# Ep19 - Skinwalker - American Urban Legend | SpookCast | ORIGINAL Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya | Urban Legend

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 20 Sep 2024, 13 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/91968702/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2024-8-20%2F386703657-44100-2-3bcc71650ca5.m4a

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## Transcript

[0:00] स्किन वॉकर। एक ऐसा जीव जो सामान्य इंसान या
[0:08] जानवरों की तरह दिखता है और अपना शिकार करने के लिए ये एक पल में
[0:12] अपना रूप बदल लेता है। हे गाइस वेलकम बेक टु दी चैनल आज
[0:18] हम आपके लिए एक ऐसी डरावनी कहानी लाये है जो आपको किसी घने जंगल
[0:22] में जाने से लगाएगी। ये कहा भी ये कैसे अर्बन लेजेंड
[0:25] के बारे में है जो लोगो के अनुसार नॉर्थ अमेरिकन और कैनेडियन
[0:30] जुम्बलों में पाये जाते है। सो अब बिना किसी देरी के आज की
[0:35] कहानी शुरू करते है। सुनते रहिए हर शुक्रवार रात नौ।
[0:40] बजे स्पोकन। अवी और मंजिला के साथ।
[0:49] मेरा नाम क्रिस है। मैं आज आपको वो कहानी सुनाने जा
[0:53] रहा हूँ जो मेरे पिता ने मुझे बताई थी।
[0:55] मैं उस कहानी को कभी नहीं भूल पाऊंगा और इसकी कड़ी वजह है।
[1:00] शायद ये मुझे बचपन में सुनाई गई पहली कहानी थी।
[1:04] शायद इसलिए अभी की ये कहानी ये बताती है की मेरे दादा जी की मौत
[1:09] इतने बदमांत तरीके से कैसे हुई? अब मैं आपको वो कहानी सुनाता हूँ
[1:13] जैसे मेरे पिता ने मुझे बताई थी। खुरा तो हम शिकार पर निकले थे
[1:21] ओहाइयो में उस डेरी फार्म थे आसपास के जंगल में जहाँ हम उस
[1:25] वक्त हम कोयोटेज का पीछा कर रहे थे।
[1:29] उनकी खाल के लिए हमने $50 मिलते थे, वो कभी कभी बच्छरों को मार
[1:34] देते थे। हम हर रात उनका शिकार करते थे।
[1:37] क्यों की हमें पैसों की जरूरत थी? कभी कभी रास्ते में हमें हिरण मिल
[1:42] जाते थे और हम उनका भी शिकार कर लेते थे।
[1:45] इससे पूछ रहा तो के लिए हमारे परिवार का खर्च चल जाता था और कुछ
[1:49] पैसे बच भी जाते थे। हम पैदल चलकर अपना काम खत्म करके
[1:53] वापस घर आ रहे थे क्योंकि उस वक्त हमारे पास ना तो गाड़ी थी ना ही
[1:58] कोई फोर व्हीलर। हम रोज़ जंगल से शार्ट कट लेकर
[2:01] आते थे। उस रात घर लौटते वक्त हमें एक जगह
[2:05] पर हर तरफ खून दिखा। थपेड़ों पर, खास में नदी में।
[2:10] पहले तो हमें लदा की ये का काम है।
[2:12] हमने देखा था की कभी कभी जब वो किसी वजह से शिकार नहीं कर पाते
[2:17] थे तो हताशा में हिरण या मवेशी का शिकार करने लग चूके।
[2:20] जब कुत्तों, भेड़ियों या कोई उठिस का झुंड किसी पर हमला करता है तो
