# Ep 75 - RAKT VANN | PART 3 - KAAL PIND KA BHOG | HINDI HORROR STORY | Mythological Horror |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 19 Mar 2026, 31 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/117182358/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2026-2-19%2F420383539-44100-2-4adb9dcc6b85d.mp3

Story: Arjun is now obsessed with Rakt Vann. The sweet fragrance, the silence of the villagers, and the missing people—it’s all connected… and he’s close to the truth. But some truths don’t wait to be uncovered. They pull you in. As Keshav struggles with what he has seen, Arjun prepares to return to the cursed ruins—alone. Because in Rakt Vann… no one just disappears. They are chosen. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana |Chakwa | Chakhwa |Chakva | Chalava | Brahmarakshas | Munjya | Brahadaitya |Ambulance Horror | Driver Story | Hindi Horror Story | Horror Stories | Story and Narration by : Manjila Sound Design and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Share your incidents with us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:10] मैं हूँ मंजुला और आप सुन रहे हैं इस फोरकास्ट।
[0:25] दोस्तों नमस्कार, मैं हूँ मंजुला और आज मैं आपके लिए लाई हूँ रक्त
[0:31] वन इस कहानी का आखिरी भाग। मैं आशा करती हूँ कि आप इसे एंड
[0:36] तक जरूर सुनेंगे और हमेशा की तरह अपना सपोर्ट जरूर दिखाएंगे।
[0:43] चलिए बिना किसी देरी के आज का यह एपिसोड शुरू करते हैं।
[0:55] रक्त वन से लौटने के बाद रिपोर्टर अर्जुन गांव में घूम घूमकर लोगों
[1:00] से रक्त वन काल, पेड़ और गाय हुए लोगों के बारे में तरह तरह के
[1:05] सवाल पूछने लगा, पर हर जगह उसे वही रटा रटाया जवाब मिलता रहा।
[1:12] गुप्त दल के सदस्य। दूर से ही उस पर नजर रखे हुए थे।
[1:16] पर अर्जुन को जल्द ही समझ आ गया कि सांगरी गांव के लोग उसकी कोई
[1:21] मदद नहीं करने वाले। वो ये भी समझ चुका था कि अगर सबको
[1:28] एक ही जवाब हटाया गया है तो इसका मतलब है इस गांव में।
[1:34] कोई राज़ छुपा है जिसे सब मिलकर छुपा रहे थे?
[1:41] थककर अर्जुन एक दीवार के सहारे बैठा।
[1:45] उसने अपनी एक पुरानी नोट बुक खोली।
[1:48] पहले पेज पर एक पुरानी फोटो चिपकी थी।
[1:53] एक नौजवान लड़के की मुस्कुराते हुए पहाड़ी पोशाक में अर्जुन ने
[1:59] उस फोटो को कुछ देर तक देखा, फिर धीरे से कहा।
[2:03] भाई मैं जानता हूँ तुम भी यहीं आए थे और यहाँ से वापस कभी नहीं लौटे
[2:10] मैं, मैं वादा करता हूँ। मैं यहाँ से साथ जानकर ही तम
[2:15] लूँगा। उसने नोट बंद की और अपने कमरे की
[2:20] तरफ़ चला गया। वह मन ही मन ठान चुका था की उस
[2:26] रात वह अकेले ही रक्त बन जा कर काल पिंड के आस पास।
[2:38] उस रात केशव अपने घर के बाहर बैठा ही था कि तभी उसे दूर से महेंद्र
[2:44] आता हुआ दिखा। आज ठीक लग रहा है तो।
[2:47] महेंद्र उसके बगल में बैठते हुए बोले।
[2:51] जवाब मेरे सारे सवालों का जवाब दोगी।
[2:54] अब मुझे ठीक लगेगा चाचा कल आपने कालपिन की कहानी पूरी नहीं सुनाई
[2:59] और आज मैं पूरी बात बिना सुनी आपको जाने नहीं दूंगा।
[3:05] ठीक है, ठीक है पूछ, क्या पूछना है तुझे?
[3:10] कालपिन को अब 40 दिन में। लगती है।
[3:14] लेकिन कल आपने जो कहानी सुनाई थी तब तो वो कुछ दिनों बाद में शिकार
[3:20] करता था, है ना? ठीक पकड़ा तुने कहते हैं शुरुआत
[3:26] में वो हर हफ्ते पूर्व लोगों का शिकार किया करता था तब?
