# Ep39- OFFICER DOUGLAS KA BUNGALOW | SPOOKCAST ORIGINAL STORY |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 9 Mar 2025, 17 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/99597864/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-2-9%2F396251481-44100-2-d297de38aac36.m4a

Story: What happens when three friends decide to explore a Haunted Colonial Bungalow in Pune on a moonless night! Rumors has it, that the Bungalow comes alive every fortnight on AMAVAS!! Will they survive this ordeal? To know, listen to this original Story!! Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! Send your stories on our Whatsapp number 9767916545. Leave a msg or a voice note and we will get back to you. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Haunted Village | Haunted House | Haunted Flat | Narrated by : Avi STORY and SOUND : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:04] हाउ? डेयर यू हाउ डेयर यू फॉल ए स्लीप
[0:12] ऑन ड्यूटी लेट? मी टीच यूए लेसन।
[0:20] हाँ तो साहब माफ़ कर दो गलती हो गयी मुझसे की गलती हो गयी गलती हो
[0:24] गयी मेरे से इस की इस गरीब की पत पत बतुआ लगेंगी तुझे।
[0:39] बदुआ लगेंगी तुझे याद रख। यह
[0:58] सुनते रहिये स्पूकास्ट, अवि और मंजिल के साथ।
[1:08] दी। डगलस बंगलो पुणे का पुराना रोड
[1:13] जहाँ एक वीरान और श्रापित जगह थी एक बड़े से बगीचे से घिरा हुआ
[1:17] कोलोनियल स्टाइल का एक विशाल बंगला जिसकी टूटी फूटी दीवारें और
[1:22] खिड़की दरवाजे ने डरावने इतिहास की कहानियों बयां करते थे।
[1:27] बंगले के चारों ओर बना विशाल बगीचा आज किसी जंगल से कम नहीं
[1:32] था। बंगले की टूटी छत पर एक बूढ़े
[1:36] बरगद के पेड़ ने अपनी शाखाएं फैला रखी थी जैसे वो उन टूटी फूटी
[1:41] पुरानी दीवारों को सहारा देने के लिए वहाँ खड़ा था।
[1:45] पेड़ की लताओं और धूल ने तो घर के अंदर तक कब्जा कर रखा था।
[1:51] एक जमाने में इस बंगलो में बड़े ब्रिटिश ऑफिसर्स रहा करते थे।
[1:56] शानू शौकत के साथ। मगर अब वहाँ सिर्फ एक सन्नाटा था,
[2:01] एक डरावना सन्नाटा। एक ऐसा सन्नाटा जो हर अमावस की
[2:05] रात को टूट जाता था और वो बंगला दोबारा जी उठता क्योंकि आज भी हर
[2:12] अमावस की रात को वहाँ उस ब्रिटिश ऑफिसर की एक आवाज गूंजती थी।
[2:17] फिर एक गोली चलने की आवाज आती और उसके बाद।
[2:22] किसी दूसरे इंसान की दर्दनाक चीख की एक भयानक गूंज से पूरा
[2:29] एलफिंस्टन रोड गूंज उठता था। लोगों का कहना था की आजादी से
[2:35] पहले इस बंगलो में स्टीवन डगलस नाम का एक बहुत ही क्रूर।
[2:40] और गुस्सैल ब्रिटिश ऑफिसर अपने स्टाफ के साथ रहता था।
[2:44] एक रात ऑफिसर डगलस ने अपने नौकर की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर
[2:50] दी। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो हाथ पंखा
[2:53] चलाते चलाते सो गया था, उसकी आंख लग गई थी और तब से।
[2:59] ये बंगला श्रापित बन गया हर अमावस्या की रात ये श्रापित बंगला
[3:05] फिर से जीवित उठता है। वो मौत का तांडव फिर से इस बंगले
[3:11] में रचता और कुछ डरावनी चीखें सुन आसपास के लोग कांप जाते।
[3:21] तीन दोस्त शरद, सचिन और वैभव, जिन्हें हॉरर और परनार्मल चीजों
[3:27] का बहुत शौक था, वैभव थोड़ा स्केप्टिकल था पर शरद और सचिन।
[3:33] अपने हर एक परानॉर्मल एड्वेंचर पे उसे साथ ले जाते हैं।
[3:38] हमेशा की तरह उन लोगों ने कुछ नया प्लान करते वक्त इस बार डगलस
[3:43] बंगलों में अमावस्या की रात गुजारने की सोंची शरद सचिन देखना
[3:48] चाहते थे क्या सच में वहाँ वो आवाज़ें सुनाई देती है क्या?
