# Ep 56 - ROSEWOOD VILLA - The Haunted House of Nilgiris | SPOOKCAST ORIGINAL STORY | Horror Story | Hindi Horror Podcast |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 1 Sep 2025, 42 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/107634007/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-8-1%2F4975addf-1096-15d4-1d55-ed2172d2f678.mp3

Story: A spine-chilling tale of an Old Colonial Villa, promising a fresh start for a grieving father and his son. Instead, they come face to face with their worst fears!! To know the truth… listen to this Original Audio Horror Story by Spookcast. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana |Haunted School | Haunted Hostel |Haunted Jail | Narrated by : Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com/ or DM us on Instagram @spookcastoriginals Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:03] दोस्तों नमस्कार कैसे हैं आप सब फर्स्ट ऑफ़ ऑल आई ऍम रियली सॉरी
[0:08] इस एपिसोड को लाने में थोड़ी सी देर हो गई।
[0:11] बारिश का सीज़न चल रहा है एंड जस्ट लाइक एव्रीवन मुझे भी वैरल
[0:15] हो गया था सो रियली सॉरी अबाउट दी डिले बट एनीवेज।
[0:19] यह विया आज की कहानी शुरू करने से पहले एक छोटा सा डिस्क्लेमा है।
[0:25] आज की कहानी में कुछ डिस्टर्बिंग और ट्रैफिक सीन्स है, जो हर किसी
[0:29] के लिए सूटेबल नहीं है। अगर आपको अनकम्फर्टेबल फील हो तो
[0:33] आप इस कहानी को स्किप कर सकते हैं।
[0:35] लिसनर्स डिस्क्रीशन इस ट्रिकली अड्वाइज़्ड।
[0:39] ये कहानी पूरी फिक्शनल है। जो भी नाम, जगह या कैरेक्टर्स आप
[0:42] इसमें सुनेंगे वो या तो इमेजिनेशन का हिस्सा है या फिर सिर्फ
[0:46] एंटरटेनमेंट और स्टोरी टेलिंग के लिए यूज़ किए गए हैं।
[0:50] ये पॉटका सूइसाइड क्राइम्स, ब्लाइंड बिलीव्स तंत्र मंत्र,
[0:55] स्मोकिंग या ड्रिंकिंग किसी भी चीज़ को प्रोमोट नहीं करता।
[0:58] और हमारा इरादा किसी भी रिलिजन कास्ट, स्टेट या कंट्री को हर्ट
[1:04] करना बिल्कुल नहीं है। थैंक यू कहानी शुरू करने से पहले
[1:09] कंजरिंग मूवी के फैंस आज के स्टोरी के एंड तक जरूर बने
[1:13] रहिएगा। आप सब के लिए एक स्पेशल
[1:16] अनाउंसमेंट है। सुनते रहिए स्पूकास्ट, अवि और
[1:21] मंजिल के साथ। हर घर का एक इतिहास होता है, कभी
[1:32] अच्छा, कभी बहुत बुरा कई बार हम अनजाने में।
[1:37] पूरे इतिहास वाले घर में चले जाते हैं, कभी कभी तो रहने लगते हैं और
[1:42] फिर वहाँ से निकलना नामुमकिन सा हो जाता है।
[1:48] इसलिए नहीं कि आपका डर आप पर हावी हो चुका है, बल्कि इसलिए।
[1:54] क्यों उस घर में रह रही पेशाजिक शक्ति फूंखी है, कभी बदले के लिए
[2:01] और कभी आपके मांस के लिए रोज़वुड विला?
[2:14] नीलगिरी के सुंदर हरे भरे पहाड़ों की गोद में फंसा एक बहुत सुंदर
[2:20] पुराना सा कोलोनियल स्टाइल का बंगला था लाल मिट्टी टाइल्स की
[2:24] चाद, ऊंची पत्थर की दीवारें, एक बड़ा सा फायरप्लेस बड़ी बड़ी
[2:30] लकड़ी की खिड़कियाँ। वुडेन फ्लो और एक सुंदर सा हरा
[2:34] भरा बगीचा। पहाड़ों के बीच बसा ये फुल्ली
[2:37] फर्निश्ड विला किसी सपने से कम नहीं था।
[2:41] ऐसा लगता था मानो आप किसी यूरोपियन घर में आ गए हो।
[2:45] इस विला के चारों तरफ हरे भरे जंगल और पहाड़ फैले हुए थे।
[2:50] दूर दूर तक और कोई घर नहीं था। इतना सन्नाटा था चारों तरफ की
[2:55] पत्तों के हिलने की आवाज तक साफ सुनाई देती थी।
[2:59] यहाँ बस ताज़ी हवा और शांति थी। हर तरफ वही शांति जो अर्जुन मेहरा
[3:06] अपनी बीवी के मौत के बाद तलाश रहा था।
[3:10] दो महीने पहले उसकी बीवी मल्लिका और 10 साल के बेटे अंश का एक कार
[3:15] एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें मल्लिका की मौत हो गई थी।
[3:23] उस एक एक्सीडेंट ने अर्जुन के खुशहाल जिंदगी को एक पल में बदल
[3:28] दिया था। अंज उस अक्सीडेंट के बाद से काफी
[3:32] चुप हो गया था। डॉक्टर्स का कहना था कि ये सब उस
[3:35] अक्सीडेंट के ट्रॉमा की वजह से हुआ है।
[3:38] उसने अपनी माँ को अपनी आँखों के सामने दम तोड़ता देखा था, जो किसी
[3:44] भी बच्चे के लिए काफी ट्रौमैटिक एक्सपीरियंस था और इसीलिए।
[3:48] 8 दिन पहले अपने 10 साल के बेटे अंश के साथ अर्जुन रोजवुड विला
[3:53] में तीन महीने के लिए शिफ्ट हुआ था।
[3:56] एक ब्रेक के लिए लोगों की छोटी सिंपथी और बेफसूल के सवाल जवाब से
[4:02] बहुत दूर वर्क फ्रम होम का ऑप्शन तो था ही उसके पास।
[4:06] और अंश को भी स्कूल से रिकवरी के लिए ब्रेक चाहिए था।
[4:10] सो 8 दिन पहले वो दोनों इस सुंदर से घर में शिफ्ट हुए थे।
[4:15] ओनर बैंगलोर में रहते थे और काफी को ऑपरेटिव थे।
[4:19] बस उनकी एक सिंपल सी कंडीशन थी। मिस्टर मेहरा हाँ, टोनू आराम से
[4:24] रही है बस। बस एक बस एक।
[4:27] बात का ध्यान रखिएगा। घर में घर में नॉन वेज खाना मत
[4:32] बनाइएगा। प्लीज़ गलती से भी नहीं।
