# Ep35 - AAPBEETI 3 by SPOOKCAST- 2 REAL HORROR STORIES | Real Stories | Sachi Ghatana |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 9 Feb 2025, 24 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/98249978/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-1-9%2F394566683-44100-2-21fa30d7a535b.m4a

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## Transcript

[0:01] हे गाइस कैसे हैं आप सब? वेलकम टु थिस वीक एस एपिसोड ऑफ़
[0:06] कास्ट आज का एपिसोड थोड़ा अलग और स्पेशल है क्योंकि इसमें सुनाई
[0:12] जाने वाली सभी घटनाएं हमारे लिसनर्स के अपने साथ घटी हैं।
[0:16] एंड बिलीव मी? ये दोनों स्टोरीज़ काफी यूनिक और
[0:20] डरावनी है। और हाँ, अगर आप लोग ये सोच रहे
[0:23] हैं कि स्पोक कास्ट पर ओरिजिनल स्टोरीज़ क्यों नहीं आ रही?
[0:27] सो लेट मी जस्ट टेल यू कि आप लोगों में से बहुत सारे लोगों ने
[0:31] अपनी इतनी इंटरेस्टिंग घटनाएं हमारे साथ शेयर की हैं।
[0:34] एंड वी बोथ फील दट इस ओनली फेयर कि हम आपकी स्टोरीज़ हमारे।
[0:37] स्पोककस कम्यूनिटी और बाकी हॉरर स्टोरी लवर्स के साथ भी शेयर करते
[0:42] रहे और मेरी ओरिजिनल स्टोरीज़ वो तो आपके लिए हर अलटरनेट वीक आती
[0:48] रहेंगी। सो चलिए अब बिना किसी देरी के आप
[0:52] बीती शुरू करते हैं ये पहली घटना। हमारे साथ मुंबई से करण ने
[0:58] व्हाट्सएप पर शेयर की है। वैसे करण ने हमारे साथ अब तक एक
[1:02] नहीं चार चार कृपी इंसिडेंट शेयर की हैं, जिसमें से एक इंसिडेंट आप
[1:07] ऑलरेडी आप बी टी पार्ट वॅन में सुन चूके हैं, करण थैंक यू फॉर
[1:12] शेयरिंग सो मेनी इंटरेस्टिंग इन्सिडेंट्स।
[1:15] ये घटना उनकी अपने साथ घटी थी जब वो अपने गांव गए थे।
[1:19] उन्होंने गांव का कोई नाम तो स्पेसिफाई नहीं किया है, पर चलिए
[1:23] अब मैं इस घटना को उनके शब्दों में आपके सामने रखने की कोशिश
[1:27] करूँगी। सुनते रहिए स्पोक कास्ट अवि और
[1:33] मंजिल के साथ। मेरा नाम करन है और ये घटना 2020
[1:43] की है। मेरी नानी के घर पर एक फंक्शन था
[1:46] और मैं और मेरा परिवार गांव गए थे।
[1:49] गांव में मेरा एक दोस्त था बिट्टू।
[1:52] बिट्टू मेरी चाची का लड़का था जो मेरे दादी के घर के पास ही रहता
[1:57] था। गांव जाने के कुछ दिन पहले जब
[2:00] मेरी 1 दिन बिट्टू से बात हुई तब उसने मुझे कहा कि इस बार जब मैं
[2:04] गांव जाऊंगा तब वो मुझे गांव घूमाने ले जाएगा।
[2:08] मैं भी मान गया प्लान के हिसाब से कुछ दिन बाद।
[2:12] हम लोग गांव गए। पहले कुछ दिन हम लोगों ने नानी के
[2:16] यहाँ का फंक्शन अटेंड किया और फिर एक 2 दिन के लिए दादी के यहाँ गए।
[2:21] जब हम लोग दादी के यहाँ पहुंचे, मैंने तुरंत बिट्टू को कॅाटाक्ट
[2:25] किया पर बिट्टू तब बीज़ी था, वो मुझे कुछ घंटों में मिलने आने
[2:30] वाला था। उसने मुझसे थोड़ा आराम करने को
[2:33] कहा। नानी के यहाँ से दादी के यहाँ आने
[2:35] के लिए बस राइड से काफी डायरिंग थी सो मैंने भी सोचा कि खाना खाकर
[2:41] थोड़ा रेस्ट कर लेते हैं। मैं जब उठा तब करीब दोपहर के 3:00
[2:45] बज रहे थे। मैं फ्रेश होकर तुरंत चाची के घर
[2:48] पहुंचा बिट्टू से मिलने। पर वह अब भी घर में नहीं था।
[2:52] वह बाहर दुकान पर गया था और आधे घंटे में लौटने वाला था।
[2:56] तब तक साढ़े 4:00 बज चूके थे। उसके लौटने पर कुछ देर बात चीत
[3:00] करने के बाद मैंने उसे मुझे गांव और बगिया घूमाने ले जाने को कहा।
[3:05] पर पता नहीं क्यों वह हिचकिचाया वह बोला।
[3:09] करण भाई। अभी शाम हो गई है, वहाँ अभी जाना
[3:13] ठीक नहीं होगा। मुझे कुछ समझ नहीं आया।
[3:16] अभी वहाँ जाना ठीक नहीं होगा। इस बात का क्या मतलब?
