# Ep 50 - AAPBEETI 9 by SPOOKCAST- 4 REAL HORROR STORIES | Real Stories | Sachi Ghatana |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 6 Jul 2025, 46 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/105108061/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-6-6%2F403409247-44100-2-1f28ea5218d91.m4a

Story: In our SPECIAL 50th EPISODE, listen to these 4 creepy horror incidents shared by our lovely Listeners! Send your stories on our Whatsapp number 9767916545. Leave a msg or a voice note and we will get back to you. Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana | Narrated by : Avi and Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay Music used by Vivek Abhishek : SUBSCRIBE us on YOUTUBE: https://bit.ly/3qumnPH Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:03] दोस्तों नमस्कार कैसे हैं आप सब वेलकम टु ए वेरी स्पेशल एपिसोड ऑफ
[0:08] स्पूकास्ट इट इस ए फिफ्टिएथ ब्रॉडकास्ट एपिसोड फॉर ए टीम ऑफ
[0:13] टू अवि और मेरे लिए ये बहुत बड़ा माइंडस्टोन है आपके प्यार और
[0:17] सपोर्ट के बिना। ये पॉसिबल ही नहीं हो पाता।
[0:21] सो वी कैन नॉट थैंक यू इनफ। आज के एपिसोड में हम दो नहीं चार
[0:26] चार यूनिक इन्सिडेंट्स शेयर करेंगे जो आप लोगों ने हमारे साथ
[0:30] शेयर की। वी रेसिवड ए लॉट ऑफ रियली गुड
[0:32] इन्सिडेंट्स बट वी हैड टु एन्सुर वी पिक दी मोस्ट यूनिक वन्स सो हम
[0:38] लोगों ने। ये चार घटनाएं जिले की हैं।
[0:41] आप सब के लिए और आप सब के लिए जिनकी घटनाएं हम आज नहीं सुना
[0:45] पाएंगे टोन बी डिसअप्पोइंटेड बाकी घटनाएं भी आगे की आप बीती के
[0:50] एपिसोड्स में आती रहेंगी। आज के एपिसोड में दो घटनाएं हमारे
[0:54] इंडियन लिस्टनर्स की हैं। और बाकी की दुर्घटनाएं अब्बू धाबी
[0:58] और जापान में हमारे दो लिस्टनर्स के साथ घटी घटनाएं हैं, जो हमें
[1:03] काफी डरावनी लगी। वैसे आज का एपिसोड थोड़ा अलग होने
[1:07] वाला है क्योंकि आज आप के साथ सिर्फ मैं नहीं अभी भी है।
[1:11] हैलो दोस्तों, कैसे हैं आप सब? आज का स्पेशल फिफ्टिएथ एपिसोड है
[1:16] कुछ खास हम बस चार घटनाएं ही नहीं सुनेंगे बल्कि साथ में होगी थोड़ी
[1:21] गपशप और कुछ हमारे बारे में बातें जो आप सब हमेशा से पूछते रहे हैं
[1:27] मैसेजस पे सो चलिए देम दी लाइट्स प्लग इन दोज़ हेड फ़ोन्स एंड बी
[1:32] रेडी। टु अनप्लग युअर पीस ऑफ़ मैएंड
[1:35] क्योंकि आज की आपबीती का एपिसोड शुरू होने जा रहा है।
[1:40] मैं हूँ अभी। और मैं मंजिला और आप सुन रहे हैं
[1:43] इस फोरकास्ट। अभी और मंजिला के साथ ये पहली
[1:48] घटना हमारे साथ शेयर की है। कार्तिक ने ईमेल पे क्नॉइस।
[1:51] कार्तिक एक एंजोयिंग ग्रैजुएट है। चेन्नई से कार्तिक 2016 में
[1:56] टोक्यो गए थे। अपनी मास्टर्स डिग्री कंप्लीट
[1:59] करने के लिए और ये घटना उनके साथ तभी घटी थी।
[2:03] कार्तिक थैंक यू सो मच फॉर शेयरिंग थिस एक्सपीरियंस एंड थिस
[2:07] न्यू टॉपिक ऑलटुगैदर विथ आवर स्पोक कास्ट कम्यूनिटी अब मैं इस
[2:12] घटना को अब उनके ही शब्दों में आपके सामने पेश करने की कोशिश
[2:16] करूँगा। मेरा नाम कार्तिक है और आज मैं आप
[2:21] लोगों के साथ कुछ ऐसा डरावना शेयर करना चाहता हूँ जो मेरे साथ
[2:25] टोक्यो में हुआ था। मैं सितम्बर 2016 में टोक्यो गया
[2:29] हुआ था। अपने मास्टर्स कंप्लीट करने के
[2:31] लिए सबको पता है की टोक्यो कितना महंगा शहर है।
[2:35] मेरे पेरेंट्स ने कुछ जोड़ तोड़ के पैसे दिए थे, वो भी बस कॉलेज
[2:40] फीस के लिए ही काफी था। एक घर किराये पे लेने का बजट बहुत
[2:44] ही टाइट था, काफी हफ्ते निकल गए। पर मैं कैप्सूल होटल में ही रह
[2:49] रहा था। दिन भर अपार्टमेंट ढूंढता पर
[2:51] टोक्यो में सस्ता घर मिलना बहुत मुश्किल था।
[2:54] फिर मुझे में एक अपार्टमेंट मिला। किराया इतना कम की बिलीव करना
[3:00] मुश्किल होता है। दूसरे अपार्टमेंट्स के कंपॅरिज़न
[3:03] में ऑलमोस्ट 30% कम प्राइस में। प्रॉपर्टी एजेंट एक मिडिल एज
[3:08] जापानीज़ अंकल थे। टूटी फूटी अंग्रेजी में बात करते
[3:11] थे। वो हर बार बोल रहे थे तब मैं नहीं
[3:17] समझ पाया था। इसका मतलब क्या है?
[3:19] जब मैंने उनसे पूछा तो वो हाथ हिलाकर बस बोले।
[3:22] स्पेशल प्रॉपर्टी गुड प्राइस। वॅन डे, लॉन्ग टाइम अगो।
[3:28] मैंने बस अपना सर हिलाया और अपार्टमेंट देखने चला गया क्योंकि
[3:32] कैप्सूल होटेल्स में रह रह के पढ़ाई करना इम्पॉसिबल हो रहा था।
[3:36] मेरे लिए अपार्टमेंट बहुत ही छोटा सा था पर साफ सुथरा एक बैडरूम
[3:41] किचन और एक छोटा सा बाथरूम, कुछ ज्यादा ही छोटा।
[3:45] पर मैं घर रेंट पे लेने के लिए डेस्पेरेट हुआ जा रहा था और
[3:49] प्राइस भी मेरे बजट में ही थी, सो मैंने उसी दिन अग्रीमेंट साइन कर
[3:54] लिया। पहला एक हफ्ता बिल्कुल परफेक्ट
[3:57] था। फाइनली मुझे अपना घर मिल ही गया
[3:59] था, अपना खाना बना सकता था, प्राइवेसी थी, बस और क्या चाहिए
[4:04] था? मैंने बैडरूम में एक टेबल लगाई,
[4:07] क्लासेज के रूटीन सेट किए लगा जैसे अब फाइनली सब कुछ ठीक हो
[4:12] जाएगा। सब कुछ ठीक चलेगा पर फिर वो गन्दी
[4:16] सी स्मेल आने लगी। मुझे अच्छे से आज भी याद है कि वो
[4:22] एक ट्यूसडे नाइट स्टार्ट हुआ था। मैं उस रात लेट नाइट तक पढ़ाई कर
[4:27] रहा था। कुछ 2:30 बजे होंगे जब अचानक से
[4:30] एक अजीब सी बहुत हेवी सी बदबू आने लगी।
[4:34] बिलकुल जैसे कुछ मर गया हो यही कहीं आसपास मुझे समझने में देर
[4:38] नहीं लगी की किसी चीज़ के सड़ जाने वाली जो बदबू होती है, ये
[4:42] वही थी। पहले मैं किचन गया।
[4:44] सोचा शायद कुछ पुराना कचरा कहीं फंस गया होगा, कहीं रह गया होगा।