[3:31] इस वन में बस वही रहते थे पर फिर मूर्ति में कैद होने के बाद पूर
[3:37] पालकों ने खुद को बचाने के लिए उसके साथ एक समझौता किया और तब से
[3:45] सारे नियम पलट गए। कैसा समझौता चाचा?
[3:49] क्नॉइस। बोरपा लोगों ने कसम खाई थी कि वो
[3:52] खुद कालपिंड को हर दो महीने बाद एक इंसान एक पली ला कर देंगे।
[3:58] कभी आसपास के गांव के लोग और कभी पर्यटन पर पूरपा जाति के लोग नहीं
[4:05] और इसके भरने में कालपिंड को कुछ से।
[4:08] शिकार करना बंद करना था, खासकर भोरपा लोगों का और अपनी बहू पर भी
[4:15] काबू पानी थी। इस समझौते के मुताबिक कॉल पिन तभी
[4:20] शिकार कर सकता था अगर भोरपा लोग उसके लिए कोई बलि लाने में असमर्थ
[4:26] रहे। क्नॉइस और समझौते के बाद से सालों
[4:30] तक सब कुछ ठीक चला पर जब धीरे धीरे बूथ पर जाती लगभग खत्म होने
[4:36] लगी। चीजें फिर बदलने लगी।
[4:39] उसकी भूख के बीच का अंतराल भी कम होने लगा तो खुद ही सोच के शव
[4:45] इतने सालों से। 40 दिन में काल पिंड बर्ली लेता
[4:49] था, पर इस बार इस बार उसने 3035 दिन के पीछे शिकार कर लिया है।
[4:56] इसका मतलब इसका मतलब उसकी भूख फिर से बढ़ गई है।
[5:02] लेकिन चाचा आज हर 40 दिन में उसे शिकार किसे मिल जाता है?
[5:07] वो भी जंगल के उस इंसान हिस्से में जहाँ सब जाने से डरते हैं।
[5:11] केशव ने हैरानी से पूछा। पता नहीं बेटा शायद भगवान की कृपा
[5:17] है हमारे गांव पर हर 40 दिन के आसपास कोई न कोई मुसाफिर, कोई न
[5:23] कोई अनजान इंसान। उस जंगल में भटक ही जाता है और वो
[5:28] उस खुशबू का शिकार बन जाता है। पर चाचा अगर कोई शिकार ना मिले तब
[5:34] क्या होगा? ये सवाल सिर्फ महेंद्र का चेहरा
[5:38] सफ़े पर गया। ऐसा कई बार हुआ है।
[5:41] केशव पिछली बार जब हुआ था। तब मैं तेरी उम्र का था।
[5:48] उस बार 50 दिन से भी ज्यादा धन बीत चूके थे पर जंगल में कोई नहीं
[5:53] गया और काल्पनिक की भोग बेकाबू होने लगी और फिर एक रात क्नॉइस।
[6:04] वो हुआ जिसका सब को डर था वो मीठी सी खुशबू उस रात रक्त वंश से
[6:10] निकलकर यहाँ सांगरी गांव तक पहुँच गई।
[6:14] उस समय गांव के किनारे पर एक परिवार रहता था, माँ बाप और दो
[6:19] बच्चे वो सब खून में उठे क्नॉइस। बिना कुछ बोली की तरफ चल पड़े।
[6:27] उस रात उस रात काल पिंड का प्रकोप उस परिवार पर पड़ा केशव उसने उन
[6:33] सबकी बलि ले ली। छोटे छोटे बच्चों की भी जब जब हम
[6:40] उस परिवार को ढूंढ़ते हुए। पहुंचे हम हम सब काब उठे।
[6:46] पूरे खंडहर में उन चारों का खून, मांस के टुकड़े, हड्डियों फैली
[6:52] हुई थी। मैंने खुद मैंने खुद इन हाथों से
[6:56] उन छोटे बच्चों के मांस के टुकड़े और हड्डियों उस कुएं में फेंके थे
[7:00] केशव। मैं उस दिन को कभी नहीं भूल पाया।
[7:06] महेंद्र ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।
[7:10] उसकी आँखों से ये आंसू गिरने लगे। उस मनहूस दन को अब बहुत साल हो
[7:16] गया है। मैं अब बूढ़ा हो चुका हूँ पर
[7:19] भगवान की कृपा से उस दिन के बाद। फिर ऐसा कोई हादसा हमारे गांव में
[7:25] नहीं हुआ है। केशा और इसीलिए कल मुखिया जी सबको
[7:29] सतर्क कर रहे थे। हम गुप्त दल के सदस्यों का काम
[7:34] सिर्फ सफाई करना नहीं है। इस गांव की काल पिंड के प्रकोप से
[7:39] रक्षा करना भी है। क्नॉइस?
