# Ep 76 - AAPBEETI 21 by SPOOKCAST - 5 REAL HORROR STORIES | Real Stories | Sachi Ghatana |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 29 Mar 2026, 45 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/117648897/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2026-2-30%2F421059059-44100-2-56aa412f4ed02.mp3

Story: In this episode, we bring you 5 True Desi Horror Stories from different corners of India — each one stranger and more unsettling than the last. 🔹The first incident comes from the villages of Punjab, where a man encountered something on a lonely path… something that couldn’t be seen, but could definitely be heard. 🔹The second story takes us to the tea estates of Assam — where a simple object found on the ground led to a terrifying experience that still raises questions. 🔹The third incident is from a small village in Bundelkhand, where a long-followed ritual revealed something that perhaps was never meant to be witnessed. 🔹The fourth story comes from the backwaters of Kerala — where a man’s quiet journey took a disturbing turn when he realized he might not be alone. 🔹And the final story comes from Bihar — about a dark and mysterious presence that is said to dwell beneath the water… waiting. So dim the lights, put on your headphones, and get ready… because these stories might stay with you longer than you expect. Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana |Chakwa |Chakhwa |Chakva | Chalava | Brahmarakshas | Munjya |Brahadaitya |Ambulance Horror | Driver Story | Panduba | Narrated by : Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Share your incidents with us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:11] और आप सुन रहे हैं स्पोक कास्ट। दोस्तों नमस्कार, मैं हूँ मंजुला
[0:24] एंड वेलकम बेक टु दी स्पेशल एपिसोड ऑफ़ आपबीती बाई स्पोककास्ट
[0:30] जहाँ मैं कुछ ऐसी सच्ची घटनाएं शेयर करती हूँ जो स्पोककास्ट
[0:34] लिसनर्स ने। हमारे साथ शेयर की है।
[0:37] वैसे अगर आप सोच रहे हैं कि यह स्पेशल एपिसोड किस खुशी में है तो
[0:43] मैं आप सबको बता दूँ कि इस बुक कास्ट पर अब तक 75 एपिसोड पूरे हो
[0:49] चूके हैं एंड विथ टोडेस एपिसोड। वी अरे?
[0:52] ऑफिशियली लॉन्चिंग सीज़न 4 ऑफ स्पोक कास्ट जिसमें आपके लिए है
[0:58] बहुत सारी डरावनी ओरिजिनल स्टोरीज़, आपबीती के और नए एपिसोड
[1:03] और कुछ नए सरप्राइजेज़ भी जिनके बारे में आपको जल्द ही पता लगेगा।
[1:09] सो। इफ यू लव स्पोक कास्ट देन स्प्रेड
[1:12] दी वर्ड हमारे पॉडकास्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए।
[1:16] उन लोगों के साथ जिन्हें डरावनी कहानियों पसंद हैं।
[1:20] और हाँ, हमें फॉलो करना मत भूलिए। चलिए अब जल्दी से शुरू करते हैं
[1:27] आज का ये स्पेशल एपिसोड। सो व्हाट ऑन युअर हेडफोन्स गेट
[1:32] रेडी क्योंकि आज के आप भी देखा एपिसोड शुरू होने जा रहा है।
[1:42] आज की पहली घटना हमें भेजी है लुधियाना से अमनप्रीत कौर ने।
[1:48] ये घटना उन्हें उनके दादाजी ने सुनाई थी।
[1:51] ये तब की बात है जब उनके दादाजी जवान थे और वह पंजाब हरियाणा
[1:56] बॉर्डर के एक छोटे से गांव में रहा करते थे।
[2:00] चलिए इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की
[2:06] कोशिश करूँगी। मेरा नाम अमनप्रीत है और ये घटना
[2:14] मैंने अपने दादाजी से कई सालों पहले सुनी थी जब वो जिंदा थे।
[2:20] ये उनके गांव में तब घटी थी जब वो जवान थे।
[2:26] मेरे दादाजी कहते थे कि उन दिनों भिंड की राते हाथ जैसे नहीं थी,
[2:32] तब न बिजली थी, न बहुत सारे लोग। सूरज ढलने के बाद पूरा इलाका एक
[2:39] गहरी भारी खामोशी में डूब जाता था।
[2:44] ये किस्सा उनके पड़ोसी गुचरण पाजी के साथ घटा था।
[2:49] 19 सिक्सटीज का वक्त था गुचरण पाजी एक शाम काफी देर से शहर से
[2:55] लौट रहे थे। सूरज टूट चुका था पर चाँद की
[3:00] रौशनी में वो धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे।
[3:04] गांव के रास्ते की हालत बहुत खराब थी।
[3:07] रास्ते के नाम पर कच्ची पगडंडी थी, जिसके दोनों तरफ सरसों के खेत
[3:13] थे और उषाम खूब तेज धूल भरी हवा चल रही थी।
[3:19] गुर्जर पाची अपनी साइकिल पर थे। रास्ते की हालत देख वो साइकिल से
[3:25] उतर गए और पैदल ही साइकिल घसीटते हुए आगे बढ़ने लगे।
[3:31] वो अंधेरे में कुछ देर तक शांति से चलते हुए आगे बढ़ ही रहे थे कि
[3:36] तभी अचानक उन्हें अपने पीछे से। एक अजीब सा शोर सुनाई दिया।