[3:19] गर्मियों के दिन चल रहे थे और गाँव में काफी गर्मी थी।
[3:23] मैंने तो ये सुना था कि गाँव की बगिया में मौसम हमेशा अच्छा होता
[3:27] है। आसपास बहुत पेड़ और जंगल थे, तो
[3:29] वहाँ हमेशा ठंडी हवा चलती है और अभी तो शाम का समय था वहाँ का
[3:34] मौसम तो और भी सुहाना हो गया होगा।
[3:37] फिर बिट्टू वहाँ जाने से मुझे क्यों मना कर रहा था मुझे परेशान
[3:42] देख उसने धीमी आवाज में मुझे रोका और कहा कि।
[3:46] घर के बाहर चलकर बात करते हैं। उसे डर था कि अगर चाची ने सुन
[3:50] लिया कि वह दोनों वहाँ जाने की बात कर रहे हैं तो मुसीबत हो
[3:54] जाएगी। उसका ये जवाब सुनकर मुझे थोड़ा
[3:57] अजीब लगा और मैंने उससे पूछा कि वो चाची के सामने ये बात करने से
[4:01] क्यों मना कर रहा था? हम लोग कुछ गलत काम तो नहीं कर
[4:05] रहे थे? बस गांव के बगिया में जाने की बात
[4:08] कर रहे थे, तब बिट्टू ने मुझे जो कहा उसने मुझे थोड़ा डरा दिया।
[4:14] उसने कहा कि गांव वालों का कहना था कि वहाँ बगिया के पास एक लड़की
[4:20] की आत्मा घूमती थी और गांव वाले उसे सरकटी।
[4:25] चुड़ैल कहते थे बहुत लोगों ने उसे देखा था।
[4:32] सब लोग उससे बहुत डरते थे और इसीलिए शाम को क्या दिन में भी
[4:37] लोग वहाँ जाने से डरते थे? ये सब सुनकर मुझे थोड़ा डर तो लगा
[4:41] पर मैंने बात को हँसी मजाक में डाल दिया।
[4:43] क्योंकि गांव में हर चार कदम पर ऐसी कुछ न कुछ डरावनी घटनाओं के
[4:47] बारे में लोग बात करते ही रहते हैं।
[4:50] तो मैं मजाक करते हुए उसे वहाँ जाने के लिए कन्विंस करने लगा।
[4:54] लेकिन बिट्टू नहीं ऐसा उसने जो मुझे कहा था शायद उस बात पर उसे
[5:00] विश्वास था। फिर भी।
[5:03] हम दोनों घर से निकले और छुपते छुपाते करीब 45 मिनट्स के बाद
[5:08] बगिया में पहुंचे। वह जगह वाकई में बहुत सुंदर थी।
[5:15] गर्मियों का मौसम था पर वहाँ का मौसम गांव के मौसम से ज्यादा ठंडा
[5:20] और सुहाना था। चारो तरफ।
[5:22] कई तरह के पेड़ थे और जमीन पर सूखे हुए पत्ते पड़े थे।
[5:26] एक हल्की सी ठंडी हवा चल रही थी। वहाँ मैं और पिट्टू बात करते करते
[5:31] आगे बढ़ने लगी। चारों तरफ इतनी शांति थी कि हमारे
[5:36] पैरों के नीचे दबे सूखे पत्तों की आवाज़ हमें साफ सुनाई दे रही थी।
[5:42] पर पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगने लगा कि हमारे पैरों की आवाज के
[5:47] साथ साथ और भी कुछ पैरों की आवाज वहाँ आ रहे थे।
[5:51] पैरों के नीचे पत्ते कुचलने की आवाज सिर्फ मेरे और बिट्टू के
[5:55] नहीं थे। वहाँ हमारे अलावा कोई और भी था।
[6:01] मैंने बिट्टू को ध्यान से सुनने को कहा उसने भी वो आवाज़ सुनी पर
