# Ep23 - AAKHRI SAFAR | SpookCast | ORIGINAL Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 16 Oct 2024, 15 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/93129654/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2024-9-16%2F388207789-44100-2-da49bab1075e8.m4a

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## Transcript

[0:02] नमस्कार दोस्तों, आपका स्वागत है स्पोक कास्ट के इस नए एपिसोड में
[0:07] आप सब में से बहुतों ने रात के अंधेरे में कभी ना कभी फैम्ली या
[0:11] दोस्तों के साथ आउट स्टेशन ट्रैवेल किया होगा।
[0:14] चारों तरफ गोपर डेरा, एक अजीब सा सन्नाटा।
[0:18] बस हेडफोन स्पीकर से आ रही गाने की आवाज एक अलग ही माहौल बनाती
[0:23] है। पर क्या होता है जब आपके बगल में
[0:25] बैठा हुआ इंसान जिससे आप अपना दोस्त या फैम्ली समझ रहे थे, वो
[0:30] दरअसल कोई और है? आइए सुनते हैं एक ऐसी ही कहानी।
[0:35] मैं हूँ अवि और आप सुन रहे हैं स्पूककास्ट अवि और मंजिला के साथ
[0:41] सुनते रहिए स्पूककास्ट अवि और मंजिला के साथ रात का समय था।
[0:53] राकेश अपने दो बच्चों पूजा और पवन के साथ अपने कार में।
[0:57] कॉलेज हॉस्टल के लिए निकल चूका था।
[0:59] पवन को एक अच्छे कॉलेज में अडमिशन मिल गया था और वो उसे छोड़ने जा
[1:04] रहे थे। उनके फैम्ली का बांड काफी
[1:06] स्ट्रांग था और राकेश अपनी बीवी के गुज़र जाने के बाद अपने बच्चों
[1:11] के और भी करीब हो गया था। वो तीनो पहाड़ों वाले रास्तों से
[1:15] जा रहे थे। रास्ते के दोनों तरफ घने जंगल थे
[1:19] पर रास्ते पे गाड़ियां ना के बराबर थी।
[1:22] राकेश मनिमन इस रूट को लेके खुद को कोस रहा था।
[1:26] वो इस रास्ते से कुछ साल पहले भी आया था पर तब ये रास्ता काफी
[1:31] बीज़ी रहता था। इस रास्ते पर आज इतना सन्नाटा
[1:35] होगा। उसने कभी नहीं सोचा था और दो जवान
[1:38] बच्चों के साथ इस तरह रात में एक सुनसान रास्ते से ट्रैवेल करना
[1:42] उसे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था।
[1:45] उसने गाड़ी की स्पीड तेज की और जल्द से जल्द वो सुनसान रोड से
[1:49] निकलने की कोशिश करने लगा। सब कुछ ठीक लग रहा था जब अचानक
[1:54] भवन बोल पड़ा। पापा मुझे बाथरूम जाना है, राकेश
[1:58] ने घबराकर कहा अभी ये जगह ठीक नहीं है बेटा थोड़ा रुक जा आगे
[2:04] किसी धावे पर जाकर रोकता हूँ मैं पर पवन के बार बार कहने पर राकेश
[2:08] ने गाडी रोक दी। घाटी का वो कोना बिल्कुल सुनसान
[2:15] था। ना आगे कोई गाड़ी दिख रही थी, ना
[2:17] पीछे। राकेश और पूजा गाड़ी के अंदर बैठे
[2:20] जंगल की तरफ इधर उधर देख रहे थे जहाँ पवन बाथरूम करने गया था।
[2:25] चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था। सिर्फ गाड़ी की हेडलाइट्स की
[2:29] रौशनी से आगे का रास्ता दिख रहा था।
[2:32] उन दोनों को थोड़ी दूर। पवन के फ़ोन के टॉर्च की लाइट भी
[2:36] दिख रही थी। झिंगरों की आवाज और कुछ आवाजें