[4:36] ये आखिरी के शब्द सुनकर अर्जुन थोड़ा चौंक गया था।
[4:40] उस दिन पर उसने ज्यादा कुछ नहीं कहा।
[4:43] शायद शायद दोनों पूरे वेज होंगे। और वो नहीं चाहते होंगे कि उनके
[4:47] किचन में नॉन वेज खाना बने। उसने यही सोचा और बात वही खत्म हो
[4:53] गई पर इस बात के पीछे छुपे की वॉर्निंग अर्जुन को कुछ दिन बाद
[4:59] समझ आने वाली थी। रोजवुड विला में शिफ्ट होने के
[5:07] बाद पहले तीन 4 दिन तो बड़े ही अच्छे से निकले।
[5:10] अर्जुन वैसे भी शिफ्टिंग और इनोकेशन की वजह से दो हफ्ते के
[5:14] लिए हाफ डे कर रहा था। सो रोज़ पहाड़ों पर लॉन्ग ड्राइव,
[5:18] बहुत सारी कहानियों, वीडियो, गेम्स ये सब रोज़ होता रहा।
[5:23] साथ ही अंश नित्या दीदी और अरुण भैया से रोज़ गार्डनिंग भी सीखने
[5:27] लगा। दरअसल नित्या दीदी और अरुण भैया
[5:30] उस विला के गार्डन का ध्यान रखते थे।
[5:32] वो दोनों रोज़ 14 किलोमीटर दूर एक गांव से साइकिल पर रोज़ सुबह 9:00
[5:37] बजे आते और गार्डन में काम कर शाम को 4:00 बजे लौट जाते अंश।
[5:42] उन दोनों के साथ अच्छे से घुलने मिलने लगा था।
[5:46] वो फिर से मुस्कुराने लगा था। पर अर्जुन को उन दोनों की एक बात
[5:52] खटकती रहती। वो जब भी हत्या दीदी और अरुण भैया
[5:56] को विल्ला के अंदर आने कहता या फिर कुछ खाने पीने को देता तुम
[6:01] दोनों के चेहरे। सफेद पड़ जाते मानो उन्हें किसी
[6:06] चीज़ का डर हो। वो मिला के अंदर पैर रखते ही नहीं
[6:11] थे। बस का काम कर रोज़ वहीं से लौट
[6:14] जाते और अर्जुन को यह बात हमेशा खटकती रहती।
[6:22] शिफ्ट होने के पांचवें दिन अर्जुन और लंच कर रोज़ की तरह जब लॉन्ग
[6:27] ड्राइव से लौट रहे थे, अंश को रास्ते के कोने में एक चिकन की
[6:32] दुकान दिखी और उसने चिकन खाने की बात की।
[6:35] अंश की बात सुन अर्जुन थोड़ा हिचकिचाया क्योंकि उसे ओनर की बात
[6:40] याद थी। और उसने अंश को भी फिर से वही बात
[6:43] याद दिलाई। साथ ही उसे प्रॉमिस किया कि अगले
[6:46] दिन जब वो ड्राइव पर निकलेंगे तो वो उसे किसी होटल में चिकन जरूर
[6:51] खिलाएगा। पर अर्जुन की बात सुनकर अंश चुप
[6:55] हो गया। मुझे मुझे मम्मी वाला चिकन मिला।
[6:58] था पापा होटल का नहीं। अंश के यह शब्द सुन अर्जुन का दिल
[7:03] प्रसीब किया। उसने कुछ सोचा और फिर गाड़ी
[7:07] रिवर्स की और मोड़कर दोबारा दुकान वाले रास्ते पर चला गया।
[7:10] उसने वहाँ से चिकन खरीदा और पास ही कुम्हार के पास से मिट्टी के
[7:15] कुछ बतन। अभी तो आप कह रहे थे कि अंकल ने
[7:18] घर पर चिकन बनाने से मना किया है? येस यू अरे राइट और इसीलिए हम
[7:23] दोनों घर पर चिकन नहीं बनाएंगे। गार्डन में बनाएंगे लकड़ियों पर
[7:28] एकदम शिकारी स्टाइल, मिट्टी के बर्तनों में वो भी मम्मी की
[7:32] रेसिपी क्यों चलेगा ना? ये सुनते ही अंश के चेहरे पर हँसी
[7:38] लौट आई। पर जैसे ही वो दोनों घर पहुंची और
[7:41] घर के पीछे खाना बनाने का इंतजाम करने लगे, चिकन का बैग देख नित्या
[7:47] दीदी के चेहरे पर खौफ की लहर दौड़ गई।
[7:50] सर सर ये आप क्या कर रहे हैं आप? आप यहाँ कच्चा मांस लेकर क्यों
[7:55] आए? सर आपको उन्होंने बताया नहीं क्या
[7:58] आप? आप दोनों को मरना है क्या नित्य
[8:01] दीदी की ये अजीब सी बात सुन अर्जुन शॉक हो गया?
[8:04] एक सेकंड एक क्या मतलब है आपका? सर वो वो भूखा है।
[8:11] कच्चे मास की कंध से वो जाग जाएगा और वो जाग गया तो वो जाग गया तो
[8:17] फिर कोई नहीं बचेगा। कोई नहीं सर।
[8:20] क्या कौन जांच आएगा? नित्या दीदी की ऊंची आवाज सुन अब
[8:25] तो करुण भैया भी वहाँ पहुँच चूके थे।
[8:27] सामान देख उन्होंने भी अपना सर पकड़ लिया।
[8:30] सर सर आप इस कच्चे मास को दूर ले जाओ अभी और इससे कहीं दूर फेंक
[8:36] दो, नहीं तो। नहीं तो इस घर में अनार्थ हो
[8:39] जाएगा सारा अनार्थ हो जाएगा। ठीक है, मैं देख लूँगा आप दोनों
[8:44] प्लीज़ घर जाइए। अर्जुन ने इर्रिटेट होकर कहा
[8:47] क्योंकि अंश पास ही खड़ा था और उन दोनों के इन अजीबो गरीब बातों को
[8:51] सुन वो डर रहा था। और सर अरुण भैया प्लीज़ बात को
[8:56] खत्म करते हैं ना? आप लोगों का घर जाइए, ऐसे भी चार
[9:00] बजने वाले हैं जो होगा मैं देख लूँगा ये।
[9:02] कहकर अर्जुन ने बात वहीं खत्म कर दी और अरुण भाई और दित्या दीदी
[9:08] वहाँ से चले गए। उसके बाद अर्जुन और अंश तैयारी
[9:12] में जुट गए और कुछ घंटों की जट्टोज के बाद चिकन रेडी हो गया।
[9:16] दोनों बाप बेटे ने अच्छे से खाना एन्जॉय किया और फिर अंदर जाने के
[9:20] लिए सामान समेटने लगे। पर बहुत सारा चिकन बच गया था।
[9:25] सो अर्जुन ने उस चिकन वाली मिट्टी की हांडी को अंदर ले जाकर फ्रिज
[9:31] में रख दिया। उसका मानना था कि ओनर ने।
[9:35] घर के अंदर नॉन वेज बनाने से मना किया था।
[9:38] उन दोनों ने बाहर खाना बनाया और वही खाया, वो भी अलग बर्तन में।
[9:42] सच में खाना रख ही सकता था वो और ये सोच कर वो दोनों अंदर चले गए।
[9:48] अर्जुन अपने ऑफिस के काम में लग गया और अंश अपने कमरे में चला