[6:05] हमें आसपास कोई नहीं दिखा। हम दोनों को थोड़ा डर तो लगा पर
[6:11] हमने सोचा कि गांव का इलाका है तो हो सकता है कि आसपास कोई लकड़ी
[6:16] इकट्ठा कर रहा हो या फिर कोई गांव वाला शाम को घर लौट रहा हो।
[6:21] हमने इस बात पर ज्यादा ध्यान न देने की सोंची और आगे बढ़ने लगे।
[6:27] बातें करते करते अब हम बगिया से बाहर निकल चूके थे, अब सामने जंगल
[6:32] का रास्ता था और वहाँ बगिया से गर्मी थोड़ी ज्यादा थी।
[6:36] हम दोनों को काफी गर्मी लगने लगी। और तभी अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे
[6:42] ठंडी हवा का झोंका मुझे छूकर चला गया वो वो एक अजीब सा एहसास था
[6:50] इतनी गर्मी में अचानक से ठंडी हवा को फेल कर मैंने बिट्टू को आए उस
[6:55] ठंडी हवा के बारे में तुरंत बताया।
[6:58] और मेरी बात सुनकर उसके चेहरे का रंग मानो उड़ गया क्योंकि बिट्टू
[7:04] को कोई ठंडी हवा का झोंका महसूस नहीं हुआ था।
[7:08] अचानक उसकी आँखों में डर वापस आ गया था और बिना वक्त कब आए?
[7:13] उसने मुझे वहाँ से तेजी से उसके साथ घर लौटने को कहा।
[7:17] मैंने उसे रोक कर पूछने की कोशिश की पर उसने मुझे कुछ भी नहीं
[7:20] बताया। बस कहा कि वो मुझे सब कुछ बताएगा।
[7:24] यहाँ से निकल कर उसने मुझे उसके साथ वहाँ से जल्द से जल्द घर
[7:28] लौटने को कहा। बिट्टू के चेहरे पर डर साफ दिख
[7:31] रहा था। मुझे और इस वजह से अब मुझे भी डर
[7:35] लगने लगा था। शाम हो चुकी थी।
[7:38] हमारे चारों तरफ जंगल का इलाका था तो चारों तरफ अब धीरे धीरे अँधेरा
[7:43] फैल रहा था। हम दोनों तेजी से जंगल के रास्ते
[7:47] आगे निकलने लगे कि तभी अचानक मुझे एक और आवाज सुनाई दी।
[7:52] हम जीस रास्ते पर चल रहे थे। उसके दोनों तरफ पेड़ थे।
[7:56] पता नहीं क्यों? पर मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई
[7:59] थपेड़ों के पीछे से हमारे साथ साथ चल रहा था।
[8:02] जैसे जैसे किसी औरत ने पायल या कोई गहने पहने हो और वह चल रही हो
[8:08] जिससे की एक झनछन सी आवाज आ रही थी।
[8:11] मैंने बिट्टू को रोका और समझने की कोशिश की कि अब ये नई आवाज किस
[8:15] चीज़ की है। क्योंकि मुझे अब भी आसपास कोई
[8:18] नहीं दिख रहा था पर आवाज साफ सुनाई दे रही थी।
[8:22] बट बेटू बिना कुछ बोले तेजी से आगे भागने लगा मानो वो वहाँ 1
[8:27] मिनट नहीं रुकना चाहता हूँ पर मैं तभी भी खुद को समझा रहा था मुझे
[8:32] तभी याद आया कि शायद गांव की कोई औरत।
[8:35] जिसके घर में वाशरूम नहीं था वो शायद अंधेरे में आयी हो।
[8:38] वहाँ के गांव में ऐसा होना बहुत ही नॉर्मल था।
[8:41] शायद उन्हीं औरतों की आवाज मुझे सुनाई दे रही हो, पर बिट्टू ने
