# Ep32- MURDAGHAR | ORIGINAL Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 18 Jan 2025, 32 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/97227760/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-0-18%2F4a214855-5d0c-593f-7531-32e04476a373.mp3

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## Transcript

[0:01] दोस्तों नमस्कार कैसे हैं आप सब आज की कहानी शुरू करने से पहले बस
[0:07] एक छोटा सा डिस्क्लेमर है। आज की कहानी काफी इंटेंस ग्राफिक
[0:12] हॉरर एलिमेंट्स से भरी हुई है जो कुछ लोगों को थोड़ी डिस्टर्बिंग
[0:16] लग सकती है तो अगर आप कमजोर दिल के हैं।
[0:20] या ट्रैफिक हॉरर सीन्स को बर्दाश्त नहीं कर सकते तो आप आज
[0:24] की कहानी स्किप कर सकते हैं। एंड फॉर ऑल दोज़ लिसनर्स हूँ
[0:28] एन्जॉयस दी स्टोरीज़ कीप लिसनिंग सुनते रहिए स्पोक कास्ट अवि और
[0:37] मंजिल के साथ। हैलो हैलो पुलिस स्टेशन सर सर
[0:51] आपको मेरी आवाज़ सुनाई दे रही है सर सर आप जल्दी से सिटी हॉस्पिटल
[0:56] पहुंची है, प्लीज़ सर मुर्दा घर से चीखें सुनाई दे रही हैं।
[1:00] डरावनी चीखें अंदर एक डॉक्टर और एक असिस्टेंट है।
[1:05] हाँ। डॉ।
[1:06] मेहता और उनकी असिस्टेंस ज़्यादा? हाँ सर, हम लोग दरवाजा बाहर से
[1:12] खोलने की कोशिश कर रहे हैं पर नहीं खोल पा रहे हैं।
[1:15] प्लीज़ सर जल्दी आइए अंदर कुछ तो हो रहा है, बहुत चीखने की आवाजे आ
[1:19] रही है जल्दी आइए सर प्लीज़। 19197 सर्दियों की एक कंपा देने
[1:31] वाली सुबह के साढ़े 4:00 बज रहे थे।
[1:34] सिटी हॉस्पिटल के कंपाउंड में जगह जगह पर पुलिस के लोग खड़े थे।
[1:39] पार्किंग में पुलिस की बैन की इमरजेंसी लाइट्स जल रही थी पर
[1:44] सबसे ज्यादा भीड़। मुर्ताघर के बाहर थी हॉस्पिटल
[1:48] स्टाफ और पुलिसवालों की यहाँ का नज़ारा किसी हॉस्पिटल का काम और
[1:54] किसी क्राइम सीन का ज्यादा लग रहा था।
[1:57] जैसे ही कुछ पुलिसकर्मी मुर्ताघर की तरफ पड़े एक गंदी बू ने उन्हें
[2:03] वहीं रोक दिया। वो पुलिसकर्मी किसी तरह मुँह पर
[2:07] रुमाल राख आगे बढ़े सिटी हॉस्पिटल की पिछली तरफ एक सुनसान अंधेरी और
[2:13] खाली जगह पर ये मुर्दा घर था आसपास और कुछ नहीं था एक छोटे से
[2:20] स्लोप से चढ़कर ऊपर जाने पर। पोस्टमॉर्टम रूम का दरवाजा और साथ
[2:26] ही में अंदर से लगा मुर्दा घर था। जैसे ही पुलिसकर्मी उस लोग के पास
[2:31] पहुंचे वो फिर से रुक कर उन्हें कुछ ऐसा दिखाई दिया जिसने सब को
[2:38] हिला कर रख दिया उस लोग पर। खून से रंगा किसी का हाथ था बस
[2:47] हाथ कंधे से उंगलियों तक बाकी का शरीर वाहन नहीं था।
[2:53] उस हाथ की तीन उंगलियां टूट कर उल्टी दिशा में मुड़ गई थी।
[2:59] दरवाजे के बाहर इतना खून था कि स्लोप।
[3:03] खून से भीग कर लाल और स्लिपरी हो चुका था और खून स्लोप से होकर अब
[3:08] जमीन पर गिर रहा था। उन पुलिसकर्मियों ने एक दूसरे को
[3:13] देखा। बाहर का दृश्य इतना खौफनाक था कि
[3:17] अंदर जाने में सब हिचकिचा रहे थे। सब समझ गए थे।
[3:22] कि अंदर कुछ बहुत ही वीभत्स हुआ है।
[3:26] वो लोग किसी तरह स्लोप से चढ़कर दरवाजे पर पहुंचे पर दरवाजा अंदर
[3:31] से बंद था। उन लोगों ने दरवाजा हिलाया, उसे
[3:36] खोलने की कोशिश की, पर नाकामयाब हो।
[3:41] वो दरवाजा तोड़ने के बारे में सोच ही रहे थे कि अचानक दरवाजे की
[3:45] कुंडी अंदर से खुलने की आवाज आई और दरवाजा अपने आप हल्का सा खुल
[3:54] गया। जाओ चेक करो, जल्दी।
[4:00] इंस्पेक्टर ने कहा, एक पुलिसकर्मी ने धीरे से दोनों दरवाजों को
[4:06] थोड़ा और खोला। उन्हें ऐसा लग रहा था कि कोई
[4:10] सिरफिरा अभी भी शायद अंदर ही होगा।