[3:44] पहले होने लगा शायद शायद हवा है या उन्हें कोई भ्रम हो रहा है पर
[3:51] धीरे धीरे वो आवाज़ काफी साफ होने लगी।
[3:55] उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे एक बोहत बड़ा पशुओं का।
[3:59] उनके पीछे आ रहा था। उन जानवरों के पीतल की घंटियों की
[4:05] टन टन और पैरों के जमीन पर पड़ने की आवाज बिल्कुल साफ सुनाई दे रही
[4:12] थी। साथ ही एक भारत की आवाज भी आ रही
[4:15] थी जैसे कोई चरवाहा अपने। जानवरों को हाक रहा था गुरुचरण
[4:22] पाछ को अजीब लगा क्योंकि गांव के चरवाहे अँधेरा होने के पहले ही
[4:28] अपने जानवरों को अक्सर वापस ले आया करते थे।
[4:31] अँधेरा होने के बाद कोई चरवाहा कभी घर नहीं लौटा था वो।
[4:38] अब रुक कर और उन्होंने पीछे मुड़ कर देखा पर अंधेरे में उन्हें बस
[4:43] चारों तरफ काफी धूल उठती हुई नजर आई।
[4:48] आगे रास्ता तंग था तो वो खेत के किनारे एक पुराने पेड़ के नीचे
[4:54] खड़े हो गए ताकि। उन जानवरों के झुंड को रास्ता दे
[4:58] सके। उन जानवरों के पैरों की आवाज़ जब
[5:02] उनके और करीब आये तो चाँदनी की हल की रौशनी में उन्होंने उस धूल के
[5:08] गुब्बारे को फिर से मुर कर के कहा पर इस बार इस बार उनकी सास बिलकुल
[5:15] रुक गयी। क्योंकि वह धूल का गुबारा बड़ी
[5:19] तेजी से उनके पास तो आ रहा था, साथ ही जानवरों की आवाज भी बढ़ती
[5:26] जा रही थी और उस धूल के बीच में उस धूल के गुब्बारे के बीच में
[5:32] कुछ नहीं था। ना कोई जानवर, ना कोई चरवाहा
[5:40] गुरचरन पाजी के पैर से वही जम गए। चारो तरफ धूल ऐसे उड़ रही थी जैसे
[5:47] वह भारी शरीर वाले कई जानवर चल रहे हों।
[5:53] मिट्टी में नए नए पैरों के निशान अपने आप बन रहे थे।
[5:58] जानवरों की हल्की हल्की आवाज भी आ रही थी पर वहाँ ना एक भैस थी ना
[6:04] कोई गाय ना कोई चरवा। जब वो धूल का गुमारा गुजरन बाजी
[6:11] के बिल्कुल पास से गुजरा, उन्हें हवा का एक बहुत तेज दबाव महसूस
[6:17] हुआ और उन्हें पशुओं के शरीर की एक काफी तेज बदबू भी आने लगी।
[6:24] गुजरन बाजी दर्द से कांपते हुए। बस एक मूर्ति की तरह चुपचाप खड़े
[6:31] भी सब देखते रहे। धीरे धीरे वो झुंड वहाँ से गुजर
[6:36] गया। घंटों की आवाज दूर होती गई और वो
[6:40] धूल का गुब्बारा देखते ही देखते। आगे अंधेरे में कहीं खो गया।
[6:47] गुरचरन पाजी ये सब देख काफी घबरा गए थे और किसी तरह भागते दौड़ते
[6:54] अपने घर पहुंचे। उनका शरीर बिल्कुल बर्फ़ की तरह
[6:58] ठंडा पड़ चुका था। अगले दिन।
[7:04] जब उन्होंने पूरी बात गांव के बुजुर्गों को बताई तब उन्हें पता
[7:09] चला कि कई सालों पहले उस रास्ते से गुजर रहे एक जानवरों का काफी
[7:15] बड़ा काफिला मौत का शिकार हुआ था। लोग कहते हैं कि उन जानवरों पर उस
[7:21] दिन बिजली गिरी थी। और उनकी रूह आज भी हर मौसम में
[7:26] वही रास्ता तय करती है। वो किसी को दिखती नहीं है पर उनका
[7:33] बोझ आज भी मिट्टी महसूस करती है। उस रास्ते को गांव में गए भी
[7:42] रास्ता कहा जाता है। एक ऐसा रास्ता जिसे मौत के बाद भी
[7:47] उस चरवाहे और जानवरों की रूह पार करते थे, जो और किसी को नहीं
[7:54] दिखता था, बस उस चरवाहे और उसके जानवर ही उसे देख सकते थे।
[8:02] बुजुर्गों का कहना था कि वो सब किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते
[8:07] पर उस जगह पर डर इतना ज्यादा लगता है कि उस भारीपन से लोगों की
[8:13] तबियत खराब हो जाती थी इसीलिए अंधेरा होने के बाद वहाँ लोग नहीं
[8:19] जाते थे। मेरे दादाजी को गुज़रे अब 11 साल
[8:25] हो चूके हैं, पर आज भी जब हम उन्हें याद करते हैं उनका बताया
[8:30] ये किसान हम सबको याद आता है। अब तो उस जगह पर नए नए घर भी बन
[8:36] चूके हैं। पर मैं अक्सर ये सोचता हूँ कि
[8:39] क्या आज भी वहाँ ये सब आवाजें अंधेरे में किसी को सुनाई देती
[8:46] है? हे अवमान प्रीत थैंक यू फॉर
[8:52] शेयरिंग थिस विथ उस मुझे इंसुलिन काफी इंटरेस्टिंग लगा।
[8:57] हम अक्सर इंसानों की स्पिरिट्स के किस्से सुनते हैं, पर किसी जानवर
[9:02] की स्पिरिट से रिलेटेड कोइन्सिडेंट्स पोपकास्ट पर पहली
[9:06] बार शेयर किया गया है। वैसे मैं आप सबको बता दूं कि इस
[9:11] तरह की हंटिंग को रेजिडुअल हंटिंग कहते हैं जहाँ स्पिरिट्स।
[9:15] अपने किसी पुराने रूटीन को बार बार दोहराते हैं, ना वो किसी को
[9:20] कोई हार्म पहुंचाते हैं, ना किसी को डिस्टर्ब करते हैं।
[9:24] बस ये बार बार एक ही चीज़ को दोहराते हैं।
[9:28] जैसे इस केस में वो जानवरों और चरवाहों का काफिला एक ही जगह से
[9:34] गुजरता था। जिसे गांव वाले गाई भी रास्ता
[9:37] कहकर पुकारना थे। दोस्तों, क्या आपने कभी इससे पहले
[9:41] रेजिडुअल हंटिंग के बारे में सुना था?