[2:39] ऐसी थी जो पहचानी नहीं जा रही थी। राकेश के अंदर बेचैनी बढ़ रही थी
[2:45] और पूजा अपने हाथ मसलते हुए बोली। पवन को 5 मिनट से ज्यादा हो गए।
[2:51] पापा आप ज़रा उसे आवाज़ दो ना प्लीज़।
[2:54] राकेश भी थोड़ा परेशान होने लगा था।
[2:56] उसने जब मुड़कर पवन की ओर देखा, वहाँ अब कोई मोबाइल की लाइट नहीं
[3:00] दिखाई दे रही थी। उसका दिल बैठ गया।
[3:04] पवन मवन, पवन, राकेश ने आवाज़ लगाई पर कोई जवाब नहीं आया।
[3:12] पूजा बेटा। पवन को फ़ोन लगा ज़रा राकेश ने
[3:15] अपनी बेटी से कहा। पूजा ने पवन का नंबर लगाया है पर
[3:22] उसका फ़ोन आउट ऑफ़ कवरेज एरिया आ रहा था।
[3:26] पवन को गए हुए अब 10 मिनट गुजर गए थे।
[3:29] राकेश ने टॉर्च निकाली और गाड़ी से उतरा।
[3:32] पापा, रुको, मैं भी चलूँगी मुझे यहाँ अकेले डर लग रहा है।
[3:38] राकेश ने मना नहीं किया और वो दोनों जंगल की तरफ जाने लगे।
[3:41] पूजा ने भी अपने फ़ोन की लाइट ऑन की।
[3:44] राकेश आगे आगे टॉर्च लेकर चल रहा था और पूजा ठीक उसके पीछे।
[3:52] पवन। राकेश और पूजा दोनों पवन को आवाज
[3:56] लगा रहे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा था।
[4:00] जंगल में सिर्फ कीड़े मकोड़ों की आवाज ही आ रही थी तभी पूजा की नजर
[4:04] दूर एक पेड़ के पास गई। उसने अपने मोबाइल के टॉर्च का बीम
[4:09] उस दिशा में किया और उसकी सांसे वहीं रुक गई।
[4:15] पवन वहाँ उस पेड़ के ठीक नीचे खड़ा था लेकिन हवा में उसके पैर
[4:21] जमीन से काफी ऊपर थे और वो शायद होश में भी नहीं था।
[4:25] उसकी गर्दन नीचे लटकी हुई थी, उसके शरीर में मानो कोई हलचल नहीं
[4:30] थी। सामने एक लंबी काली औरत खड़ी थी
[4:35] जिसके लंबे बालों से उसका चेहरा ढका हुआ था।
[4:38] उसकी त्वचा किसी पूड़ी औरत जैसी थी और वो अपने दोनों हाथों को पवन
[4:43] की तरफ बढ़ाकर कुछ अजीब से मंत्र जैसा कुछ बोल रही थी।
[4:47] पूजा की आवाज मानो गले में ही अटक गई।
[4:52] पापा पापा वो पापा वो कौन है? वो कौन है बाबा?
[5:01] कौन पूजा पवन दिखाते तुम्हें कहाँ है?
[5:04] वो राकेश पूजा से थोड़ा आगे चल रहा था तो वो तेजी से उस उबड़
[5:10] खाबड़। पगडंडी से पूजा की तरफ बढ़ने लगा।
[5:14] पूजा डर के मारे हिल भी नहीं पा रही थी।
[5:16] उसने इशारा करते हुए राकेश को उस पेड़ की तरफ देखने को कहा।
[5:21] उसी पल वो औरत अचानक रुक गयी जैसे उसने समझ लिया हो की कोई उसे देख
[5:28] रहा था उसने धीरे धीरे। अपना सिर घुमाया और सीधा पूजा की
[5:33] तरफ देखा और पूजा की जान मानो वहीं निकल गई।
[5:37] उस औरत की आँखों की पुतलियां सफेद थी।
[5:41] वह पूजा की तरफ देख मुस्कुराने लगी थी।
[5:44] एक बहुत ही वीभत से मुस्कान। बिना दांतों के जिसे देख पूजा के
[5:49] हाथ पैर ठंडे पड़ गए थे, पूजा के गले से एक ज़ोर से चित्तकार निकली
[5:55] और अगले ही पल वो काली औरत मानो वहाँ से कहीं गायब हो गई और बेहोश
[6:00] पवन जमीन पर गिर गया। राकेश तब तक पूजा के पास पहुँच
[6:05] गया था पूजा। पूछा क्या हुआ तुझे?