[4:14] दरवाजा पूरा खुलते ही एकाएक। सड़े हुए इंसान के शरीर और ताज़ी
[4:19] खून की गंध का एक भपका उनसे टकराया।
[4:23] सब लोगों ने तुरंत रुमाल से अपना नाक ढक लिया।
[4:27] कुछ पुलिसकर्मियों ने अंदर जाकर चारों तरफ ढूंढा पर अंदर कोई नहीं
[4:32] था। मुर्दाघर में एक ही दरवाजा था
[4:35] जिससे। वो लोग अंदर घुसे थे, अंदर का
[4:39] नजारा डरावना था, चारों तरफ खून बिखरा पड़ा था।
[4:45] दीवार, फ्रीज़र्स, दरवाजे, खिड़कियां, मेडिकल इक्विपमेंट्स
[4:50] हर चीज़ पर खून था। जमीन खून से भीगकर लथपथ हो चुका
[4:55] था। इतना ज्यादा कि छल्ले पर पैर फिसल
[4:59] रहे थे, लाइट्स टूट गई थी और बस कार्नर की एक पुरानी ट्यूब लाइट
[5:04] में रौशनी थी और अंदर कोई नहीं था।
[5:09] जिंदा तो कोई नहीं लाशों की दुर्गन्ध असहनीय थी।
[5:14] रूम के अंदर। तीन पोस्टमॉर्टम टेबल्स थे दो पर
[5:18] सफेद कपड़े में लिपटी लाश रखी थी और उनमें से एक लाश के ऊपर एक कटा
[5:25] हुआ सिर रखा था। किसी आदमी का वो सिर खून से लथपथ
[5:31] था। बाल खून से गीले होकर मुँह पर झपक
[5:35] गए थे। उसकी पड़ी पड़ी आंखें अभी भी खुली
[5:38] हुई थी मानो किसी भयानक चीज़ को देखा था।
[5:41] उसने उस सर के नीचे की ओर से मास्क के लोथड़े और स्किन टिशोज
[5:46] लटक रहे थे। जैसे किसी ने उस सर को बॉडी से
[5:51] उखाड़ कर अलग किया हो। उस सर से बहने वाले खून से।
[5:55] थकी लाश की सफेद चादर लाल हो चुकी थी खून रिसकर अब जमीन पर गिर रहा
[6:01] था। पहली टेबल के पास जमीन पर किसी का
[6:05] शरीर पड़ा था उल्टा और बिना सरका उस आदमी ने डॉक्टर जैसा लैबकोट
[6:12] पहना था जो खून से लाल हो चुका था।
[6:15] एक पुलिसकर्मी ने तुरंत कोर्ट पर लगी आइडी को चेक किया।
[6:18] वह लाश डॉक्टर मेहता के थे। उन लोगों ने पोस्टमॉर्टम टेबल पर
[6:23] रखी लाशों की चादर उठाकर चेक किया तो दोनों लाश ठीक कंडीशन में थे।
[6:29] सर ये देखिए असिस्टेंट। एक पुलिसकर्मी ने बॉडी फ्रीजर्स
[6:34] के पास के जमीन की तरफ इशारा करते हुए कहा, वह फ्रीजर्स के पास जमीन
[6:39] पर एक शरीर का टुकड़ा पड़ा था। बिना हाथ और बिना पैर का पर शरीर
[6:47] और एक बुरी तरह कुचला हुआ सिर जो आधे से ज्यादा।
[6:52] धड से अलग कर दिया गया था। पतली सी स्किन के टिश्यू से वो धड
[6:57] से जुड़ा हुआ था। हाथों पैरों की जगह मांस के
[7:01] लोथड़े स्किन लटक रहे थे मानो किसी ने कोई धारदार औजार से नहीं
[7:07] बल्कि उन्हें खींचकर उखाड़ कर शरीर से अलग किया।
[7:11] हो? दरवाजे के बाहर वाला हाथ शायद इसी
[7:14] बॉडी का है पर बाकी के दो पैर और एक हाथ कहाँ है और ये कटा हुआ सर
[7:21] ये बॉडी, ये सब देख कर तो यही लग रहा है कि किसी ने इन्हें शरीर से
[7:26] खींचकर अलग किया है। भला क्यों कोई किसी को इस तरह से
[7:29] मारेगा? इतना गुस्सा किस बात का?
[7:33] वैसे भी ऐसा करने के लिए बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत है।
[7:39] इंस्पेक्टर ने कहा सब शांत थे, हर कोई डरा हुआ था, ठीक से सोच नहीं
[7:47] पा रहा था ऐसा विपक्ष दृश्य। इससे पहले शायद ही किसी ने अपने
[7:52] करियर में देखा था। लाशों का ऐसा हाल केवल जंगल में
[7:56] होता है जब कोई आदमखोर जानवर किसी को उठा ले जाता है।
[8:00] पर ये तो एक हॉस्पिटल का मुर्दाघर था तभी एक आवाज ने सबका ध्यान
[8:06] खींचा। कार्नर में रखे फ्रीजर में से एक
[8:11] फ्रीजर का दरवाजा अपने आप खुल गया।
[8:15] सब लोगों ने उस तरफ देखा उस बॉडी फ्रीजर के अंदर कुछ था, बॉडी
[8:21] नहीं, पर कुछ तो था वहाँ कुछ बुलसकर्मी डर से एक दूसरे को
[8:26] देखने लगे। पहले मुर्दा घर का दरवाजा, अब
[8:30] फ्रीजर का दरवाजा सब अपने आप कैसे खोल रहे थे?