[9:52] गया। इस बात से अनजान।
[9:55] क्यों उस चिकन से भरी हंडी को घर में लाकर उन दोनों ने बहुत बड़ी
[10:00] गलती कर दी थी? रात के करीब 1:00 बजे अपना हाफ डे
[10:07] खत्म कर अर्जुन सोने आया ही था कि अचानक उसे किचन से कुछ आवाज़
[10:13] सुनाई दी। पहले उसने सोचा कि शायद अंश होगा
[10:17] और उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन कुछ ही मिनटों में एक जानवर
[10:22] जैसी आवाज को सुन वो डर कर बिस्तर पर बैठ गया।
[10:27] वो आवाज किचन से आ रही थी, अर्जुन उठा।
[10:32] और किचन की तरफ सावधानी से बढ़ने लगा।
[10:36] फिर से बाहर निकलते ही वो कुर्रानी की आवाज और तेज सुनाई दे
[10:41] रही थी। साथ ही में एक दुर्गन्ध किचन में
[10:44] फैली हुई थी मानो कोई चूहा मर गया था।
[10:48] वहाँ उसने हॉल का लाइट ऑन किया। और अगले ही पल वो गुराने वाली
[10:53] आवाज बंद हो गई पर अपने सामने का नजारा देख अर्जुन परेशान हो गया।
[11:01] किचन का हाल बिल्कुल खराब था, फ्रिज का दरवाजा खुला हुआ था और
[11:05] उसका सामान जमीन पर पड़ा था। वो मिट्टी की हांड़ी।
[11:09] टूटी हुई चारों ओर फैली हुई थी और चिकन के खाये टुकड़े हर तरफ फैले
[11:14] थे। पट्टियाँ भी आंधी चबाई हुई थी।
[11:17] किचन का ये हाल देख अर्जुन को यही लग रहा था कि पास के जंगल से शायद
[11:23] कोई जानवर घर में घुसाया है। उसने तुरंत पूरे घर की लाइट्स ऑन
[11:28] की। अंश को नींद से उठाया।
[11:30] फायर प्लेस से लोहे का रॉड उठाकर घर का कोना कोना चेक किया पर कहीं
[11:36] कोई जानवर नहीं मिला। उसे जीस तरह से फ्रिज खुला था।
[11:41] खाया हुआ चिकन जमीन पर पड़ा था। ये सब कोई चूहा नहीं कर सकता था
[11:46] और ये गंद चुप। तक फैली थी।
[11:49] चारों तरफ ये तो सोने से पहले तक नहीं थी और वो जानवर जैसे गुराने
[11:55] वाली आवाज। इस बात ने उसे परेशान कर दिया।
[12:00] अंश भी ये सब देख घबराया हुआ था और उससे परेशान थे एक अर्जुन को
[12:05] अचानक। नित्या दीदी और अरुण भैया की कही
[12:08] बात याद आई और वो सहम उठा। पर अर्जुन ने खुद को समझाया कि उन
[12:15] दोनों की बात में कोई लॉजिक नहीं था।
[12:18] सब अंधविश्वास था और किचन साफ कर वो और अंज सोने चले गए।
[12:24] पर अगले दिन से रोज़वुड विला में सब कुछ बदल गया।
[12:31] उस दिन अंश अचानक से चुप हो गया। वो बस बार बार रूंग के कार्नर में
[12:36] देखता और फिर नजरें चुरा लेता मानो कुछ डरावना दिख रहा था उसे
[12:41] जो अर्जुन को नहीं दिख रहा था। अर्जुन ने यह बात कई बार नोटिस की
[12:46] पर पूछने पर अंश ने कुछ नहीं कहा। बोला राइट पर गया ना ठीक से खाना
[12:52] खाया और ना उसने कुछ और किया। वो रात को भी सोने जल्दी चला गया
[12:58] जो अर्जुन को काफी अजीब लगा। उस रात ऑफिस का काम खत्म कर जब
[13:07] अर्जुन सोने गया तो उसे एक आवाज सुनाई दे मानो कोई उसके बैडरूम के
[13:15] बाहर कॉरिडोर से दौड़कर गया, उसने बाहर निकलकर चेक किया।
[13:20] और आज भी ठीक उसी जानवर की तरह कहीं कोई नहीं था उस किचन और हॉल
[13:26] में। वहीं सड़े मांस की दुर्गन्ध फैली
[13:29] हुई थी और फ्रिज का दरवाजा फ्रिज का दरवाजा खुला हुआ था और ये देख
[13:36] अर्जुन को एक हल्की से खौफ का एहसास हुआ।
[13:40] ये सब अचानक हर रात क्या शुरू हो गया?
[13:43] तस्कर में अगले दिन जब अंश उठा, अर्जुन उसे देखकर चौंक गया।
[13:51] उसकी आंखें आज अंदर धंसी हुई थीं। उसका चेहरा कुछ ज्यादा ही फीका लग
[13:56] रहा था। वो आज भी शांत था और कुछ ज्यादा
[13:59] ही डराववा लग रहा था। उसका ये हाल देख अर्जुन ने आज उसे
[14:03] सोर देकर पूछा कि उसे हुआ क्या था और अंश का जवाब सुन वह हिल गया।
[14:10] पापा वो वो लड़का है ना जो कल से यहाँ है वो।
[14:15] वो मुझे पता नहीं क्यों कल से घूर रहा हैं मेरे पीछे पीछे घूम रहा
[14:20] हैं हर कमरे में वो मुझे उसे देख के डर लग रहा हैं पापा।
[14:24] लड़का कौनसा लड़का? धीरे बोलो पापा सुनेगा वह लड़का
[14:31] जो कल से यहाँ आया हैं। शायद वो विद्या दीदी के साथ आया
[14:35] है पता नहीं पर वो हर वक्त मेरे पीछे घूम रहा है, जकूर रहा है और
[14:41] उसके शरीर से बहुत गंदी बदबू आ रही है।
[14:43] पापा मरे हुए चूहे की। एक सेकंड मैंने किसी लड़की को
[14:48] नहीं देखा। अंश कौन सा लड़का और कहाँ आया वो
[14:52] गार्डन में? मेरे पापा नहीं, वो किचन में ही
[14:57] तो खड़ा है। अभी हम लोगों को घूर रहा है वो
[15:00] पता नहीं वो इतना ही कुछ नहीं है। अर्जुन अंश की बात सुन हिल गया।
[15:06] वो धीरे से पीछे मुड़ा और उसने मुड़कर किचन की ओर देखा मगर वहाँ
[15:11] कोई नहीं था। पर अगले ही पल उसे वो गंध आई।
[15:17] वहीं सड़े मांस की दुर्गन्ध जो पिछले दो रातों से घर में फैली
[15:21] हुई थी और एक अनजांडर के अहसास से उसके गलतन के बाल अचानक खड़े हो
[15:27] गए। अंशः वहाँ कोई नहीं है।
[15:32] पापा, मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ, वो कल से यहाँ हैं वो कल रात कल
[15:39] रात भी यहीं था। क्या?