[2:25] वो एक सिस्टेमेटिक तरीके से करते हैं।
[2:27] वो किसी का कमजोर बीमार बोर है या फिर छोड़ जानवर को चुनते हैं।
[2:32] वो उसका पीछा करते हैं, उसे किसी कोने में ले जाते हैं जहाँ से वो
[2:36] निकल ना सके और फिर छोड़ दी अल्फा जानवर उसे मार देता है, लेकिन
[2:40] यहाँ ऐसा कुछ नहीं हुआ था। किसी चीज़ ने हिरोइन के झुंड पर
[2:44] हमला कर दिया था, कभी झुंड पर हमला नहीं करते, भेड़िए भी नहीं।
[2:49] वहाँ तीन हिरण के शब्द थे। तीनों शव पूरी तरह से कटे फटे हुए
[2:54] थे। यहाँ एक सिर बढ़ा था तो वहाँ एक
[2:58] टांग जंगल के शिकारी जानवर ऐसा नहीं करते।
[3:00] वो बचे हुए टुकड़े नहीं छोड़ते। जिसने भी ये किया था उसने ये खाने
[3:04] के लिए नहीं मज़े के लिए किया था। हमने बस बहुत सारे शब्द देखे और
[3:09] सोचा कि हमें ये पता करना चाहिए कि किस जानवर ने इस निर्मम तरीके
[3:13] से शिकार किया था। उस वक्त मैं सिर्फ 13 साल का था।
[3:17] राइफल ही एक मात्र ऐसी गन थी जिसे मैं सही से चला सकता था।
[3:21] मेरे पिताजी के पास शार्ट गम थी। हमने उस जानवर को ट्रैक करना शुरू
[3:25] किया जिसने ये सब किया था। हमने बस खून के धब्बों का पीछा
[3:30] किया। पीछा करते करते हमें अब कुछ फयानक
[3:33] आवाजें सुनाई देने लगी। मैं जिंदगी में बहुत सारे जंगलों
[3:38] में गया हूँ और पूरी दुनिया घूम चुका हूँ, लेकिन मैंने उस रात
[3:42] जैसी आवाजें कभी नहीं सुनी। रैप की करीब 12 या 1:00 बजे का
[3:46] समय था, हमने देखा की हिरोइन खरगोश, राखुद और चिड़िया सब डरे
[3:52] हुए किसी चीज़ से दूर भाग रहे थे। लोमरी और कुछ चिड़ियों को छोड़कर
[3:57] किसी जानवर को भी इस वक्त जला नहीं होना चाहिए था।
[4:00] लेकिन वो सिर्फ जगह नहीं थे, वो भाग रहे थे।
[4:03] उस रात मैंने चिड़ियों के झुंड को सीधे पैरों से टतराते हुए देखा।
[4:10] वो किसी जीभ से बचने की कोशिश कर रहे थे।
[4:12] हम कोयोटेज के 1 जून में से मिले लेकिन हमने देखा की वो किसी और से
[4:17] दूर भाग रहे थे। उन्होंने हमें नोटिस भी नहीं किया
[4:20] और सीधे हमारे पास से निकल गए। हमें ये सोचना चाहिए था की शायद
[4:25] जिसे हम ब्रेक कर रहे थे वो कोई ऐसी चीज़ थी जिसे हम मार नहीं
[4:29] सकते थे। हमें घर लौट जाना चाहिए था लेकिन
[4:32] हम मेल लौटे बस आगे बरत देते। आखिरकार हम एक खोये घाटी में
[4:36] पहुंचे याम तौर पर एक सोयाबियन का खेत था, लेकिन अभी सीज़न में ही
[4:41] था, इसलिए यहाँ सिर्फ समतल जमीन थी।
[4:45] तभी हमें पैरों के निशान दिखे। जंगल से भाग रहे जानवरों ने
[4:49] रास्ते में सब कुछ रौंद डाला था, लेकिन जहाँ हिरण का खून था, वहाँ
[4:54] किसी में एक कदम भी नहीं रखा था। वहाँ सिर्फ एक जानवर के पैरों के
[4:59] निशानदेही, ऐसे निशान जो हमने पहले कभी नहीं देखे थे, वो पैरों