[3:53] इन बंगलों के बारे में उन दोनों ने अपने परिवार और दोस्तों से
[3:57] बहुत कुछ सुन रखा था। एक बंगला जो 8090 सालों से खाली
[4:02] पड़ा था, कुछ तो कारण होगा उसका उन लोगों ने पता लगाने की सोंची
[4:07] वैभव ने हमेशा की तरफ कम इन्ट्रेस्ट दिखाया।
[4:11] पर शरद और सचिन ने उसको मना ही लिया।
[4:14] 2 दिन बाद अमावस्या की रात ठीक 8:00 बजे उन तीनों का डगलज बंगलों
[4:20] के बाहर मिलने का प्लान बना। आज डगलस बंगलों।
[4:30] एक मुर्दा भवन की तरह सचिन और शरद के सामने खड़ा था।
[4:35] उन दोनों ने दूर बाइक बात करते हुए ही बंगलो को देखा।
[4:39] चारों तरफ सन्नाटा और घुंप अंधेरा था।
[4:42] घने पेड़ पौधों के बीच वो टूटा बंगलो ठीक से दिखाई भी नहीं देता
[4:47] था। ऐसा लग रहा था कि रात के आठ में।
[4:50] 12:00 बज चूके हों वो दोनों हाथ में टॉर्च राइट लिए आगे बढ़े।
[4:57] बगलों की दीवारें झाड़ियों से घिरी हुई थी, जिसमें काले पेड़
[5:01] पौधे उगाये थे। खिड़कियों के कांच टूटे हुए थे और
[5:04] दरवाजे आधे खुले आधे बंद जैसे कोई अभी भी।
[5:09] अंदर आने का इंतजार कर रहा हूँ। वैभव मेन दौर के सामने ही था।
[5:15] उसकी आँखों में डर था पर वो जबरदस्ती मुस्कराने की कोशिश कर
[5:20] रहा था। तुम दोनों।
[5:22] शुर हो ना की अंदर जाना है। बहुत का पता नहीं पर यहाँ सांप,
[5:27] बिच्छू, मच्छर जरूर मिलने वाले हैं।
[5:29] आज हमें। उसने धीरे से कहा अबे मैं बस एक
[5:34] रात की तू बात है यार, एक एड्वेंचर समझ और क्या हर बार का
[5:38] नाटक रहता है तेरा शरद हंसके बोला मगर उसकी आवाज में एक।
[5:44] हल्की सी घबराहट थी। आज तीनों ने टॉर्च जलाये और
[5:48] बंगलों के अंदर कदम रखा। जैसे ही उन्होंने अंदर जाने के
[5:57] लिए टूटे हुए दरवाजे को धक्का दिया, एक पुरानी सड़ी हुई गंध
[6:02] उनकी नाक से टकराई। कुछ कबूतर और चमगाद अचानक हुए
[6:09] दरवाजे की इस आवाज से चौकन्ने हो गए और वहाँ से उड़ने लगे।
[6:14] अंदर एक अजीब सी बासी, सड़ी गली बदबू जैसी थी जिसे यहाँ कुछ
[6:19] सदियों से मर चुका हो। पर मिट्टी तक उसकी मौत को आज भी
[6:25] ना छुपा पाई हो। दीवारों पे मकड़ी के जाले थे,
[6:30] फर्श पे धूल थी पर उस धूल के बीच पैरों के नए निशान भी थे जैसे कोई
[6:37] उनसे पहले भी वहाँ आया हो। भूत का तो पता नहीं पर यहाँ एक
[6:43] भूत बंगले वाली पूरी फीलिंग आ रही थी, तभी एक आवाज आई ने झट से पीछे
[6:51] देखा और पूछा। तुम लोगों ने सुना।
[6:55] सचिन ने रूम में टॉर्च की रौशनी दौड़ाई।
[6:58] रूम के एक कार्नर में एक टूटा हुआ झूमर हिल रहा।
[7:02] दरवाज़े से आती हवा में वो धीरे धीरे हिल रहा था और एक कर्कर सी
[7:08] आवाज कर रहा था अरे वो देख कुछ नहीं है।
[7:13] दरवाज़े से आरी हवा की वजह से वो झूमर हिल रहा है।