[4:48] पर जल्द ही रियलाइज किया कि स्मेल वहाँ से नहीं आ रही थी।
[4:51] बाथरूम से आ रही थी। मैंने जैसे ही बाथरूम का दरवाजा
[4:55] खोला, एक गन्दी सी सड़ी हुई। बदबू ने मुझे घेर लिया वो वो एक
[5:00] सड़े हुए मांस की स्मेल थी। मैंने अपने आप को कन्विंस किया कि
[5:04] शायद कोई पाइप का प्रॉब्लम होगा। पुरानी बिल्डिंग थी पुरानी
[5:07] प्लंबिंग में बी सूरज ब्लॉक के कारण ये बदबू आ रही है।
[5:11] सो अगले दिन मैंने लैंडलॉर्ड को कॉल किया और एक प्लम्बर बुलाया जब
[5:16] प्लम्बर आया, उसने पूरा बाथरूम चेक किया।
[5:18] हर पाइप हर कनेक्शन फ्लो टाइर्स तक उठा के उसने चेक किया।
[5:21] और सब कुछ साफ था और हर पाइप बिल्कुल ठीक से काम कर रहा था।
[5:26] जब मैंने उससे स्मेल डिस्क्रैब करने की कोशिश की तो वो मुझे कुछ
[5:29] अजीब सी पागल की तरह देख रहा था और बार बार कह रहा था नो
[5:33] प्रॉब्लम, नो प्रॉब्लम मिया बट प्रॉब्लम थी यार बहुत बड़ी
[5:38] प्रॉब्लम थी। हर रात बिलकुल टाइम पे दो 2:30
[5:41] बजे के आसपास वो बदबू रोज़ वापस आ जाती और दिन पर दिन वो और तेज
[5:46] होती जा रही थी। वीकेंड आते आते मैं बाथरूम के डोर
[5:51] के नीचे एक टॉवेल रोल करके सो रहा था ताकि बदबू से मेरी नींद ना टूट
[5:56] जाए पर कोई फायदा नहीं हुआ। और फिर एक रात से अचानक नॉकिंग की
[6:01] आवाज स्टार्ट हुई। पहले पहले आवाज इतनी धीमी थी कि
[6:06] मुझे लगा शायद मैं इमेजिन कर रहा हूँ, हल्की सी आवाज थी वो तीन बार
[6:14] और ये आवाज बाथरूम के अंदर से आ रही थी क्नॉइस।
[6:17] मैं बेड में लेटा था, सुनता रहा और अपने आप को समझाता रहा कि शायद
[6:22] पाइप्स की आवाज होगी या ऊपर वाले घर के बाथरूम में कोई कुछ काम कर
[6:26] रहा होगा? पर वो आवाज़ बंद नहीं हुई।
[6:30] वो कुछ देर बाद बाद होती रही। वो रात बस किसी तरह मैंने गुजारी।
[6:36] दूसरी रात वो आवाज अब और ज़ोर से आने लगी थी और मैं उठ कर चेक करने
[6:43] गया क्योंकि उस दिन मुझे ऐसा लग रहा था की बाथरूम में कोई था देर
[6:47] इस सम्वन हूँ वास् इनसाइड और वो अंदर से नाक कर रहा था सो मैं
[6:53] उठा। और बाथरूम डोर के बाहर खड़ा हो
[6:55] गया। अगली नॉकिंग के इंतजार में।
[6:59] फिर जब अगली बार नॉकिंग की आवाज हुई, मैंने हिम्मत करके चट से
[7:02] दरवाजा खोला और उस गन्दी बदबू ने मुझे एक बार और घेर लिया।
[7:07] इतनी तेज की शर्ट से नाक ढकना पड़ा पर बाथरूम बिल्कुल खाली था।
[7:13] कुछ नहीं था अंदर जो वो साउंड कर सकता था, ना कोई पाइप की आवाज, ना
[7:17] कोई हवा का आना जाना और ना ही कोई चूहा।
[7:20] परेशान होकर मैंने बाथरूम की लाइट ऑफ की और दरवाजा बंद कर दिया।
[7:26] पर मैं जैसे ही बेड पे चढ़ा लॉकिंग फिर से स्टार्ट हो गई और
[7:30] अब मुझे। काफी डर लगने लगा था और मैं बेड
[7:35] से फिर नहीं उठा। अगली रात तक मैं बिल्कुल थक चुका
[7:39] था और कई दिनों से मैं ठीक से सोया भी नहीं था।
[7:42] उस दिन फिर से दो बजते ही इस में लानी शुरू हो गई थी और फिर इतनी
[7:47] तेज होती गई की वहाँ रात को सोना मुश्किल हो चुका था मेरे लिए और
[7:52] तभी नॉकिंग शुरू हुई। दोबारा मैं किसी तरह डरते डरते
[7:57] उठा और मैंने डिसाइड किया कि मैं बाथरूम के दरवाजे को खुला रखूँगा
[8:02] ताकि आवाज आनी बंद हो जाए। मैंने बाथरूम की लाइट ऑन रखने की
[8:06] सोंची क्नॉइस शायद मैं अंदर देख सकूँ कि क्या हो रहा है।
[8:09] पर जैसे ही मैं बाथरूम का लाइट जलाकर बाथरूम का दरवाजा खोलकर बेड
[8:15] की तरफ जाने लगा, लाइट्स फ्लिकर होने लगी और फिर आउट ऑफ नोव्हेयर
[8:21] लाइट्स बंद हो गई। अब उस बैडरूम में मैं था।
[8:26] और मेरे सामने बाथरूम का वो खुला दरवाजा जिसके अंदर सिर्फ गहरा
[8:33] अँधेरा मैं फ़ोन की फ्लैशलाइट ऑन करने की कोशिश कर ही रहा था कि
[8:37] अचानक उस अंधेरे बाथरूम से नॉकिंग की आवाज फिर से आने लगी।
[8:42] दरवाजा खुला होने के कारण मैं उस आवाज को।
[8:45] अब साफ साफ सुन पा रहा था और वो आवाज सुन और ये सब देख मैं इतना
[8:51] डर गया की मैंने अपना फ़ोन और कीस उठाई और अपार्टमेंट के बाहर भाग
[8:57] गया। पूरी रात मैंने बिल्डिंग के बाहर
[9:00] वाले बेंच पे बिताई। मैं समझने की कोशिश कर रहा था कि
[9:03] क्या हो रहा था उस अपार्टमेंट में मेरे साथ जब सुबह हुई, तब तक मैं
[9:07] अपना मन बना चुका था कि मैं मेरे सवालों के जवाब के बिना वापस
[9:12] अकेले उस अपार्टमेंट के अंदर नहीं जाऊंगा।
[9:17] सो, कुछ देर इंतजार करने के बाद मैं अपने पड़ोस में रह रही एक
[9:21] आंटी के पास गया। वो एक बूढ़ी जापानीज़ लेडी थी और
[9:25] उन्हें थोड़ी बहुत टूटी फूटी अंग्रेजी आती थी।
[9:28] मैंने जब उन्हें पूरी बात एक्सप्लेन करने की कोशिश की तब
[9:31] उन्होंने मुझसे पूछा। यू डोन्ट नो अबाउट।
[9:35] दी और फिर उन्होंने मुझे बताया। युकी के बारे में 22 साल की एक
[9:40] कॉलेज स्टूडेंट जो मेरे अपार्टमेंट में कुछ साल पहले रहती
[9:43] थी, वो डिप्रेशन से परेशान थी, फोन्स नहीं उठाती थी, क्लासेज
[9:48] नहीं जाती थी और 1 दिन वो गाय भी हो गई।
[9:52] कुछ दिनों बाद नेबर्स ने अपार्टमेंट से आ रही इस मिल की
[9:56] कंप्लेंट की और लैंडलॉर्ड ने की यूज़ करके अपार्टमेंट चेक किया।
[10:00] तब युकी की लाश अपार्टमेंट में ही मिली।
[10:04] बाथरूम के अंदर वो 18 दिनों तक बाथरूम में पड़ी थी।
[10:09] उस छोटी सी जगह में। उस गर्मी के मौसम में।
[10:13] नो बाथरूम दैट एस व्हेर दे फाउंड। उस आंटी ने बताया, उनकी ये बात
[10:19] सुनकर मैं हिल गया था और मैं समझ गया था कि उस अपार्टमेंट का रेंट
[10:24] इतना कम क्यों था? एजेंट जीसको एको पुकेन कह रहे थे।
[10:30] वो क्यों कह रहे थे? इको बुकेन मतलब ए स्टिग्मेटाइज़्ड
[10:35] प्रॉपर्टी जहाँ किसी की मौत हुई हो स्पेशल सुइसाइड से?