[15:41] हाँ, कल रात पता नहीं कब वो मेरे कमरे में घुस गया था पापा वो
[15:46] हमारे के ऊपर बैठा था, मेरे कार से खेल रहा था।
[15:51] अच्छा, मैंने उसे मेरा कार लौटने को कहा तो उसने मेरी कार को तोड़
[15:56] दिया। फिर वो ऊपर से नीचे कूदा और मेरे
[16:00] बिस्तर के नीचे चला गया। पापा, मैं काफी डर गया था पूरी
[16:04] रात पूरी रात वो बिस्तर के नीचे था अजीब अजीब डरावनी आवाजे निकाल
[16:09] रहा था। मैं ठीक से सू तक नहीं पाया।
[16:14] तो तुमने मुझे बुलाया क्यों नहीं? मेरे पेट के नीचे था पापा, मुझे
[16:19] पेट से उतरने में डर लग रहा था। अंश की पूरी बात सुन अर्जुन हिल
[16:24] गया। उसके एक्सीडेंट के बाद उसे मेंटल
[16:27] ट्रॉमा हुआ था। पर क्या वो हैलूसिनेट कर रहा था?
[16:31] अर्जुन ने किस तरह तब उस बात को टाला?
[16:34] पर ये बात उसके दिमाग में घूमती रही और तसल्ली करने के लिए दोपहर
[16:40] को उसने नित्या दीदी से इस बारे में पूछा।
[16:43] दीदी, सुनो आपके साथ कोई अच्छा आया है क्या अंश जैसा कोई?
[16:48] अर्जुन का सवाल सुनते ही। नित्या दीदी के हाथ से खुरपी नीचे
[16:53] गिर गई। बच्चा आपने आपने उसे देखा क्या
[16:58] सर? नहीं नहीं, मैंने मैंने किसी
[17:01] बच्चे को नहीं देखा, पर अंश कह रहा है कि उसने किसी बच्चे को
[17:05] देखा है, मुझे लगा कि कोई आपके साथ आया होगा।
[17:09] मैं इसीलिए पूछ रहा। हूँ।
[17:11] हे भगवान मतलब मतलब वो औरत आया है आप सर सर आप दोनों आप दोनों यहाँ
[17:19] से चले जाओ, सर चले जाओ नहीं तो अनर्थ हो जाएगा और ऐसा कहते हुए
[17:25] वो अरुण भैया की तरफ भागी और उन्हें।
[17:28] शायद ये बात बताने लगी उन दोनों के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था
[17:33] जिसे देख अर्जुन के पैर भी ठंडे पड़ गए।
[17:37] उसने खुद को बस किसी तरह संभालना और वंश के पास अंदर चला गया और
[17:41] पूरे दिन वंश पर नजर रखता रहा क्योंकि अब।
[17:46] उसे भी डर लग रहा था। उसे भी लग रहा था कि उसकी अरएन्ज
[17:51] के अलावा घर पर कोई और था, क्योंकि वह सड़ी हुई मांस की बदबू
[17:57] अब हर वक्त आ रही थी। रात को अर्जुन अपने ऑफिस का काम
[18:07] खत्म कर। अपने कमरे में सोने गया।
[18:10] उसने फैसला कर लिया था कि कल के साथ यहाँ से चला जाएगा।
[18:15] इस घर में वो और नहीं रहना चाहता था।
[18:18] भूत प्रेत की बातों पर उसे यकीन नहीं था पर पिछले 2 दिन से जो हो
[18:23] रहा था उसका उसके पास कोई एक्सप्लनेशन नहीं था।
[18:27] वो अंश को और किसी भी ड्रामा से गुज़रने नहीं देना चाहता था।
[18:32] बिस्तर पर कर्वटे बदलते हुए वो ये सब सोच ही रहा था कि तभी उसे अपने
[18:39] कॉरिडोर के बाहर वहीं पहरों की आवाज सुनाई दी और अर्जुन।
[18:47] बिलकुल सतर्क हो गया। वो उठा और चुपचाप बेड पर बैठकर
[18:52] ध्यान से सुनने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बच्चा
[18:57] कॉरिडोर में दौड़ रहा था। हंस रहा था वो और अचानक वो दौड़ने
[19:03] और हंसने की आवाज। अर्जुन के रूम के दरवाजे के बाहर
[19:07] आकर एकदम से रुक गई। अर्जुन की सांसे तेज हो गई।
[19:15] इससे पहले कि वो खुद सोच भी पाता अचानक उसके कमरे का दरवाजा अपने
[19:21] आप खुलने लगा। अर्जुन एक मूर्ति की तरह बेड पर
[19:27] बैठा दरवाजे की तरफ देख रहा था। दरवाजा पूरा खोलते ही कमरे में
[19:34] सड़े हुए मांस की कम बज चुकी थी और दरवाजे के बाहर दरवाजे के बाहर
[19:42] संदेरे कॉरिडोर में। उसे एक बच्चा दिखा, उसकी आँखें
[19:48] बिल्कुल सफेद थी, गला कटा हुआ था और उसका सर एक तरफ चमड़े के सहारे
[19:55] लटका हुआ था। वो चुपचाप अर्जुन के दरवाजे के
[19:59] बाहर खड़ा उसे घूर रहा था। उसका शरीर काला था, त्वचा जगह जगह
[20:04] से पिघली हुई थी। परबली पल मुस्कुराया एक पेशाचिक
[20:12] हँसी जिसमे कोई बासूमियत नहीं थी, डरावनी हँसी की आवाज़ कॉरिडोर में
[20:19] गूंजने लगी। अर्जुन डर से कांप रहा था, वो
[20:23] बच्चा बहुत ज्यादा डरावना दिख रहा था।
[20:26] इससे पहले की अर्जुन खुद को संभालना वो बच्चा दौड़ कर वहाँ से
[20:30] किचन की ओर चला गया। अर्जुन कांप उठा।
[20:35] उसके बाद वह डर से सून हो गए पर वो फिर भी बिस्तर से उतरा।
[20:40] और उस बच्चे के पीछे गया पर किचन आज भी खाली था, कहीं कोई नहीं था।
[20:48] नाइट लैंड्स की रौशनी में उसे कोई नहीं दिखा लेकिन तभी उसने फ्रिज