[9:44] अगर हाँ तो हमें कॉमेंट्स में जरूर बताना ओके चलिए अब बर्थ है
[9:49] आज की अगली घटना की ओर। आज की दूसरी घटना हमें भेजी है।
[9:54] गुवाहाटी, असाम से देवो जीत ने ये घटना उनके पापा के साथ घटी थी।
[10:00] डिब्रूगढ़ असाम में जब वो अपने दोस्त के एक काफी पुरानी टी स्टेट
[10:06] में बहुत सालों पहले घूमने गए थे, चलिए।
[10:11] इस घटना को मैं अब देबोजीत के शब्दों में आप सबके सामने रखने की
[10:16] कोशिश करूँगी। मेरा नाम देबोजीत है, मेरे पापा
[10:24] अपनी पूरी लाइफ बहुत ही तर्कशील इंसान रहे हैं, पर आसाम के उन घने
[10:29] थी गार्डन्स ने। उन्हें कुछ ऐसा दिखाया जिसके बाद
[10:34] उन्होंने पूरी जिंदगी अंधेरे से दूरी बनाकर रखना ही बेहतर समझा।
[10:41] 19। नाइनटीज़ की बात है पापा को
[10:45] ब्रॉन्चाइल अस्थमा हो गया था डॉक्टर्स ने उन्हें।
[10:48] कुछ दिन के लिए किसी खुली हवा वाली जगह पर जाकर रेस्ट करने को
[10:53] कहा। सो पापा डिब्रूगढ़ में अपने एक
[10:56] पुराने दोस्त के टी स्टेट में रहने के लिए चले गए।
[11:02] मानसून का मौसम था और आसाम की बारिश तो सब लोग जानते ही हैं।
[11:07] दिन में भी तब। लगभग अंधेरा रहता था।
[11:11] पापा हर रोज़ मॉर्निंग और इवनिंग वक पर निकलते थे और जल्द ही
[11:15] उन्हें इसके फायदे नजर आने लगे। एक शान वो अपनी वॉक से लौट रहे
[11:21] थे। रास्ता काफी कच्चा था और दोनों
[11:25] तरफ की बुशेस की ऊंची ऊंची झाड़ियां थीं।
[11:29] ऑलमोस्ट अँधेरा हो चुका था। पास ही एक छोटा सा झरना बहता था,
[11:34] जिसकी आवाज पूरे रास्ते में गूंजती रहती थी।
[11:38] पापा पैदल चल रहे थे और उनके हाथ में टॉर्च थी, तभी अचानक उन्हें
[11:44] गीली मिट्टी के बीच रास्ते में। को चमकता हुआ दिखा।
[11:50] उन्होंने चुप कर देखा तो मिट्टी में एक पुरानी चांदी की पायल आंधी
[11:56] दबी हुई थी। उस पर काफी सुंदर पुरानी नाकाशी
[12:01] थी। पापा ने सोचा शायद किसी भी स्टेट
[12:05] में काम करने वाली औरत की पायल। काम करते वक्त गिर गई होगी तो
[12:10] उन्होंने उसे उठाकर अपनी जेब में रख लिया।
[12:13] सोचा घर जाकर अपने दोस्त को दे देंगे पर वो उसे अपनी जेब में रख
[12:18] कर आगे बढ़ने लगी। पहले दो 3 मिनट तो।
[12:27] सब ठीक रहा पर फिर अचानक उनकी सांस को अजीब होने लगा।
[12:35] उन्हें अपने कंधों पर एक अजीब सा एहसास एक अजीब सा भारीपन महसूस
[12:41] होने लगा। पहले उन्हें लगा शायद दिन भर की
[12:44] थकान है। या बारिश से भीगी हुई जाकेट का
[12:48] वजन उन्हें फील हो रहा है पर जैसे जैसे वो आगे बढ़ रहे थे वो पोज़
[12:55] वो भारीपन बढ़ने लगा। पापा को पता नहीं क्यों ऐसा लग
[13:00] रहा था जैसे कोई उनके कंधो पर पीछे से सवार हो गया था।
[13:05] और अपना पूरा वजन उनपर टाल रहा था।
[13:11] वो घबराकर रुक गए। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, हर
[13:16] तरफ टॉर्च मारी, पर वहाँ कोई नहीं था सिर्फ सुनसान रास्ता और बूटीक
[13:23] वर्सेज़। और धूप से आने वाली वो झरने की
[13:27] आवाज उन्हें अब डर लगना शुरू किया और वो तेजी से अपने दोस्त के
[13:32] बंगलो की तरफ बढ़ने लगे और जैसे ही वो थोड़ा और आगे बढ़े उनके पहर
[13:39] गीली मिट्टी में अस्वाभाविक रूप से गहरे धसने लगे।
[13:44] ऐसा लग रहा था जैसे वो अकेले नहीं बल्कि दो लोगों का वजन उठा कर चल
[13:49] रहे हो। उनकी सांस फूलने लगी और सीने में
[13:57] एक अजीब सा दबाव महसूस होने लगा। वो वहाँ से तेजी से भागकर निकलना
[14:03] चाहते थे। पर उस भारी पन की वजह से वो भाग
[14:08] नहीं पा रहे थे। थकान से उनका शरीर अब आगे झूटने
[14:12] लगा था। ईद टिल्ली होने लगी थी और सबसे
[14:17] डरावनी बात ये थी की मिट्टी में उनके जूतों के निशान इतने गहरे
[14:22] पड़ रहे थे। जैसे कोई हाथ ही वहाँ से गुजर रहा
[14:26] हो। अपने पैरों के इतने गहरे निशान
[14:30] देख पापा बहुत ज्यादा डरने लगे और तभी तभी उन्हें बहुत ही भारी और
[14:37] अंडा एहसास हुआ। उन्हें ऐसा महसूस होने लगा कि कोई
[14:42] उनके बिल्कुल खान के पास सांस ले रहा था।
[14:49] पापा वैसे ही काफी घबरा गए थे तो वो भगवान का नाम लेकर बस किसी तरह
[14:55] अब जल्दी जल्दी आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे और तकलीफ?
[15:00] उनको अचानक उस पायल का ख्याल आया जो उन्होंने जेब में रखी थी।
[15:07] उन्हें तुरंत एहसास हुआ कि ये सब चीजें तो तब से हो रही थी जब से
[15:13] उन्होंने वो पायल अपनी जेब में रखी थी पापा ने।
[15:18] अब कांपते हुए हाथो से वो पायल निकाली और वही पास मिट्टी पर रख
[15:24] दी और जैसे ही उन्होंने वो पायल जमीन पर छोड़ी उन्हें ऐसा लगा
[15:29] जैसे उनके कंधों से कई किलो का बोझ अचानक हट गया हो।