[7:41] याद रखना तो और इसीलिए मैं खुश हूँ कि तू भी अब ये जिम्मेदारी
[7:47] उठाएगा। बात खत्म कर महेंद्र अब उठे और
[7:51] वहाँ से चले गए पर केशव वहीं बैठा रहा।
[7:55] उसे अब धीरे धीरे सब कुछ समझ आ रहा था।
[7:59] कि कैसे सांगरी गांव की शांति के पीछे एक बहुत बड़ा और खूनी इतिहास
[8:06] छुपा था। महेंद्र केशव के घर से वापस जा
[8:15] रहे थे कि तब तुने गांव के किनारे अंधेरे में कोई खड़ा दिखाई दिया।
[8:22] शॉर्ट्स और टी शर्ट में वो बड़ी सावधानी से आगे बढ़े तो उन्होंने
[8:28] देखा कि रिपोर्टर और जंगल के पास चुपचाप एक मुर्गी की तरह खड़ा था
[8:35] और उस अंधेरे में वो पता नहीं क्या दिख रहा था।
[8:40] रिपोर्टर साहब? रिपोर्टर साहब?
[8:44] पर अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया। महेंद्र अब अर्जुन के पास पहुंचा,
[8:49] उसके कंधे पर हाथ रखा और आवाज लगाई।
[8:53] अरे अर्जुन साहब आप अब यहाँ जा कर रहे इतनी रात को?
[9:00] महेंद्र की आवाज़ सुन अर्जुन ऐसे झटके से हिला।
[9:04] वहाँ तो वो बेहोश था और उसे अभी होश आया था।
[9:08] उसने डरते डरते आसपास देखा और वो परेशान हो गया।
[9:14] हे मैं यहाँ कैसे आया मुझे मुझे तू यहाँ ले कर आयो क्या?
[9:19] महेंद्र हँस पड़ा। मैं आपको यहाँ क्यों लाऊंगा?
[9:26] फला वैसे क्या आपको याद है आप यहाँ कैसे पहुंचे?
[9:30] वो भी इतनी रात को? पता नहीं मैं मैं अपने कमरे में
[9:35] था फिर अचानक मुझे अचानक मुझे। हुई मीठी सी खुशबू आने लगी।
[9:45] है ना पर फिर आपको कैसे पता? मुझे सिर्फ यही नहीं मुझे और भी
[9:53] बहुत कुछ पता है साहब, पर आप उस पर यकीन नहीं करेंगे, इसलिए आप
[9:58] जाइए। मैं भी घर जाता हूँ।
[10:01] रुकिए क्या चाह जानते हैं आप? यही कि जो खुशबू आपको यहाँ लेकर
[10:09] आई है वही खुशबू आपको आज रक्त वन में भी आई थी और तब से आपको ऐसा
[10:16] लग रहा है कि आपको कोई रक्त वन में बुला रहा है।
[10:19] है ना? आपको आँखों ये सब कैसे पता?
[10:25] मैंने कहा ना मुझे सब पता है ये बाल ऐसे ही नहीं सफेद हुए हैं, ये
[10:32] जंगल शपित है, हम भी यहाँ फंसे हुए हैं बस फर्क इतना है कि आप?
[10:38] अब पैसे वाले हैं, भाग सकते हैं पर हम गरीब हैं तो हम यहाँ से
[10:43] नहीं भाग सकते। निधि मानिए और आप यहाँ से तुरंत
[10:47] चले जाइए नहीं तो आप भी कुछ ही दिनों में गायब हो जाएंगे।
[10:53] ठीक उस विदेशी की तरह। तुम क्नॉइस।
[10:58] तुम मुझे धमकी दे रहे हो? धमकी नहीं, साहब, मैं बस आपको
[11:03] बचाने की कोशिश कर रहा हूँ। कौन गायब करेगा मुझसे?