[8:46] मेरी इस थियरी पर कोई रिएक्शन नहीं दिया, ना वो रुका वो अब और
[8:51] घबरा गया था और तेजी से आगे चला जा रहा था।
[8:54] मानो उसने ठान लिया हो की वो मेरे किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं
[8:58] देगा। वहाँ मैं भी उसके पीछे पीछे अब
[9:00] तेजी से चलने लगा। ये जगह अब सच में मुझे भी डरा रही
[9:04] थी। हम लोग तब तक जंगल के ऐसे हिस्से
[9:07] में पहुँच गए थे जो थोड़ा ज्यादा घना था।
[9:10] वहाँ काफी अंधेरा था। और अब मुझे वो आवाज और ज्यादा
[9:15] ज़ोर से सुनाई देने लगी मानो कोई हमारे साइड में नहीं बल्कि अब
[9:21] हमारे ठीक पीछे चल रहा हो। मैं डर कर बिट्टू को आवाज देने
[9:25] लगा पर बिट्टू नहीं रुका क्योंकि शायद उसने भी वो आवाज सुनी थी।
[9:31] आगे एक मोड़ था जहाँ जंगल खत्म होने वाला था वहाँ रास्ते के
[9:35] दोनों तरफ बास यानी बैम्बू के पेड़ लगे थे।
[9:39] हम लोग अब उस रास्ते पर मुड़े ही थे कि अचानक मैंने देखा कोई उन
[9:43] बास के थपेड़ों के पीछे से हमें देख रहा था।
[9:47] शायद शायद कोई औरत। वह अँधेरा बहुत था पर एक औरत का
[9:53] आकार मुझे थपेड़ों के बीच दिख रहा था।
[9:57] मैंने उस औरत को जैसे ही देखा, मैं इतना डर गया कि मेरे गले से
[10:02] एक जोरदार चीक निकल गई। मेरे चीख से जंगल गूंद उठा।
[10:09] मैं और बिट्टू अब बहुत तेजी से भागने लगे थे।
[10:13] पर पता नहीं कैसे अगले ही पल वो औरत हमारे सामने तेजी से भागते
[10:18] हुए आई और एक दम हमारे सामने आकर रास्ते पर चुपचाप खड़ी हो गई।
[10:24] बिट्टू और मैं वहीं जम गया डर से। हम दोनों की हालत खराब थी।
[10:30] वहाँ बहुत अंधेरा था और वो औरत बसे।
[10:33] काली परछाई सी ही लग रही थी, मुझे अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो
[10:39] रहा था। मैंने अपनी जिंदगी में किसी को
[10:41] इतना तेज दौड़ते हुए कभी नहीं देखा था।
[10:44] वो औरत एक पल में। उन थपेड़ों के पीछे से इस रास्ते
[10:49] पर दौड़कर कैसे आई? मुझे ये समझ ही नहीं आ रहा था।
[10:52] हम दोनों की हालत बहुत खराब हो गई थी।
[10:55] हम वहाँ से भाग जाना चाहते थे, पर हम दोनों एक इंच भी हिल नहीं पा
[11:00] रहे थे। एक इंच भी नहीं मानो मानो हमें
[11:04] पैरालायसिस हो गया हो। और तभी तभी मैंने एक ऐसी बात को
[11:09] नोटिस किया जिसने मेरा खून जमा दिया।
[11:15] उस अंधेरे रास्ते पर जो औरत खड़ी थी, उस औरत का शरीर तो मुझे दिख
[11:20] रहा था, पर उसका सिर नहीं। इससे पहले कि वह अंधेरे में ठीक
[11:28] से और कुछ देख पाता, एक शोर की आवाज आई।
[11:32] हमारे साइड में लगे बम्बू का एक पेड़ टूटा और ज़ोर से हमारे कदमों