[15:35] वेदम हल्का महसूस करने लगी। इस एहसास ने उन्हें और भी ज्यादा
[15:41] डरा दिया और वो तुरंत वहाँ से किसी तरह निकले।
[15:45] उन्होंने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सीधा अपने बंगलों की
[15:51] तरफ भागे। अगले दिन उन्होंने।
[15:58] उस टी स्टेट के एक पुराने माली को की बात बताई।
[16:02] माली ने तब उन्हें बताया कि सालों पहले उस झरने में गिरकर एक औरत की
[16:08] मौत हुई थी और तब से यहाँ टी स्टेट में अंधेरा होने के बाद कई
[16:15] बार लोगों के साथ डरावने। अनुभव होते हैं।
[16:20] इसी किसी ने तो उस औरत को देखा भी है।
[16:23] इसीलिए लोग अंधेरा होने के बाद कि ये गार्डन के इस हिस्से में अकेले
[16:29] नहीं जाते। पापा ये पूरी बात सुन काफी डर गए
[16:36] उस दिन के बाद से। अंधेरा होने के बाद वो अब कभी वॉक
[16:40] पर अकेले नहीं जाते, ना ही कभी रास्ते में गिरी हुई किसी चीज़ को
[16:45] वो हाथ लगाते हैं और अगर गलती से रास्ते में गिरी कोई चीज़ को हम
[16:50] सब हाथ लगाते हैं तो पापा हम सबको भी खूब डांटते हैं।
[16:59] हे देबो जी थैंक यू फॉर शेयरिंग थिस इंसिडेंट।
[17:03] ये इंसिडेंट काफी क्रीपी था स्पेशल वो पार्ट जब आपके पापा को
[17:08] सडेनली वेइट फील होने लगा और उनके पैर जमीन में कुछ ज्यादा ही धसने
[17:13] लगे। आसाम के टी स्टेटस के अपने बहुत
[17:16] पुराने राज़ हैं। कितनी ही अलग अलग कहानियों और
[17:19] किस्से इंटरनेट पर अक्सर हमें सुनने को मिलते हैं।
[17:23] ऐसे मैं बता दूँ कि इस तरह की हंटिंग को ऑब्जेक्ट अटैचमेंट कहते
[17:28] हैं। कहा जाता है कि कुछ लोग जिनकी मौत
[17:31] नॉर्मल नहीं हुई है। उनकी आत्मा अक्सर उन चीजों से
[17:35] बंधी रहती है जिनसे उनका बहुत स्ट्रांग अटैचमेंट होता है।
[17:40] इस केस में शायद वो ज्वेलरी, वो पायल वो चीज़ थी जिससे उस औरत की
[17:46] स्पिरिट जुड़ी हुई थी और इसीलिए गाइस रास्ते पर पड़ी हुई हर चीज़
[17:51] को उठाकर जेब में रखना। ठीक नहीं होता।
[17:55] सम्टाइम्ज़ इट कैन सीरियसली कॉस्ट ट्रबल।
[17:58] चलिए अब बढ़ते हैं आज की अगली घटना की तरह।
[18:02] ये अगली घटना हमें भेजी है निखिल ने।
[18:06] ये घटना उनके दादाजी के पुराने पुश्तैनी घर का है, जो बुंदेलखंड
[18:11] के एक छोटे से एक गांव में है। चलिए इस घटना को मैं अब निखिल के
[18:16] शब्दों में आप सबके सामने रखने की कोशिश करूँगी।
[18:24] मेरा नाम निखिल है और ये घटना 2003 या चार की है।
[18:29] वो गर्मी की छुट्टियां मुझे आज भी याद है।
[18:33] पर किसी अच्छी वजह से नहीं। हम सारे कज़िन्स गर्मी की
[18:39] छुट्टियों में अलगअलग शहरों से अपने परिवार के साथ बुंदेलखंड के
[18:43] एक छोटे से गांव में बने मेरे दादी के घर जाया करते थे।
[18:48] उस समय हर कोई। अपनी गर्मियों की छुट्टी में शायद
[18:51] यही किया करता होगा और हम सब में भी इसका कुछ अलग ही क्रीज था
[18:57] कज़िन्स के साथ पूरा दिन खेलना, वहाँ का खाना, दादी के हाथ की
[19:02] मिठाई, पढ़ाई से छुट्टी वो सब एक अलग ही माहौल था।
[19:08] मेरे सभी कज़िन्स में शालिनी दीदी हम सब में सबसे बड़ी थी और हम सब
[19:14] में सबसे मॉडर्न भी थे। उन्हें गांव की पुरानी बातों पर
[19:18] बिल्कुल यकीन नहीं था और अगर उन्हें कोई कुछ करने से मना करता
[19:23] तो दीदी उस चीज़ को पक्का करती। अब हमारे गांव के घर में एक
[19:30] सदियों पुराना रिवाज था। हर दोपहर को खाना खाने से पहले
[19:35] दादी आंगन के एक अंधेरे कोने में एक छोटी थाली में खाना रखती थी।
[19:39] थोड़ा ताजा खाना हमारे पुरखों के लिए उस कोने में दादी के अलावा
[19:45] कोई नहीं जाता था। सबका वहाँ जाना बिल्कुल मना था पर
[19:50] हैरानी की बात ये थी कि वो खाना रोज़ किसी तरह खत्म हो जाया करता
[19:57] था। दादी कहती थी कि हमारे परिवार के
[20:01] बड़े बुजुर्ग जो मर चूके हैं, वो उस प्रसाद को रोज़ ग्रहण करते थे।
[20:07] और हमें इस बात को सुनकर सच में डर लगता था।
[20:11] दरअसल घर का वो कोना था भी वैसा आंगन में लगे एक बड़े से पेड़ के
[20:17] पीछे था वो कोना जहाँ लगभग हर वक्त अँधेरा सा होता था।
[20:23] हमारा डर कम करने के लिए मामा अक्सर कहते थे कि खाने को रोज़
[20:27] कोई पक्षी खा लेता है, पर हम सब ने कभी किसी पक्षी को वहाँ संधेरे
[20:34] कोने में जाते नहीं देखा, ना और किसी जानवर को पर हर सुबह।
[20:40] जब दादी वो प्लेट उठाती थी तो वो प्लेट खाली रहती।
[20:46] हम बच्चों को कड़े शब्दों में कहा गया था कि उस कोने से दूर रहना और
[20:52] सब डर से वहाँ वैसे भी नहीं जाते थे, पर इन सब बातों का।
[20:58] शालिनी दीदी पर कोई असर नहीं था। उस बार शालिनी दीदी के सर पर उस