[7:18] तीनों ने एक दूसरे को देखा। सबके चेहरे सफेद तो थे पर अब वह
[7:23] थोड़ा शांत हो गए। सचिन और शरद अब कमरे के बाहर
[7:28] निकले। वो दोनों हाथ में टॉर्च लिए आगे
[7:31] थे और वैभव उनके पीछे। तभी दूर कहीं एक कुत्ता रोने लगा
[7:38] और तीनों अपनी जगह पर। वहीं रुक गए।
[7:43] इस अंधेरे और भूतिया घर में वो आवाज़ तीनों के खून को जमाने के
[7:48] लिए काफी थी। तीनों का गला सूख रहा था पर उन
[7:52] लोगों ने खुद को संभालना और आगे बढ़ते रहे।
[7:58] अब तक सिर्फ नौ ही बजे थे। पूरी रात बाकी थी।
[8:01] इस तरह से हर छोटी छोटी आवाज़ से डरने का कोई मतलब नहीं था।
[8:07] वो दोबारा रिलैक्स होने की कोशिश करने लगे।
[8:09] उन तीनों ने पूरे घर को घूम के देखने की सोंची और हाथ में टॉर्च
[8:14] लिए वो धीरे धीरे उस बंगले को एक्स्प्लोरर करने लगे।
[8:19] वहाँ का सब सामान गायब था। बस कहीं कोई टूटी हुई टेबल या
[8:23] चेयर दिख जाती। दीवारों पर हर जगह लोगों ने अपने
[8:27] नाम लिख रखे थे, जो उनसे पहले यहाँ शायद आए थे।
[8:31] आधे कमरों की तो दीवारें गिर चुकी थी और कहीं कहीं तो छत भी गायब
[8:35] थी। घर की हालत सच में बहुत खराब थी।
[8:41] उन तीनों ने पूरे घर को देखने के बाद एक कमरे में बैठने का फैसला
[8:45] किया। उन लोगों ने एक कमरा चुना जिसकी
[8:48] दीवारें और छत अब भी ठीक ठाक थी और फिर जमीन पर पेपर बिछाकर वे
[8:53] तीनों बैठ गए। सचिन साथ में एक सोलर लैंप और एक
[8:58] कॉफ़ी का फ्लास्क ले आया था। उसने तीन पेपर कब्ज में कॉफ़ी
[9:03] भरा। फिर तीनो कॉफ़ी पीते पीते धीमी
[9:06] आवाज़ में बातें करने लगे। प्लान तो ये था की वो लोग सुबह
[9:11] 5:00 बजे तक। यही बैठे रहेंगे जब तक की वो
[9:14] ऑफिसर डगलस की आवाज या गोली की आवाज नहीं सुन लेते, बातें करते
[9:21] करते एक घंटा भर बीत गया पर अभी तक कुछ नहीं हुआ था।
[9:26] साढ़े 10:00 बज चूके थे। मच्छरों ने तीनों का शांति से
[9:30] बैठे रहना मुश्किल कर दिया था। वैभव दूसरे दिनों की तुलना में आज
[9:35] काफी चुप था। शायद उसे अभी भी उन दोनों पे
[9:39] गुस्सा आ रहा था क्योंकि उन्होंने उसे जबरदस्ती वहाँ लाया था।
[9:43] तीनों कुछ आवाज़ होने का इंतजार करने लगे।
[9:50] रात के करीब 1:00 बजे होंगे। शरद कुछ बात कर रहा था कि अचानक
[9:55] तीनों को एक आवाज सुनाई दी और तीनों सतर्क हो गए।
[10:03] वो तीनों बिलकुल स्थिर और शांत होकर बैठ गए।
[10:07] ऐसा लग रहा था मानो कोई उस कमरे के खिड़की के बाहर बगीचे में सूखे
[10:12] पत्तों पर चल रहा था। पत्तों के मसलने की आवाज धीरे
[10:17] धीरे भर रही थी। शरद ने टॉर्च बाहर के बगीचे की
[10:21] तरफ मारी पर वहाँ सिर्फ पेड़ थे हिलते हुए धीरे धीरे।
[10:26] शायद कोई? छोटा जानवर।