[11:36] के पास गिर पड़ा। मानो मानोस औरत ने उसे किसी तरह
[11:40] से गिराया हो। खुद को बचाने के लिए हम लोग एक
[11:43] कदम पीछे हुए। और मेरा पैर किसी चीज़ में अटका
[11:46] और मैं जमीन पर गिर पड़ा या सर एक पत्थर से टकराया और मैं बेहोश हो
[11:52] गया। जब मेरी आंख खुली तब मैं घर पर
[11:58] था, हम दोनों कहाँ गए थे और क्या हुआ था, ये पूरी बात जानकर।
[12:03] घर पर सब लोगों ने हम दोनों पर बहुत चिल्लाना शुरू कर दिया पर
[12:08] मुझे अब भी उस औरत की कहानी नहीं पता थी।
[12:12] थोड़ी देर बाद जब माहौल शांत हुआ तब दादी ने पूरी कहानी बताई।
[12:18] बहुत साल पहले जब मेरी दादी शादी कर उस गांव में आई थी।
[12:23] तब जंगल के उस हिस्से में जहाँ बाँस के पेड़ थे वहाँ एक लोहार
[12:28] अपनी बीवी के साथ रहता था। उसकी बीवी बहुत सुंदर थी, वो उसे
[12:32] बंगाल में मिला था जब वो वहाँ किसी काम से गया था।
[12:35] उन दोनों की लव मैरिज हुई और वो उसे अपने साथ गांव ले आया।
[12:40] समय बीतता गया और वो लोहार यहाँ गांव में काम करने लगा।
[12:44] वो सब के लिए कुल्हाड़ी, कोयता और खेत में लगने वाले बाकी औजाद
[12:48] बनाया करता था। 1 दिन जब वो काम खत्म कर घर लौट
[12:52] रहा था तब उसने अपनी बीवी को किसी दूसरे आदमी के साथ इंटिमेट
[12:56] सिचुएशन में देखा। उसे इतना गुस्सा आया कि उसने
[13:00] फांसी पड़े एक कोयते को उठाया और तब तक अपनी बीवी के गले पर मारता
[13:04] रहा जब तक उसकी बीवी का गला कट कर अलग नहीं हो गया।
[13:09] कुछ घंटों बाद पुलिस आई और उसे ले गए।
[13:12] लाश को भी ठिकाने लगाया गया पर कुछ दिनों बाद से।
[13:16] उस घर के बाहर से गांव वालों को रात में अजीब अजीब आवाजें सुनाई
[13:20] देने लगी। कभी घुंघरूओं की आवाज तो कभी कुछ
[13:24] और गांव में अफवाह फैल गई कि वहाँ कुछ है।
[13:27] कुछ लोगों ने तो वहाँ एक बिना सर वाली औरत को भी देखा था।
[13:32] तब वहाँ पूजा पाठ करवाई गई। उस घर को भी तोड़ दिया गया और।
[13:36] वह पेड़ पौधे लगा दिए गए। पर उस औरत की आत्मा कभी तृप्त
[13:40] नहीं हुई। आज भी वह सरकटी औरत लोगों को
[13:44] दिखाई देती है। मैं सोच में पड़ गया तो क्या उस
[13:49] दिन बिट्टू और मैंने भी उस सरकटी औरत की आत्मा को ही देखा था?
[13:53] क्या पता जो भी था। वो एक बहुत ही तरावना हादसा था
[13:58] जिसे मैं चाह के भी आज तक भूल नहीं पाया हूँ।
[14:05] थैंक यू करण एक और इंटरेस्टिंग घटना शेयर करने के लिए है वंडर कि
[14:10] क्या अभी भी वहाँ वो औरत लोगों को दिखाई देती है?
[14:13] यह काफी क्रीपी इंसिडेंट था और आपने इसे काफी डीटेल में शेयर
[14:18] किया जिसके लिए थैंक यू सो मच गाइस आपको कैसी लगी यह घटना?