[21:04] जगह पर जाने का भूत चढ़ा। वो देखना चाहती थी कि सच में वो
[21:10] खाना हर रोज़ गायब कैसे हो जाता है।
[21:13] दीदी को लगता था कि दादी की ये सब बातें अंधविश्वास है।
[21:17] और कोई कुत्ता बिल्ली उसे खा जाता होगा और ऐसे ही 1 दिन उन्होंने
[21:24] ठान लिया कि वो उस मिस्ट्री को सॉल्व करेंगी।
[21:29] उस दिन दादी ने दोपहर के खाने से पहले हर दिन की तरह उस कोने में
[21:34] थाली रखी। गर्म रोटी, थोड़ा गुड़ और दाल फिर
[21:39] हम सब ने खाना खाया, कुछ देर खेलने लगे और फिर डांट खाकर सब
[21:45] सोने चले गए। पर शालिनी दीदी उस दिन सोने नहीं
[21:49] गई। वो चुपके से आंगन के कोहने में
[21:52] रखी एक भारी लकड़ी की अलमारी के पीछे।
[21:56] छुप गई। वो वहाँ खड़ी रहकर देखना चाहती थी
[22:01] कि कौन सा जानवर उस खाने को खाता है।
[22:05] हम सबको तो पता भी नहीं चला कि शालिनी दीदी वहाँ छुपी थी।
[22:09] जब कुछ देर बाद सबको पता लगा कि शालिनी दीदी गायब थी तो सब परेशान
[22:15] होकर। उन्हें यहाँ वहाँ ढूंढने लगे और
[22:18] तब जाकर महामा को वो आंगन में बेहोश पड़ी मिली।
[22:24] उसी भारी अलमारी के पीछे जहाँ वो छुपी थी, कुछ देर बाद उन्हें होश
[22:31] आया तब? उन्हें तेज बुखार आ चुका था।
[22:36] घर के बड़े समझ चूके थे कि कुछ तो गड़बड़ थी क्योंकि होश में आने के
[22:42] बाद से शालिनी निधि का बर्ताव बिल्कुल बदल चुका था।
[22:46] अगले 3 दिन तक निदे बिल को शांत थी मानो वो शोक में चली गई हो।
[22:52] वो ना कुछ खा रही थी ना किसी से बात कर रही थी।
[22:56] बस वो एक दिशा में देखते जा रही थी और ये सब देख हम बच्चे काफी डर
[23:02] गए थे। हमारी शालिनी दीदी जो हमेशा बातें
[23:06] करती रहती थीं। अचानक किस तरह शांत हो जाएगी ये
[23:10] हम सब ने कभी नहीं सोचा था। उनकी ये हालत देख घर पर पंडित जी
[23:17] को बुलाया गया। उन्हें गंगाजल बुलाया गया, पूजा
[23:20] की गई और तब जाकर शालिनी दीदी ने रोते रोते जो कहा।
[23:26] वो सुनकर सब के चेहरे सफ़ेद बढ़ गए।
[23:32] मुझे आज भी उसे सोचकर बहुत डर लगता है क्योंकि मैंने खुद उनको
[23:37] उस हालत में देखा था। दीदी के मुताबिक जब वो वहाँ छुपी
[23:42] थी तो उस प्लेट में खाना वैसे के वैसा ही था।
[23:46] पर जैसे ही घर में सब सूखने चले गए, आंगन में एक अजीब सा सन्नाटा
[23:53] छा गया और अचानक उन्होंने देखा कि वो ताजा नरम रोटी उनके देखते
[24:00] देखते सेकंड्स में काली पड़ने लगी वो रोटी।
[24:05] धीरे धीरे सूखने लगी। जैसे वो बरसों पुरानी हो और फिर
[24:13] फिर उसके बाद जो हुआ उसे देख शालिनी दीदी बेहोश हो गई।
[24:20] उन्होंने देखा कि वो गर्म दाल की भान।
[24:23] अचानक ऊपर जाने की जगह एक पॉइंट की तरफ तेज़ी से खींचने लगी थी।
[24:30] उस अंधेरे कोने की तरफ जैसे कोई इनविजिबल चीज़ उसे अपनी ओर खींच
[24:36] रही हो और फिर फिर उन्हें ऐसा महसूस होने लगा जैसे उस अंधेरे
[24:42] कोने से। तो अनजाना के उन्हें देख रही थी,
[24:48] उन्हें घूर रही थी वो और ये देख दीदी इतना डर गई कि वो वहीं बेहोश
[24:56] हो गई। इस हादसे ने घर के सभी बच्चों को
[24:59] भी हिला दिया। हमें उस दिन पूरी बात किसी ने
[25:03] नहीं बताई, न हमें सब कुछ समझ आया।
[25:06] बस इतना पता था कि शालिनी दीदी के साथ कुछ बहुत बुरा हुआ था और फिर
[25:12] अगले दो 3 साल तक मैं दादी के घर गर्मी की छुट्टियों में नहीं गया।
[25:21] जब मैं बड़ा हुआ और इस बारे में मैंने दादी से बात की तब उन्होंने
[25:26] मुझे कहा कि पुरखों को प्रसाद चढ़ाने के बाद कभी नहीं देखना
[25:31] चाहिए। मरने के बाद वो अक्सर ऐसी
[25:34] शक्तियां में बदल जाते हैं जिसे देखना या महसूस करना इंसानी शरीर।
[25:41] बिल्कुल झेल नहीं पाता। पता नहीं उस दिन जो दीदी ने देखा
[25:47] वह सच था या उनकी आँखों का धोखा था पर वह जो कुछ भी था उसे देखने
[25:53] के बाद दीदी फिर कभी पहले जैसे नहीं रही कुछ था।
[25:58] जो इस हादसे ने शालिनी दीदी में हमेशा के लिए बदल दिया।
[26:08] हे निखिल थैंक यू फॉर शेयरिंग थिस विथ दी कम्यूनिटी आई रियली होप
[26:13] आपकी शालिनी दीदी जहाँ भी हो वह आप ठीक हो।
[26:17] जो भी उन्होंने देखा शायद उन्हें वो नहीं देखना चाहिए था।
[26:22] दट। इस व्हाट आई फील मैंने जब इस
[26:24] टॉपिक पर रिसर्च किया तो कुछ में ऐसा लिखा हुआ मिला मुझे कि जब
[26:29] आत्माएं अपना भोग लेती हैं तो वो उस खाने का जीवन या तत्व निचोड़
[26:35] लेती हैं। इस वजह से फिजिकल फुड मिट्टी या
[26:39] राग जैसा हो जाता है। शायद दादी के दिए उस भोग के साथ
[26:43] भी रोज़ कुछ ऐसा ही होता था। यू नेवर नो मुझे ये घटना काफी
[26:49] डिस्टर्बिंग लगी। दोस्तों आपको ये घटना कैसी लगी?
