# Ep18 - Highway ka Chalawa | SpookCast | ORIGINAL Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya | Chalava

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 13 Sep 2024, 15 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/91669050/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2024-8-13%2F386301518-44100-2-c5ebec56221c4.m4a

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## Transcript

[0:10] इमेजिन कीजिए कि आप अकेले किसी अनजान रास्ते से जा रहे हैं।
[0:16] कुछ देर बाद आप नोटिस करते हैं कि रास्ता खत्म होने का नॉमिनी ले
[0:20] रहा बस आप बार बार एक ही जगह पर घूम रहे हैं।
[0:25] अगर आपको ये लग रहा है कि आप गुम हो गए हैं तो आप गलत हैं।
[0:30] आप दरअसल एक छलावे का सामना कर रहे हैं।
[0:34] छलावा एक ऐसा सुपर नेचुरल एंटिटी है जो यात्रियों का रास्ता भटकाने
[0:39] का काम करता है। छलावा अलग अलग फॉर्म्स में नजर आ
[0:42] सकता है। कभी इंसान या कभी जानवर की तरह और
[0:46] अपने विक्टिम्स को कॅफ्यूज करने के लिए इल्लूशन्स या भ्रम क्रियेट
[0:50] करता है। हे गाइस वेलकम बेक टु आवर चैनल।
[0:54] आज हम आपके लिए एक ऐसी ही डरावनी कहानी लेकर आए हैं।
[0:58] आज का एपिसोड शुरू करने से पहले मैं और मंजिला आप सबसे थैंक यू
[1:02] कहना चाहेंगे। आप सब ने हमारे छोटे से पॉडकास्ट
[1:06] को बहुत प्यार दिया है। हम दोनों बस आपसे यही रिक्वेस्ट
[1:09] करेंगे कि अगर आपको हमारा कॅन्टेंट पसंद आता है तो हमें
[1:13] सपोर्ट करने के लिए आप हमें फॉलो करें।
[1:16] और रेटिंग्स देना मत भूलिए, अपने फ्रेन्डस और फैम्ली के साथ ज्यादा
[1:20] से ज्यादा हमारी ओरिजिनल स्टोरीज़ शेयर करें।
[1:23] थैंक यू अगेन फॉर सपोर्टिंग आवर स्मॉल पॉडकास्ट चलिए आज की कहानी
[1:27] शुरू करते हैं। सुनते रहिये हर शुक्रवार रात 9:00
[1:32] बजे स्पोकन, अवी और मंजिला के साथ।
[1:42] अमावस्या की रात थी और आसमान में एक भी तारा नजर नहीं आ रहा था।
[1:47] रात के 11:00 बज चूके थे। प्रदीप अपनी कार अकेले वेस्टर्न
[1:51] घाट के घुमावदार रास्ते पर चलाते हुए थक चुका था।
[1:55] इस अंधेरी रात में सिर्फ उसके कार की हेडलाइट की रौशनी ही उसका साथ
[1:59] दे रही थी। यार?
[2:01] कितनी अजीब जगह है ये? रेडियो में गाने की वॉल्यूम
[2:05] बढ़ाते हुए प्रदीप ने खुद से कहा। अचानक उसकी नजर रोड के किनारे एक
[2:11] बूढ़े आदमी पर पड़ी। वो आदमी रास्ते पर ज़ोर ज़ोर से
[2:16] हाथ हिलाकर गाड़ी रोकने का इशारा कर रहा था।
[2:20] प्रदीप ने ब्रेक लगाया और कार को धीरे से साइड में रोक दिया।
[2:24] उसकी हेडलाइन्स की रौशनी उस आदमी पर पड़ी और जो प्रदीप ने देखा वो
[2:29] देखकर उसकी रोक आप गई। रास्ते पर एक बूढ़ा आदमी था जिसके
[2:36] पूरे शरीर पर जलने के निशान थे। उसके कपड़े फट चूके थे और वो बहुत