[8:34] कुछ लोग सावधानी से उस फ्रीजर की तरफ पड़े फ्रीजर के दरवाजे पर तीन
[8:40] नंबर लिखा हुआ था और फ्रीजर के अंदर जो रखा था उसे देख सबके पैर
[8:46] ठंडे हो गए। अंदर दो कटी हुई टाँगे और एक हाथ
[8:52] था खून से लत पर फ्रीजर के डोर पर लाल स्किन के टिश्यूज़ चिपके हुए
[8:58] थे और अंदर इतना खून भर चुका था कि वो अब रिस्क कर बाहर जमीन पर
[9:03] टपक रहा था। ये कटा हुआ हाथ और पैर इस
[9:07] असिस्टेंट के ही लग रहे हैं। पर ये इस फ्रीजर में क्या कर रहे
[9:11] हैं? मुर्दाघर का दरवाजा अंदर से बंद
[9:15] था। बाहर आने का वही एक रास्ता है।
[9:17] हॉस्पिटल स्टाफ ने किसी को बाहर आते भी नहीं देखा, बस चीखें सुनी
[9:23] तो फिर गया कहाँ? बहुत सारे सवाल है शिंदे जैसे
[9:28] खूनी ने ये बॉडी पार्ट्स फ्रीजर में क्यों रखे?
[9:31] और वो कटा हुआ हाथ वो वो बाहर कैसे गया?
[9:35] यहाँ कुछ तो बहुत अजीब हुआ है। पुलिस इंस्पेक्टर ने परेशान होकर
[9:39] कहा। सर ये जगह ठीक नहीं है।
[9:42] मैंने पहले भी सुना है इस मुर्दा घर के बारे में।
[9:45] कॉन्स्टेबल शिंदे ने कहा। शिंदे तुम जो कह रहे हो वो मैंने
[9:51] भी सुना है पर वो सब एक अफवाह है और कुछ भी नहीं जाओ।
[9:55] फॉरेन्सिक टीम को बुलाओ और हॉस्पिटल स्टाफ का इंटरव्यू शुरू
[9:59] करो, जाओ। यह कहकर इंस्पेक्टर बाहर चले गए।
[10:04] बस ज्यादातर पुलिस कर्मचारियों को पता था कि कांस्टेबल शिंदे क्या
[10:09] कहना चाहते थे। बस सब चुप रहे और काम में लग गए।
[10:13] मुर्दाघर को सील कर दिया गया और मर्डर इन्वेस्टिगेशन शुरू की गई
[10:18] पर हॉस्पिटल स्टाफ को पता था। कि इस सब का कोई फायदा नहीं था
[10:23] क्योंकि जिसने डॉक्टर मेहता और उनके असिस्टेंट जाधव को इस बेरहमी
[10:27] से मारा था, उसे पुलिस कभी नहीं पकड़ पाएगी।
[10:33] बस इस बात की तसल्ली थी कि अब वो मनहूस मृदा घर।
[10:37] सील हो जाएगा और हॉस्पिटल में किसी के भी साथ अब कोई अनहोनी
[10:42] नहीं होगी। वैसे ये सिटी हॉस्पिटल का
[10:48] मुर्दाघर हमेशा से ऐसा नहीं था। वहाँ कोई अजीब घटनाएं नहीं घटती
[10:53] थीं, पर 1 साल पहले कुछ हुआ वहाँ। और वो मुर्दाघर एक ऐसी जगह में
[10:59] बदल गया जहाँ हॉस्पिटल स्टाफ रात में क्या दिन में भी जाने से काँप
[11:05] जाते थे? सबसे पहले उस मनहूस मुर्दाघर का
[11:08] शिकार बना राजू जो एक वार्ड बॉय था और कई बार।
[11:13] हॉस्पिटल की डेथ बॉडीज को वो मुर्दाघर में रखने जाया करता था।
[11:18] 1 दिन वह एक बॉडी को मुर्दाघर के फ्रीजर में रखने गया।
[11:22] दोपहर का वक्त था तो सब लंच ब्रेक पर थे।
[11:26] उसने जैसे ही देखा कि मुर्दाघर में कोई स्टाफ नहीं था, उसने लाश
[11:30] को स्ट्रेचर के साथ अंदर रख दरवाजे पर स्टाफ का इंतजार करना
[11:34] शुरू किया। चारों तरफ काफी सन्नाटा था, बस
[11:38] दूर से बीच बीच में हॉस्पिटल से आ रही सिरेन और दूसरी आवाज़ें सुनाई
[11:43] दे रही थी। बस कुछ मिनट पीते होंगे कि अचानक
[11:47] उसे एक हल्की सी आवाज सुनाई दी। उसने मुड़कर अंदर देखा पर अंदर तो
[11:55] कोई नहीं था। ज्यादा ध्यान ना देकर उसने फिर
[11:58] इंतजार करना शुरू किया पर वो आवाज फिर से हुई।
[12:03] इस बार थोड़ी और ज़ोर से राजू ने इस बार डर डरकर पीछे मुड़कर देखा।
[12:10] ऐसा लग रहा था कि वो आवाज किसी फ्रीजर के अंदर से आ रही थी।
[12:14] जहाँ लाश रखी जाती थी वो धीरे धीरे फ्रीजर के पास गया।
[12:19] वो चीजों को समझने की कोशिश कर ही रहा था कि वो आवाज फिर से हुई।
[12:26] तीन नंबर फ्रीजर के अंदर से। उस आवाज को सुनकर उसे ऐसा लगा
[12:31] मानू फ्रीजर के अंदर कोई बंद था। राजू घबराते हुए तीन नंबर फ्रीजर
[12:37] के पास पहुंचा। उसने देखा कि उस फ्रीजर के दरवाजे