[26:54] अगर अच्छी लगी है तो पोल्स में वोट देकर जरूर बताएगा।
[26:58] चलिए अब बढ़ते हैं आज की अगली घटना की तरह।
[27:03] ये अगली घटना हमें भेजी है केरला से हृदय ने।
[27:06] ये घटना उनके एक पड़ोसी जो उनके पापा के दोस्त थे, उनके साथ घटी
[27:11] थी 19 एटीस में। जब वो केरला के अल्लेप्पी इलाके
[27:15] में एक सर्वे के सिलसिले में गए थे।
[27:19] चलिए इस घटना को अब मैं हृदय के शब्दों में आपके सामने रखने की
[27:24] कोशिश करूँगी। मेरा नाम रितय है।
[27:31] ये घटना मैंने। कुछ साल पहले अपने पापा के दोस्त
[27:35] नायर अंकल से सुनी थी और ये मुझे आज तक याद है।
[27:40] नायर अंकल हमेशा कहते थे कि पानी की अपनी एक पुरानी याददाश्त होती
[27:45] है। 19 एटीस की बात है अंकल रात के
[27:50] वक्त एक छोटी सी लकड़ी की नाव। जिसे हमारे यहाँ वलम कहते हैं।
[27:55] उसमें बैठकर बेक वाटर से घर की तरफ लौट रहे थे।
[28:00] रात काफी गहरी थी और आसमान में बादल थे।
[28:04] जीस वजह से चाँद की रौशनी होने के बावजूद रौशनी काफी कम थी।
[28:10] पानी बिल्कुल काला और शांत दिख रहा था।
[28:13] नायल अंकल अकेले थे और खुद ही चप्पू चला रहे थे।
[28:17] पानी में चप्पू के गिरने की एक रिदमिक आवाज़ के अलावा और कोई
[28:22] आवाज़ नहीं थी। वो थोड़ा बीच रास्ते में पहुंचे
[28:26] थे कि अचानक ना? एक तरफ काफी सोच झुकी, अंकल ने
[28:34] तुरंत अपना बैलेंस संभालना, उन्हें लगा शायद कोई बड़ी मछली
[28:38] नाव से टकरा गई होगी। ऐसा अक्सर होता था बेक वॉटर में
[28:44] पनाह वापस सीधी नहीं हुई वो। एक तरफ झुकी रही सेकण्ड्स मिनट
[28:53] में बदल गए पर नाव टेढ़ी की टेढ़ी ही थी।
[28:58] इतनी ज्यादा के बिलकुल कोने पर कोई बहुत भारी इंसान आकर बैठा वो
[29:08] नार अंकल ने। तुरंत टॉर्च घुमाई पर कोने में
[29:12] सिर्फ खाली जगह थी, पानी नाव के रिंग तक पहुँच रहा था पर वहाँ कोई
[29:19] नहीं दिख रहा था नाव के ऊपर ना पानी के अंदर तभी उन्हें नाव के
[29:26] घीली लकड़ी पर। टप टप जैसी आवाज सुनाई दी।
[29:31] उन्होंने ध्यान से देखा ऐसा लग रहा था जैसे कोई पानी से अभी अभी
[29:36] निकल कर नाव पर आया हो और उसके शरीर से पान में टपक रहा हो, पर
[29:42] उनके सामने कोई नहीं था। अहसास होते ही।
[29:48] नायर अंकल दर्द से वहीं जम गए। उन्होंने देखा कि ना कि फ्लोर पर
[29:53] पानी की बूँदें अपने आप गिर रही थी पर वो बूंदे एक लाइन में आगे
[29:59] बढ़ रही थी, पर फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने उन्हें और भी ज्यादा डरा
[30:05] दिया। उन्हें ऐसा लगने लगा जैसे कोई
[30:09] इनविजिबल इंसान या कुछ या कुछ और नाव के एक कोने से चलते हुए दूसरे
[30:17] कोने तक जा रहा था। उनकी तरफ नाव अब हर कदम के साथ
[30:23] अजीब तरह से रीक कर रही थी। और झूल रही थी नार अंकल दर्द से
[30:29] वहीं बैठे रहे। किसी तरह नाव को डूबने से रोकते
[30:33] हुए बस उन्हें क्या करना चाहिए? उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
[30:39] उन्हें अपने बिलकुल सामने अभी काफी भारी और सड़ी हुई बदबू आने
[30:44] लगी। जैसे तालाब के नीचे की मिट्टी की
[30:48] बदबू होती है। फूबूज काफी देर तक नाव के दूसरे
[30:54] कोने पर जाकर फिर दोबारा बैठ गया और नाव पूरे रास्ते एक तरफ चुकी
[31:01] रही। माहेर अंकल ने किसी तरह खुद को
[31:05] संभालना और जैसे तैसे पास कोई जमीन लेकर को उसकी तरफ ले जाने
[31:10] लगी। फिर जैसे ही किनारा आया नाउ अचानक
[31:15] इस झटके के साथ सीढ़ी हुई जैसे उभार अचानक वहाँ से उतर गया हो।
[31:25] नायर अंकल ने किनारे पर देखा, गीले मिट्टी पर अब पैरों के निशान
[31:31] थे जो ढलान की तरफ जा रहे थे पर वहाँ कोई इंसान नहीं था।
[31:37] अंकल की तरफ से हालत बिल्कुल खराब हो चुकी थी।
[31:41] और वो बस किसी तरह उस रात घर पहुंचे।
[31:44] उस रात के बाद उन्होंने कभी अकेले रात में वलम नहीं जलाई।
[31:51] उस रात उनके वलम पर क्या चढ़ा था उन्हें नहीं पता और ना ही वो
[31:56] जानना चाहते हैं बस हमारे यहाँ इसीलिए।
[32:00] बहुत रात को अकेले बलम चलाने को मना किया जाता है।
[32:04] कहा जाता है कि खाली बलम देखकर जल यात्री उस पर चढ़ जाते हैं।
[32:11] जल यात्री वो आत्माएं होती है जो पानी में भटकती है और सिर्फ थोड़ी
[32:17] देर के लिए किसी का। सहारा लेती हैं।
[32:24] हे लताय थैंक यू फॉर शेयरिंग थिस इंसिडेंट फर्स्ट ऑफ़ ऑल लेट मी
[32:28] टेल यू मुझे जलयात्री नाम के किसी भी एंटिटी के बारे में आज तक कुछ
[32:33] नहीं पता था। बट ये इंसिडेंट सुनकर मुझे इसके
[32:36] बारे में पता चला। ये इंसिडेंट वैसे काफी क्रीपी था
[32:40] स्पेशल वो पार्ट जब सडेनली नायर अंकल की बोट टिल्ट हो जाती है और
[32:45] उसके कार्नर पर कोई चढ़कर बैठ जाता है जो उन्हें दिखाई नहीं
[32:49] देता। दट पार्ट वास् अक्चवली स्केयरी
[32:53] दोस्तों। अगर आपके स्टेट में भी कोई ऐसी
[32:56] अननोन एंटिटी से रिलेटेड कोई घटना है तो हमसे वो जरूर शेयर कीजिएगा।
