को घसीट रही थी पर उसकी हिम्मत नहीं
[34:23] थी कि वो कमरे के बाहर निकले? अगले कुछ सेकंड तक आवाज आती रही।
[34:29] फिर अचानक बस ऐसे ही एकदम से सब कुछ शांत हो गया।
[34:34] सुरेश बिस्तर पर पूरी तरह से सतर्क होकर बैठा था, तभी अचानक
[34:39] उसने कमरे के दरवाजे पर एक दस्तक सुनी।
[34:49] और अगले ही पल दरवाजे के पहर से डरावनी आवाज ने सुरेश को हथफरा कर
[34:56] दिया। सुरेश सुरेश।
[35:03] मैं तुम्हे कुछ मैं तुम्हे कुछ दिखाना चाहती हूँ पढ़ाओ ना सुरेश।
[35:10] ये आवाज़ पूनम की थी। चलो ना सुरेश मैं मैं सच में
[35:16] तुम्हे कुछ दिखाना चाहती हूँ ऊपर टू रूम में कुछ बहुत ही मजेदार है
[35:23] क्नॉइस। हाँ।
[35:24] घरवासा खोलूंगा सुरेश बहुत। मज़ा आने वाला है, बहुत मज़ा आने
[35:30] वाला है और फिर वो पागलों की तरह हंसने लगी।
[35:40] दोस्तों आगे क्या हुआ? वो औरत कौन थी?
[35:44] क्या पूनम अपना बदला लेने वापस आई थी?
[35:47] आगे सुरेश के साथ क्या होने वाला है?
[35:50] इन सब सवालों का जवाब सुनने के लिए सुनिए इस कहानी का आखिरी भाग
[35:56] अगले हफ्ते सर आपको आज की कहानी अच्छी लगी है।
[36:02] तो आप मुझे इंस्टाग्राम पर ऐट स्पोक कास्ट ओरिजिनल मैसेज करके
[36:07] जरूर बताएगा। मुझे अच्छा लगता है जब आप लोग
[36:10] मुझे मैसेज करते हैं एंड फाइनली अब जल्दी से बढ़ते हैं आज के इस
[36:15] आउट आउट सेशन की तरह। इस अवधि का पहला शूट ऑफ जाता है
[36:18] श्लोक को जिन्होंने हमें व्हाट्सएप पर कॅाटाक्ट किया है।
[36:22] बीन लिसनिंग टु उस बुक कास्ट फॉर ए फ्यू डेज़ नाउ और उन्हें मेरी
[36:26] ओरिजिनल स्टोरीज़ और मेरा नैरेशन स्टाइल अच्छा लगता है।
[36:29] स्पेशल भैरव वाला एपिसोड ये श्लोक।
[36:32] थैंक यू फॉर रीचिंग उस एंड सपोर्टिंग स्पूडकास्ट कीप इन टॅच
[36:36] ओके इस हफ्ते का दूसरा शाउट आउट जाता है।
[36:38] निशांत को काम रूप आसाम से इन्होंने भी हमें व्हाट्सएप पर ही
[36:43] कॅाटाक्ट किया ही इस ए रेगुलर लिस्ट नो एंड लव्स स्पूडकास्ट एंड
[36:47] फाडू फ्राइडेज उन्होंने हमारे अर्बन लेजेंड से रिलेटेड सारी
[36:51] स्टोरीज़ काफी पसंद हैं। ही हैज़ ऑल्सो शेर्ड ए रीयल
[36:54] इंसिडेंट विथ एस। जो आप जल्द ही हमारी आपबीती के
[36:57] एपिसोड भी सुनने वाले हैं। हे निशांत थैंक यू फ़ॉर रीचिंग
[37:00] आउट एंड फ़ॉर लाइकिंग आउर कंटेंट सो मच आई एम सो ग्लैड दैट यू रीचड
[37:04] आउट कीप इन टच ओके एंड फायनली। आज का फाइनल शॉट हो जाता है।
[37:09] कामयाब को उन्होंने भी हमें व्हाट्सएप पर ही कॅाटाक्ट किया।
[37:13] इन्हें भी हमारे दोनों ब्रॉडकास्ट काफी पसंद है।
[37:17] शी है ऑल्सो मेड सम ग्रेट रेकमेंडेशन फॉर फारू फ्राइड।
[37:21] वो हमारी कहानियों, अपने ऑफिस के काम करते वक्त सुनती हैं।
[37:25] एस शी लव्स दी अट्मोसफियर देर अरे स्टोरीज़ क्रियेट हे कामयाब, थैंक
[37:30] यू हमारे काम को इतना अप्रीशीएट करने के लिए मुझे बहुत अच्छा लगता
[37:34] है जब मुझे इस तरह के मैसेजस आते हैं जहाँ आप सब हमें रोज़ सुनना
[37:39] पसंद करते हैं सो थैंक यू कामयाब। आज का एपिसोड यहीं खत्म होता है।
[37:45] अगले हफ्ते हम लोग लौटेंगे। इस डरावनी कहानी के आखिरी भाग के
[37:51] साथ मैं हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पोककास्ट सी यू नेक्स्ट वीक
[37:56] गाइज़ सुनते रहिए स्पोककैस्ट। अवि और मंजिला के साथ।

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