[12:41] के नीचे से खून बहकर जमीन पर टपक रहा था, जिससे जमीन पर एक खून का
[12:46] दाग बन गया था। वो ये सब देख ही रहा था कि वो तीन
[12:51] नंबर फ्रीजर का दरवाजा अचानक धीरे से खुद ही खुल गया।
[12:58] उसने जमीन से नजर उठाकर जैसे ही फ्रीजर के अंदर देखा, फ्रीजर के
[13:03] पिछले हिस्से में अचानक से कुछ मिला।
[13:06] राजू घबराते हुए कुछ कदम पीछे गया।
[13:09] उसने फ्रीजर के अंदर दोबारा देखा। अंदर कुछ था, कोई लाश नहीं, पर
[13:15] कुछ तो था अंदर कुछ ऐसे ही फ्रीजर के अंदर देखने के लिए दोबारा से
[13:20] झुका उसे अंदर खून से रंगा हुआ एक कटा हुआ हाथ दिखा।
[13:25] इससे पहले की वो भाग पाता। वो कटा हुआ हाथ उसकी ओर लपका और
[13:30] पूरी ताकत से उसका गला दबाने लगा। वो हाथ अपना ज़ोर कसते ही जा रहा
[13:36] था उसके गले पर और पूरे मुर्दा घर में एक विभत्स हँसी गूंजने लगी।
[13:42] राजू के पैर अब हवा में छटपटा रहे थे।
[13:45] वो कटा हुआ हाथ उसकी आँखों के सामने था रस, एक हाथ और कुछ नहीं
[13:50] उस हाथ का मांस कई जगह से गला हुआ था स्किन गलकर जगह जगह से गुलाबी
[13:57] होकर लटक रही थी वो हाथ खून से भरा हुआ था गाढ़े काले खून से और
[14:04] उससे। एक घिनौनी बदबू आ रही थी।
[14:08] राजू की आँखों के सामने अब अँधेरा छाने लगा और इससे पहले कि वह कुछ
[14:12] कर पाता वह बेहोश हो गया। थोड़ी देर बाद जब असिस्टेंट ब्रेक
[14:19] से वापस लौटा उसने राजू को जमीन पर बेहोश पाया।
[14:23] उसके मुँह? गले और कपड़ों पर गांढा लाल खून
[14:27] लगा था और उसके गले में पांच उँगलियों के निशान थे।
[14:31] होश में आते ही वो डर के मारे पागलोसा बर्ताव करने लगा।
[14:35] उसने सबको बताया कि उसने वहाँ क्या देखा पर किसी को उसकी बात पर
[14:41] यकीन नहीं हुआ क्योंकि सबको पता था।
[14:44] कि राजू नशा करता था। अगले कुछ दिनों में उसकी दिमागी
[14:48] हालत और बिगड़ गई और उसने वो नौकरी छोड़ दी।
[14:53] ये बात आप की तरह कुछ ही दिनों में हॉस्पिटल स्टाफ में फैल गई।
[14:57] बस ज्यादातर लोगों को इस बात पर तब ज्यादा यकीन नहीं हुआ।
[15:05] सब कुछ ठीक चल रहा था और जल्द ही लोग राजू की घटना को भूल गए।
[15:11] करीब एक महीने बाद एक और घटना घटी।
[15:16] डॉक्टर जोशी को एक इमरजेंसी पोस्टमॉर्टम केस के लिए नाइट
[15:20] शिफ्ट में आना पड़ा। मुर्दागर के रेगुलर सुपरवाइजर उस
[15:24] दिन छुट्टी पर थे और रोज़ से कुछ ज्यादा बॉडीस आ गई थी।
[15:27] पोस्टमॉर्टम के लिए रात के करीब 2:00 बजे असिस्टेंट और हेल्पर
[15:32] ब्रेक पर गए। डॉक्टर जोशी अकेले ही एक बॉडी का
[15:35] पोस्टमॉर्टम कर रहे थे। ये कॉम्प्लिकेटेड केस था, इसलिए
[15:39] उन्होंने ब्रेक नहीं लिया। चारों तरफ बिल्कुल शांति थी, कहीं
[15:44] कोई आवाज नहीं थी। बस फ्रीजर से आ रही एक मशीन की
[15:49] आवाज के अलावा पर अचानक फ्रीजर के पास वाला सीलिंग लाइट फ्लिकर करने
[15:54] लगा। वो बार बार बंद चालू बंद चालू हो
[15:57] रहा था। डॉक्टर जोशी ने जाकर।
[16:00] स्विच ऑन ऑफ किया पर कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने उस लाइट को उसी हाल
[16:06] पर छोड़कर दोबारा अपना काम करना शुरू किया।
[16:10] कुछ मिनट पीते ही होंगे कि अचानक उन्हें एहसास हुआ कि वहाँ बहुत
[16:16] ज्यादा ठंड लग रही थी और तभी उन्हें वो।
[16:20] आवाज सुनाई दी। डॉक्टर जोशी को साफ पता था कि वह
[16:25] आवाज फ्रीजर की तरफ से आई थी, पर वह डरे नहीं।
[16:29] लाइट का खराब होना, टेम्परेचर का कम होना और अब यह फ्रीजर से आवाज
[16:34] था। उन्हें लग रहा था कि शायद कुछ
[16:35] इलेक्ट्रिकल या मेकानिकल प्रॉब्लम था।
[16:37] इस रूम में। वह फिर से अपने काम में लग गए पर