[33:01] हम उसे आपबीती में जरूर फीचर करेंगे।
[33:04] इंडिया काफी डाइवर्स है और हर स्टेट में बहुत अलग अलग और हॉरर
[33:11] एंटिटीज है। स्पूकक्स पर मेरी हमेशा कोशिश
[33:14] होती है कि मैं आप सब के लिए नए नए एंटिटीज के बारे में कहानियों
[33:19] और आपबीती शेयर करो। आई होप आप आज का ये स्पेशल एपिसोड
[33:24] अब तक एन्जॉय कर रहे हैं जिसमें हमने अब तक चार काफी अलग अलग और
[33:30] यूनिक और घटनाएं। आपके साथ शेयर की है।
[33:33] आपको इनमें से कौन सा इंसिडेंट सबसे अच्छा लगा है, ये हमें पोल्स
[33:38] में जरूर बताना चलिए अब बढ़ते हैं फाइनली आज की आखिरी घटना की तरफ।
[33:46] दोस्तों आज की आखिरी घटना हमें भेजी है बिहार के बेगूसराय से।
[33:51] सौरव ने ये घटना उनके चाचा के साथ बहुत सालों पहले घटी थी और
[33:57] स्पूकास के आपबीती सीरीज में पनडुब्बा की ये पहली घटना है।
[34:03] चलिए इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की
[34:08] कोशिश करूँगी। मेरा नाम सौरभ है।
[34:16] ये बात कई साल पहले की है जब मेरे चाचा की उम्र करीबन 2022 साल की
[34:22] होगी। बिहार के गांव में उस वक्त जिंदगी
[34:26] काफी साधारण थी पर पुराने लोग कुछ नियमों का बड़ी सख्ती से पालन
[34:32] करते थे। और हमारे गांव में भी ऐसा एक नियम
[34:36] था। वो नियम था अंधेरे के बाद गांव के
[34:42] पीछे वाले पोखर पर कभी ना जाने का एक शाम की बात है।
[34:48] खेत में काम करते वक्त हमारी भैस कीचड़ में काफी लत हो गई थी।
[34:53] सूरज ढल रहा था पर चाचा ने सोचा कि उसे ऐसे ही खूटे पर बांधना ठीक
[34:59] नहीं होगा। तो घर लौटते वक्त वो उसे लेकर
[35:02] गांव के उस पीछे वाले पुराने पोखर पर चले गए जहाँ अंधेरे के बाद
[35:07] जाना बिल्कुल मना था। वो पोखर घर के रास्ते में ही
[35:13] पड़ता था। गो धुले का वक्त था, सूरज ढल चुका
[35:17] था पर आसमान में अभी भी थोड़ी लाली बची थी, जिसकी वजह से सब कुछ
[35:23] धुंधला पर साफ़ दिख रहा था। तालाब के पास बिल्कुल सन्नाटा था,
[35:28] दूर दूर तक कोई नहीं था। बस मेढकों की अजीब सी आवाज आ रही
[35:33] थी। चाचा को याद था कि यहाँ आना मना
[35:36] है इसीलिए वो जल्दी जल्दी हाथ चलाने लगे।
[35:40] उन्होंने भैस को पानी में उतारा और खुद किनारे पर खड़े होकर उस पर
[35:45] पानी डालने लगे। भैस के गले पर बंधी रस्ती को
[35:49] उन्होंने पानी में छोड़ दिया। पानी में पहले तो भैस के हिलने से
[35:54] काफी हलचल थी पर चाचा ने अचानक मॉडल किया कि भैस के आसपास के
[36:01] पानी को छोड़ तालाब का पानी धीरे धीरे बिल्कुल स्थिर हो रहा था।
[36:08] एक खून की भी हरकत नहीं हो रही थी उसमें जो कि बहुत अजीब था।
[36:15] साथ ही मेंढकों की आवाज भी अब बिल्कुल बंद हो चुकी थी।
[36:22] वो सोच ही रहे थे कि आगे क्या करें कि तभी चाचा को।
[36:27] भैस के गले पर बंधी रस्सी पर एक भारीपन महसूस हुआ।
[36:32] उन्हें लगा शायद रस्सी पानी के नीचे किसी जड़ में फंस गई है।
[36:38] उन्होंने उसे थोड़ा ज़ोर से खींचा और रस्सी धीरे धीरे ऊपर भी आने
[36:43] लगी। पर फिर जो हुआ।
[36:46] उसने चाचा का खून जमा दिया। जैसे जैसे रस्सी ऊपर आ रही थी
[36:53] उसके साथ कुछ और भी था जो पानी की सतह के पास आ रहा था।
[36:59] आसमान की हल्की रौशनी में चाचा ने पानी की सतह के बिल्कुल नीचे
[37:05] देखा। वहाँ एक काला इंसानी साया था जो
[37:10] बहुत धीरे धीरे बिना किसी हलचल के ऊपर की तरफ आ रहा था।
[37:16] वो कोई डूबा हुआ आदमी नहीं था, ना कोई लाश थी, वो जिंदा था।
[37:23] पर उसका रंग पानी के अंधेरे से भी ज्यादा काला था।
[37:27] आँखें पानी में भी चमक रही थी और उसे देख चाचा का डर से गला सूख
[37:33] गया। इससे की पहले वो साया पूरी तरह
[37:37] बाहर आता या चाचा आगे क्या करना है वो समझ भी पाते।
[37:42] उनकी भैस थी। अचानक एक ऐसी चीख मारी जो चाचा ने
[37:47] पहले कभी नहीं सुनी थी कि जानवर का डर जब उसकी आवाज में निकलता है
[37:53] तो वो बहुत ही डरावना होता है। उनकी भैस पागलों की तरफ पानी से
[37:59] बाहर निकलने के लिए चटपटाने लगी। चाचा ने बिना पीछे मुड़े रस्सी
[38:05] बाहर खींची और भैस को लेकर तालाब से तुरंत बाहर निकले और घर की तरफ
[38:11] दौड़ पड़े। उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे पीछे
[38:15] पानी में कोई काफी तेजी से उनका पीछा कर रहा था।
[38:23] जब वो कुछ देर बाद किसी तरह गांव पहुंचे और बड़े बुजुर्गों को
[38:29] उन्होंने ये बात बताई तो सबसे पहले उन्होंने उसे बहुत डांटा।
[38:34] फिर सब ने एक ही नाम लिया पंडेप्पा।
[38:40] हाँ, हमारे गांव की उस तालाब में पनडुब्बा था और उसे बहुतों ने
[38:46] देखा था और इसीलिए वहाँ जाना मना था।
[38:52] गांव के पुराने लोग आज भी सूरज ढलने के बाद उस तालाब से दूर ही
[38:58] रहते हैं। चाचा हमेशा कहते थे कि अगर उस शाम
[39:02] वो समय पर नहीं भागते तो शायद वो या उनकी भैस उस दिन जिंदा नहीं बच
[39:09] पाते क्योंकि पनडुब्बा पानी में ही रहता है, वो लोगों को पानी में