[11:08] कौन कालपिंड? आपको जो खुशबू आ रही है ना, वो
[11:14] कालपिंड की शक्ति है। वो आपको अपनी तरफ खींच रहा है और
[11:19] अगर आप यहाँ रहे तो एक महीने के अंदर आपकी मौत पक्की हैं।
[11:26] जीतने भी लोग यहाँ से गायब हुए हैं।
[11:30] उन सबको ये कुछ बुआई हैं जो आपको आ रही हैं और वो सब मर चूके हैं।
[11:36] क्नॉइस कालपिंड का शिकार बन चूके हैं वो सब और अगर आपको उनकी मौत
[11:42] के सबूत चाहिए तो आपको उस खंडहर में आज भी बहुत से सबूत मिल
[11:48] जाएंगे। वहाँ कुछ गुप्त जगहों पर भी कई
[11:52] पुराने सूखे मांस के टुकड़े कई हड्डियों क्नॉइस।
[11:55] दीवारों पर चपकी हुई है। तो मैं आज ही जाकर चेक करता हूँ
[11:59] ना? बेवकूफ मत बनिए, मैंने कहा ना
[12:02] आपसे आपको जो खुशबू आ रही है वो काल पिंड की है।
[12:07] अगर आप आज वहाँ गए तो आप आज ही बनेंगे।
[12:13] तो क्या? तो क्या मैं कभी वहाँ नहीं जा
[12:15] सकता। जा सकते हैं पर आज नहीं आप आज
[12:20] यहाँ से चले जाइए और एक महीना शपित वंश से दूर रहिए, तब तक
[12:26] खुशबू का असर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
[12:29] तब आप लौटकर आइएगा और सबूत इकट्ठा करियेगा।
[12:34] पर तुम मेरी मदर क्यों कर रहे हो? पूरा कहो तो मुँह पे ताला लगाकर
[12:40] बैठा था। क्योंकि मुझे यहाँ से निकलना है।
[12:45] अगर आप मेरी थोड़ी भी मदद करेंगे तो मैं खुद आपको उन सारे जगहों पर
[12:51] ले जाकर सबूत दिखाऊंगा। क्नॉइस और फिर मैं भी यहाँ से भाग
[12:56] जाऊंगा। तो तुम्हें कितने पैसे चाहिए?
[13:00] बस 50,000 अगर आप राज़ी हुए तो आज से एक महीने बाद जीस रात गांव में
[13:07] भद्र पूर्णिमा का मेला लगने वाला है।
[13:10] उस रात मैं खुद आपको। रक्त वन ली जाकर सबूत दिखाऊंगा पर
[13:15] याद रखना अगर पैसे नहीं तो सबूत नहीं।
[13:20] ठीक है, एक महीने बाद, मैं फिर रात को तुम्हें ही मिलूंगा पैसों
[13:25] के साथ। तो फिर ठीक है, एक महीने बाद
[13:28] मिलते हैं, आप अकेले आना क्नॉइस। और हाँ ये लीजिए ये नीलगिरी का
[13:34] तेल रखिए। एक रुमाल पर लगाकर अपनी नाक पर
[13:38] बांध लीजिए, इससे आप आज रात सुरक्षित रहेंगे।
[13:43] चलता हूँ मैं क्नॉइस। एक महीना देखते देखते बीत गया ना
[13:58] किसी की मौत हुई ना पुलिस लौटकर आई।
[14:02] फिर आई भद्र पूर्णिमा की वो रात और पूरा गांव मेले की रौशनी और
[14:08] ढोल नगाड़ो और मंदिर की घंटियों की आवाज में डूब गया।
[14:13] सब लोग मेले की खुशियों में मग्न थे और इसी शोर के बीच एक आदमी
[14:20] चुपचाप गांव से बाहर निकला। महेंद्र मेले से निकलने से पहले
[14:31] उसने केशव को भी कह दिया था। की इशारा करने पर वो उसके पीछे
[14:36] पीछे दूरी बनाकर आए क्योंकि आज उसकी जिंदगी बदलने वाली थी और
[14:44] केशव ने बिना कोई सवाल किये वही किया।
[14:48] जैसे ही महेंद्र मेले से निकला, केशव भी छुपते छुपाते।
[14:53] उसके पीछे दूरी बनाकर चल दिया। थोड़ी दूर जंगल के अंदर जाकर केशव
[14:59] ने देखा कि कोई महेंद्र का इंतजार कर रहा था।
[15:04] रिपोर्टर अर्जुन और महेंद्र को रिपोर्टर अर्जुन से इस तरह झुपकर
[15:10] मिलता देख केशव। हैरान हो गया।
[15:14] फिर उसने खुद को शांत रखा और दुरी बनाकर उनका पीछा करता था।
[15:20] महेंद्र और अर्जुन बिना कुछ बोले रक्तवन की तरह बढ़ रहे थे, रात का
[15:26] अँधेरा घना था और महेंद्र में सिर्फ एक लालटेन जला रखी थी।
[15:32] वो सब आगे बढ़ते रहे और कुछ ही देर बाद वो सब रक्तवन के उन टूटे
[15:38] हुए दीवारों के सामने खड़े थे। केशव उन्हें दूर से ही देख रहा
[15:44] था। तो वो सबूत कहाँ है महेंद्र जी?