[10:40] जापान में ऐसे घरों का किराया सस्ता होता है क्योंकि लोग इन्हें
[10:45] रेंट पर लेने से कतराते हैं। उसी शाम।
[10:48] मैंने सामान पैक किया, घर की चाबी मेल स्लॉट में डाल दी और वहाँ से
[10:53] चला गया। मुझे फिर से कुछ दिन कैप्सूल होटल
[10:57] में रहना पड़ा। कन्वीनियेंस स्टोर का खाना खाना
[11:00] पड़ा पर क्या करता? ऐसे घर में रहने से तो कैप्सूल
[11:03] होटल बहुत बेटर चॉइस था। मैंने अगले 2 साल में अपने
[11:07] मास्टर्स की डिग्री कंप्लीट की और फिर इंडिया वापस आ गया।
[11:11] पर कभी कभी उस छोटे से बैडरूम को याद करता हूँ और सोचता हूँ यूपी
[11:16] के बारे में क्या? वो अभी भी वहीं है?
[11:19] क्या वो अभी भी नॉक करती है और फ्रॅंक्ली शायद मैं इसका जवाब ना
[11:24] ही जानूं। तो बेहतर है, थैंक यू कार्तिक इस
[11:30] घटना को हमारे और हमारे स्पोक कास्ट कम्यूनिटी के साथ शेयर करने
[11:34] के लिए थिस वास् वेरी वेरी डिफरेंट थान यूसुअल जापानीज़
[11:38] स्टोरीज़ जो हम सुनते आते हैं। सो अवि?
[11:41] हाउ अबाउट शेयरिंग? सम मोर?
[11:43] डीटेल्स अबाउट विथ ऑडिएंस क्या है?
[11:47] ये इंटरेस्टिंग मंजुला सो गाइज़ कार्तिक के ईमेल में आने के बाद
[11:51] वी रिसर्च्ड ऑन दिस एंड मुझे यह समझ में आया कि जापान में ये जो
[11:57] टर्म है ये कॉन्सेप्ट बहुत ही कॉमन है।
[12:01] इवन टुडे इसका बेसिक मीनिंग ये है एक ऐसी प्रॉपर्टी जहाँ की जहाँ
[12:06] किसी की मौत हुई हो और मोस्ट नाइट्ली दुए टु दी उन्नतुरल
[12:10] कॉज़िज़ लाइक, सुसाइड, मर्डर और अक्सीडेंट ये प्रॉपर्टीस काफी
[12:15] सस्ती मिलती है रेंट के लिए एंड ब्य लॉ जापान में।
[12:20] ओनर्स और एजेंट्स को ऐसे किसी फ्लैट को रेंट पे देने से पहले
[12:24] टेनेंट को ये बताना मांडेटोरी है। दट्स अक्चवली ए गुड लॉ, क्योंकि
[12:30] यहाँ इंडिया में कई बार फ्लैट लेने पर उसके पहले हमारे यहाँ कौन
[12:35] रहता था? यहाँ पर किसी की डेथ हुई है या
[12:37] नहीं ये सब कभी पता नहीं लगता। वैसे वो बात अलग है इवन इफ़ इट
[12:43] इज़ डिक्लेर्ड मैं पर्सनली एज़ ए फ्लैट में कभी नहीं रहना चाहूंगी
[12:47] दिस इज़ दी लास्ट थिंग, आई वुड लाइक टू एक्सपीरियंस एवर व्हॉट
[12:51] अबाउट यू अवि? सेम हीयर लेट एस स्टे अवे फ्रॉम
[12:56] सच प्रॉपर्टीज़ फ़ॉर नाउ ओके थाट्स इट।
[13:00] सो नेक्स्ट कौन सी घटना सुनाने जा रहे हैं हम आज मंजुला।
[13:05] वेल आगे बढ़ने से पहले आई थिंक वी कैन डू ए शार्ट राउंड ऑफ़ इंट्रो
[13:10] जो कि हमारे काफी सारे लिसनर्स ने चार्ज एंड ईमेल पे हमसे रिक्वेस्ट
[13:14] की है व्हाट डू यू थिंक? वेल इन दट केस आई विल लेट यू
[13:19] स्टार्ट। ओके सो गाइज़ एज़ यू नो मेरा नाम
[13:23] मंजुला है एंड मैं स्पोक कास्टी राइटर होस्ट एंड डायरेक्टर होम ऑन
[13:28] ए पर्सनल फ्रंट आरवी एंड मी वी बोथ आरए कपल वी आर मैरीड गाइज़
[13:32] एंड वी डू दिस एज़ ए हॉबी प्रोजेक्ट अपार्ट फ्रॉम आउर
[13:36] रेगुलर प्रोफेशन्स। वी बोथ रन टू पोडकास्ट टूगेदर
[13:40] स्पोककस्ट एंड फाडू फ्राइडेज स्पूकास्ट में ज्यादा देसी
[13:44] कॅन्टेंट हैं। और यहाँ आप मेरी लिखी ओरिजिनल
[13:47] स्टोरीज़ और आपके द्वारा शेयर की गई आपबीती सुनते हैं एंड फाडू
[13:51] फ्राइडेज के बारे में अभी आपको बताएंगे।
[13:54] सो गाइज़ एस यू नो मेरा नाम अवि है।
[13:57] और मैं फारू फ्राइडेज का रैटर होस्ट एंड डायरेक्टर हूँ और फारू
[14:01] फ्राइडेज पे आप पूरे दुनिया भर के हॉरर, अर्बन लिजेंड्स डार्क
[14:06] मिस्टीरियस एंड सुपरनैचरल इन्सिडेन्स पर एपिसोड सुनते हैं।
[14:11] हर शुक्रवार सो चलिए फिलहाल बढ़ते हैं नेक्स्ट स्टोरी की ओर।
[14:16] एंड वी विल ऑसर ए कपल ऑफ मोर क्वेश्चन्स इन दी एपिसोड अहेड?