[16:41] वह आवाज फिर से आई। इस बार और ज़ोर से अब डॉक्टर जोशी
[16:50] थोड़ा चौंका है क्योंकि वह आवाज सुनकर उन्हें अब ऐसा लगने लगा था
[16:55] मानो कोई फ्रीजर के अंदर से नौकर रहा हो।
[16:58] वो फ्रीजर के सामने गए और एक एक करके फ्रीजर का दरवाजा खोलकर
[17:02] देखने लगे कि सब लाशें ठीक तो हैं और तब ही वो आवाज फिर से आई।
[17:12] तीन नंबर फ्रीजर से डॉक्टर जोशी अब थोड़ा परेशान हो गए।
[17:17] इतने साल के करियर में उन्होंने ऐसा कुछ एक्सपीरियंस नहीं किया
[17:20] था। उन्होंने धीरे सेल्स फ्रीजर का
[17:23] दरवाजा खोला। तीन नंबर का फ्रीजर अंदर से
[17:28] बिल्कुल खाली था। अंदर कुछ नहीं था।
[17:32] वो थोड़ा कैन्फ्यूज्ड थे क्योंकि उन्हें पता था की आवाज तीन नंबर
[17:35] फ्रीजर से ही आई थी। उन्होंने फिर भी खुद को समझाया और
[17:39] वह पोस्टमॉर्टम टेबल की तरफ जाने के लिए मुड़े पर वह जैसे ही मुड़े
[17:44] वह वहीं उस जगह पर जम गए। वह जीस बॉडी का पोस्टमॉर्टम कर
[17:50] रहे थे। उसके साइड में रखी लाश अब उठकर
[17:54] बैठ गई थी। वह।
[17:57] अब भी सफेद चादर से ठगी हुई थी पर ट्रोली पर बैठी थी वो लाश डॉ।
[18:03] जोशी इससे पहले की खुद को संभाल पाते उस लाश की गर्दन अब धीरे
[18:09] धीरे पीछे मुड़ने लगी। उनकी तरफ और उसके गले से एक
[18:14] डरावनी आवाज निकलने लगी। जब पूरे मुर्दा घर में गूंजने
[18:18] लगी। डॉ।
[18:19] जोसियस लाश के एक तरफ खड़े थे फ्रीजा के पास और उस लाश का मुँह
[18:24] घूमते हुए उनकी ही तरफ था, वो डर से कांपने लगे, वो चिल्लाकर
[18:32] वॉचमैन को बुलाना चाहते थे। पर उनके कल से कोई आवाज़ नहीं
[18:36] निकल रही थी। उस लाश के सर पर सफ़ेद चादर बंधा
[18:40] हुआ था। इससे उसके फीचर्स साफ दिख रहे थे।
[18:45] अब उस लाश ने अपना मुँह धीरे धीरे खोलना शुरू किया।
[18:50] बड़ा बहुत बड़ा। उसके गले से निकल रही एक विभास
[18:56] आवाज से पूरा मुर्दा घर गूंज रहा था।
[19:00] चादर के ऊपर से भी उसका खुला मुँह साफ दिख रहा था और फिर वो चादर
[19:05] खून से धीरे धीरे लाल होने लगा। मान उस लाश के मुँह से खून निकल
[19:10] रहा हो, चादर धीरे धीरे लाल होने लगा और।
[19:14] पूरी तरह से जब चादर लाल हो गई, उससे खून टपक कर जमीन पर गिरने
[19:19] लगा। इससे पहले की डॉ।
[19:21] जोशी वॉचमैन को बुला पाते। उन्हें अपने दिल में एक जोरदार
[19:26] दर्द महसूस हुआ और वह जमीन पर गिर गए।
[19:33] कुछ देर बाद जब असिस्टेंट और हेल्पर ब्रेक से लौटे तब उन्होंने
[19:37] डॉक्टर जोशी को जमीन पर पड़ा देखा।
[19:39] उनकी सांस नहीं चल रही थी। उनका कोट काढ़े लाल खून से सना
[19:45] हुआ था, पर उन्हें कोई चोट नहीं आई थी।
[19:49] डिस्टेंट और हेल्पर ने दौड़ कर बाहर मदद मांगी।
[19:53] कुछ डॉक्टर्स आए पर तब तक डॉक्टर जोशी की हार्ट अटैक से मौत हो गई
[19:58] थी। डॉक्टर जोशी के कोट पर लगे गाड़े
[20:01] लाल खून को देख मुर्दा घर के वॉचमैन को राजू की घटनाएं याद आ
[20:05] गई। वार्ड बॉय राजू उसे भी तो कोई चोट
[20:09] नहीं आई थी। पर उसके शरीर पर भी कड़ा लाल खून
[20:13] था। उसने असिस्टेंट और हेल्पर को राजू
[20:17] वाली घटना वहीं खड़े खड़े सुना दी।
[20:19] सबके चेहरे पर अब डर था, बात हॉस्पिटल में भी फैल गई।
[20:25] हॉस्पिटल में अब दबे शब्दों में मुर्दा घर के बारे में बात होने
[20:29] लगी। सब कहने लगे कि कोई आत्मा है जो
[20:32] लोगों पर अटैक कर रही है पर कारण किसी को नहीं पता था।
[20:37] बस लोग वहाँ रात क्या अब दिन में भी जाने से डरने लगे।
[20:41] अगले कुछ दिनों में उस असिस्टेंट और हेल्पर ने भी अपनी नौकरी छोड़
[20:45] दी। उन्हें भी फ्रीजर नंबर तीन से।
[20:49] आवाज सुनाई देने लगी थी। शायद ज्यादा दिन बीते भी नहीं थे
