# EP27 - ROOM NO 307 - Haunted Kota Hostel | SpookCast ORIGINAL Story |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 16 Nov 2024, 19 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/94516501/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2024-10-16%2F389930831-44100-2-38b30455ab50e.m4a

Story: What happens when Ruchi decides to not change her Hostel Room in Kota, India even when she realizes its haunted!! Will she survive? Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Haunted Hostel | Hostel Stories | Haunted Dormitories | Haunted Hostel Stories | Narrated by : Manjila Story and Sound: Manjila Basu Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com Sound Effect from Pixabay

## Transcript

[0:02] रात के 3:00 बजे रुचि अचानक अपने हॉस्टल के कमरे में नींद से उठी।
[0:08] वो कोटा के एक हॉस्टल में रूम नंबर 307 में रह रही थी।
[0:13] उस रात वो अकेले सो रही थी। क्योंकि उसकी रूममेट रचना सुबह ही
[0:18] अपने घर चली गई थी। अपने पापा के मेडिकल इमरजेंसी की
[0:21] वजह से यह रुचि की पहली रात थी। इस कमरे में अकेले जैसे ही रुचि
[0:28] ने आंखें खोली, उसे महसूस हुआ कि कमरे में कुछ तो अजीब था।
[0:33] उसने उठने की कोशिश की। पर वो बिल्कुल हिल नहीं पा रही
[0:37] थी। उसका शरीर बिल्कुल पत्थर की तरह
[0:41] सख्त हो चुका था और उसके हाथ, पैर और मुँह बिल्कुल हिल नहीं रहे थे।
[0:47] वो सिर्फ अपनी आँखों को हिला पा रही थी तभी उसे एक आवाज सुनाई दी।
[0:56] आँखों के कोने से अचानक उसने देखा कि बालकनी का दरवाजा धीरे धीरे
[1:02] अपने आप खुल रहा था और अगले ही पल कुछ अजीब सी चीज़ बालकनी से
[1:10] रेंगते हुए उसके बैग की तरफ बढ़ने लगी।
[1:14] रुचि का बेड और बालकनी का दरवाजा परपेंडिकुलर था और वो सीधा लेती
[1:19] हुई थी तो वो सही से नहीं देख पा रही थी कि उसके बेड की तरफ क्या
[1:23] बढ़ रहा था। धीरे धीरे उसे कमरे में एक अजीब
[1:28] सी बदबू महसूस होने लगी। सड़े हुए मास्क।
[1:32] मानो कोई चूहा या कोई दूसरा जानवर मर गया हो।
[1:37] जैसे जैसे वो चीज़ रेंगते हुए उसके पास आती जा रही थी, वैसे
[1:42] वैसे बदबू बढ़ती जा रही थी, एक डरावनी सी आवाज भी आ रही थी।
[1:47] अब जैसे कि कोई कुछ बोल रहा हो। पर उसके गले से आवाज नहीं निकल पा
[1:52] रही हो। रुची के रूम पे अचानक खड़े होने
[1:57] लगे। रात के 3:00 बजे वो इस अंधेरे रूम
[2:00] में अकेली थी और उसके रूम में कुछ रेंग रहा था।
[2:04] कोई अंजान सा आया या पता नहीं और क्या पर वो।
[2:08] ऐसी हालत में थी कि वो उठकर भाग भी नहीं पा रही थी।
[2:12] यह सोचकर डर के मारे और हेल्पलेस फील करते हुए उसके आंसू निकलने
[2:17] लगे थे। कुछ था जो चारों पैरों पर रेंगते
[2:21] हुए उसके बिस्तर के हेड बोर्ड के पास पहुँचकर उसके बिस्तर के