[20:53] के दरवाजे क्यों टिका? वो अब उसके सामने धीरे धीरे घुल
[20:59] रहा था। अर्जुन कांपते हुए फ्रिज के पास
[21:04] गया। उसने फ्रिज का दरवाजा पूरा खोला
[21:08] और उसने जो देखा उसकी जान उसके हलक में आ गई।
[21:14] क्योंकि फ्रिज के अंदर। फ्रिज के अंदर ऊपर वाले सेल्फ में
[21:19] उसी बच्चे का कटा हुआ सर रखा था। उसका मुँह खुला हुआ था, अब शरीर
[21:27] बैंगनी हो चुका था, गाड़ा खून अभी भी फ्रिज में जगह जगह पर जमा हुआ
[21:32] था। आ रही सड़ी हुई दुर्गन्ध असहनीय
[21:35] थी। नीचे वाले शेल्फ में भी उस बच्चे
[21:39] के शरीर के टुकड़े थे। कटा हुआ हाथ और पैर हाथ तो पैरों
[21:44] में भी जगह जगह पर खून जमकर खून के धक्के बन गए थे।
[21:49] ये भयंकर दृश्य देखकर अर्जुन चिल्लाता और जमीन पर गिर पड़ा और
[21:55] तभी। एक डरावनी हँसी की आवाज उस अंधेरे
[21:58] किचन में गूंजने लगी। फ्रिज का दरवाजा अपने आप ज़ोर से
[22:04] बंद हो गया और जिन डर से बेहोश हो गया।
[22:12] थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया। वो किचन में अकेला था, ना कोई
[22:17] आवाज थी ना कोई दुर्गन्ध। उसने किसी तरह हिम्मत कर फ्रिज का
[22:22] दरवाजा दुबारा खोला बराबर फ्रिज में कोई लाश नहीं थी।
[22:28] फ्रिज में बस खाने का सामान पड़ा था पर अर्जुन अर्जुन अब भी कांप
[22:33] रहा था। वो वैसे ही काँपता हुआ अंश के
[22:37] कमरे में गया और फिर उसे पकड़कर वहीं सो गया।
[22:42] वो अब समझ चुका था कि अंश हैलूसिनेट नहीं कर रहा था।
[22:47] इस घर में सच में कोई पैशाचिक एंटिटी थी और वो।
[22:52] किसी भी हाल में अपने घर छोड़ना चाहता था।
[22:58] अगली सुबह होते ही अर्जुन ने सामान पैक करना शुरू कर दिया और
[23:03] ब्रेकफास्ट के पहले ही वो दोनों वहाँ से निकलने के लिए रेडी हो
[23:07] गए। पर जैसे ही वो सामान लोड करने कार
[23:10] के पास पहुंचा। उसने देखा कि कार के चारो टाइर्स
[23:14] फ्लैट थे। एजेंट फ्रस्ट्रेशन में ज़ोर से
[23:17] चिल्लाता उसे यहाँ से आज ही निकलना था पर कैसे उसने यहाँ वहाँ
[23:23] फ़ोन करना शुरू किया पर ना कोई मैकेनिक इतनी दूर आने को राज़ी
[23:27] था, ना कोई कॅब। नित्या दीदी और अरुण भैया ने तो
[23:31] उसी दिन से यहाँ आना बंद कर दिया था, जब अर्जुन ने उन्हें उस बच्चे
[23:35] के बारे में पूछा था। उसे मदद चाहिए थी पर कोई नहीं था।
[23:40] हेल्प करने के लिए उसके घरवाले तो यूएस में रहते थे, उस जंगल के बीच
[23:46] बने इस भूतिया घर में फंस चुका था।
[23:49] उसने फाइनली अपनी वाइफ मल्लिका के भाई को फ़ोन किया और उन्हें पिक
[23:54] करने को कहा। वो मान तो गए पर उस दिन के लिए
[23:59] थी। अगले दिन के लिए मल्लिका का भाई
[24:03] बाहर था और वो अगले दिन ही आ सकता था पर अर्जुन के ना चाहते हुए भी।
[24:09] उसमन हूज रोजवुड? बेला में उसे और अंज को एक आखिरी
[24:13] रात रुकना पड़ा पर अर्जुन ने अनपैक नहीं किया न सामान कार से
[24:20] बाहर निकाला। वो किसी भी हालत में वहाँ से
[24:23] निकलने के लिए रेडी रहना चाहता था।
[24:25] परमाणु प्रकृति भी। आज उसके खिलाफ़ थी।
[24:31] दोपहर से ही वहाँ तेज बारिश होने लगी और उस रात जो हुआ उसके लिए वह
[24:38] बिल्कुल तैयार नहीं था। रात के 1:15 बज रहे थे।
[24:47] और बाहर अब भी तेज बारिश हो रही थी।
[24:51] अर्जुन अपने स्टडी रूम में लैपटॉप खुल कर बैठा था।
[24:55] उसे नींद नहीं आ रही थी। उसकी नजर बार बार दरवाजे के बाहर
[25:00] फैले लम्बे कॉरिडोर की तरफ जा रही थी।
[25:02] एक अजीब से सन्नाटे ने उस घर को आज घेर रखा था।
[25:08] तभी अचानक एक चीख से पूरा रोज़ वुड विला गूंज उठा।
[25:13] अर्जुन हड़बड़ाकर अपने डेस्क से उठा और अपने बेटे के कमरे की और
[25:18] भागा। आज अपने कमरे में सो रहा था
[25:21] अर्जुन तेजी से कमरे का दरवाजा कोई अंदर गुस्सा ही था कि उस।
[25:25] 23 लाश की गंद सूंघ उस सिहर उठा अर्जुन ने की तरफ देखा कमरा
[25:32] अंधेरे में डूबा हुआ था पर साइड टेबल पे रखी टेबल लाइन से आ रही
[25:36] हल्की रौशनी में अंश का कापता शरीर बिस्तर पर सिकुड़ा हुआ दिखा
[25:42] उसे वो। अपने घुटनों को अपने हाथों में
[25:45] दबाये अपना माथा नीचे कर रो रहा था।
[25:50] उसके छोटे से कंधे डर से कांप रहे थे।
[25:54] अर्जुन तेजी से उसकी ओर पड़ा। अंश अंश क्या हुआ बेटा क्या हुआ?