[14:20] ये अगली घटना हमारे साथ व्हाट्सएप पर शेयर की है।
[14:23] आराधना ने आराधना फिलहाल यूनाइटेड किंगडम में रहती है।
[14:27] पर ये घटना उनके साथ तब घटी थी जब वो उत्तर प्रदेश में थी।
[14:31] ट्वेल्फ्थ क्लास में। मैं इस घटना को अब उनके शब्दों
[14:34] में आपके सामने रखने की कोशिश करूँगी।
[14:38] मेरा नाम आराधना है। ये घटना मेरे साथ तब घटी थी जब
[14:42] मैं ट्वेल्फ्थ क्लास में थी और एक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहती
[14:46] थी। मेरे रूममेट का नाम प्रिया था और
[14:49] हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। और हमेशा साथ ही मैं सॉल जाती थी।
[14:53] खाना खाने ये जनुअरी का महीना था, बहुत ज्यादा ठंड थी।
[14:58] उस दिन मेरा अगले दिन असेसमेंट था, सो मैं पूरी दोपहर रीडिंग रूम
[15:03] में पढ़ाई कर रही थी। शाम की अटेंडेंस के बाद मैं सॉल
[15:07] गई एक कप चाय पिया। और फिर वापस पढ़ने चली गई रीडिंग
[15:11] रूम में पर अब वहाँ हुई नहीं था। मैं अकेली थी।
[15:15] उस बड़े से रीडिंग रूम में कुछ देर पढ़ाई करते हुए मुझे अचानक
[15:20] ऐसा लगने लगा कि कोई मुझे दरवाजे से देख रहा था।
[15:24] जब भी मैं उस तरफ देखते, वहाँ कोई नहीं होता।
[15:27] पर ये फीलिंग मुझे होती रही। लगता रहा कि कोई मुझे देख रहा है
[15:34] सो मैं उठकर गई दरवाजे तक चेक करने के लिए कि कोई सचमुच है या
[15:38] नहीं, पर वहाँ कोई नहीं था। 15 मिनट तक ये फीलिंग मुझे होती
[15:43] ही रही और अब मुझे थोड़ा डर लग रहा था।
[15:47] तो मैंने अपने रूम में वापस जाने की बात सोंची।
[15:50] पर एक लास्ट टॉपिक अभी भी बाकी था।
[15:52] मैंने सोचा कि बस 10 मिनट और ये लास्ट टॉपिक खत्म कर मैं रूम चली
[15:57] जाऊंगी तो मैं भी फिर से अपनी किताबों में खो गई।
[16:02] कुछ मिनट बीते ही होंगे कि अचानक कमरे के बाहर के कॉरिडोर की लाइट
[16:07] ने फ्लिकर करना शुरू किया। अब इसमें कुछ नॉर्मल नहीं था।
[16:12] ऐसा अक्सर होता था सो मैं दोबारा अपनी किताबों में खो गई।
[16:17] बट तभी अचानक रीटिंग रूम की लाइट एक तरफ से बंद हो गई और लाइट बंद
[16:23] होते ही। तीन किताबें बुक शेल्फ से नीचे
[16:26] गिरीं। एक के बाद एक सीक्वेंस में मेरे
[16:32] अलावा वहाँ कोई नहीं था और किताबों को इस तरह एक के बाद एक
[16:37] नीचे गिरता देख अब मुझे बहुत डर लगने लगा।
[16:41] मैं उठी और डर के मैं वहाँ से निकलकर सीधा रूम की तरफ जाने लगी।
[16:46] रास्ते में कॉमन वॉशरूम था। मैं वहाँ रुकी, मुँह धोकर मैंने
[16:51] खुद को शांत किया। मैं खुद को समझाने की कोशिश कर
[16:56] रही थी कि ये सब शायद एग्ज़ैम का स्ट्रेस होगा।
[17:00] वाशरूम से बाहर निकलकर मैं रूम की तरफ जा ही रही थी कि तभी मैंने
[17:05] देखा प्रिया मेरी रूममेट मेरे पास आ रही थी और अचानक मैंने दो अजीब
[17:11] चीजें नोटिस की। पहली बार उस जनवरी की कड़क ठंड
[17:16] में प्रिया ने सिर्फ कॉटन सूट पहना हुआ था।
[17:20] कोई स्वेटर नहीं, कोई जैकेट नहीं, कुछ नहीं और दूसरी अजीब बात मुझे
[17:26] अचानक बहुत कमजोरी महसूस होने लगी।
[17:29] मैं फील कर रही थी जैसे मेरी सारी ताकत खत्म हो रही हो।
[17:33] बॉडी का टेम्परेचर तेजी से गिर रहा था मेरा।
[17:37] एक साथ मुझे बहुत ठंड भी लग रही थी पर पसीना भी आ रहा था।
[17:42] मैंने प्रिया कहने की कोशिश भी की, मदद मांगने के लिए पर मेरे
[17:47] होंठ मेरा साथ नहीं दे पाए। ऐसे लग रहा था मानो मैं बेहोश
[17:51] होने वाली हूँ। प्रिया मेरे पास आई, मेस की तरफ
[17:55] इशारा किया और बोली। आराधना यार चलो ना भूख लगी है
[17:59] कहाँ थी तुम रिन्यू का टाइम है और तुमको पता है ना मैं हमेशा
[18:04] तुम्हारे ही साथ जाती हूँ। मैं धीरे धीरे उसके साथ चलने लगी।
[18:08] कदम दर कदम मेरी हालत अब भी खराब थी पर प्रिया ने शायद नोटिस भी
[18:14] नहीं किया। और मैं भी कुछ बोलने की हालत में
[18:17] नहीं थी। मैं इस हॉल में पहुंचने के बाद
[18:20] मेरा खाना खाने का मन बिल्कुल नहीं कर रहा था।
[18:23] मैंने डिसैड किया कि मैं वहाँ वेइट् करूँगी और प्रिया के खाना
[18:27] खत्म होने के बाद हम दोनों वापस अपने रूम में लौट जाएंगे।
[18:31] पर उस दिन प्रिया इतनी भूखी थी मानो कई दिनों से उसने खाना नहीं
[18:37] खाया हो। उसने 22 रोटी खाई, एक पूरी प्लेट
[18:41] बिरयानी और एक बोल नॉन वेज करी। खाना देने वाले भईया भी हैरानी से
[18:46] उसे देख रहे थे। 45 मिनट लगे प्रिया को पूरा खाना
[18:51] खत्म करने में। अब तक मैं भी थोड़ा बेटर फील कर
[18:54] रही थी। ये मेस हॉल एक गर्म जगह थी।
[18:58] जाने पहचाने चेहरे थे आसपास इसलिए मेरा डर भी थोड़ा कम हो गया था।
[19:02] शायद डिन्नर के बाद हम दोनों उठे और वापस कमरे की ओर जाने लगे।
[19:07] मेस हॉल और हॉस्टल के बीच में एक वाशिंग एरिया था।
[19:11] लड़कियों के हाथ मुँह धोने के लिए प्रिया वहाँ रुक गई और बोली।
[19:15] आराधना कैर्री ऑन मैं आ जाउंगी। मुझे रुकने का मन था, मैं अकेले
[19:20] नहीं जाना चाहती थी, पर उसने जबरदस्ती से मुझे जाने को कहा और
[19:24] मैंने अगले ही पल खुद को धीरे धीरे अपने हॉस्टल रूम की तरफ जाते
[19:29] हुए पाया। रूम पहुंचने पर दरवाजा अंदर से
[19:33] बंद था। शायद हमारी तीसरी रूममेट काव्य
[19:36] अंदर थी। मैंने दरवाजा नॉक किया ज़ोर से
[19:40] बताया कि मैं हूँ ताकि काव्या जल्दी से दरवाजा खोले, दरवाजा
[19:44] खोला और मैं हिल गई। मुझे अपनी आँखों पर भरोसा ही नहीं
[19:52] हो रहा था क्योंकि दरवाजा खोला था काव्या ने नहीं प्रिया ने प्रिया
[19:58] कमरे के अंदर गर्म कपड़ों में थी और वो मुझ पर चिल्ला रही थी।
[20:03] उसे भूख लगी थी और वो मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी डिन्नर पर
[20:08] जाने के लिए। प्रिया को देखते ही मेरे पैरों से
[20:13] पूरी ताकत चली गई और मैं नीचे गिर पड़ी।
[20:17] मैं खुद को संभाल नहीं पा रही थी। मैंने दादर के वाशिंग एरिया की
[20:21] तरफ देखा जहाँ मैंने प्रिया को अभी थोड़ी देर पहले छोड़ा था और
[20:25] वहाँ वो मुझे अब भी दिखी। एक अजीब शिमज़ खान के साथ मुझे
[20:32] देखते हुए रूम वाली प्रिया परेशान होकर मुझे संभाल रही थी।
[20:38] मेरी हालत खराब थी डर से और फिर मैं बेहोश हो गई।
[20:44] उस रात मुझे तेज बुखार आ गया। अगले दिन असेसमेंट में भी मैं कुछ
[20:49] खास नहीं कर पाई। एक हफ्ते तक मैं बीमार रही।
[20:53] प्रिया से मुझे हर वक्त डर लगता रहता, इतना ज्यादा कि धीरे धीरे
[20:59] हमारी दोस्ती खराब होने लगी अनफारचुनेटली मैं उसे कभी बता
[21:03] नहीं पाई कि मैंने उस दिन क्या देखा था या उस दिन।
[21:07] क्या हुआ था मेरे साथ? क्योंकि मुझे हमेशा लगता रहता कि
[21:11] पता नहीं जीस प्रिया के साथ मैं हूँ वो असली है या कुछ और?
[21:16] इस घटना ने मेरी हेल्त पर बहुत ज्यादा असर डाला ट्वेल्वथ बोर्ड्स
[21:21] कंप्लीट करने के बाद। मैं वहाँ से अडमिशन कैंसिल करके
[21:25] चली गई और कभी वापस नहीं लौटी। आज भी जब उस बारे में मैं सोचती
[21:30] हूँ तो कुछ समझ नहीं आता मुझे वो क्या था उस स्टडी हॉल से मेरे साथ
[21:36] वो कौन सी एंटिटी साथ आई थी ये मैं नहीं जानती।
[21:40] बस इतना जानती हूँ वो जो भी था। वो मेरी दोस्त प्रिया नहीं थी।
[21:47] थैंक यू आराधना इस बहुत ही क्रीपी इंसिडेंट को हमारे साथ शेयर करने
[21:51] के लिए थिस एंटिटी साउंड लाइक ए मिमिक टु मी एक डुप्लीकेट डिमोनिक
[21:57] एंटिटी जिसके बारे में आपको इंटरनेट पर बहुत कुछ मिल जाएगा।
[22:01] ये वैसे बहुत रैर और खतरनाक होते हैं।
[22:04] सो मंजिला हाउ अबाउट शेयरिंग सम डीटेल्स अबाउट थिस, मिमिक विथ आउर
[22:10] ऑडिएंस या। सो व्हाय नॉट गाइज़?