[2:24] कार्नर को अब खरोंच रहा था। बिस्तर पर शायद चढ़ने की कोशिश कर
[2:30] रहा था। वो रुचि बस उठकर वहाँ से भाग जाना
[2:34] चाहती थी पर वो अपने शरीर को बिल्कुल हिला नहीं पा रही थी।
[2:38] वो जितनी भी कोशिश करती है उसका कोई फायदा नहीं था।
[2:42] उसे अब तक ये रियलाइज हो चुका था कि उसे शायद स्लीप पैरालिसिस हो
[2:46] रहा था। एक ऐसा कंडीशन जब आप मेंटली तो
[2:49] बिल्कुल अक्टिव होते हो, पर अपने बॉडी को बिल्कुल हिला नहीं सकते,
[2:55] बॉडी पूरी फ्रीज़ हो रखी होती है। वो चीज़ जो जमीन पर रेंग रही थी,
[3:00] अब धीरे धीरे उसके बेड का चक्कर लगाना शुरू कर दी है और तभी रुचि
[3:06] को। कुछ सुनाई देता।
[3:09] है। अच्छा वो रिंगती हुई चीज़ एक
[3:22] डरावनी खराश भरी आवाज में उसका नाम ले रही थी।
[3:27] रेंगते हुए जब वो उसके पैर के पास पहुंची तब रुचि ने देखा कि वो कोई
[3:32] जानवर नहीं, एक लड़की थी उस लड़की के शरीर का मांस जगह जगह से गला
[3:40] हुआ था। कपड़े पुराने और फटे हुए थे और
[3:44] उसका शरीर टेड़ा मेड़ा था। किसी मकड़ी की तरह मानो उसकी
[3:49] हड्डियों टूटकर आपस में भिड़ गई हूँ।
[3:52] उसके चिपचिपे खून से सने खुले बाल उसके मुँह पर फैले हुए थे और वो
[3:57] चारों हाथ पैरों पर बैठ के आसपास रेंग रही थी।
[4:02] रुची डर से कांपने लगी। उसे ऐसा लग रहा था कि वो कभी भी
[4:08] अपना होश खोदेगी तभी अचानक न चाहते हुए भी उन दोनों की नजरें
[4:14] मिली और वो रेंकती हुई लड़की जिसका मुँह चिपचिपे बालों से ढका
[4:19] था, वो मुस्कुराते हुए उठकर जमीन पर बैठ गई।
[4:26] उसके गंदे, सड़े गले, दांतों और अजीब सी चमकती आँखों को देख रुची
[4:31] को एक गंजा डर का अहसास हो रहा था।
[4:34] ये कौन थी, कहाँ से आई थी या फिर ये उसका हैलूसिनेशन था?
[4:38] स्लीप पैरालिसिस की वजह से पता नहीं पर तभी।
[4:43] उस लड़की ने कुछ ऐसा कहा जिसे सुनने के लिए रुचि बिल्कुल तैयार
[4:49] नहीं थी। रची मेरे साथ नहीं चलेगी, चला रची
[5:02] बहुत मज़ा आएगा। उसकी आँखों की पुतलियां पीली थी
[5:13] और इतनी बड़ी की पूरी आँखों में पुतलियो के अलावा और कुछ नजर नहीं
[5:18] आ रहा था। रुची को अब बहुत ज्यादा डर लग रहा
[5:21] था और अगले ही पल। वो बेहोश हो गई।
[5:30] सुबह साढ़े 5:00 बजे रुचि नींद से उठी।
[5:33] जब किसी ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी वो तुरंत उठकर डोर की तरफ
[5:38] बढ़ी। बाहर उसकी उसी हॉस्टल की दो फेंस
[5:42] खड़ी थी जो उसे योगा के लिए बुलवाने आई थी।
[5:45] उन्हें देखते ही रुचि को एकाएक रात में घटी सारी बातें याद आ गई
[5:50] और उसका चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ गया।
[5:54] उसका चेहरा साफ बता रहा था कि कुछ तो गड़बड़ थी उसकी फ्रेन्डस ने
[5:59] उससे पूछा भी कि सब ठीक है या नहीं, पर वो चुप रही।
[6:05] उसने सिर्फ इतना कहा कि वह पहली बार हॉस्टल में अकेले सो रही थी
[6:10] और रात को उसे बस थोड़ा डर लग रहा था और कुछ नहीं।