[5:04] के निशान अलगे थे और जिसके भी थे उसका वजन £100 से ज्यादा नहीं था।
[5:08] ये चीज़ हारी थी। इसका मतलब इसकी स्पीड काफी तेज़
[5:12] होगी और उसे निशाना बनाना मुश्किल होगा।
[5:15] हमने पैरों के निशानों का पीछा किया।
[5:18] पहाड़ी की छोपी पर एक पुराना स्कूल थाप आधे स्कूल को ब्वेंडर
[5:22] ने उड़ा दिया था, लेकिन वहाँ कोई नहीं रहता था।
[5:26] जब हम स्कूल के 50 गज के दायरे में पहुंचे तो हमें एक आवाज सुनाई
[5:31] दी। एक बच्ची जो दो अलग अलग आवाजों से
[5:40] मिलकर बनी थी, एक ऊंची पिच वाली थी और दूसरी एक कुराहट थी।
[5:45] ये जो कुछ भी था, वह 171 ही समय में दोनों आवाजें निकाल रहा था।
[5:50] हम भी इस गज के दायरे में पहुंचे। पिताजी ने मेरी तरफ देखा और
[5:54] फुसफुसाकर कहा कि मुझे उनके पीछे रहना है क्योंकि हम अब अपने शिकार
[5:58] को घेरने वाले हैं। कोई भी जानवर गिरने पर लड़ेगा,
[6:03] खासकर शिकारी। मेरे पिता को लग रहा था कि शायद
[6:06] ये कोई जंगली पागल कुत्ता होगा। उन्होंने बताया कि प्लान ये है कि
[6:11] जब वो खा रहा हो तब हम चुपके से जाकर उसे गोली मारेंगे और तब तक
[6:16] गोली मारते रहेंगे जब तक वो हिला बंधन ना करते फिर उसका गला काट
[6:20] देंगे। और ऑदर वो पिताजी पर हमला कर दे
[6:23] तो मेरा काम ये था की उसे गोली मारूं या चाकू से पार करूँ ताकि
[6:27] वो उनसे अलग हो जाए। हम दोनों धीरे धीरे साथ में घोड़ा
[6:32] आगे बढ़ने लगे। हमने देखा की वो जानवर एक शंक पर
[6:37] चुका हुआ था। आज वो उसका मांस फाड़ रहा था और
[6:40] जो टुकड़े में ही खा रहा था उन्हें किनारे फेंक रहा था।
[6:43] चाँद की रौशनी में ईंटों पर हर तरफ हूल लगा हुआ था।
[6:47] उसका शरीर कहीं से पीला और कहीं से सफेद था और वो थोड़ा आर्मी
[6:52] जैसा बिखरा था। अनाउंसमेंट टाइम गाइस एपिसोड 20
[6:57] हमारे यानी स्पोक का सीज़न 1 का फिनाले होने जा रहा है।
[7:01] बट डोन्ट वोर्री। हम अगले ही हफ्ते सीज़न 2 स्टार्ट
[7:05] करने वाले है जहाँ हर हफ्ते आप सुन सकते हैं।
[7:08] एक नहीं तो एपिसोड 1 ओरिजिनल स्टोरी हर वेंस डे और एक सच्ची
[7:13] घटना हर फ्राइडे वी जो स्टोर दट। आप सीज़न 2 को भी उतना ही प्यार
[7:18] देंगे जिन्दा आपने सीज़न 1 को दिया है।
[7:20] सुनते रहिये स्पोक का। स्ट, अवी और मंजिला के साथ।
[7:25] नाउ बेक टु देपिस्ट। उसके हाथ और पैर हमारे जैसे ही थे
[7:29] लेकिन वो पंडर की तरह झुका हुआ बैठा था और उसके हाथ सामान्य में
[7:34] ही थे उसके हाथों में लम्बी उंगलियाँ की जिनके सिले पर पंजे
[7:39] थे, मेरे पिताजी हिचकिचाये वो किसी इंसान पर गोली नहीं चलाने
[7:43] वाले थे इसलिए उन्होंने अपना गला साफ़ करने की आवाज की ताकि वो
[7:47] पीछे मुड़कर दिखे। आवाज सुन उसने पीछे बोल कर देखा