[15:50] अंदर। कुएं की दीवारों पर, ऊटी के पास
[15:55] और मेरे पैसे। पैसे बाद में आ, लेकिन पहले सपूत
[16:00] फिर पैसे। महेंद्र ने सिर हिलाकर हाँ कहा और
[16:05] फिर वो खंडहर के अंदर चला गया। अर्जुन बस एक सेकंड रुको।
[16:11] उसने एक बार फिर अपनी जाकेट के जेब पर हाथ रखा।
[16:15] वहाँ वो पुरानी फोटो थी उसके भाई की उसने उसे देखा फिर वो अंदर चला
[16:23] गया। खंडहर के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा
[16:31] था। चारों तरफ को अंधेरा।
[16:34] वहीं दुर्गंध और उस बड़े से कुएं के बीच काल बिन उसकी एक आग आज मनो
[16:42] अंधेरे में भी चमक रही थी। महेंद्र ने पास की दीवार पर एक
[16:49] मशाल जलाई दूर से ये सब देख। केशव परेशान हो चुका था।
[16:54] उसे बिल्कुल समझ नहीं आ रहा था कि अंदर जल क्या रहा था पर वो फिर भी
[17:01] खंडहर की दीवारों के पास आकर छुपकर खड़ा हो गया देखने के लिए
[17:06] कि आगे क्या होता है? अर्जुन और महेंद्र अब कुएं के पास
[17:12] पहुंचे और अर्जुन ने तुरंत एक टॉर्च चलाई।
[17:17] महेंद्र भी उसके पास आकर बैठा और झुक कर कुएं की अंदरूनी दीवारों
[17:22] की तरफ इशारा करने लगा। अर्जुन ने टॉर्च घुमाई तो उसकी
[17:27] आँखें चमक उठी। उस कूड़े की दीवारों पर पुराना
[17:32] खून, मांस के सूखे टुकड़े और छोटी छोटी इंसानी हटिया दिखने लगी।
[17:38] उससे उसने तुरंत अपना कैमरा ऑन किया और वो फटाफट फोटो खींचने
[17:44] लगा। अर्जुन को अपनी आँखों पर यकीन
[17:48] नहीं हो रहा था। उससे अपनी खुशी संभाली नहीं जा
[17:52] रही थी। आखिरकार इतने सालों से गायब हो
[17:56] रहे लोगों का राज़ वो खुलने जा रहा था।
[18:01] वो इन सब चीजों में इतना खो गया था कि उसे एहसास तक नहीं हुआ कि
[18:06] वो अब उस कुएं के ऊपर बने। पुल पर खड़ा था।
[18:13] वो जमीन पर बैठे फोटोज खींच रहा था कि अचानक उसे एक एहसास हुआ,
[18:20] जिससे उसके शरीर में एक डर की लहर दौड़ गई।
[18:25] उसे उसे गंध आ रही थी। वही मीठी सी गन जो उसने एक महीने
[18:34] पहले महसूस की थी वही गन जिससे कालपिंड अपने शिकार को अपने पास
[18:41] खींचता था। अर्जुन डर कर खड़ा हो गया पर उसने
[18:47] कालपिंड की तरफ देखा। उससे कुछ पांच छः हाथ की दूरी पर
[18:53] था और काल पिंड की वो आग बुआ आग अब जीवित थी।
[19:00] वो अर्जुन को ऊपर से नीचे तक खो रही थी।
[19:05] उसकी पुतली ऊपर नीचे हो रही थी। साथ ही कालफिन के शरीर से भी एक
[19:13] अजीब सी खुशाने जैसी आवाज़ आ रही थी और उसके पेट से निकली वो लम्बी
[19:18] जीब अब हवा में यहाँ वहाँ हिल रही थी, हाँ वो अपने शिकार को सूंघने
[19:26] की कोशिश कर। रहा।
[19:28] हो? और शीत एक अर्जुन डर से काटने
[19:32] लगा। उसके गली से एक चितका निकली और वो
[19:37] भागने के लिए पीछे मुड़ा और उसके पैर उसके पैर अब उसके काबू में
[19:42] नहीं थे। वो चाह कर भी उन्हें पीछे नहीं