[26:01] अंश। अर्जुन की आवाज सुन अंश ने अपना
[26:04] चेहरा ऊपर किया। उसके काल आंसुओं से भीगे हुए थे।
[26:09] आँखों में आँखों में डर साफ नजर आ रहा था पापा।
[26:17] वो पापा। वो।
[26:19] उसने बाथरूम की ओर इशारा किया। अर्जुन ने भी बाथरूम की तरफ देखा
[26:25] वो दरवाजा बंद था। पापा पापा वो लड़का वो लड़का
[26:30] बाथरूम में पापा। लड़का अरे यू शुर अरे यू शुर
[26:36] आंट्स। हाँ, पापा, वही लड़का।
[26:41] मैंने उसे फिर से देखा और उसका गला उसका गला आज कट्टा हुआ था
[26:47] पापा उसे उसे खूब निकल रहा था उसकी शत उसकी शत खून से बुरी
[26:53] गीली। थी तुम तुम यहीं बैठो मैं।
[26:59] मैं बाथरूम चेक करके आता हूँ। नहीं पापा पापा नहीं आप मत जाओ
[27:05] मुझे मुझे बहुत दर लग रहा है, आज बहुत डराना लग रहा था मैं मत जाओ,
[27:12] वो आपको कुछ कर दे पापा, प्लीज़ ये।
[27:15] कह कर अंश ने अर्जुन की बाजू। बहुत तेज़ जकडली।
[27:21] और डराव मैं लग रहा था मतलब। पापा, मैं मैं सो रहा था जब मुझे
[27:26] ऐसा लगा की मेरे पेट के नीचे से स्क्रैचिंग की आवाज आ रही थी मैं
[27:32] मैं छिप करने से ऐसे उठा वो मेरे। पेट के नीचे से हाथ।
[27:38] उन पैरों पर कॉल करता हुआ बाहर आया पर आज आज उसका गला कटा हुआ
[27:43] था। उसका गला साइड में थोड़ी सी स्केल
[27:47] से साइड में अटक रहा था। बापू ऑलमोस्ट थोड़ी।
[27:50] था और फिर और फिर वो। ऐसे ही हाथो पैरों के दिल कटी है।
[27:56] गर्दन के साथ मेरी पेट का चढ़ गया मैं मैं 10 से मुँह से चिल्लाता
[28:04] था वो तो वो बाथरूम में चला गया वो बंदर है पापा मुझे मुझे यहाँ
[28:12] से चलते हैं प्लीज़। चलो।
[28:13] अज़ीज़ पापा प्लीज़ अंश डर से कांपता हुआ बोला।
[28:18] अंश अंश लिसेन तुम नहीं रुको लेट मी चेक, वन्स ओके बाहर वैसे भी
[28:25] बारिश हो रही है, गाड़ी भी बंद पड़ी है देर इस नो व्हेर वी कैन
[28:29] गो मैं एक बार देखता हूँ क्या पता वो चला गया हो।
[28:33] ये सुनते ही अंश उसे रोकने लगा पर अर्जुन नहीं रुका।
[28:37] उसने भगवान का नाम लिया। बाथरूम की ओर बढ़ा अंश के बिस्तर
[28:42] से बाथरूम तक जमीन खून से रंगा हुआ था।
[28:46] अर्जुन ने कांपते हुए हाथों से बाथरूम का दरवाजा खोला और चारों
[28:51] तरफ नजर दौड़ा। बाथरूम के एक कोने में उसकी नजर
[28:56] अटक गई क्योंकि उस अंधेरे बाथरूम के शावर कर्टेन्स के पीछे उसे सच
[29:02] में एक बच्चे की आकृति दिखाई दी। नीचे बैठी हुई पल के रोने की आवाज
[29:08] भी आ रही थी साथ में। साथ ही बाथरूम की जमीन पर जगह जगह
[29:12] पर खून फैला था। ये देखकर अर्जुन की सास अटक गई।
[29:17] वो वहीं जम गया। कौन है कौन है?
[29:21] आ? अर्जुन ने हल्की सी कांपती हुई
[29:24] आवाज़ में पूछा पर बच्चा नहीं मड़ा।
[29:27] वो बस उसकी तरफ पीट किए रोता रहा। अर्जुन ने अब बाथरूम की लाइट ऑन
[29:32] किया और उसने अपने कदम उस लड़के की ओर बढ़ाये।
[29:36] उसने उस शॉवर गार्डन को हल्का छुआ ही था।
[29:40] तभी वह बच्चा सो उससे चीखा, पीछे की तरफ छोड़ा और अर्जुन अर्जुन की
[29:46] आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि उसके सामने बाथरूम के शॉवर
[29:50] कर्टेन्स के पीछे उसका बेटा अंश था।
[29:55] अर्जुन को देखते ही अंश उससे लिपट गया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगा तो?
[30:01] पापा तो पापा का। अच्छा कितना डर लग रहा था प्लीज़,
[30:09] प्लीज़ यहाँ से चलो बाबा, प्लीज़ जल्दी जल्दी।
[30:14] हुआ क्या है? ये कौन कहाँ से आ रहा है?
[30:17] मैं सो रहा था मैं सो रहा था जब मेरे पैर में पीस दर्द हुआ, मैं
[30:24] उठा। लगातार तो मैंने देखा की मेरे पैर
[30:27] की उंगलियाँ मेरे पैर की उंगलियाँ उस लड़के के मुँह में थी पापा पर
[30:33] वो मेरे पैर की उंगलियों को मेरे पैर की उंगलियों को चबा रहा था,
[30:39] खाने की कोशिश कर रहा था वो वो कह रहा था की।
[30:44] वो कह रहा था की उसको भूख लगी है उसको उसको मेरा मांस खाना था।
[30:49] पापा मैं मैं बहुत डर गया, मैं बाथरूम में आकर्षित गया, आप क्या
[30:55] से चलो बाबा? प्लीज़?
[30:57] आप चलो यहाँ से जल्दी जाओ। ये सुनते ही अर्जुन ने अंश के पैर
[31:03] को देखा। उसके दाहिने पैर की उंगलियों के
[31:06] आसपास इंसानी दांतों के निशान थे और ख्वाब इतने गहरे कि वहाँ की
[31:12] स्किन अलग होकर बाहर लटक रही थी, उसकी खून से पूरा बाथरूम।
[31:19] और उसके कपड़े रंगे हुए थे। अर्जुन का सर घूम गया उसे उसे अब
[31:24] कुछ समझ नहीं आ रहा था ये ये क्या हो रहा था उसके साथ?
[31:29] अगर ये अंश है तो फिर अंश के बिस्तर पर कौन था?