[6:15] उसके फ्रेन्डस ने उससे कुछ ज्यादा नहीं पूछा और वह लोग योगा के लिए
[6:19] चले गए। उस दिन रुचि ने डिसाइड किया।
[6:23] कि जब तक उसकी रूममेट रचना वापस नहीं आ जाती वो अपने दूसरे
[6:28] फ्रेंड्स के कमरे में ही सोए की अगले कुछ दिन उसने अपना ज्यादातर
[6:33] वक्त हॉस्टल के बाहर ही बिताया और जब भी कमरे में जाना होता वो
[6:38] बालकनी का दरवाजा खुला रखती। ताकि कमरे में ज्यादा से ज्यादा
[6:42] रौशनी आए और उसका डर कम हो सके। बस हर शाम वह अपने फ्रेन्डस के
[6:49] रूम में सोती उस रूम में नहीं जब एक वीक के बाद रचना वापस आई।
[6:56] रुचि फाइनली अपने रूम में सोने लगी।
[6:59] और धीरे धीरे वो उस रात को लगभग भूल गई, पर सब कुछ जल्द ही बदलने
[7:06] वाला था। इच्छा तुझे अपने हॉस्टल की एक और
[7:14] लड़की के कमरे में पढ़ाई कर रही थी, अचानक उसे याद आया।
[7:19] की एक इम्पोर्टेन्ट बुक उसके डेस्क पर रह गया था तो वो उठ कर
[7:23] वो बुक लेने अपने रूम में चली गई। जब वो दरवाजे के बाहर पहुंची तो
[7:27] दरवाजा हल्का सा खुला छोड़कर वो अंदर गई ताकि हॉलवे की रौशनी अंदर
[7:33] आए और कमरा दाग ना लगे। लेकिन जैसे ही वो कमरे के अंदर गए
[7:39] वो सहम कर वहीं खड़ी हो गई। उस अंधेरे रूम में उसे बेड के
[7:45] हेडबोर्ड वाले वॉल के पास उसकी रूममेट रचना खड़ी दिखाई दी।
[7:50] वॉल की तरफ अपना मुँह ये। तृष्णा के बाल खुले हुए थे और वो
[7:57] दीवार की तरफ देख रही थी, जैसे किसी ने उसे कोई पनिशमेंट दिया
[8:01] हो। वो अपना सर धीरे धीरे दीवार पर
[8:06] पटक रही थी और दीवार पर एक लाल निशान दिख रहा था।
[8:11] एक काढ़ा लाल निशान जो शायद। रचना के खून से बना था।
[8:18] रचना रचना। ये ये ये तो।
[8:23] क्या कर रही है रचना? रुचि ने कांपते हुए आवाज में
[8:27] पूछा, उसके दिल में उस रात की यादें और डर वापस आ चूके थे पर
[8:33] रचना ने। कोई जवाब नहीं दिया।
[8:36] वो अपना सर धीरे धीरे दीवार पर मारते हुए एक अजीब सी आवाज कर रही
[8:42] थी। रुचि के हाथ पांव ठंडे होने लगे
[8:45] थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या
[8:48] करे? वो हिम्मत करके रचना के पास गई और
[8:53] उसने उसका हाथ पकड़ा। रचना को उसने जैसे ही छूआ, उसने
[8:58] अपना सिर पटकना बंद कर दिया पर एक अजीब सी डरावनी आवाज में हंसने
[9:04] लगी। रुचि ने इस डरावनी आवाज को सुनकर
[9:09] एक कदम पीछे लिया। कृष्णा ने अब धीरे धीरे अपना सर
[9:14] घुमाकर रुचि को देखा। उसकी आँखों की पुतलियां बड़ी बड़ी
[9:18] पीले रंग की थीं। उसके दाँत सड़े हुए काले रंग के
[9:23] और पूरे कमरे में अचानक सड़े हुए मांस की बदबूआ ने रखी।
[9:28] रचना को इस रूप में देखकर रुचि के गले से चीख निकल गई।
[9:33] अट्टबी में डोर ज़ोर से पूरा खुल गया और रुचि ने पीछे मुड़कर देखा।
[9:39] हलवे की लाइट में रचना खड़ी थी। डोर के बाहर रुचि को देखकर उसके
[9:46] चेहरे पर चिंता थी। रूचि तो क्यों चलाई तो ठीक है ना?