[20:56] कि एक नए असिस्टेंट राहुल ने नाइट शिफ्ट जॉइन किया।
[20:59] उसे किसी ने तीन नंबर वीजा के बारे में नहीं बताया था।
[21:04] उसका पहला दिन तो ठीक से गुजरा। पर दूसरी रात जब वह अकेला कुछ
[21:09] बेपर्ब कर रहा था, अचानक उसे एक आवाज सुनाई दे।
[21:14] रात के सन्नाटे में उसे समझने में देर नहीं लगी कि यह आवाज फ्रीजर
[21:19] से आ रही थी। पहले उसने ध्यान नहीं दिया पर जब
[21:23] आवाज ज्यादा ज़ोर से आने लगी। तब उसे थोड़ा डर लगने लगा।
[21:29] वह अकेला था और उस वक्त सब ब्रेक पर थे।
[21:35] आवाज कुछ ऐसी थी मानो कोई फ्रीजर के अंदर बंद हो और नॉक कर रहा हो।
[21:40] वो उठकर फ्रीजर के पास गया। तभी तीन नंबर फ्रीजर का दरवाजा
[21:45] खुद ब खुद धीरे धीरे खुलने लगा। जैसे ही राहुल ने झुककर फ्रीजर के
[21:53] अंदर देखा एक खून से सना हाथ फ्रीजर से रेंगता हुआ बाहर निकलने
[21:59] लगा। वो हाथ जगह जगह से कटा और गला हुआ
[22:03] था और उससे गाढ़ा लाल खून टपक रहा था।
[22:07] ये दृश्य देखकर असिस्टेंट राहुल के गले से एक चितकान निकल गई।
[22:11] वो जमीन पर गिर गया, किसी तरह बुआ से उठा और मेन डोर की तरफ भागा।
[22:17] पर अगले ही पल मेन डोर का दरवाजा। बंद हो गया।
[22:22] राहुल डर से रोने लगा। उसे बहुत डर लग रहा था।
[22:27] उसने डर डर कर अब फ्रीजर की तरफ देखा पर फ्रीजर के बाहर कोई हाथ
[22:32] नहीं बल्कि खून में भीगी हुई सड़ी गली लाश खड़ी थी।
[22:41] इसका एक हाथ और पैर शरीर से लगभग अलग हो चुका था।
[22:46] बस कुछ स्किन टिश्यू से वो शरीर से किसी तरह जुड़ा हुआ था।
[22:51] उस लाज के मुँह से एक डरावनी आवाज निकल रही थी और वो धीरे धीरे
[22:56] लंगड़ते हुए राहुल की तरफ बढ़ने लगा।
[22:59] उस लाश से टपक टपक कर जमीन पर चारों तरफ खून फैलने लगा था।
[23:03] उसके कटे हाथ और पैर शरीर से जहाँ लटके हुए थे वहाँ से खून उफान
[23:08] उफान कर बाहर गिर रहा था। राहुल ने दरवाजा पीटना शुरू किया।
[23:13] चिल्ला चिल्लाकर मद्द मांगने लगा। वो बाहर वॉच में न कुछ लोग जमा भी
[23:18] हो गए। धी राहुल के चितकार भी सुनाई दे
[23:21] रही थी पर वो किसी तरह भी दरवाजा नहीं खोल पा रहे थे।
[23:25] उस कटी फटी लाश ने अब राहुल को उस जमीन पर उठाकर फेंक दिया।
[23:31] फिर उसके सीने पर खड़े होकर उसका एक हाथ पकड़कर से खींचने लगा।
[23:37] राहुल दर्द से चिल्लाने लगा, बट कुछ ही सेकण्ड्स में उस लाश ने
[23:43] उसके हाथ को शरीर से उखाड़कर अलग कर दिया।
[23:49] पतला पतला ये शब्द? उसलाज के मुँह से निकल रहे थे।
[23:59] उसलाज की विभत से हँसी पूरे मुर्दा घर में गूंज रही थी।
[24:04] राहुल खून बहने की वजह से बेहोश हो गया।
[24:10] बाहर वॉचमैन और दूसरे लोग दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे थे पर कुछ
[24:15] नहीं कर पा रहे थे। अचानक दरवाजा खुल गया।
[24:21] जब वॉचमैन और उन लोगों ने असिस्टेंट राहुल की हालत देखी तो
[24:24] वो सब डर से कांप उठे। मुर्ताघर का जमीन खून से रंगा हुआ
[24:29] था। राहुल की सांसे चल तो रही थी पर
[24:32] वो होश में नहीं था। और उसके शरीर पर अपने खून के
[24:35] अलावा वहीं गाढ़ा लाल खून लगा था। राहुल को हॉस्पिटल में शिफ्ट किया
[24:42] गया और उसकी जान बच गई। पर वो उस हादसे से और अपना हाथ
[24:48] खोने से इतना ज्यादा सदमे में चला गया कि उसने।
[24:52] कुछ ही दिनों में वो नौकरी छोड़ती।
[24:54] हॉस्पिटल ने उसे एक हेवी कंपनसेशन तो दिया पर कहा कि उसका हाथ
[24:59] ऐक्सिडेंटली मुर्दा घर में किसी इक्विपमेंट को हैंडल करते वक्त कट
[25:03] गया था। पर नौकरी छोड़ने से पहले राहुल ने
[25:06] अपने सुपरवाइजर को बताया कि उसने उस रात क्या देखा था और उसका ये
[25:11] हाल। कैसे हुआ?