[39:14] खींचकर ले जाता है और उन्हें डुबोकर मार देता है।
[39:24] हे सौरभ थैंक यू फॉर शेयरिंग थिस मुझे पर्सनली इंसिडेंट काफी
[39:29] डरावना लगा। जानवर अक्सर वो चीज़ पहले ही सेंस
[39:32] कर लेते हैं जो हम इंसान देख तक नहीं पाते।
[39:36] शायद इसीलिए। आपके चाचा वहाँ से उस दिन ठीक समय
[39:40] पर भाग पाए दोस्तों बिहार में पनडुब्बा का डर आज भी काफी गहरा
[39:46] है। कहते हैं ये कोई आत्मा नहीं है
[39:49] बल्कि पानी में रहने वाली वो रहस्यमय एंटिटी है जो सदियों से
[39:54] उन्हीं तालाबों में बसे हुए हैं। ऐसा सुना जाता है कि वो अक्सर
[39:59] अपने विक्टिम्स से तंबाकू या शराब मांगते हैं और फिर उन्हें पानी
[40:04] में डुबोकर मार देते हैं। आज के दिन भी बिहार के कई छोटे
[40:10] गांवों में ऐसे कुछ तालाब हैं जहाँ लोग आज भी जाने से डरते हैं।
[40:17] और इसी के साथ आज का ये स्पेशल एपिसोड यहीं पर खत्म होता है।
[40:23] अगर आपके पास भी कोई पैरानॉर्मल या हंटिंग एक्सपीरियंस है जो आप
[40:27] सबके साथ शेयर करना चाहते हैं तो हमें इंस्टाग्राम पर डीएम कर सकते
[40:32] हैं। ऐड्स।
[40:35] बस याद रखिएगा हम आपबीती में काला जादू से रिलेटेड इन्सिडेंट्स नहीं
[40:40] सुनाते बस परनोरमल इन्सिडेंट्स सुनाते हैं।
[40:44] अगर आपकी घटना यूनिक और डरावनी हुई तो हम उसे जरूर फीचर करेंगे।
[40:50] हमारे आपबीती सीरीज में चलिए। अब जल्दी से बढ़ते हैं आज के
[40:55] शाउटआउट सेशन की तरफ वैसे गाइज़ शाउटआउट शुरू करने से पहले एक
[41:00] छोटी सी बात अगर आप मुझे मैसेज भेजते हैं और मुझे आपका मैसेज
[41:04] पसंद आता है तो मैं उसे अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ और
[41:09] हाईलाइट्स में भी शेयर करती हूँ। तो हो सकता है कि आपका मैसेज भी
[41:14] वहाँ फीचर्ड हो। सो अगर आपने मुझे मैसेज किया है
[41:18] तो इंस्टाग्राम पर जाकर जरूर चेक करिएगा।
[41:21] मैं ऑनेस्ट्ली इन मैसेजस को बहुत वैल्यू करती हूँ बिकॉज़ आई
[41:24] अंडरस्टैंड आप टाइम निकालकर मुझे मैसेज करते हैं, इसीलिए मैंने
[41:28] उन्हें इंस्टाग्राम पर शेयर करना शुरू किया है।
[41:31] हाँ, अगर आपका मैसेज थोड़ा पुराना है तो हो सकता है मैंने उसे मिस
[41:35] कर दिया हो पर आई ऍम सलौली ट्राइंग टु ऐड ऑल दी लवली मैसेजस
[41:40] फ्रम यू गाइस थैंक यू सो मच फॉर थिस इस हफ्ते का पहला शाट हो जाता
[41:45] है जयवंदन दर्जी को जयवंदन हमारे यूट्यूब के।
[41:49] फर्स्ट ऑफिसियल मेंबर बने हैं। हे जयवंदन थैंक यू सो मच इट रियली
[41:56] मीन्स ए लॉट कि आपने हमारे छोटे से चैनल को सपोर्ट किया, हमारी
[42:00] यूट्यूब कम्यूनिटी अभी बहुत छोटी है।
[42:02] वी अरे स्टिल ग्रोइंग बट वी अरे ट्रूली ग्रेटफुल टु हॅव यूएस ए
[42:06] पार्ट ऑफ़ इट दोस्तों। स्पोकास के हर एपिसोड के पीछे
[42:11] काफी टाइम और एफर्ट लगता है। अगर आप भी जयवंदन की तरह हमें
[42:16] सपोर्ट करना चाहते हैं तो आप हमारी यूट्यूब मेम्बरशिप ले सकते
[42:20] हैं। इट विल जेन्यूइनली हेल्प उस गेट
[42:23] बेटर टूल्स एंड क्रियेट बेटर कॅन्टेंट फॉर यू गाइस।
[42:27] इस हफ्ते का दूसरा शाउट आउट जाता है।
[42:30] अलाइना को अलाइना ने मुझे यूट्यूब पर मैसेज किया और बताया कि उस
[42:34] फोरकास्ट रेगुलरली सुनती है और दूसरे कई पोडकास्ट के कंपॅरिज़न
[42:39] में उन्हें हमारा पोडकास्ट ज्यादा अच्छा लगता है।
[42:42] हे अलाइना थैंक यू सो मच। आपका मैसेज पढ़कर मुझे सच में
[42:47] बहुत अच्छा लगा। कीप लिसनिंग एंड थैंक यू फॉर
[42:49] बीइंग पार्ट ऑफ़ दी स्मॉल कम्यूनिटी और आज का आखरी शाउट आउट
[42:54] जाता है। मिहिर राणा को मिहिर ने हमें
[42:57] यूट्यूब पर मैसेज किया पर वो हमें स्पोटिफ़ाइ पर भी सुनते हैं।
[43:02] मिहिर ने कहा था कि इस पूकस का साउंड डिज़ैन उन्हें बहुत पसंद है
[43:07] और जब वो आँखें बंद करके हमारी कहानियों सुनते हैं तो उन्हें
[43:11] लगता है जैसे कोई मूवी चल रही है। हे मिहिर सीरियसली थैंक यू सो मच
[43:16] फॉर एप्रेशिएटिंग थे एफर्ट? मैंने आपका मैसेज, इंस्टाग्राम
[43:20] स्टोरी और हाईलाइट दोनों में शेयर भी किया है और जो आपने
[43:23] एक्सपीरियंस डिस्क्राइब किया, वही अक्चवली स्पूकास्ट की स्पेशिलिटी
[43:28] है। मैं स्टोरीज़ भी ऐटमोस्फेरिक हॉरर
[43:31] स्टाइल में ही लिखती हूँ और साउंड डिज़ैन भी वैसे ही करती हूँ।
[43:36] ताकि आप हर एपिसोड को एक मूवी की तरह फील करो।
[43:40] इसीलिए आई ऑलवेज रेकमेंड हेडफोन्स लगाकर सुनो।
[43:44] गाइस मिहिर रियली हैप्पी टु हॅव यूएस पार्ट ऑफ़ थिस क्रोइंग
[43:48] कम्यूनिटी और इसी के साथ आज का एपिसोड यहीं खत्म होता है।
[43:53] फाडू फ्राइडेज का नया एपिसोड भी आ चुका है।
[43:56] लिंक डिस्क्रिप्षन में है को चेक इट अपना अगले हफ्ते मैं आपको
[44:02] मिलूँगी एक नए एपिसोड के साथ मैं हूँ मंजुला एंड तब तक टेक केयर
[44:08] गाइज़। मैं हूँ मंजुला और आप सुन रहे हैं
[44:22] स्पूकास्ट।

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