[14:22] आई होप यू लाइक्ड इट? वैसे कहीं जाइएगा मत क्योंकि एक
[14:27] और घटना अभी भी बाकी है। यह घटना हमारे साथ।
[14:31] दिव्यांश ने ईमेल पर शेयर की है। उन्होंने अपनी लोकेशन तो शेयर
[14:35] नहीं की पर ये घटना उनके दादी के साथ हुई है जो पंजाब से थे।
[14:40] और हाँ, इस घटना को उन्होंने बहुत ही अच्छे से डीटेल में इंग्लिश
[14:44] में लिखकर भेजा था। पर लिसनर्स की सुविधा के लिए हम
[14:48] लोगों ने इसे हिंदी में लिखने की कोशिश की है।
[14:50] आइए। अब उनके शब्दों में इस घटना को
[14:54] सुनते हैं। छः या 7 साल पहले मेरे परिवार के
[15:00] इतिहास का एक भयानकंज हमारे सामने आया।
[15:04] मेरी बुआ की माँ यानी दादी जो पंजाब की रहने वाली थी, हमें पता
[15:09] चला। कि उनकी लाइफ हमेशा से ही फिजिकल
[15:13] अब्यूज और हरस्मेंट जैसे अत्याचारों और पीड़ा से भरी हुई
[15:17] थी। उनका पति यानी दादाजी बहुत ही
[15:21] कठोर निर्दयी व्यक्ति थे, जो हमेशा अलग अलग तरीकों से उन्हें
[15:26] परेशान किया करते, टॉर्चर किया करते।
[15:28] उन्हें बहुत कष्टते थे। कई सालों तक ये सब सहने के बाद
[15:33] मेरी दादी ने हिम्मत दिखाई और अपनी बेटियों के साथ जोधपुर भागकर
[15:38] कहीं पर शरण ली। जैसे जैसे साल बीते गए मेरी दादी
[15:42] अपनी तीन बेटियों के भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करती रही।
[15:46] अपने अतीत के भयानक सपनों को। पीछे छोड़ने की पूरी कोशिश करती
[15:50] रही। वो पर हमें नहीं पता था कि उनकी
[15:54] जिंदगी का ये अंधेरा अभी भी खत्म नहीं हुआ था और उसका एक बहुत ही
[15:59] डरावना अंश हम सब देखने वाले थे। एक मनहूस दोपहर को हमें खबर मिली
[16:06] दादी की मौत की। उनकी अस्पताल में मौत हो गई थी।
[16:11] हमारे सारे घर में एकाएक शोक का माहौल फैल गया।
[16:15] सभी बहुत दुखी थे। एक मनहूसियत सी चारों तरफ फैली
[16:20] हुई थी। मैं रात को सोने गया तो मुझे काफी
[16:25] बेचैनी होने लगी। दादी के साथ घटी घटनाओं की बातें
[16:29] एका एक मेरे दिमाग को घेरे हुए थे।
[16:32] एक अजीब से डर का अहसास मुझे हो रहा था, जो मुझे पहले कभी नहीं
[16:37] हुआ था। मैं बिस्तर पर तो था पर पूरी रात
[16:40] मुझे ठीक से नींद ही नहीं आई। मैं इधर उधर पलटता रहा।
[16:45] फाइनली सुबह थोड़ी बहुत आग लगी ही थी कि अचानक सात या 8:00 बजे के
[16:50] करीब मेरी नींद खुली। पूरे फ्लैट में एक अजीब सा
[16:54] सन्नाटा था। घर में कोई नहीं था और मुझे जैसे
[16:59] ही दादी की मौत की खबर याद आई, पता नहीं क्यों?
[17:02] अचानक एक अनजान डर का एहसास मुझे होने लगा।
[17:05] फिर से ऐसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
[17:11] मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि ऐसे सिचुएशन में तो मुझे दुखी होना
[17:15] चाहिए था, फिर मुझे डर किस बात का लग रहा था?
[17:18] घबराहट में मैंने हनुमान चालीसा का जाप करना शुरू कर दिया।
[17:22] जिससे मैं खुद को शांत कर सकूँ। मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि
[17:26] मुझे यह अनजान डर क्यों महसूस हो रहा था?