[9:52] क्या हुआ रुचि को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।
[9:56] उसने कांपते हुए रूम के अंदर वॉल्ट के पास देखा, पर अब वहाँ
[10:03] कोई नहीं था। रूम बिल्कुल खाली था।
[10:07] ना ही कोई सड़े मास की बदबू आ रही थी और ना ही दीवार पर कोई खून के
[10:13] निशान थे। वो बहुत घबरा गई और बिना कुछ बोले
[10:17] वो रूप से निकल कर बाहर चली गई। उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
[10:22] उसे ऐसा लग रहा था कि वो पागल हो रही है।
[10:25] उसने बड़ी मुश्किल से खुद को शांत किया।
[10:29] उसने अपने दोस्तों को या रूममेट को इस बारे में कुछ नहीं बताया।
[10:34] उसने सोचा कि शायद उसके डर या एग्ज़ैम स्ट्रेस की वजह से उसे
[10:39] ऐसे हैलूसिनेशन हो रहे थे। अगले कुछ दिन और कोई आजीवन नहीं
[10:46] हुआ। और रूचि अपने रूटीन में पहले जैसे
[10:49] ही बीज़ी हो गए, सब ठीक चल रहा था कि एक रात रुचि और उसके कुछ
[10:56] हॉस्टल के फ्रेन्डस दूसरे कमरे में मूवीज़ देख रहे थे, जब रात के
[11:01] लगभग 11:00 बजे अगली मूवी देखने का टाइम आया।
[11:05] तो रुचि को याद आया कि अगले दो मूवीज़ उसके डेस्क पर पड़े पेन
[11:10] ड्राइव में थे। रूम में जाने की बात सोचते ही
[11:14] उसका दिल का एक थम गया। उन हादसों के बाद वह अपने रूम में
[11:20] अकेले कभी नहीं जाते थे। उसने सोचा कि वो।
[11:25] किसी को साथ जाने को कहे पर मजाक बनेगा, यह सोचकर वो चुप रह गए।
[11:31] वो डर डरकर अपने कमरे की तरफ पड़ने लगे।
[11:36] हॉलवे में चारों तरफ शांति थी। बस कुछ रूम से बातें करने या
[11:42] लैपटॉप में चल रहे सीरीज या मूवीज़ की आवाज आ रही थी।
[11:45] हलवे एक दम खाली था, उसने रूम का दरवाजा धीरे से खोला।
[11:54] रूम में कोई नहीं था। चारों तरफ अंधेरा था और उसने मेन
[11:58] डोर हल्का सा खुला रखा ताकि हलवे की रौशनी अंदर आए।
[12:03] और उसने जल्दी से भागकर रूम के लाइट्स ऑन किए।
[12:06] फिर वो डेस्क पर पेन ड्राइव ढूँढने लगी।
[12:08] वो सेकंड और मेरक इस डेशनरीज को इधर उधर पलट ही रही थी कि तभी रूम
[12:14] का दरवाजा बहुत ज़ोर से बंद हुआ और अगले ही पल रूम की सारी
[12:21] लाइट्स। बंद हो गई।
[12:24] रुचि के पैर डर से वहीं जम गए। उसने कांपते हुए हाथों से वो बाल
[12:30] का टॉर्च ऑन किया कि तभी धीरे धीरे बालकनी का दरवाजा खुलने की
[12:36] आवाज आई। रुचि ने जैसे ही आवाज सुनी वोटर
[12:57] से चिल्लाने लगी। वो भागते हुए मेंडोरे के पास
[13:01] पहुंची पर पूरी ताकत लगाकर। वो मेन डोर खोलने की कोशिश करने
[13:06] के बावजूद उसे नहीं खोल पाई। डोरपन था।
[13:09] ऐसा लग रहा था मानो किसी ने डोर को बाहर से लौट कर दिया हो।
[13:13] रुची अब डर से रो रही थी, उसके हाथ पैर कांप रहे थे और उसका फ़ोन
[13:20] उसे संभालना नहीं जा रहा था। अच्छा?