[6:08] क्या तुमने कुछ देखा? पूजा ने खुद को संभालना और पवन की
[6:11] ओर इशारा किया। राकेश और पूजा ने तुरंत पवन को
[6:14] उठाया। पवन पवन।
[6:16] पवन, बेटा। पवन नोट प्लीज़ उठ जा क्या हुआ
[6:19] पवन? पवन राकेश उसे जगाने की कोशिश कर
[6:22] रहा था, लेकिन पवन बेहोश था। पूजा का दिल ज़ोर से दरक रहा था।
[6:28] कोई नहीं समझ पा रहा था कि क्या हो रहा था?
[6:31] राकेश और पूजा उसे गाड़ी में वापस ले आए और उसे पानी पिलाया।
[6:36] थोड़े देर बाद पवन को होश आया। क्या हुआ पापा मैं मैं कान में
[6:42] कैसे लौटा, पवन ने पूछा। राकेश ने ज्यादा कुछ नहीं कहा।
[6:46] उस पूजा को उसके साथ पीछे वाली सीट पर बैठने को कहा।
[6:50] फिर उसने गाड़ी स्टार्ट की और सब जल्दी जल्दी वहाँ से निकल गए।
[6:54] रास्ते में अचानक राकेश ने पूछा पूजा तुम भवन को देख चिल्लाई
[6:59] क्यों थी बेटा? पूजा को समझ नहीं आ रहा था कि वो
[7:02] क्या बताए? उसने थोड़ा सोच कर कहा।
[7:05] कुछ नहीं पापा, बस अंधेरे से डर गई थी मैं।
[7:08] लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल बहुत घबराया हुआ था।
[7:12] उसे पता था कि उसने जो देखा वो कोई सपना नहीं था।
[7:16] राकेश अब गाड़ी भगा रहा था। पवन पीछे वाली सीट पर सो रहा था।
[7:21] पूजा उसके बगल में बैठी हुई थी। लेकिन उसे अभी भी डर लग रहा था।
[7:25] उस औरत के बारे में सोच कर वो कौन थी और वो कहा गायब हो गई और वो
[7:32] पवन वो क्या सच में हवा में लटक रहा था या फिर उससे देखने में कोई
[7:36] गलती हो गई? वो ये सब सोच कर काफी परेशान हो
[7:39] रही थी। होश में आने के बाद पवन को कुछ
[7:42] याद नहीं था की उसके साथ क्या हुआ था इसलिए उससे कुछ सवाल जवाब करने
[7:47] का भी मतलब नहीं बनता था। अचानक पवन के हाथ से उसका हाथ
[7:51] टकराया और पूजा चौंक गई। पवन का हाथ बर्फ़ जैसा ठंडा था और
[7:57] अगले पल उसने देखा की। पवन उसे घूर रहा था बिना पल के
[8:02] छपकाए उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी, ठीक उस चुड़ैल के
[8:08] जैसी। पवन तो तू ठीक तो है ना?
[8:12] पूजा ने डर डर कर पूछा, लेकिन पवन से कोई जवाब नहीं मिला उसका भाई।
[8:18] जो हमेशा बाते करता रहता था। आज एक दम चुप था बस वो पूजा को
[8:23] देख मंद मंद मुस्कुरा रहा था। पूजा ने डर के मारे अपना चेहरा
[8:27] दूसरी और खिड़की की तरफ कर लिया पर उसे पता था पवन अब भी उसे जा
[8:33] रहा था। उसे अब बेचैनी होने लगी थी।
[8:36] कुछ दूर चलने के बाद उन्होंने एक ब्रेक लिया त पूजा ने अपने पापा
[8:40] को अकेले पाकर फाइनली उनसे औरत वाली बात बताई।
[8:44] पापा, मुझे आपसे एक बात करनी है आप, आप तो मुझे पूछ रहे थे ना कि
[8:49] मैं जंगल में इतने ज़ोर से क्यों चलाई?