[22:12] सो अराना की घटना सुनने के बाद वी रिसर्च्ड ऑन थिस इन सिम्पल
[22:16] टर्म्स, इट्स काइंड ऑफ ए छलावा और निशीदा।
[22:20] जहाँ एक डेमोनिक एंटिटी आपके आपके किसी जान पहचान वाले की ऐडेंटिटी
[22:24] लेकर आते हैं और आपको भटकाने की या आपको हरम करने की कोशिश करते
[22:29] हैं एंड जो फीलिंग्स आराधना ने डिस्क्रैब की है।
[22:33] इस कहानी में ताकत का खत्म होना, उल्टी, सीधी बॉडी रिएक्शन्स का
[22:37] होना। ये सब क्लियर साइन्स है इस
[22:40] सुपरनैचरल प्रजेंस के और मुझे लगता है ये मेरा पर्सनल ओपिनियन
[22:45] है। वैसे बट मुझे लगता है कि आराधना
[22:48] का प्रयास से दूरी बनाने का डिसीजन भी बिल्कुल सही था,
[22:52] क्योंकि कभी कभी हमारी सेफ्टी हमारे मेन्टल पीस से ज्यादा
[22:56] ज़रूरी होती है। वैसे आप सबको ये दूसरी घटना कैसी
[23:00] लगी? दोस्तों हमें जरूर बताएगा।
[23:03] आई ऍम क्विट शुर। आपको ये पसंद आई होगी।
[23:06] अगर आप लोगों के पास भी कोई ऐसा ही यूनिक इंसिडेंट है तो हमसे
[23:11] शेयर करना मत भूलिएगा। हम डेफिनिट्ली उसे अपने आप भेटी
[23:15] सीरीज में फीचर करेंगे। चलिए।
[23:18] भर्ती है आज की तीसरी घटना सुमंजीरा बिफोर वी मूव ऑन टू ए
[23:22] नेक्स्ट इंसिडेंट सम ऑफ आउर फॉलोअर्स हैव आस्क्ड एस टू टेल
[23:27] देम हाउ डिड वी स्टार्ट स्पोक कास्ट?
[23:30] ओके गाइज़ वी बोथ अवे एंड मी वी बोथ लाफ हॉरर कंटेंट इन अल्फ़ा
[23:35] ओके? वीडियो, पॉडकास्ट, बूक्स, ब्लॉग्स
[23:38] सब कुछ है। जो भी डरावनी चीजें होती है आई
[23:42] थिंक वी काइंड ऑफ़ फॉलो एव्रीथिंग एंड वो भी अलग अलग लैंग्वेजेज
[23:45] में। वी बोथ अरे ह्यूज फन ऑफ़ रेडियो
[23:49] मिर्ची संडे सस्पेंस एंड दट इस हौ ही स्टार्टेड लविंग सिनेमा
[23:54] स्टाइल, ऑडियो पॉडकास्ट पर जब हम लोगों ने हिंदी और पोडकास्ट सुनने
[23:59] की कोशिश की तो पता चला कि ज्यादातर नैरेशन बिल्कुल सिंपल
[24:04] होती है। बिना बीजीएम मतलब, बिना
[24:07] बैकग्राउंड म्यूसिक, मिनिमम बैकग्राउंड म्यूसिक या शायद बिना
[24:11] म्यूसिक के अनलेस यू अरे पार्ट ऑफ़ सम बिग टीम।
[24:15] या ए बिग प्रोडक्शन हॉउस? ये हमारी इच्छा थी कि हम कोई
[24:19] ओरिजिनल हिंदी ऑर्डर स्टोरी वाला ब्रॉडकास्ट क्रियेट करें, जिसमे
[24:24] सिनेवैटिक ऑडियो मूवी स्टाइल का नैरेशन हो एंड थिस इस व्हाई वी
[24:29] स्टार्टेड फोरकास्ट वी ऑलवेज इनसिस्ट यू हियर आवर स्टोरीज़
[24:33] वीयरिंग हेडफोन्स। ताकि आप स्टोरी को एक्सपीरियंस कर
[24:37] सको। सुनो नहीं बस एक्सपीरियंस भी करो
[24:40] एंड दट इस हौ पोकास्ट केम इनटू एक्सिस्टेंस अगेन वी अरे नो
[24:45] एक्सपर्ट्स एस वी मेक ए लॉट ऑफ मिस्टेक्स, एंड वी अरे लर्निंग
[24:50] एव्रीडे हम हर रोज़ हजारों गलतियाँ करते हैं गाइस।
[24:54] एंड साथ ही में हम अभी भी सीख रहे हैं एंड हम सीखते रहेंगे।
[24:58] बस आप लोग साथ में ऐसे ही बने रहे।
[25:02] चलिए अब आगे बढ़ते हैं नेक्स्ट स्टोरी के साथ।
[25:05] ये अगली घटना हमारे साथ शेयर की है उर्वशी ने व्हाट्सएप पे।
[25:09] उर्वशी ने हमें बताया कि ये इंसिडेंट उनके दोस्तों के साथ हुई
[25:12] थी जब वो सब डेल्ही में। एक गर्ल्स पी जी में रहते थे
[25:16] मंजिला यू नो आई लव हॉस्टल एंड दीज़ पी जी रिलेटेड हॉरर स्टाफ
[25:21] में बी शायद क्योंकि कुछ चीजें हमारे साथ मेरे साथ हो चुकी हैं।
[25:25] ड्युरिंग मैं कॉलेज डेज़ एंड आई स्टिल थिंक अबाउट दोज़ एंड काफी
[25:28] क्रीपी एंड हॉरिफाइइंग इन्सिडेंट्स थी।
[25:31] में बी यू विल टॉक अबाउट सम ऑदर डे ऑर में बी लेटर लेटस सी।
[25:34] मैं अब उर्वशी की ये कहानी आप सबके सामने रखने की कोशिश करूँगा।
[25:40] मेरा नाम उर्वशी है। ये घटना मेरे दोस्तों के साथ तब
[25:43] घटी थी जब हम डेल्ही के एक पी जी में रहते थे।
[25:47] रीसन के वजह से मैं पी जी का नाम या जगह के बारे में ज्यादा नहीं
[25:51] बताऊंगी। हमारे पी जीके बिल्कुल पास एक।
[25:54] गार्डन था बहुत सुन्दर और बहुत बड़ा बच्चो के लिए बिलकुल
[25:58] पैराडाइस स्विंग स्लाइड सब कुछ थे वहाँ सुबह के टाइम यहाँ लोग
[26:03] जॉगिंग वाकिंग करने आते थे, एक्सर्साइज़ करते थे बच्चे, खेलते
[26:07] थे पूरा माहौल एक दम नॉर्मल और लाइव रहता था हर रात को वेल।
[26:13] रात को कहानी कुछ और होती थी। ये इंसिडेंट उस वीक की है जब मैं
[26:17] कुछ दिनों के लिए घर गई हुई थी। एक रात डिन्नर के बाद मेरे दो
[26:22] दोस्त ऋतु और अंजना ऐसे ही वक करने निकल गए।
[26:27] टाइम काफी हो गई थी तब ऑलमोस्ट मिडनाइट जब वो गार्डन के पास से
[26:32] गुजर रहे थे। उन्होंने देखा छोटी सी बच्ची एक
[26:35] झूले पर बैठी हुई थी और उसके आसपास और कोई नहीं था।
[26:40] वो बिलकुल अकेली थी, उसकी बेक उनकी तरफ थी सो उसे वो पहले ठीक
[26:45] से देख नहीं पाए। जब वो थोड़ा और आगे गए तो
[26:49] उन्होंने फिर से उस बच्ची को देखा तो वो एक।
[26:53] पुतले की तरह लगा रही थी। एक गुड़िया की तरह उसके चेहरे पर
[26:56] कोई हवभाव नहीं थे। वो चुपचाप उस झूले पर बैठी थी और
[27:01] वो झूला झूल भी नहीं रही थी। अंजना ये सब नोटिस करके थोड़ी
[27:06] घबरा गई और उसने रितु से कहा कि इतने रात को ये बच्ची अकेले यहाँ
[27:10] क्या कर रही है? खेल भी नहीं रही है बस।
[27:13] ऐसे ही बैठी है। ऋतू भी यही सब सोच रही थी और अब
[27:17] उसे एक अजीब सी फीलिंग आने लगी थी।
[27:20] उसने अंजना का हाथ पकड़ा और वहाँ से जाने को कहा।
[27:23] आखिर रात के 12:00 बजे कौन सी बच्ची अकेले पार्क में खेलती है,
[27:28] झूला झूलने आती है और झूलती भी नहीं है।
[27:31] और उसके मम्मी या पापा या और कोई गार्डीअंस कहाँ थे?