[10:28] होगा। डरो मत तुम लोग शरद ने बोला पर
[10:32] अगले ही पल एक तेज़ आवाज हुई जैसे कोई उस बरगद के पेड़ से नीचे कूदा
[10:38] हो और फिर सूखे हुए पत्तों पर बगैर से भाग कर उस बंगलो में घुस
[10:44] आया हो। तीनों एक झटके में उठ खड़े हुए
[10:47] हैं। क्या उनके अलावा भी यहाँ कोई और
[10:50] आया था? तीनों के जहन में शायद ये ही सवाल
[10:53] था और इससे पहले की वो कमरे के बाहर जाते चेक करने के लिए एक और
[10:58] आवाज़ आने लगी एक सिस्टेमेटिक आवाज़।
[11:04] पहले धीरे फिर तेज ये कैसी आवाज आया?
[11:09] सचिन ने कहा शरद ने ध्यान से सुना, आवाज पहचानी सी लगी।
[11:15] जैसे जैसे कोई हाथ पंखा चला रहा हो और साथ में खर्राटों की आवाज
[11:23] जैसे कोई। गहरी नींद में हों।
[11:26] उन सबके पैर वहीं जम गए। उन लोगों ने एक दूसरे को देखा।
[11:32] आवाज बगल वाले कमरे से आ रही थी। वो तीनों हिम्मत जुटाकर रूम के
[11:38] बाहर निकले। और उस अंधेरे कॉरिडोर से धीरे
[11:41] धीरे उस कमरे की और बढ़ने लगे जहाँ से उस हाथ पंखे की आवाज आ
[11:45] रही थी। येस माम् मैं हॉउस नाउ अचानक की
[11:49] आवाज साची और शरद के पास से उस कॉरिडोर में गूंज उठी।
[11:53] बिल्कुल कानों के पास से उन लोगों के गले से डर के मारे चीख निकल
[11:58] आई। वो लोग हाथ में टॉर्च लिए एक झटके
[12:03] से पीछे मुड़े पर पीछे कॉरिडोर खाली था।
[12:09] कोई नहीं था वहाँ और अगले ही पल उन लोगों को उस कमरे से आवाज
[12:14] सुनाई देने लगी। एक गुस्से भरे।
[12:17] ब्रिटिश आवाज़ हवा में गूंज उठी। यू अरे डियर यू डियर यू फॉल ए
[12:24] स्लीप ऑन ड्यूटी लेट मी टीच यूए लेसन नहीं।
[12:30] नहीं नहीं नहीं माफ़ कर दो साहब माफ़ कर दो, गलती हो रही मुझसे
[12:35] गलती हो गई, गलती हो गई मेरे से। इस तरह की इस तरीके की बद्दुआ
[12:50] लगेंगी तुझे बद्दुआ लगेंगी तुझे या।
[12:58] भाग यार भाग यहाँ से सचिन चिन्नाया सब जान बचाने के लिए
[13:04] भागने लगे। उन्होंने अपना सारा सामान वहीं
[13:07] छोड़ दिया। टॉर्च, फ्लास्क, सोलर लाइट सब
[13:10] वहीं रह गया। पीठ पीछे में अभी भी वो ब्रिटिश
[13:21] आवाज़ सुनाई दे रही थी। आवाज़ उनके और करीब आती जा रही
[13:25] थी। वो सब अपनी जान बचाने के लिए
[13:28] भागने लगे। चिल्लाते हुए, हाफते हुए, अंधेरे
[13:31] में एक दूसरे से दीवारों से टकराते हुए।
[13:34] फिर जैसे तैसे भागते हुए बगीचे के बीच से बंगलों के बाहर तक निकल
[13:39] आए, लेकिन जैसे ही पार्किंग एरिया के पास पहुंचने लगे एक और ज्यादा
[13:44] खौफनाक मंजर उनके लिए वहाँ इंतजार कर रहा था।
[13:50] जिसे देख वो जम गए। क्योंकि उनके सामने बाइक पर वैभव
[13:58] बैठा हुआ था। शांत हेडफोन्स पे गाने सुनते हुए।
[14:04] हाँ, कैसा लगा एक्सपीरियंस भाई लोग?