[17:29] आज हिम्मत जुटाकर मैं उठा और तैयार होकर सीधा अपनी दादी के घर
[17:33] पहुँच गया, जहाँ पहले से ही एक भीड़ जमा थी।
[17:36] सब लोग शोक में डूबे हुए थे। सब दादी के साथ बिताए अपने वक्त
[17:40] को याद कर रहे थे। कुछ लोग रो रहे थे।
[17:44] शो का एक गहरा साया सबके चेहरों पर साफ नजर आ रहा था।
[17:49] क्रियाकर्म के बाद सब घर लौटे। बड़ी मुश्किल से किसी तरह उद्दीन
[17:54] बीता। जैसे ही रात हुई, मैं अपने भाई
[17:57] बहन के साथ सोने चला गया। लेकिन अचानक पता नहीं क्यों मुझे
[18:02] फिर से वहीं सुबह वाले डर ने घेर लिया।
[18:08] मुझे अब ऐसा लग रहा था कि कोई मुझे देख रहा था उस रूम में पर पर
[18:15] पता नहीं कौन। क्योंकि उस रूम में तो मेरे भाई
[18:17] बहन थे और वो मेरी तरफ नहीं देख रहे थे।
[18:20] घर में भी आने वाली हर आती जाती आवाज अब मुझे डरा रही थी।
[18:25] दीवारों पर काले साए वो भी मुझे डरा रहे थे।
[18:29] मुझे महसूस होने लगा जैसे कोई अनजान ताकत वहाँ मौजूद थी उस घर
[18:35] में। उस कमरे में और डर से मेरा दम
[18:39] घुटने लगा। शायद शायद कुछ होने वाला था बस
[18:43] मुझे पता नहीं था क्या और अगले दिन मेरा डर सही निकला।
[18:52] अगले दिन सुबह एक अजीब सी घटना घटी।
[18:55] दादाजी यानी वही आदमी जिसने अपनी पूरी जिंदगी दादी को परेशान किया
[19:00] था। अचानक बिना किसी निशान छोड़े अपने
[19:02] कमरे से गायब हो गए। सुबह के साढ़े 7:00 बजे का समय था
[19:06] और पूरे घर में हलचल मच गई। लोग बेचैनी से उन्हें ढूंढने लगे।
[19:12] हर कोना, हर कमरा। तलाश किया जा रहा था, लेकिन अब तक
[19:17] उनका कहीं कुछ पता नहीं चल रहा था।
[19:19] मैं भी दूसरों की तरह उन्हें ढूंढ रहा था कि तभी अंधेरी सीढ़ियों पर
[19:24] चढ़ते हुए मुझे एक हल्की सी ठंडी हवा का झोका महसूस हुआ और इससे
[19:29] पहले कि मैं कुछ समझ पाता, मैंने उन्हें देखा मेरी।
[19:34] दादी को दादी अँधेरी सीढ़ियों पर खड़ी थी, उनकी आंखें बिल्कुल खाली
[19:41] थी, दुख से भरी हुई और उनके चेहरे पर एक गुस्से का भाव था।
[19:47] ऐसा लग रहा था जैसे वो लौट आई हो अपने अत्याचारी का सामना करने के
[19:51] लिए। मेरे पैर एक जगह पर जम गए, मैं ना
[19:54] भाग पा रहा था, ना कुछ बोल पा रहा था।
[19:56] फिर अचानक मुझे वहाँ दादाजी दिखे और अगले ही पल मेरी दादी ने
[20:01] उन्हें पकड़ लिया और सीढ़ियों की तरफ हँसीटना शुरू कर दिया।
[20:07] दादाजी की चीखें पूरे मकान में गूंजने लगीं।
[20:12] लेकिन दादी की ताकत और गुस्से के सामने आज वो बिल्कुल कमजोर लग रहे
[20:17] थे जैसे जैसे वो सीढ़ियों चढ़ रही थी, दादाजी की चीखें बढ़ती जा रही
[20:22] थी और लोग जमा होने लगे थे। वो उन्हें ऊपर ले जा रही थी।
[20:27] तीसरी मंजिल पर वही जगह। जहाँ दादाजी ने जिंदगी भर उन पर
[20:33] अत्याचार किए थे। डर के मारे कुछ लोग पंडित जीके
[20:38] पास भागे जो आत्माओं से संपर्क करने में सक्षम माने जाते थे।
[20:42] पंडित जी तुरंत आए और उन्होंने पूजा का आयोजन किया।
[20:46] जैसे ही उन्होंने मंत्र उच्चारण शुरू किया।