[19:46] खींच पा रहा था। पर महेंद्र उससे कुछ दूर खड़ा अब
[19:52] मुस्कुरा रहा था। जैसे वो ये सब होने का इंतज़ार कर
[19:57] रहा हो। उसके चहरे पर एक पैशाजिक मुस्कान
[20:01] थी पर एक पल के लिए अर्जुन का चेहरा सख्त हो गया मानो।
[20:08] एक सेकंड के अंदर उसे सब कुछ समझ आगया हो सायद उसका भाई भी कहीं
[20:13] सालो पहले ऐसे ही यहाँ आया था और उसके साथ भी सायद यही सब हुआ था
[20:20] जो उसके साथ हो रहा है। अर्जुन तो होने लगा।
[20:26] वो समझ चुका था की महिंदर उसकी कोई मदद नहीं करने वाला।
[20:31] अर्जुन ज़ोर ज़ोर से गिडगिड़ाने लगा चिल्लाने लगा पर कोई फायदा
[20:36] नहीं हुआ। उसके पैर अब धीरे धीरे काल पे की
[20:40] तरफ बढ़ने लगे अपने आप। अपने पास की कालपिंड की वो लम्बी
[20:48] चीज़ अर्जुन के शरीर को छू रही थी पर कोई इसकी मदद करने आगे नहीं
[20:56] आया। वादीवार के पीछे छपाती शव कालपिंड
[21:01] का ये जीवत रूप देख। डर से काँपने लगा वो दौड़कर
[21:06] महेंद्र के पास। गए चाचा उसकी मदद करो वो वो रिटन
[21:11] मिल जाएगा चाचा वो मर जाएगा। पर महेंद्र का चेहरा बिलकुल
[21:18] बिलकुल गम्भीर। तुझे अगर अपनी जान प्यारी हैं,
[21:22] केशब। तो जो हो रहा है उसे होने दे,
[21:26] चुपचाप कहीं खड़ा रह। महेंद्र की आवाज़ इतनी कठोर थी,
[21:31] उसके शव वहीं चुप हो गया और रोते रोते वो डरावना दृश्य देखने लगा।
[21:38] अर्जुन अब भी रो रहा था। उसका अपने शरीर पर अब कोई
[21:42] नियंत्रण नहीं था। वो अब काल पिंड के बिल्कुल सामने
[21:46] था, तभी तब ही कुछ ऐसा हुआ जिससे सब दान से कांपने लगी।
[21:55] काल पिंड ने अपनी जीभ से अब अर्जुन के एक हाथ को पकड़ा।
[22:00] और एक झटके से उसे अपनी तरफ खींचा और इससे पहले की कोई समझ भी पाता
[22:06] की क्या हो रहा है। अर्जुन का एक पूरा हाथ काल पिंड
[22:11] के मुँह के अंदर चला गया और अगले ही पल वहाँ लगी।
[22:16] तो नोकी ने दाँतो से अर्जुन के हाथ का पूरा मांस खींचकर
[22:21] कालपिंडनी अपने मुँह में भर लिया। अर्जुन की विभात से चिपका पूरे
[22:28] रक्तवन में गूंज उठी। उसके हाथ की हड्डी अब कंधे तक साफ
[22:34] नज़र आ रही थी। क्नॉइस।
[22:35] उससे खून और मास के लोग नहीं लटक रहे थे।
[22:39] कॉल पेन नहीं रुका। उसने अब इसी तरह से अर्जुन के ये
[22:45] दूसरे हाथ का मास भी खा लिया। बदमाश चबाने की डरावनी आवाज़ पूरे
[22:52] खंडहर में गूंजने लगी। अर्जुन के दोनों हाथों की जगह आपस
[22:58] काल जैसी टूटी हड्डियों और खून था और कुछ नहीं कशव ये देखकर डर से
[23:06] कांप रहा था। उससे चक्कर आने लगा था पर महेंद्र
[23:10] ने उसे वहाँ से जाने नहीं दिया। भागने नहीं दिया क्योंकि अब।
[23:15] तक कालपिंड की भूख पूरी नहीं हुई थी।
[23:20] कालपिंड का मुँह अब धीरे धीरे खुलने लगा।
[23:24] फिर जो हुआ वो दृश्य केशव मरते दम तक कभी नहीं भेज सकता था।