[27:35] कुछ तो अजीब था इस पूरे सिचुएशन में सो वो दोनों जल्दी से पी जी
[27:40] वापस आ गए पर जो घटना अगली रात हुई उसने सब कुछ बदल दिया।
[27:46] नेक्स्ट नाइट दोबारा डिन्नर के बाद मेरे।
[27:49] तीन दोस्त फिर से वक करने निकले। ऋतु अंजना और तीसरी फ्रेन्ड
[27:55] गीतिका। जब वो सब गार्डन के पास पहुंचे,
[27:58] गीतिका ने वो खाली पार्क और झुला देखा।
[28:01] वो बहुत एक्साइटेड हो गई और वो झूला झूलने की जिद करने लगी।
[28:04] ऋतु और अंजना अब एक दूसरे को देखने लगे उन दोनों के दिमाग में।
[28:09] पिछली ज़ात वाली घटना अब भी फ्रेश थी पर गीतिका के ज़िद को देख वो
[28:13] दोनों राजी हो गए। मान गए गीतिका आगे बढ़ी और वो
[28:18] दोनों उसके ठीक पीछे पीछे गार्डन के अंदर आए।
[28:22] जैसे ही रितु और अंजना अंदर गए उनकी नजरें सीधा उस झूले की तरफ
[28:27] ही गई। एक छोटी बच्ची आज भी थी।
[28:31] वहाँ उसी झूले पर उसके चेहरे पर आज भी कोई हावभाव नहीं था।
[28:37] बिल्कुल वैसे ही जैसे ऋतु और अंजना ने पिछली रात देखी थी, वहीं
[28:42] कपड़े नो एक्सप्रेशन, वैसा ही बिना हावभाव का चेहरा और वो।
[28:47] किसी की तरफ़ नहीं देख रही थी, सीधा आगे देख रही थी।
[28:51] हमें लगा कि गीतिका ने या तो उस बच्ची को नोटिस ही नहीं किया था
[28:55] या उसका वह होना। उसे एक दम नॉर्मल लगा था और वो
[28:58] झूले की तरफ़ आगे बढ़ने लगी पर ऋतु और अंजना आगे नहीं बढ़े।
[29:04] डर से वो एक ही जगह पे रुक गए। जब गीतिका ने पीछे मुड़कर ऋतु और
[29:10] अंजना को देखा तो वो कैफ्यूज हो गई क्योंकि उसके दोस्तों के चेहरे
[29:15] पे एक खौफ था, एक डर था उनकी आँखों में।
[29:20] चलो, यार क्या हुआ? गीतिका ने फिर से पूछा, ऋतु?
[29:24] और अंजना ने गीतिका को कोई जवाब नहीं दिया, बस अपना हाथ उठाया और
[29:29] दूसरे झूले की तरफ इशारा किया जो उस बच्ची के बिलकुल बगल में था।
[29:34] उस बच्ची के बगल वाला झूला अब अचानक ज़ोर ज़ोर से झूल रहा था
[29:39] अपने आप। जैसे कोई उस झूले पर बैठा हो, फुल
[29:47] फोर्स में झूला झूल रहा हो पर वो झूला खाली था।
[29:52] जैसे ही गीतिका ने ये देखा वो डर से कांप उठी।
[29:57] उसकी आँखों में भी अब वही डर आ गया था।
[30:00] जो रितु और अंजना के आँखों में इतने देर से वो देख रही थी, रितु
[30:06] और अंजना का वैसे ही डर से बुरा हाल था।
[30:09] उनकी बोलती तो वैसे ही बंद हो चुकी थी।
[30:11] वो तीनों भागने के लिए जैसे ही पीछे मुड़े उस छोटी बच्ची ने एक
[30:17] अजीब तरीके से। एक झटके से अपने गर्दन की तरफ
[30:20] घुमाई। उसकी आँखों या चेहरे पर अब भी कोई
[30:24] भाव नहीं थे। बट दट, ट्विस्ट दट वॅन स्मॉल मूव
[30:29] इट वास् एनफ तीनो ने अब डर से दौड़ना शुरू किया।
[30:35] वो बस किसी तरह वहाँ से भाग। घर पार्क के बाहर निकलना चाहते
[30:39] थे। दे जस्ट केप्ट रनिंग प्लान
[30:41] स्ट्रेट टु दी हॉस्टल और मुड़ के भी नहीं देखा।
[30:45] जब कुछ दिन बाद मैं घर से वापस आई तो उन्होंने मुझे ये पूरी
[30:49] इंसिडेंट बताई। मैंने ये भी सुना है कि पी जीके
[30:52] कुछ और लड़कियों ने भी उसी बच्ची को पहले भी देखा था।
[30:57] मैं ये सुनकर बिल्कुल सहम गई। उस रात के बाद हम सब ने गार्डन
[31:02] में रात को जाना बिल्कुल बंद कर दिया पर कभी कभी जब किसी जरूरी
[31:07] काम से उस गार्डन के पास से निकलना पड़ता था, रात को तो हम
[31:12] हनुमान चालीसा पड़ते हुए निकलते थे अक्सर।
[31:15] उस एरिया में रात को एक अजीब सी धुंध भी दिखती है।
[31:19] भले ही बाकी जगह साफ हो और जब भी ऐसा होता है ट्रस्ट मी वो माहौल
[31:24] और भी डरावना लगने लगता है। वो झूला वो बच्ची हमें आज भी नहीं
[31:29] पता वो कौन थी या क्या थी पर वो रात ऐश्वर्य।
[31:34] इट वास् ए रियल हॉरर हे उर्वशी, थैंक यू सो मच फॉर शेयरिंग थिस
[31:41] बच्चों की स्पिरिट्स या आत्माओं वाली स्टोरीज़ हमेशा से दूसरी
[31:46] घटनाओं से कुछ ज्यादा ही कृति लगती है।
[31:49] और वो एक्सप्रेशनलेस फेस, फिर अचानक से गर्दन घूमा देना।
[31:55] और जो सबसे क्रीपी था उस खाली झूले वाला सीन आई।
[32:00] मीन फुल स्पीड में अपने आप उस झूले का झूलना जैसे कोई इनविजिबल
[32:06] बच्चा या कोई तो है जो झूले को झुला रहा हो।
[32:09] सो थैंक यू। इस टेरिफाइंग इंसिडेंट को हमारी
[32:12] कम्यूनिटी के साथ शेयर करने के लिए उर्वशी चलिए अब बढ़ते हैं।
[32:16] अगली घटना की ओर पर इससे पहले अवी वांट्स टु से समथिंग वेरी
[32:21] इम्पोर्टेन्ट। वी हॅव रियली नॉट बीन वेरी अक्टिव
[32:23] ऑन सोशल मीडिया फ्रॉंक्ली दो पोडकास्ट का काम खत्म करते करते
[32:27] दिन निकल जाता है। बट वी वांट टु फिक्स दट।
[32:31] सो इस महीने से हम लोगों ने इंस्टाग्राम पे हॉरर कॅन्टेंट
[32:35] शेयर करना शुरू किया है। एंड वी वुड रिक्वेस्ट यू ऑल टु गो
[32:40] एंड फॉलो उस ऑन इंस्टाग्राम हम लोग वैसे यूट्यूब पर भी है।
[32:44] प्लीज़ हेल्प उस अचीव आवर नेक्स्ट माइलस्टोन।
[32:47] ऑफ़ 1000 सब्सक्राइबर्स देर एस वेल डू कनेक्ट विथ उस ऑन ऑल सोशल
[32:53] मीडिया प्लेटफॉर्म्स वी नीड दट सपोर्ट फ्रम यू एंड इन अडिशन टु
[32:56] दट डू रेट आवर, पोडकास्ट एंड हमारे पोल्स में प्लीज़ प्लीज़
[33:01] प्लीज़ पार्टिसिपेट करें बिकॉज़ दट्स दी वे वी नो व्हाट यू लव।
[33:06] बिफोर वी स्टार्ट दी फाइनल इंसिडेंट एक इम्पोर्टेन्ट चीज़
[33:10] कहनी है मुझे आपसे वी रिस्पेक्ट एंड फील ग्रेटफुल की आप सब ने
[33:16] हमें इतना प्यार और सपोर्ट दिया है पर वहीं पे कुछ लोग हैं जो
[33:20] शायद स्टोरीज़ को रियलिटी से मिक्स कर लेते हैं।
[33:24] एंड अब्यूज एंड हरस्मेंट का सहारा लेते हैं।
[33:27] व्हिच इस नॉट ओके उनसे बस इतनी ही रिक्वेस्ट है अगर आप फीडबैक या
[33:32] फीलिंग्स शेयर करेंगे। वी अरे मोर थान हैप्पी टु लिसेन
[33:36] टु यू बट इफ यू बिहेव् लाइक ए ट्रोल एंड टेक दी पाथ ऑफ़ अब्यूज
[33:41] एंड वल्गैरिटी यू कैन। स्किप ऑर पोडकास्ट कम्यूनिटी में
[33:47] हेल्ती एंड हैप्पी माहौल बनाए रखना ही हमारा उद्देश्य है।
[33:51] एंड आई होप आप सब इस चीज़ से एग्री करते होंगे।
[33:55] अब थिस स्टोरी एक रिलीजियस हॉरर बेस्ड इंसिडेंट है इफ यू अरे