[8:52] वो वो आज मुझ पर विश्वास नहीं करूँगी लेकिन।
[8:57] पवन अकेले नहीं था। पवन के सामने एक औरत खड़ी थी,
[9:01] लंबी सी उसने काले रंग के कपड़े पहने थे और उसके बाल बिल्कुल लंबे
[9:06] थे और उसकी आँखें पूरी सफेद थी और फिर वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही
[9:11] थी और उसकी आँखें देखकर मैं डर गई, पापा।
[9:16] और फिर जब जब मैंने आपको जब मैंने आपको बुलाया, मुझे नहीं पता वो
[9:21] कहाँ चली गई, मैंने आपकी तरफ देखा और मैं जब दोबारा उधर मुड़ी वो
[9:25] नहीं थी। पवन वो जमीन पर था और वहाँ जाने
[9:29] के बाद पापा अभी मुझे बहुत अजीब लग रहा है क्योंकि पवन भी अजीब सा
[9:33] बिहेव् कर रहा है वो। वो बहुत शांत है, वो बिल्कुल
[9:38] चुपचाप बैठा है और मुझे पता नहीं क्यों बट वो मुझे घूर रहा है पापा
[9:43] और वो औरत उसकी आंखें वो सब याद करके मुझे बहुत डर लग रहा है।
[9:48] पापा, मुझे सच में डर लग रहा है। अब मुझे प्लीज़ अकेले पवन के साथ
[9:52] मत बैठने दो। पूजा बेटा, वहाँ काफी अँधेरा था।
[9:55] तुम्हारा डर ही तुम्हे ऐसा सोचने पे मजबूर कर रहा है।
[9:58] वे काली औरत या चुड़ैल, ऐसा कुछ भी नहीं था।
[10:02] सब तुम्हारे दिमाग का खेल है। ये सब कुछ नहीं होता है।
[10:05] बेटा रिलैक्स पूजा ने इसके बाद और कुछ नहीं कहा, लेकिन अंदर ही अंदर
[10:10] उसे अब भी अपने ही भाई से डर लग रहा था।
[10:13] वो वापस गाड़ी के बेक शीट में बैठी पवन अब भी चुप था लेकिन अब
[10:18] भी उसके चेहरे पे वही मुस्कान थी। चेहरे की नसें जैसे की बाहर निकली
[10:23] हुई थी और उसकी त्वचा अजीब फीकी सी लग रही थी।
[10:28] राकेश ने गाड़ी स्टार्ट की और एक हल्का सा म्यूसिक चालू कर दिया।
[10:31] 2 घंटे में हम हॉस्टल पहुँच जाएंगे।
[10:34] तुम दोनों अब थोड़ा रेस्ट कर लो। थोड़ी देर बाद जब लग रहा था कि सब
[10:39] कुछ नॉर्मल है, राकेश ने पीछे से एक हल्की सी आवाज़ सुनी जैसे कोई
[10:43] कुछ फुस फुसाकर बोल रहा हो। उसने पीछे देखा तो पवन धीरे धीरे
[10:48] कुछ बोल रहा था। अच्छा?