[25:14] सिटी हॉस्पिटल में चारों तरफ डर का माहौल बन गया स्पेशल मुर्तागढ़
[25:19] में क्योंकि कोई कितना भी झूठ बोले।
[25:22] अब सबको पता चल चुका था कि कौन बदले के लिए वापस लौटा था।
[25:27] कौन फ्रीज़ एंड नंबर थ्री के अंदर से नॉक करता था।
[25:32] बस सब नौकरी खोने के डर से चुप थे।
[25:36] इस हादसे की वजह से पुलिस इन्क्वायरी भी हुई और तब इस
[25:40] मुर्दा घर की बात हॉस्पिटल में ही नहीं पूरे शहर में फैल गई।
[25:45] ये घटना लोगों के दिमाग से निकली भी नहीं थी कि दो महीने के अंदर।
[25:50] डॉक्टर मेहता और असिस्टेंट जाधव का सिटी हॉस्पिटल के उसी श्रापित
[25:55] मुर्दा घर में मर्डर हो गया। एक बहुत ही ब्रूटल मर्डर, इतने
[26:00] सारे हादसे और दो मर्डर्स के बाद फाइनली एक एन्क्वारी बिठाई गई और
[26:06] उस एन्क्वारी में जो बात बाहर आई वो भयावह थी।
[26:10] 1 साल पहले इस मुरधाघर के इंचार्ज डॉक्टर मेहता थे और जाधव उनके
[26:16] असिस्टेंट। एक रात एक एक्सीडेंट के साया था
[26:20] हॉस्पिटल में जिसमें जीवन नाम के एक जवान लड़के का हाथ और पैर
[26:25] ट्रेन के नीचे आने की वजह से कट गए थे।
[26:28] जब तक उसे सिटी हॉस्पिटल लाया गया, उसकी पल्स काफी वीक हो चुकी
[26:32] थी और लगभग सांसे थम चुकी थी। बहुत सारा खून बह चुका था।
[26:36] उसका कुछ ही देर में उसे टेड डिक्लेर करके उसे पोस्टमॉर्टम के
[26:41] लिए भेज दिया गया। मुर्दाघर में उसे फ्रीजर नंबर तीन
[26:45] में रखा गया। उस रात।
[26:47] असिस्टेंट जाधव की ड्यूटी थी और डॉक्टर मेहता किसी पर्सनल काम से
[26:51] बाहर गए थे। वो लेट आने वाले थे।
[26:54] जाधव अपना पेपर वर्क कर रहा था कि तभी उसे फ्रीजर नंबर तीन के अंदर
[26:59] से नॉकिंग की आवाज सुनाई थी। उसे लगा फ्रीजर में कुछ प्रॉब्लम
[27:05] है तो पहले तो उसने ध्यान नहीं दिया।
[27:07] लेकिन जब नॉकिंग और बैगिंग की आवाज धीरे धीरे बढ़ने लगी तब वो
[27:13] फ्रीजर के पास गया और उसने देखा फ्रीजर नंबर तीन से खून बहकर बाहर
[27:18] आ रहा था और जमीन लाल हो चुकी थी। उसे लगा कि यहाँ कुछ परानॉमल हो
[27:25] रहा है। और वह डर कर बाहर चला गया और
[27:27] डॉक्टर मेहता के आने का इंतजार करने लगा।
[27:30] उसने मुर्दाघर का दरवाजा बंद कर दिया पर वह नॉकिंग काफी देर तक
[27:37] होती रही और फिर धीरे धीरे बंद हो गई।
[27:42] जब डॉक्टर मेहता लौटे। जाधव ने उन्हें सब कुछ बताया।
[27:46] सारी बातें सुनकर डॉक्टर मेहता के मुँह का रंग उड़ गया।
[27:50] वो समझ चूके थे कि एक बहुत बड़ी अनहोनी हो चुकी थी।
[27:54] उनके असिस्टेंस से उन दोनों ने तुरंत जाकर फ्री से नंबर तीन को
[27:59] खोला। बहुत देर हो चुकी थी।
[28:04] उस फ्रीजर से तब तक खून बहकर रूम के बीच तक आ चुका था।
[28:08] फ्रीजर के अंदर जीवन नाम के उस लड़के की लाश थी।
[28:12] उसकी आँखें बड़ी बड़ी खुली हुई थीं और उसका चेहरा फ्रीजर के
[28:18] दरवाजे की तरफ बड़ा हुआ था। उसका एक हाथ जो ठीक था।
[28:22] वो फ्रीजर के डोर पर था। इसका मतलब उस पेशेंट को डेंट
[28:27] डिक्लेर तो किया गया था पर पेशेंट को फ्रीजर में होश आ गया था।
[28:32] उसने फ्रीजर से बाहर निकलने की कोशिश भी की।
[28:36] अपने मचे हुए एक हाथ से दरवाजा भी पीटा।