[7:50] और उस पल आसपास से आने वाली सभी आवाजें बंद हो गए।
[7:54] दो सेकंड के लिए वो हमें बस देखता रहा।
[7:57] फिर उसने एक पीस चीफ निकाली। और पिताजी पर झपटा।
[8:06] मेरे पिताजी ने बोली चला दी पर मुझे लगता है वो चूक गए।
[8:11] यह सब इतनी तेजी से हुआ कि मैं कुछ समझ ही नहीं पाया।
[8:14] वो पिताजी पर चढ़ गया और इससे पहले कि मैं कुछ कर पाता, वो उनके
[8:18] शरीर में अपने पंजे धसा कर मान हल करने लगा।
[8:25] मैंने बिल्कुल नजदीक से उस पर गोली से लाना शुरू कर दिया।
[8:32] लेकिन उस जानवर से मुश्किल से ही कुछ खून निकला।
[8:35] मैंने पांच गोलियां दाग ली और फिर मैंने उसे डन की बट से मार मार
[8:39] शुरू किया। पर वो ना तो और ना ही ये समझ सका
[8:44] कि मैं वो हाथ था, वो मेरे पिताजी को पंजे से चीर रहा था।
[8:48] उसने उनके घर से मांस निकालना शुरू किया।
[8:51] उनकी। छाती पर से त्वचा निकाल कर उसने
[8:54] उनका दला फाड़ दिया है। उनकी नाक पूरी तला से अलग कर दिया
[8:59] और उनकी आँखें निकाल ली। फिर उसने उनकी।
[9:03] मूंग की त्वचा को निकालकर मुँह का जो हिस्सा बचा था उसे अपने पंजो
[9:07] से अंदर खोदना शुरू कर दिया। मैं वहाँ लाचार खड़ा रहा।
[9:12] मेरा पूरा शरीर सुनने पर गया। मुझे ठीक से याद नहीं है कि क्या
[9:15] हुआ था, लेकिन किसी तरह मेरे पिताजी का चाकू उस जानवर के कंधे
[9:19] में जा घुसा और मेरे पिताजी यानी जो कुछ हिस्सा उनका अब बचा था,
[9:25] उसे मैं पेड़ पर बहुत तेज भाल में लगा।
[9:28] मैं भाल रहा था और वो जानवर मेरा पीछा कर रहा था।
[9:32] मैं जंगल में वापस आ गया था उस जंगल के विपरीत दिशा में जहाँ से
[9:36] हमने शुरुआत की थी। मैं अपने मकान मालिक के घर की तरफ
[9:42] जा रहा था जो की आस पास मदद के लिए यही सबसे करीबी जगह।
[9:47] लेकिन वो भी आधा यूट्यूब था। इस दौरान मैं उस चीज़ को चीखते और
[9:51] कराते हुए सुन सकता था। मैंने शाखाएं टूटने और इधर उधर
[9:55] फेंके जाने की आवाज सुनी। ये इतनी ज़ोर से बार बार टूट रही
[10:00] थी की ऐसा लग रहा था जैसे कोई हर पेड़ को जिसके पास से मैं गुजर
[10:04] रहा था, कुल्हाड़ी। से काट रहा हूँ लेकिन मैंने कभी
[10:08] पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक बार भी नहीं, ये ख्याल मेरे
[10:12] दिमाग में आया ही नहीं। आखिरकार मैं ठोकर।
[10:15] खाकर। बजरी में गिर गया ऊपर, वेक मेंबर
[10:18] मैंने अपने मकान मालिक और उनके कुछ दोस्तों को।
[10:21] थोड़ी दूर शराब पीते रेखा मैं चिल्लाता और वो मेरे पास आई।
[10:26] मैंने उनसे कहा कि वो एम्बुलेंस बुलाएं, मेरे मकान मालिक में मेरी
[10:30] तरफ दिखा और कुछ ऐसा पूछा जो मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।
[10:34] तुम्हारी बीट पर ये कौन से जानवर बेुकरा है?