[34:00] अनकम्फर्टेबल, प्लीज़ डू नॉट प्रोसीड बियॉन्ड थिस।
[34:04] वी अप्रीशीएट एव्रीवन एंड रिस्पेक्ट, एवेरी कास्ट रिलिजन
[34:09] एंड फेथ अबोव ऑल ह्यूमेनिटी एंड ह्यूमिडिटी तो आप रेडी हो जाओ, आज
[34:15] की आखरी और सबसे डरावनी इंसिडेंट के लिए जो लेके आ रही है आपकी
[34:21] होस्ट मंजिला। ये आखिरी घटना हमारे साथ श की है
[34:25] फाहिम अली ने जो अलीगढ़, यूपी से हैं, लेकिन पिछले कई सालों से
[34:30] अब्बू धाबी में काम करते हैं। बूथ कास्ट की आपबीती सीरीज में
[34:34] सुनाए जाने वाला ये पहला जिनका इंसिडेंट है सो ध्यान से सुनिएगा।
[34:39] इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की कोशिश
[34:43] करूँगी। मेरा नाम फाहिमली है, मैं अलीगढ़,
[34:49] यूपी से हूँ, लेकिन पिछले कई सालों से अब्बू धाबी में मैं काम
[34:53] करता हूँ। इस कहानी को कहना मेरे लिए
[34:56] बिल्कुल आसान नहीं था। क्योंकि जो हुआ उसने मेरी जिंदगी
[35:00] को हमेशा के लिए बदल दिया। उस रात जो मैंने देखा वो क्या था?
[35:05] मैं आज तक समझ नहीं पाया। सिर्फ एक चीज़ कह सकता हूँ।
[35:10] लोग कहते हैं जिन सिर्फ कहानियों में होते हैं, लेकिन मैं उन लोगों
[35:15] में से नहीं हूँ। 2011 में मुझे एक काम मिला अब्बू
[35:21] धाबी के पुराने इंडस्ट्रियल ज़ोन के एक अबैन्डन्ड वेयरहाउस कंपाउंड
[35:26] की। रात की सिक्योरिटी ऑफिसर की नौकरी
[35:29] ये एक अजीब सी जगह थी एटीस के जमाने का कंस्ट्रक्शन, लेकिन कुछ
[35:34] बिल्डिंग्स सिर्फ आधे बने थे। कइयों में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई
[35:37] तक नहीं थी और उस कम्पाउंड के बीच में थी एक छोटी सी टूटी हुई
[35:43] मस्जिद। लोग कहते थे वो मस्जिद बंद है।
[35:46] पूरा बनने से पहले ही उसमें आग लग गई थी।
[35:50] ना वहाँ अजान होती थी ना नमाज़। वो कमरा हमेशा बंद रहता।
[35:55] खिड़की से अगर अंदर झांक कर देखो, अंदर अंधेरा और जमीन पर सूखे
[36:01] पत्ते और धूल दिखाई देते हैं, बस और कुछ नहीं, लेकिन एक रात जब मैं
[36:07] राउंड्स ले रहा था, अचानक मैंने देखा कि मस्जिद के अंदर एक रौशनी
[36:11] थी हल्का सा नूर जैसे। कोई बल्ब चल रहा हो, लेकिन उस बंद
[36:17] मस्जिद में बिजली का कनेक्शन भी नहीं था तो लाइट कैसे जल रही थी?
[36:24] सो ये चेक करने के लिए मैं दरवाजा खोल के अंदर गया।
[36:30] मस्जिद आज बिल्कुल साफ थी। जैसे किसी ने कल ही झाड़ू पोछा
[36:34] किया हो। अंदर एक आदमी सजदे में था, सफेद
[36:39] चप्पा पहने और उसके पास छोटी सी तसबी यानी प्रे बीज थी।
[36:44] मैं पीछे खड़ा हो गया। सोचा कोई मजहबी शख्स होगा।
[36:48] उसने कुछ देर तक सजदा किया। और मैं चुपचाप खड़ा देखता रहा,
[36:54] लेकिन जैसे ही उसने सजदा खत्म किया, उसने एकाएक अपना सर घुमाया
[36:59] और मेरी तरफ देखा पूरा का पूरा सर पीछे की तरफ उसका बाकी का शरीर
[37:06] सीधा था अभी सजदे की पोज़ीशन में। लेकिन सिर पूरा मेरी तरफ मुड़ा
[37:12] हुआ था। वो मुझे देख अब हल्का सा
[37:16] मुस्कराया। फिर उसके गले से एक हँसी की आवाज
[37:20] निकली, लेकिन ऐसा लगा मानो तीन चार लोग साथ में हंस रहे हो एक
[37:27] भारी आवाज में। वो आवाज़ कमरे के चारों तरफ से आ
[37:32] रही थी जबकि वो आदमी मेरे सामने था।
[37:36] मैं डर से कांप उठा। मुझे महसूस हुआ जैसे मेरे पैरों
[37:40] में किसी ने बेड़ियां बांधी हो और मैं चाह कर भी वहाँ से भाग नहीं
[37:44] पा रहा था, सो मैंने उसी वक्त कलमा पढ़ना शुरू किया।
[37:48] वो आदमी या वो जो कुछ भी था अब भी मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था और
[37:56] उसकी आँखें बिल्कुल काली थी जैसे उसके अंदर कोई रूह ना हो और अगले
[38:02] ही पल मस्जिद का दरवाजा बहुत ज़ोर से बंद हुआ।
[38:08] मैंने छठ से पीछे मुड़कर देखा। मैं पहले ही बहुत डरा हुआ था वो
[38:13] जोरदार आवाज सुनकर मेरी रूह कांप गई और फिर जब मैं दोबारा उस आदमी
[38:19] की तरफ मुरा वो वहाँ नहीं था। उस कमरे में दूसरा कोई खुला
[38:25] दरवाज़ा या खिड़की नहीं थी। पता नहीं वो आदमी कहाँ चला गया,
[38:29] पर मैं मैं वहाँ एक और सेकंड नहीं रुक पाया, मैं बाहर दौड़ा मेरे
[38:36] पसीने छूट गए थे और मस्जिद के दरवाजे के बाहर कदम रखते ही
[38:41] मस्जिद का दरवाजा दोबारा ज़ोर की आवाज के साथ फिर से बंद हो गया।
[38:47] बहुत ज़ोर से मानो किसी ने बहुत गुस्से में अंदर से उसे बंद किया
[38:57] हो। अगले दिन मैंने अपने बॉस से कहा
[38:59] कि मैं अपनी शिफ्ट बदलना चाहता हूँ, लेकिन उन्होंने मेरी बात को
[39:04] हँसी में उड़ा दिया। और मुझे ड्यूटी पर जाना पड़ा।
[39:08] अगली दो रात तक सब ठीक था। मैंने कम्पाउंड के चक्कर तो लगाए
[39:14] पर उस बंद मस्जिद से दूर ही रहा। तीसरे दिन मेरी छुट्टी थी।
[39:20] उस रात मैंने एक डरावना सपना देखा।
[39:24] वो इतना डरावना था कि मुझे लगा मेरे साथ वो सब कुछ सच में हो रहा
[39:30] था। मैंने देखा कि मैं उस बंद मस्जिद
[39:34] के कमरे में था। उसकी दीवारें आज बिल्कुल काली थी
[39:38] मानो वो जल गई हो और कोने में एक काला सा साया था जिसके।
[39:44] पैर नहीं थे वो साया हवा में दो से तीन फिट ऊपर झूल रहा था और
[39:51] उसका मुँह दीवार की तरफ था। वो शायद धीरे धीरे मुस्कुरा रहा
[39:56] था क्योंकि उसके कंधे हिल रहे थे और मुझे उसकी आवाज साफ सुनाई दे
[40:02] रही थी। फिर उसने अपनी गर्दन मेरी तरफ
[40:08] मुड़ी सिर्फ अपनी गर्दन उस रात की तरह उसकी आँखों की जगह काले गठे
[40:16] थे और उसके गले से वही शैतानी हँसी निकल रही थी मानो।
[40:23] तीन चार लोग साथ में मुझे देख कर हंस रहे हो मैं मैं डर से रोने
[40:29] लगा। मैं चाह कर भी भाग नहीं पा रहा था
[40:32] और तभी उसकी आँखों में बहुत गुस्सा दिखने लगा।
[40:37] अचानक वो इतना ज़ोर से चिल्लाता। कि उस कमरे के खिड़की, दरवाजे एक
[40:45] झटके में सब अपने आप खुल गए। वो आवाज इतनी डरावनी थी कि उसे
[40:52] सुनकर मेरी जान ही निकल गई। मेरे पैर कांपने लगे और मैं बेहोश
[40:58] हो गया। सुबह जब मैं उठा, मुझे तेज बुखार
[41:05] था। डॉक्टर ने कहा वायरल है, लेकिन
[41:08] मुझे पता था मुझे बुखार क्यों आया था?