[13:26] मेरे साथ नहीं जाने। दी, वो घबराकर धीरे से पीछे
[13:40] मुड़ी। और पालकनी के डोर के कैंप में उसे
[13:44] वही लड़की का सिर दिखाई दिया। कमरे के अंदर झाकता हुआ उसके मुँह
[13:51] पर खून से भीगे चिपचिपे बाल भरे पड़े थे।
[13:56] उसकी आँखों की पुत्लियां पीली थीं जो अंधेरे में चमक रही थी।
[14:00] और उसके होठों पर वही डरावनी मुस्कान थी।
[14:05] वो रुचि को देख मुस्कुराने लगी और अगले ही पल अपने टेढ़े मेरे हाथ
[14:11] पैर पर झेंगते हुए तेजी से वो रुचि की ओर बढ़ने लगी।
[14:20] रुचि बेहोश हो गई। 15 मिनट बाद जब वो पेन ड्राइव
[14:29] लेकर वापस नहीं आई तब उसकी एक दोस्त ने उसके कमरे में जाकर चेक
[14:34] किया। उसने रुचि को जमीन पर बेहोश देखा।
[14:38] तो वो तुरंत बाकी सबको बुलाकर ले आई।
[14:41] कुछ देर बाद जब रूचि होश में आई तब उसने फाइनली अपने साथ हुए सारे
[14:47] इन्सिडेंट्स के बारे में सबको बताया।
[14:50] रुचि की पूरी बात सुनकर वहाँ बैठी एक सीनियर लड़की ने उसे और बाकी
[14:57] सबसे। एक ऐसी घटना शेयर की जिसे सुनकर
[15:02] सब हिल गए। 3 साल पहले पूजा नाम की एक लड़की
[15:07] रांची से अपने परिवार से लड़ाई करके उस हॉस्टल में एंट्रेंस
[15:11] एग्ज़ैम का प्रिपरेशन करने आई थी। वो और पढ़ना चाहती थी।
[15:16] जल्दी शादी नहीं करना चाहती थी पर जब वह एग्ज़ैम्स में फैल हुई तो
[15:21] वो अंदर से बिल्कुल टूट गई। उसके पास घर वापस जाने का ऑप्शन
[15:27] नहीं था और उसने उसी रूम के बाल्कनी से कूद कर अपनी जान दे
[15:33] दी। वो जानबूझकर अपने सर के बल कूदे
[15:37] ताकि थर्ड फ्लो से कूदने पर भी बचने का कोई चांस ना हो।
[15:42] उसका सिर बुरी तरह से क्रश हो गया और शरीर की सारी हड्डियों ऐसी
[15:47] टूटी कि उसकी लाश पूरी डीफॉर्म्ड लग रही थी।
[15:53] उसकी मौत से पहले उसने अपना पूरा वक्त अकेले बिताना शुरू किया था।
[15:58] वो किसी से बात नहीं करती थी। बाकी लड़कियां कहती थी कि उस कमरे
[16:04] से हमेशा रोने और कभी कभी दीवार पर सर पटकने की आवाज आती रहती थी।
[16:11] वो काफी डिप्रेशन में चल रही थी और फाइनली उसने स्विस कर लिया।
[16:17] पूजा के डेथ के बाद वो रूम 1 साल के लिए बंद था।
[16:22] उसके बाद रेनोवेशन्स होने पर वो रूम वापस स्टूडेंट्स को दिया जाने
[16:27] लगा। लेकिन जो भी।
[16:29] जो भी लड़की वहाँ अकेले सोती वो अजीब एक्सपीरियंस से गुजरती।
[16:34] कभी किसी को स्लीप पैरालायसिस होता, कभी कोई आवाज सुनाई देती,
[16:39] कभी कोई डरावने चेहरे दिखाई देते, कई लड़कियां या तो रूम छोड़कर चली
[16:45] जाती या फिर हॉस्टल चेंज कर लेती ये रूम?