[10:36] उन्होंने मुझसे पूछा, मैंने तब मेरे पिता के शव को जमीन पर रखा
[10:40] और मेरी सास वही रुक गई। जमीन पर जो शब्द था उसके ना हाथ
[10:44] थे ना पैर। बस कम बारिश के ऊपर का शरीर था,
[10:48] वह भी पूरी तरह से खोख लिया। अंडर के लगभग सारे अंक लायब थे या
[10:55] बाहर लटक रहे थे और उनके स्वर्ग जिला मतलब खून से सनी हुई त्वचा
[11:00] पर एक मांस का लोत रहा था। मेरे पिता के खून से लगपत शर्ट के
[11:04] कुछ टुकड़े अभी भी उनके शरीर से चिपके हुए थे।
[11:08] जैसे ही मकान मालिक ने मेरा मुँह देखा शायद वो खुद ही समझ गए।
[11:13] उन्होंने तुरंत एम्बुलेंस बुलाया लेकिन मेरे पिताजी के लिए बहुत
[11:16] देर हो चुकी थी। उनकी मौत तो वेडियो स्कूल के
[11:19] खंडहरों के पास उस पीली सफेद चीज़ के पंजो में तड़पते हुए 40 देर
[11:25] बाद एम्बुलेंस आई और मुझे अस्पताल ले रहे।
[11:27] मुझे कई हफ्तों तक वहीं रहना पड़ा और डॉक्टरों ने कहा कि मैं बहुत
[11:31] भाग्यशाली था कि बच निकला, लेकिन असली में मैं खुद को बिल्कुल भी
[11:37] भाग्यशाली में ही मानता। मैं अपने पिताजी को खो चुका था और
[11:41] यह सिर्फ ये दुर्घटना नहीं थी। यह एक हत्या थी और मुझे नहीं पता
[11:45] था कि यह किसने किया। था।
[11:47] जानवर था। जब मैं अस्पताल से बाहर निकला तो
[11:50] हम उस घर को छोड़कर वहाँ से चले गए।
[11:53] मेरे पिता के मौत के इन्वेस्टिगेशन तक क्या हुआ पता
[11:55] नहीं। मुझसे किसी ने ज्यादा पूछ्ताछ
[11:58] नहीं की। पुलिस पूछ्ताछ के लिए हमें बहुत
[12:01] छोटा था और वैसे भी पुलिस को ये सब कहानी काल्थ मिखी लप्पी थी।
[12:06] कुछ समय बाद मैंने इंटरनेट पर ऐसे ही घटनाओं के बारे में कहानियों
[12:10] पर मैं शुरू किया और मैंने देखा कि मेरे पिता के साथ जो बर्द नाक
[12:14] हादसा हुआ था ऐसे कई हादसे बहुत से लोगों के साथ हुए थे और उस दिन
[12:20] मुझे पता चला जीस चीज़ ने मेरे पिताजी को मारा था।
[12:23] उसे स्किन वॉकर के एक ऐसा टीचर जो जब चाहे अपना रूप बदलकर लोगों का
[12:29] शिकार करता है। हे गाइस कैसे है आप सब?
[12:35] अगर आपको हमारा कॅन्टेंट पसंद आता है तो हमें सपोर्ट करने के लिए आप
[12:39] हमें फॉलो करें और रेटिंग्स? देना मत भूलिए।
[12:42] अपने फ्रेन्डस और फैम्ली के साथ ज्यादा से ज्यादा हमारी ओरिजिनल
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[12:59] सकते हैं। ऐट स्पोक टी वि इंडिया।
[13:02] सुनते रहिए हर शुक्रवार रात 9:00 बजे।
[13:05] स्पोक कास्ट। अवि और मंजिला के साथ।

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