[31:34] और उसी पल? एक पेशाचेक हँसी बाहर कमरे में
[31:38] गूंजने लगी। उस बच्चे की हँसी जो एक भारी आवाज
[31:43] में हंस रहा था और अचानक अचानक घर की दीवारें कांपने लगी, सामान
[31:49] नीचे गिरने लगा। जैसे जैसे कोई भूकंप आया हो।
[31:54] वो भयंकर हँसी और तेज होती जा रही थी।
[31:57] पटर से अर्जुन और अंश का बुरा हाल हो रहा था।
[32:00] अर्जुन ने बाथरूम से तुरंत बहार निकलने का फैसला किया।
[32:04] पंच का फर्स्ट ऐड करना बहुत ज़रूरी था।
[32:07] उसने अंश को गोद में उठाया, बाथरूम के दरवाजे पर पहुंचा, कमरे
[32:12] में नजर दौड़ाई। और उसने जो देखा वो अंदर तक कांप
[32:17] गया। मंच के बिस्तर पर 810 साल का वो
[32:21] लड़का एक मकड़ी की तरह हाथों पैरों के बल बैठा हुआ था और
[32:27] निकाले सड़े हुए शरीर को दाएं बाएं हाथों के बल झुला रहा था।
[32:33] उसके गले से एक डरावनी आवाज आ रही थी।
[32:37] उसकी कटी हुई गर्दन जो एक पतले से चमड़े के सहारे बगल में लटकी हुई
[32:42] थी, वो भी शरीर के साथ साथ झूल रही थी।
[32:47] उल्टा लटका सिर अर्जुन की तरफ देख मुस्कुरा रहा था।
[32:53] के काले ताक पर खून साफ नजर आ रहा था।
[32:57] शायद शायद वो अंश का कुंड था एक एक अर्जुन के पैर जमीन में धंस
[33:03] गए, वो हिल नहीं पा रहा था वो बच्चा अब घुर्राते हुए बिस्तर से
[33:08] धीरे धीरे नीचे उतरा अर्जुन की तरफ कमरे की रौशनी।
[33:13] बंद चालू होने लगी। उसे अपनी और बढ़ता देख अंज डर से
[33:18] चिल्ला उठा। रंज की चीख सुन अर्जुन मानो होश
[33:23] में आया। वो बाहर भागा।
[33:26] उसने अंज के रूम का दरवाजा बंद किया और उसे अपनी कार की चाबी और
[33:30] फर्स्ट एयठ गेट उठाई। क्नॉइस और अपनी कार की तरफ दौड़ा।
[33:34] फिर तुरंत कार के दरवाजे अंदर से उसने लॉक कर दिए और रोज़वुड
[33:40] विल्ला के दरवाजे की तरफ डर से देखने लगा।
[33:43] कुछ ही सेकण्ड्स में वो बच्चा क्या फिर तुझे कोई पशाच करे वो?
[33:50] रोजवुड विला के देहलीज पर आया और आकर वहीं रुक गया।
[33:54] उन्होंने किसी चीज़ ने उसे उस देहलीज पर बांध रखा हो।
[33:58] वो अर्जुन को दूर से देख गुस्से से गुजरा रहा था और कुछ देर बाद
[34:03] रोजवुड विला के अंदर चला गया। अर्जुन अब भी कांप रहा था।
[34:09] उसने अंश को अपने बाहों में तेज जकड़ रखा था।
[34:13] इतना डर उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी महसूस नहीं किया था, सो
[34:18] चुपचाप कार में बैठा रहा, फिर सब शांत हो गया।
[34:24] अगली सुबह एक कार की आवाज से उसकी नींद टूटी।
[34:29] मेहुल उसी और अंज को पिक अप करने जल्द दिया गया था और चूनों से
[34:34] देखकर खुशी से रो पड़ा। उन दोनों की हालत देख मेहुल कांप
[34:39] उठा। वो सब वहाँ से निकले और पहले सीधा
[34:43] हॉस्पिटल गए। अंज का ट्रीटमेंट कराने और फिर।
[34:47] अर्जुन ने बैंगलोर में अपने ओनर को फ़ोन लगाया।
[34:51] उसे गाली देने के लिए अर्जुन से कुछ देर बुरा भला सब सुन पहले तो
[34:57] ओनर शांत रहे। फिर उन्होंने कहा।
[35:00] मिस्टर मेहरा आई टोल्ड यू बट फिर भी आप घर में नॉन वेज खाना लेकर
[35:05] आए। आई ऍम सॉरी फॉर व्हाट, यू बोथ हॅव
[35:08] टु गो थ्रू बट? मैंने आपको इसीलिए वार्न किया था।
[35:12] और फिर उन्होंने उस घर का काला इतिहास अर्जुन के सामने रखा जिसे
[35:18] सुन अर्जुन सहम उठा। ये ओनर इस घर के फोर्थ ओनर थे पर
[35:24] बहुत सालों पहले। इस घर के आसपास चाय का बागान था
[35:29] और इस घर में उस घर का दूसरा ओनर उस चाय बागान का मालिक रहता था।
[35:35] पर किसी कारणवश अचानक उसके बागान बर्बाद होने लगे और सब तरह के
[35:40] उपाय करने के बाद भी जब बागान की हालत नहीं सुधरी।
[35:45] और बिज़नेस में बहुत ज्यादा नुकसान होने लगा तब उस बिजनेसमैन
[35:48] ने एक तंत्रिक को बुलाया। उस तंत्रिक का कहना था कि किसी
[35:54] दुश्मन ने उनके चाय बागान पर कोई काला तंत्र किया था और उसको काटने
[36:00] का एक ही उपाय था बलि। वो भी किसी बच्चे की।
[36:06] वो बिजनेसमैन काफी डेस्पेरेट था और उसने इस मुश्किल को खत्म करने
[36:11] के लिए पास ही के जंगल में बसे ट्राइबल विलेज से एक बच्चे को
[36:15] अगवा कराया बलि देने के लिए। लेकिन वो बच्चा बीमार था, उसे खून
[36:22] की बिमारी थी। जिसके बारे में ये लोग नहीं जानते
[36:25] थे। उन लोगों ने उस बीमार बच्चे को 3
[36:28] दिन तक खाना तो दिया पर शाकाहारी जबकि वह ट्राइबल बच्चा।
[36:33] वो ज्यादातर मांस खाता था, वो ठीक से कुछ नहीं कहा पाया और फिर भूखी
[36:39] बेटी उसकी बलि चढ़ाई गई पर शैतान ने।
[36:43] वो बली नहीं कबूली क्योंकि शैतान बीमार बच्चे की बलि नहीं कबूलता
[36:50] उसका गला तो काटा गया पर वो पूरा सही से नहीं कटा और पूजा और बली
[36:58] अधूरी रह गई इस कुकर्म को छुपाने के लिए।
[37:02] बच्चे की कटी फटी लाश फ्रिज में ही रखी गई कुछ दिनों तक और फिर
[37:08] बाद में उसे जंगल में गाड़ दिया गया।
[37:11] कुछ ही दिन में वो चाय बागान का मालिक मर गया और चाय बागान पूरी
[37:17] तरह से बर्बाद हो गया और उसकी जगह।
[37:21] जंगल ने ले ली और तब से वो बच्चा इसी घर में है।
[37:27] कहते हैं वो आज भी भूखा है मांस का भूखा और इसीलिए इस घर में बस
[37:33] शाकाहारी खाना रखा जाता है, मांसाहारी नहीं।
[37:37] इस घर को तोड़कर किया गया पूजा करवाई गई।
[37:41] पर वो बच्चा या फिर पिशाच कहूं किसी तरह आज भी इस घर से जुड़ा
[37:47] हुआ है। आसपास के लोग ये सारी बातें जानते
[37:51] हैं और इसीलिए कोई रोजवुड विला के अंदर नहीं जाता।
[37:57] अर्जुन पूरी बात सुन चुप रहा। उसे उस बच्चे के लिए बुरा भी लग
[38:03] रहा था। ओनर पर गुस्सा भी आ रहा था और अंश
[38:07] के बारे में सोच डर भी लग रहा था, पर वो कर ही क्या सकता था?