[20:48] एक अजीब सी आवाज सबको सुनाई देने लगी।
[20:51] एक ऐसी आवाज जिसमें तुक और गुस्सा दोनों भरा था।
[20:56] तो तो कभी मेरे लिए एक साड़ी भी नहीं लाया, तुने मुझसे सब कुछ छीन
[21:04] लिया, अब अब तेरी बारी है। तेरी बारी है अब।
[21:09] दादी की आवाज सन्नाटे में गूंज रही थी।
[21:13] हर कोई डरा हुआ था, किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इस
[21:17] घर में चल क्या रहा था? तब पंडित जी ने पूजा के सम्मान
[21:20] में दादी को एक नई साड़ी भी चढ़ाई।
[21:22] उनकी कभी पूरी ना हुई इच्छाएं का मान रखने के लिए।
[21:27] और पूजा के दौरान भी सबको खरका महसूस हो रहा था।
[21:31] पूरी इमारत में दादी की आवाज और दादाजी की चीखें अब भी गूंज रही
[21:35] थी। जैसे वो मरी नहीं हो, वो लौट आई
[21:38] हो अपने सालों के दर्द का बदला लेने के लिए।
[21:46] पता नहीं वो दिन कैसे निकला। धीरे धीरे सब शांत हो गया पर उस
[21:51] दिन के बाद वो घर कभी पहले जैसा नहीं रहा।
[21:56] जब भी मैं वहाँ जाता दिन हो या रात, मुझे हमेशा वहाँ जाने से डर
[22:01] लगने लगता। घर की दीवारें जैसे आज भी दादी का
[22:04] दुख अपने अंदर समेट कर बैठी थी। रात को मैं जब भी वह सोता, मुझे
[22:10] अक्सर एक हल्की सी आवाज सुनाई देती जैसे कोई मुझे कोई मुझे बुला
[22:14] रहा हो और हर बार मेरे पसीने छूट जाते दिल दिल जोरों से धड़कने
[22:20] लगता। एक ठंडी हवा मानो मुझे खेल लेती
[22:25] एक अजीब सा अहसास जैसे दादी की आत्मा आप भी कहीं आसपास भटक रही
[22:31] हो और तब जाकर मुझे समझ आया कि कुछ आत्माएं कभी मुक्ति नहीं पाती
[22:38] शायद। शायद मेरी दादी की आत्मा आज भी उस
[22:43] घर में फंसी हुई है। थैंक यू फॉर शेयरिंग दिव्यांशु
[22:50] आपकी दादी सच में काफी स्ट्रांग थी और उनके साथ जो हुआ दट, वास्
[22:54] रियली सैड बट ही वुड लाइक टु नो कि आपके दादाजी के साथ उस दिन
[22:59] क्या हुआ? वॉज़ ही ओके आई जस्ट होप की हमारी
[23:03] तरह हमारी ऑडिएंस को भी आपका यह इंसिडेंट काफी इंटरेस्टिंग लगा हो
[23:08] और इसी के साथ आज का एपिसोड यहीं पे खत्म होता है।
[23:12] गाइस थैंक यू फॉर शेयरिंग दीज़ इन्सिडेंट्स विथ उस अगर आप अपने
[23:16] साथ या अपने परिवार या दोस्तों के साथ।
[23:18] घटी कोई घटना हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो आप हमें व्हाट्सएप
[23:22] या इंस्टाग्राम पर कॅाटाक्ट कर सकते हैं।
[23:24] डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में है लाइक वी ऑलवेज सेव यू लाइक ए पॉडकास्ट
[23:29] रेटिंग देना प्लीज़ मत भूलिए इट मैटर्स और हाँ, आज के पूल में भी
[23:34] आप जरूर वोट दीजिएगा। अगले हफ्ते।
[23:37] एक ओरिजिनल स्टोरी के साथ वी विल बी बेक तब तक सुनते रहिये इस
[23:41] पोकास्ट और हाँ फाडू, फ्राइडेज पर एक नया एपिसोड भी आ चुका है गो
[23:47] एंड चेकआउट दी लिंक इन दी डिस्क्रिप्षन मैं हूँ मंजिला और
[23:51] आप सुन रहे हैं इस पोकास्ट, अवि और मंजिला के साथ।
[23:57] सुनते रहिए स्पूक कास्ट अवि और मंजिला के साथ।

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