[23:30] अर्जुन खुद ही। कालपिंड के मुँह के अंदर अपने
[23:35] शरीर को डालने लगा और जब उसका पूरा शरीर कालपिंड के मुँह के
[23:42] अंदर चला गया, कालपिंड ने अपना मुँह बंद करना शुरू किया और अगले
[23:49] ही पल अर्जुन की मारमातिक चीखे। हत्ती टूटने की डरावनी आवाज से और
[23:55] खून के फव्वारे चारो तरफ फैलने लगे।
[24:00] मेरा खंडहर लाल होने लगा पर फिर धीरे धीरे काल पिंड ने अपना पूरा
[24:06] मुँह बंद कर दिया। अर्जुन अब काल पिंड का पोंख बन
[24:11] चुका था। महेंद्र और केशव के शरीर पर भी
[24:16] खून की छींटें लगी थीं। महेंद्र की आँखों में अब आंसू थे,
[24:21] कांपते होठों से वह बार बार बस कहने लगा।
[24:26] कालपिंड प्रसन्न हो। काल पिंड न हो।
[24:35] केशा जमीन पर गिर पड़ा और बस रोता रहा पर महेंद्र हाथ जोड़कर वहीं
[24:42] खड़ा रहा। काल पिंड का ये प्ररावना रूप देख
[24:47] सब अपनी जगह पर वहीं जम चूके थे। थोड़ी देर बाद कालपिंड ने फिर से
[24:54] अपना मुँह खोला है, पर इस बार अर्जुन के शरीर के जो भी हिस्से
[25:00] उसने नहीं खाये थे, उसे बाहर खेलते महेंद्र ने आखरी बार आगे
[25:06] बढ़ा, उसने झुक कर कालपिंड को प्रणाम किया।
[25:10] फिर वहाँ से केश को लेकर बाहर चला गया।
[25:20] केशव अब पूरी तरह से हिल चुका था, वो अब भी काँप रहा था।
[25:27] उसे अब भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।
[25:31] उसके पूरे शरीर पर अर्जुन का खून लगातार उसे खुद को देख हो रही थी।
[25:37] क्यों? क्यों चाचा क्यों आपने आपने ऐसा
[25:42] क्यों किया? आपने उसे उसे मरने क्यों दिया?
[25:47] क्योंकि तू और मैं। पूर्वाजाति की आखिरी वंशज है
[25:52] केशव। क्या पर आपने तो कहा था कि क्यों
[25:58] जाति खत्म हो गई? हाँ, खत्म हो गई बल्स हमारा
[26:03] परिवार बचा है केशव और जब तक हम जिंदा हैं क्नॉइस।
[26:08] कालपिंड के साथ किये समझौते के मुताबिक हमे हर बार उसके लिए
[26:13] शिकार ढूंढ कर लाना होगा वरना वो हमारे अपने परिवार को और हमारे
[26:19] गांव वालों को मार देगा की शब कालपिंड उन्हें खा जाएगा।
[26:25] तो तो क्या इतने सालों से? इतने सालों से लोगों को यहाँ आप
[26:30] लिख कर आते हैं। हाँ जी पाप मैं ही कर रहा हूँ।
[26:36] जब से हमारे गांव के उस परिवार की मौत हुई है केशव उसकी बात से ये
[26:41] जिम्मेदारी मैं ही निभा रहा हूँ। वो मरे थे क्योंकि तेरे पिता ने।
[26:46] ये काम करने से मना किया था काल पिंड को भूखा रखा था उसने और उसकी
[26:52] सजा उन मासूम गांव वालों को मिली। ऐसी गलती अब हम दोबारा नहीं कर
[26:58] सकते। इसीलिए मैंने इस रिपोर्टर को
[27:01] बुलाया था। बेटा कहा था मैंने कि कुछ पैसों
[27:04] के बदले। मैं उसे सारी सबूत दूंगा।
[27:07] ये बेवकूफ धीरे जाल में फंस गया। उसके पैसे, उसका कैमरा, वो सब
[27:14] मुझे नहीं चाहिए। वो सब तो कब के कुएं में गिर चुका
[27:18] है? तो आपने सिर सिर्फ उसे बलि देने