[16:48] किसी को परमानेंटली नहीं दिया गया क्योंकि लगभग सभी को कुछ ना कुछ
[16:54] अचीव एक्सपीरियंसेस हुए थे। वहाँ पिछले साल एक लड़की थी जो
[17:00] अकेले उस रूम में करीब एक हफ्ता रही।
[17:03] पता नहीं उसने क्या देखा क्योंकि अचानक पता चला कि 1 दिन उसका
[17:07] मेन्टल ब्रेकडाउन हो गया। और उसे घर वापस भेजना पड़ा और कुछ
[17:12] दिन बाद यह खबर आई कि उसने अपने घर की बाल्कनी से कूदकर सुसाइड कर
[17:18] लिया है। कहते हैं कि पूजा की आत्मा आज भी
[17:23] उस रूम में है और वह दूसरों को संभव।
[17:27] सुसाइड करने के लिए कन्विंस कर लेते हैं?
[17:30] पता नहीं ये सब सच है या कोइंसिडेंस ये सब सुनकर रुचि और
[17:36] बाकी सारी लड़कियां चुप हो गई। रुचि का चेहरा सफ़ेद पड़ गया था
[17:42] और उसके दोस्तों को भी लग रहा था कि उसने जो कुछ देखा।
[17:46] वो शायद वाकई में सच था। उसने कुछ दिनों बाद वो हॉस्टल
[17:52] छोड़ दिया। तीन महीने बाद हॉस्टल की लड़कियां
[17:57] डाइनिंग हॉल में बैठ कर लंच कर रही थीं।
[17:59] तभी घबराई हुई रचना हॉल में भागकर खुशी उसके हाथ में फ़ोन था।
[18:06] उसने सबकी तरफ देखा और फिर कहा रुचि की सिस्टर का कॉल आया था
[18:12] उसने उसने कल शाम को अपने घर की बालकनी से कूदकर सुई साइड कर लिया
[18:20] है। हे गाइस कैसे हैं आप सब?
[18:25] अगर आप में से किसी को या आपके फ्रेन्डस या फैम्ली में अगर किसी
[18:30] को सुसाइडल थॉट्स आते हैं, तो आप प्लीज़ किसी क्लोज़ फ्रेन्ड या
[18:34] किसी एक्सपर्ट से जरूर बात कीजिए। इट विल हेल्प इमेन्सली वैसे क्या
[18:40] आप में से किसी ने किसी होंटेड हॉस्टल के रूम में स्टे किया है
[18:43] कभी? अगर हाँ, तो हमसे अपना
[18:46] एक्सपीरियंस जरूर शेयर कीजिए। वी वुड लव टु नो युअर स्टोरी होप
[18:51] यू गाइस अरे एंजोयिंग ओरिजिनल स्टोरीज़ लाइक ऑलवेज आपकी
[18:54] रेटिंग्स के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
[18:57] अगले हफ्ते फिर एक ओरिजिनल स्टोरी के साथ वी विल बी बेक मैं हूँ
[19:02] मंजुला। और आप सुन रहे हैं, स्पोक कास्ट
[19:06] अवि और मंजिला के। साथ सुनते रहिए स्पोक कास्ट अवि
[19:12] और मंजिला के साथ।

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