[38:13] उसने बस मन ही मन खुद से वादा किया कि वो इसके बाद कभी।
[38:19] किसी अनजान घर में नहीं रुकेगा। क्योंकि हर घर का एक इतिहास होता
[38:27] है, कभी अच्छा और कभी बहुत डरावना।
[38:41] और इसी के साथ ये कहानी यहीं खत्म होती है।
[38:44] अगर आपको कहानी अच्छी लगी तो मुझे इंस्टाग्राम पर ऐट स्पूकास्ट
[38:49] ओरिजिनल मैसेज करके जरूर बताएगा। अब बात करते हैं आज की कंजरिंग
[38:54] यूनिवर्स से रिलेटेड अनाउंसमेंट के बारे में आप में से बहुत लोगों
[38:58] को। कंजरिंग यूनिवर्स की कहानियों और
[39:00] मूवीज़ पसंद होंगी, जिसमें एडन लूरेन वारेन ने कई तरह के पैन
[39:05] नॉर्मल केसेस को हैंडल किया है पर उनके केसेस सिर्फ कंजरिंग
[39:10] यूनिवर्स तक लिमिटेड नहीं है। कई ऐसे डरावनी केसेस भी है जिन पर
[39:15] ना आज तक कोई मूवी बनी है ना कोई डॉक्यूमेंट्री।
[39:18] और इसीलिए हम आपके लिए लाए हैं एक थ्री एपिसोड मिनी सीरीज, जिनमें
[39:28] क्यों डरावने केसेस का जिक्र है जो आपने पहले नहीं सुनी होंगे।
[39:33] सुझाइए और अभी सुनिए सीरीज का फर्स्ट एपिसोड।
[39:37] ऑन आवर पोडकास्ट क्नॉइस। फाडू फ्राइडेज अभी की आवाज में आई
[39:41] ऍम शुर, यू विल लव इट डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में एंड फाइनली अब
[39:46] जल्दी से बढ़ते हैं आज के शॉट आउट सेशन की तरफ।
[39:49] आज एपिसोड वैसे ही थोड़ा लंबा हो चुका है सो वी विल ट्राई टु मेक
[39:53] इट ए लिटिल क्विक ओके इस हफ्ते का पहला शॉट हो जाता है अक्षत को।
[39:57] जिन्होंने हमें ईमेल पर कॅाटाक्ट किया ही है।
[40:00] बीन लिसनिंग टु उस बुक कास्ट फॉर ए फ्यू, मंथ्स नाउ और उन्होंने
[40:04] हमारे साथ दिल्ली के एक हौंटेड ट्री की ऑसम घटना शेयर की है, जो
[40:08] आप लोग जल्द ही सुनने वाले हैं। आपबीती में ही ऑल्सो लव्स मैं
[40:12] नैरेशन टाइम सो अक्षर, थैंक यू सो मच।
[40:16] सो हैप्पी टु हॅव यू इन दी स्पूकास्ट कम्यूनिटी एंड या डोन्ट
[40:19] फर्गेट टु फॉलो उस ऑन इंस्टाग्राम इस हफ्ते का दूसरा शॉट हो जाता है
[40:24] यूपी से शगुन सिंह को, जिन्होंने हमें ईमेल पर कॅाटाक्ट किया।
[40:28] शी लव्स पूरकास्ट एंड फाडू फ्राइडेज और उन्हें मुर्दाघर और
[40:32] कालकोटरी की कहानियों बहुत पसंद आई।
[40:34] हे शगुन? आई होप आपने मेरा ईमेल पड़ा होगा
[40:38] आई ऍम सो ग्लैड दट। यू रीचड आउट लॉट्स ऑफ़ लव टु यू
[40:41] एंड युअर फैम्ली एंड फाइनली आज का फाइनल शाट हो जाता हैं।
[40:45] आसाम से कृष्णा को इन्होंने हमे व्हाट्सएप पर कॅाटाक्ट किया एंड
[40:49] इन्हें मेरी और अभी हम दोनों की कहानी सुनाने का अंदाज काफी पसंद
[40:53] हैं। हाँ फेवरेट स्टोरीज़ अरे भैरा।
[40:56] एंड नेम तलाई की डायन आई थिंक आई ऍम गोइंग टु राइट अनँद्अर स्टोरी
[41:02] ऑन दी लाइन्स ऑफ़ भैरव बिकॉज़ आई कीप लिसनिंग टु थिस अगेन एंड अगेन
[41:06] आप मेरे से बहुत लोगों को भैरव पसंद है सो या लेटस सी लेट मी
[41:11] थिंक इफ आई वांट टु राइट इट अगेन एनीवेज हे कृष्णा।
[41:14] थैंक यू सो मच फॉर युअर मैसेज कीप लिसनिंग एंड सपोर्टिंग उस लाइक यू
[41:18] ऑलरेडी डू ग्लैड यू अरे ए पार्ट ऑफ़ थिस कम्यूनिटी नो अरे विथ थिस
[41:23] आज का एपिसोड यही खत्म होता है। अगले हफ्ते हम लोग लौटेंगे।
[41:28] आप भी ठीक एक एपिसोड के साथ अगर आप चाहते हैं कि आपके साथ घटी कोई
[41:32] घटना। हम आपबीती सीरीज में सुना है जो
[41:35] पूरी दुनिया में बसे 80 से ज्यादा कंट्रीज़ के लोग सुन रहे हैं।
[41:40] यू कैन रीच उस ऑन इंस्टाग्राम ऐट स्पोक कास्ट ओरिजिनल डीटेल्स
[41:46] डिस्क्रिप्षन में है एंड अगेन फाडू फ्रेडीज पर वारंट एक्स
[41:50] फाइल्स का पहला एपिसोड सुनना मत भूलिएगा।
[41:53] अगले हफ्ते फिर मिलेंगे मैं हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पोक
[41:58] कास्ट अवि और मंजिला के साथ। सुनते रहिए स्पोक कास्ट अवि और
[42:05] मंजिला के साथ।

Shows are listed from Apple Podcasts' charts and directory, and Podcast Index where it is used. Every show and episode belongs to its publisher and plays from the publisher's own feed; this site hosts none of them.