[27:22] के लिए बुलाया था? हाँ, क्नॉइस।
[27:24] बट तुझे भी आगे जाकर ये जिम्मेदारी संभालनी होंगी।
[27:28] केशब तू बोरपा जाति की अगली पीढ़ी है तेरी ऊँगली पर जो अंगूठी है,
[27:34] वो बोरपा जाति की निशानी है। हमारे उस समझौते की निशानी जब तक
[27:42] तू से पहने रहेगा क्नॉइस तुझे कोई मीठी खुशबू नहीं आएगी।
[27:47] काल पिंड तुझे कोई क्षति नहीं पहुंचाएगा, क्योंकि काल पिंड
[27:52] जानता है जो ये अंगूठी पहनता है वहीं उसके लिए शिकार लाकर देता
[27:58] है। मैं मैं नहीं करूँगा, चाचा
[28:03] क्नॉइस। मैं मैं मैं ये सब नहीं कर सकता
[28:08] चाचा, मैं मैं नहीं करूँगा, मैं मैं यहाँ से भाग जाऊंगा, मैं यहाँ
[28:14] से भाग जाऊंगा, हाँ हाँ, मैं यहाँ से भाग जाऊंगा, चाचा।
[28:20] भगा तो तेरा पिता भी था केशव। तुझे क्या लगता है तेरे पिता ऐसे
[28:25] ही गायब हो गए? उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया
[28:30] और वो कालपिंड का शिकार बने एक बात याद रखना तू ना यहाँ से भाग
[28:38] सकता है ना? ये काम करने से मना कर सकता है
[28:41] क्नॉइस। क्योंकि अगर तुने ये नहीं किया तो
[28:44] तू भी मरेगा केशव जैसे तेरे पिता मरे थे अब खुद को शाम कर बेटा
[28:52] क्योंकि बोर पालकों के श्राप का बोझ अब तुझे भी संभालना होगा।
[28:58] ठीक वैसे ही जैसे मैं। इतने सालों से संभाल रहा हूँ बस
[29:04] ये याद रखना कि हम ये पाप सिर्फ इसलिए करते हैं केशव ताकि हमारा
[29:10] परिवार और बाकी गांव के लोग सुरक्षित रहें और हाँ ये राज़
[29:17] सिर्फ हमारे बीच ही रहने दे ना तू।
[29:19] इसके बारे में कोई नहीं जान सकता। ना मुखिया देवराज, ना गुप्त दल के
[29:25] बाकी लोग। अगर वो जान गए कि तू और मैं बूर
[29:29] पर है तो वो हमें खुद ही मार देंगे।
[29:34] केशव जमीन पर गिरकर रोने लगा। दोनों कुछ देर तक वहीं बैठे रहे।
[29:40] फिर दोनों चुपचाप वापस सांगरी गांव की तरफ चल पड़े।
[29:45] उस गांव की तरफ चूहा उनका घर था पर जिसके लोगों को ये नहीं पता था
[29:51] कि ये परिवार पुश्रापित बोरपा दल का हिस्सा है जिसकी गलतियों को।
[29:57] वो गांव वाले और गुप्त दल इतने सालों से छुपाते आ रहे हैं और इसी
[30:09] के साथ ये एपिसोड यहीं खत्म होता है।
[30:12] आई होप आपको ये कहानी अच्छी लगी हो?
[30:15] अगर अच्छी लगी है तो मुझे इंस्टाग्राम पर मैसेज करके जरूर
[30:19] बताएगा पर एक स्पेशल अनाउंसमेंट है जो आप सब के साथ मैं शेयर करना
[30:24] चाहती हूँ इस हफ्ते इस पोपकास्ट आपके लिए ला रहा है एक बहुत ही
[30:30] स्पेशल आप बीती एपिसोड जहाँ। कुछ ऐसी एंटिटीज के बारे में
[30:36] घटनाएं सुनेंगे जो स्पोकस पर पहले कभी फीचर नहीं हुई तब तक टेक केयर
[30:42] गाइस। मैं हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं
[30:57] स्पूकास्ट।

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