[10:51] 567 पवन क्या कर रहा है तू? राकेश ने पूछा लेकिन पवन ने आँखें
[11:01] बंद कर ली और वो नंबर गिनता रहा। राकेश को लगा कि शायद वो डीप
[11:05] ब्रीदिंग कर रहा है। खुद को थोड़ा रिलैक्स करने के
[11:09] लिए। पर पवन चुप नहीं हुआ।
[11:11] वो नंबर्स गिनते ही जा रहा था और वो नंबर्स अब हज़ारों में जा रहे
[11:15] थे। राकेश को समझ नहीं आ रहा था कि ये
[11:18] हो क्या रहा था? उसे अजीब लग रहा था।
[11:21] अचानक पीछे की सीट से आ रही एक अजीब सी आवाज़ ने उसका ध्यान
[11:24] खींचा जब राकेश ने पीछे मुड़कर देखा।
[11:29] जो नजारा उसे बेक सीट पर दिखा वो देखकर वो दंग रह गया।
[11:32] अंदर तक हिल गया पवन अपनी सीट पर सीधा बैठा हुआ था।
[11:37] उसकी आंखें बिल्कुल सफेद थी। उसके होंठों पर दांतों पर खून लगा
[11:41] हुआ था और पूजा का सिर उसके गोद में था।
[11:45] खून से लथपथ बिना दांतों। और आँखों के उसके सिर से खून टपक
[11:52] रहा था। पूजा की आधे से ज्यादा सर के बाल
[11:56] पवन ने खींचकर निकाल लिए थे और अब राकेश को समझ में आया कि शायद पवन
[12:02] अब तक यहीं गिन रहा था। पवन के हाथों में पूजा के खून से
[12:06] लथपथ बालों का एक गुच्छा भी था और शायद पूजा की ही एक आंख को वो
[12:12] बड़े चाव से चबा रहा था। सीट में चारों तरफ खून, नाखून और
[12:17] वह त्वचा के टुकड़े, खून से लथपथ बालों के गुच्छे और शायद दांत के
[12:22] भी टुकड़े फैले हुए थे। पूजा की लाश भवन के गोद में थी
[12:27] भवन अपनी बहन की आँखें अब भी बड़े चाव से खा रहा था।
[12:31] उसका मुँह खून से भर गया था। राकेश का दिमाग घूम गया ये सब देख
[12:36] के और उसके गले से एक चीख निकली। उसने एक ज़ोर का ब्रेक मारा लेकिन
[12:42] ये भयंकर दृश्य देख। वो अपना संतुलन खो चुका था।
[12:46] गाडी डिवाइडर से टकरा गई और राकेश वहीं स्पॉट में मर गया।
[12:56] जब पुलिस वहाँ पहुंची उन्हें बस दो लाशे मिली।
[13:00] अक्सीडेंट का केस फाइल हुआ। पर पूजा की आँखें, नाखून, दांत और
[13:06] बाल निकाले जाने का राज़ कोई नहीं समझ पाया था।
[13:10] पवन की कोई खबर भी नहीं मिली। दो हफ्ते बाद पवन की लाश उसी जंगल
[13:16] के उस कोने में मिली जहाँ उस रात वो बाथरूम करने के लिए गया था।
[13:21] उसकी लाश उसी पेड़ से लटकी हुई थी और उसके भी बाल, दांत, आँखें और
[13:27] नाखून गायब थे। पर उसके चेहरे पर एक अजीब सी
[13:32] मुस्कान अब भी थी। अब उस रोड से रात के टाइम बहुत ही
[13:37] कम लोग गुजरते हैं। लोकल्स का कहना है कि कुछ साल
[13:40] पहले पास के ही गांव में बहुत सी मौतें हो रही थी।
[13:44] फिर 1 दिन लोगों ने एक औरत को काला जादू करते हुए पकड़ लिया।
[13:48] उस औरत को काला जादू करने के दोष में लोगों ने बहुत मारा।
[13:52] उसके बाल, नाखून, दांत, आँखें एक एक कर उसके जिंदा रहते ही निकाल
[13:58] दी गई। फिर उसे भी उस पेड़ से लटका कर
[14:01] मार दिया गया। तब से अगर कोई उस जंगल में रात
[14:05] में जाता हैं या कोई उसे देख लेता हैं तो वो चुडैल उसके साथ भी यही
[14:11] करती हैं। और अंत में उसे मार देती है तो ये
[14:20] थी हमारी आज की कहानी कैसी लगी आपको हमे जरूर बताये और हाँ हमे
[14:25] प्लीज़ रेट कीजिए, आपके इस सपोर्ट के लिए धन्यवाद, हम जल्दी ही
[14:31] लौटेंगे। फाडू फ्राइडेज के एपिसोड के साथ
[14:34] इस शुक्रवार रात 9:00 बजे आज के लिए यहीं तक शुभरात्रि सुनते रहिए
[14:43] स्पोक कास्ट अवि और मंजिला के साथ।

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