[28:39] पर असिस्टेंट जाधव ने इसे कुछ भूतिया समझकर फ्रीजर नहीं खोला, न
[28:43] किसी से मदद मांगी। इस वजह से पेशेंट की वहाँ मौत हो
[28:48] गई। डॉक्टर मेहता समझ चूके थे कि अगर
[28:51] वो इस बात को हैलैट करते तो जाधव के साथ सुपरवाइजर होने की वजह से।
[28:57] उनकी भी नौकरी जा सकती थी। इसलिए उन्होंने जाधव को मुँह बंद
[29:01] रखने को कहा और खून वगैरह साफ करा कर पात को वहीं दबा दिया, पर वो
[29:06] पेशेंट वापस आया। अपनी मौत का बदला लेने के लिए उस
[29:13] हादसे के बाद एक राग? उन दोनों को फ्रीजर से नॉकिंग की
[29:17] आवाज सुनाई दी जब वो फ्रीजर के पास गए।
[29:22] फ्रीजर नंबर तीन से बाहर खून रस रहा था।
[29:25] जमीन पर पर फ्रीजर नंबर तीन में कोई लाश नहीं थी।
[29:31] वो दोनों उसी रात समझ गए थे कि वहाँ।
[29:34] क्या हो रहा था? वो इतना डर गए कि उन दोनों ने
[29:37] अपना शिफ्ट चेंज करवाकर मॉर्निंग शिफ्ट कर लिया।
[29:41] उसके बाद जो भी उस मुर्दा घर में अकेला जाता उसके साथ कुछ ना कुछ
[29:46] अनहोनी जरूर होती और ऐसी बातें दबती थोड़ी ना है।
[29:51] जाधव ने अपनी गलती के बारे में अपनी घरवाली और एक दो दोस्तों को
[29:55] भी बता दिया और हॉस्पिटल में तो कुछ हादसों के बाद ही तो ये बात
[30:00] ऐसे ही फैल गई। पर एक हफ्ते पहले सब कुछ बदल गया
[30:04] जब स्टाफ शोर्तज की वजह से डॉक्टर मेहता और जाधव की नाइट ड्यूटी लगी
[30:10] उस दिन। उस फ्रीजर नंबर तीन में मरे उस
[30:13] लड़के ने फाइनली अपना बदला पूरा किया।
[30:18] हॉस्पिटल पर मेडिकल नेग्लिजन्स का केस तो हुआ वो मर्डर केस को पुलिस
[30:23] ने वहीं बंद कर दिया क्योंकि दोषी को तो सजा मिल ही चुकी थी।
[30:27] एक दर्दनाक मौत। जैसे उस लड़के की हुई थी फ्रीजर
[30:32] नंबर तीन में हे गाइस कैसे हैं आप सब?
[30:40] इस न्यू ईयर में आपके लिए मैंने कुछ अलग लिखने की कोशिश की है।
[30:44] ये स्टोरी थोड़ी ट्रैफिक और ब्रूटल है।
[30:47] पर मरे हुए लोगों के जिंदा हो जाने की घटना हम सभी ने सुनी है।
[30:52] ये कहानी कुछ उसी ऐडिया पर बेस्ड है।
[30:55] होप यू गाइस लाइक दी स्टोरी वैसे अगर आप अपने अपने फैम्ली के साथ
[31:00] घटी कोई घटना हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो डू रीच आउट टु उस ऑन
[31:05] व्हाट्सएप ब्य लीविंग ए है। और ए वौइस् नोट ऑन 97679 वैन 6545
[31:14] आप अपने इंस्टाग्राम में भी डीएम कर सकते हैं।
[31:16] लिंक डिस्क्रिप्षन में है ऑल दोज़ पीपल हूँ ऑलरेडी शेयर्ड युअर
[31:20] स्टोरीज़। आपकी कहानी फेब्रूवेरी फर्स्ट वीक
[31:22] में आने वाली है। हमारे मंथ्ली आप हीती सीरीज में
[31:26] सो वेइट् फॉर इट और हाँ का नया एपिसोड भी लाइव हो चुका है।
[31:31] उसका लिंक भी डिस्क्रिप्षन में है।
[31:33] सो गो अहेड एंड शो युअर लव ऑन दट एपिसोड गाइस।
[31:37] वैसे हमें रेटिंग्स देना और फॉलो करना मत भूलिएगा।
[31:40] अगले हफ्ते। एक क्रीपी ओरिजिनल स्टोरी के साथ
[31:43] वी विल बी बेक मैं हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पोक कास्ट अवि
[31:48] और मंजिला के साथ। सुनते रहिए स्पोक कास्ट अवि और
[31:54] मंजिला के साथ।

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