[41:12] वो सपना इतना डरावना था कि मुझे सच में लग रहा था कि शायद मैं
[41:17] दोबारा से उस मस्जिद के अंदर गया था रात में लेकिन मैं?
[41:22] उस रात छुट्टी पर था। शायद वो दिन मेरे सपने में आया था
[41:27] मुझे डराने उस दिन से मेरी हालत और बिगड़ गई।
[41:32] हालांकि रहमत से मेरी खराब तबियत के कारण लिए गए छुट्टियों की वजह
[41:37] से मुझे मेडिकल ग्राउंड पर नौकरी से निकाल दिया गया।
[41:41] मैं खुद भी वहाँ काम नहीं करना चाहता था।
[41:45] ठीक होने पर कुछ दिनों बाद मैं फाइनली वहाँ के एक पुराने वर्कर
[41:50] जुनैद भाई से मिला और उस बंद मस्जिद के बारे में मैंने उनसे
[41:54] पूछा। उस मस्जिद का नाम सुनते ही जुनैद
[41:57] भाई का चेहरा जुलत बढ़ गया। पर उन्होंने मुझे सच बताया और
[42:02] मुझे जो पता चला उसने मुझे हिला दिया।
[42:06] कई सालों पहले जब वो मस्जिद बन रहा था तब 1 दिन एक आदमी ने वहाँ
[42:11] कुछ रिलीजियस स्क्रिप्चर्स का अनादर किया।
[42:14] उसे कंस्ट्रक्शन वर्कर्स से बहुत मार पड़ी।
[42:18] उसे वहाँ से भगा दिया गया। पर उस रात को अचानक वो नींद से
[42:23] उठा पागलों जैसा बर्ताव करने लगा और अपने कमरे से उठकर रात को वो
[42:29] कहीं चला गया। अगले दिन उसकी जली हुई लाश उस बंद
[42:34] मस्जिद के कमरे में मिली। वो अंडर कंस्ट्रक्शन कमरे में भी
[42:39] आग लग गई थी और उसके बाद मस्जिद का कंस्ट्रक्शन पूरी तरह रुक गया।
[42:45] लोगों ने इस हादसे को एक बहुत बुरे ओमन की तरह देखा और तब से
[42:50] लोग कहते हैं कि एक चिन्ह उस कमरे में बस गया था।
[42:56] और वो सिर्फ उन लोगों को दिखाई देता है जिसने उसके ना चाहते हुए
[43:01] भी उसे देख लिया हो। शायद उस रात जब मस्जिद से हल्की
[43:05] सी रौशनी आ रही थी मुझे बाहर नहीं जाना चाहिए था।
[43:10] मैं वहाँ गया और उसकी सजा मुझे मिली।
[43:14] वो 1 दिन था और आज 1 दिन है। मैंने दुआओं का सिलसिला जो शुरू
[43:19] किया था वो आज भी बंद नहीं किया है।
[43:22] पर इतने सालों बाद भी कभी कभी वो डराव न सपना मुझे आज भी दिखाई
[43:28] देता है और वो चिन्ह मेरे सपनों में आज भी आता है।
[43:38] थैंक यू फहीम बाई इस डरावनी इंसिडेंट को हमारे कम्यूनिटी के
[43:41] साथ शेयर करने के लिए ये स्टोरी मुझे पर्सनली बहुत पसंद आई एंड
[43:47] काफी डरावनी लगी। हम सब की लाइफ में कुछ ना कुछ ऐसा
[43:51] होता है। जीस पर हम नॉर्मल्ली यकीन नहीं
[43:53] करते, पर फिर अचानक 1 दिन अगर हमारा सामना उसी चीज़ से हो देन
[43:59] आई थिंक इट कैन बीए हॉरिफाइइंग एक्सपीरियंस एंड आपका इंसिडेंट
[44:04] सुनकर मुझे कुछ ऐसा ही फील हुआ। एंड मंजिल आई वुड लाइक टु ऐड फॉइम
[44:08] भाई जिन मेरा भी एक बहुत फेवरिट टॉपिक है।
[44:12] एंड ये इंसिडेंट सुनकर मज़ा आ गया यहाँ न कोई भूत था, न कुछ और बट
[44:18] आपका उस आदमी या जो कुछ भी था उसके साथ वो एनकाउंटर व्हेर ही
[44:23] टर्न्स हिज़ हेड, वॉज़ स्केयरी। अब्सोलुटली फहीम भाई ने जो
[44:27] एक्सपीरियंस हम सब के साथ शेयर किया है वो हमें सीखाता है कि
[44:31] अगर। कोई जगह अबन्डड है या वहाँ कोई
[44:34] अजीब अक्टिविटी लग रही है, तो बेहतर यही होगा कि हम उस जगह से
[44:38] दूर रहे। 100%।
[44:40] आई ऍम विथ थिस। आज का एपिसोड यहीं खत्म हो
[44:43] जायेगा। इस अगले हफ्ते हम लोग लौटेंगे एक
[44:47] और आपबीती एपिसोड के साथ क्योंकि अब हमारे पास।
[44:50] बहुत सारी घटनाएं हैं आपको सुनाने के लिए।
[44:53] आई होप यू एन्जोएड लिसनिंग टु थिस एपिसोड एस मच एस मी एंड वी
[44:57] एन्जोएड रिकॉर्डिंग इट एंड गाइस गो एंड फॉलो उस ऑन इंस्टाग्राम
[45:01] प्लीज़ भूलिएगा मत एस वी सैड। हम लोगों ने वहाँ भी हॉरर कंटेंट
[45:06] पोस्ट करना शुरू किया इस महीने से।
[45:08] डोन्ट फर्गेट टु फॉलो उस रेट उस एंड पार्टिसिपेट, इन ए पोल्स तभी
[45:12] हमें पता चलेगा आपको किस तरह का कंटेंट पसंद आ रहा है, सो अगले
[45:16] हफ्ते फिर मिलेंगे। मैं हूँ अभी।
[45:19] और मैं मंजिला और आप सुन रहे हैं इस फोरकास्ट।
[45:22] अभी और मंजिला के साथ सुनते रहिये फोरकास्ट।
[45:28] अवि और मंजिला के साथ।

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