[14:07] वैभव ने सचिन और शरद से पूछा शरद ने हिचकिचाते हुए कहा।
[14:13] तू तू हमारे। पहले यहाँ कैसे पहुंचा तू तो पीछे
[14:18] था ना? वैभव ने उन्हें देखा और एक शांत
[14:21] आवाज़ में जवाब दिया। मैं मैं तो अंदर गया ही नहीं था।
[14:26] सचिन और शरत का मुँह खुला का खुला रह गया।
[14:29] अरे मुझे यहाँ आने में देर हो गयी थी, 10:00 बजे पहुंचा हूँ मैं।
[14:33] तुम लोगों का फ़ोन भी नहीं लग रहा था तो मैं यहाँ बाहर ही रुक गया।
[14:37] मुझे वैसे भी पता था तुम फट्टू लोग पूरी रात वहाँ अंधेरे में
[14:42] मच्छरों के साथ नहीं गुज़रने वाले थे।
[14:46] शरद और सचिन चुप थे, वो एक दूसरे को देखने लगे।
[14:51] पसीने से उनका शरीर भीग चुका था। एक अनजान खौफ से उनका गला सूख
[14:56] चुका था। इतना कि वो एक शब्द नहीं बोल पा
[15:00] रहे थे। उनकी रगों में सिर्फ एक चीज़ थी
[15:04] डर एक भयानक डर जिसकी वजह से वो ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहे
[15:10] थे। खड़े नहीं हो पा रहे थे।
[15:12] कुछ बोल नहीं पा रहे थे। अचानक सचिन जमीन पे गिर गया।
[15:17] उसने तेज सांसे भरते हुए डरते डरते शरद की आँखों में देखा।
[15:22] उन दोनों के दिमाग में बस एक ही सवाल था अगर वैभव 10:00 बजे आया।
[15:29] और बंगलो के अंदर गया ही नहीं। तो जो बंदा उनके साथ रात के 8:00
[15:35] बजे से अब तक था वो कौन था? क्या वो डगलस बंगलो का भूत था या
[15:42] फिर उस आदमी का जिसे गोली लगी थी या कुछ और?
[15:46] जो अब तक उस बगीचे से उन तीनों को देख रहा था।
[16:00] आज की कहानी यहीं तक दोस्तों वी होप दट यू वुड लाइक थिस स्टोरी।
[16:05] कहानी अगर अच्छी लगी है तो हमें रेटिंग देना मत भूले और हमें फॉलो
[16:10] करना तो बिलकुल नहीं और अपने फ्रेन्डस एंड फैम्ली के साथ इस
[16:14] स्टोरी को जरूर शेयर करे। सब मिलके सुने अगर आप अपना कोई
[16:18] एक्सपीरियंस शेयर करना चाहते है तो हमें इंस्टा पे डीएम करे।
[16:23] या हमें व्हाट्सएप करे 9767916545 पे डीटेल्स अरे इन दी
[16:30] डिस्क्रिप्षन और हाँ फारू फ्राइडेज का नया एपिसोड तो आ चुका
[16:34] है गो एंड चेक इट आउट अगले हफ्ते आपबीती की एक नए एपिसोड के साथ हम
[16:40] फिर लौटेंगे। मैं हूँ अवि और आप सुन रहे थे
[16:44] स्पूकास्ट अवि और मंजिला के साथ सुनते रहिए स्पूकास्ट, अवि और
[16:53] मंजिला के साथ।

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