[2:42] बुरी तरह से इंजर्ड लग रहा था। उसके शरीर से हल्का हल्का धुआं सा
[2:47] कुछ उठ रहा था और शरीर के कई जगह पर स्किन चल कर नीचे के गुलाबी
[2:52] परत दिख रही थी। ये दृश्य जितना भयावह था, उतना ही
[2:56] खौफनाक भी। प्रदीप ने अपना विंडो थोड़ा सा
[2:59] नीचे किया और पूछा। क्या हो चाचा अब ठीक तो होना?
[3:04] बेटा, मेरी मदद करो बूढ़े ने एक दर्द भरी आवाज में कहा।
[3:10] मैं पास के गाँव में रहता हूँ आज रात मेरी झोपड़ी में आग लग गई,
[3:16] मैं किसी तरह बच गया, लेकिन देखो कितनी बुरी तरह जल गया हूँ क्या
[3:23] तुम क्या तुम मुझे पास के अस्पताल ले जा सकते हो?
[3:28] प्रदीप ने उसे ध्यान से देखा उस आदमी का शरीर काफी जला हुआ था।
[3:32] जगह जगह से उसकी स्किन पिघल चुकी थी और लाल हो चुकी थी।
[3:36] प्रदीप हेजिटेट कर रहा था लेकिन फिर उसने सोचा कि वो इनकी हेल्प
[3:41] नहीं करेगा तो कौन करेगा? रास्ते पर गाड़ियां वैसे भी काफी
[3:45] कम थी इस वक्त। ठीक है चाचा अब पीछे बैठ जाइए,
[3:49] आइए। प्रदीप ने कहा रेयर सीट की तरफ
[3:53] देखते हुए जैसे ही वो बूढ़ा आदमी पीछे बैठा, पूरे गाड़ी में चले
[3:59] हुए स्किन और बालों की कंध भर गई। प्रदीप को चली हुई चमड़ी की तेज़
[4:05] गन से उल्टी सी आने लगी। उसका दिल क्या की?
[4:08] वो अभी गाड़ी से उतर कर वहीं उल्टी कर दे लेकिन उसने अपने आप
[4:12] को कंट्रोल किया। सारे विंडोज नीचे किए और कार
[4:15] स्टार्ट किए। कुछ देर तक दोनों चुपचाप बैठे
[4:19] रहे। प्रदीप बार बार सामने वाले मिरर
[4:23] में उस बूढ़े की तरफ देखने की कोशिश कर रहा था।
[4:27] उसे ये सोच के अजीब लग रहा था की इतनी बुरी तरह जलने के बाद भी वो
[4:32] बूढ़ा आदमी बिलकुल शांत कैसे बैठा हुआ था, ना कोई दर्द, ना कोई
[4:37] तकलीफ सामने वाले रेयर क्यूँ मिरर पे प्रदीप ने देखा की उस बूढ़े
[4:41] आदमी के होठों पर एक अजीब से मुस्कान थे।
[4:47] चाचा अब अब ठीक तो होना? प्रदीप ने हिम्मत करके पूछा।
[4:52] हाँ, बेटा, मैं बिलकुल। ठीक हूँ।
[4:55] मुझे बस जल्दी से अस्पताल पहुंचा दो।
[5:00] अचानक उसकी नजर रोड के राइट साइड पर पड़ी।
[5:03] उसने उस सुनसान रास्ते की दूसरी तरफ दूर एक आदमी को हाथ हिलाते
[5:07] हुए देगा। प्रदीप ने सोचा फिर कोई लिफ्ट
[5:10] मांग रहा है और इस बार वो गाड़ी नहीं रुकेगा।
[5:14] लेकिन जैसे जैसे गाड़ी आगे बढ़ी प्रदीप की आँखें फटी की फटी रह
[5:19] गई। उसका गला सूखने लगा।
[5:22] वहाँ रास्ते के दूसरी ओर एक और आदमी खड़ा था, लेकिन वो कोई और
[5:28] नहीं बल्कि वही बूढ़ा था जिसे प्रदीप ने अभी कुछ देर पहले ही
[5:32] लिफ्ट दिया था। उसने उस रास्ते पर खड़े आदमी को
[5:37] देखा, वही जले हुए कपड़े, वही बर्न इंजरीज, बिल्कुल वही आदमी
[5:41] जिसे प्रदीप ने अभी कुछ देर पहले ही लिफ्ट दी थी।
[5:45] प्रदीप अब डर से कांप रहा था। उसने उस बूढ़े आदमी को गाड़ी में
[5:49] बैठाने के बाद एक बार भी गाड़ी नहीं रुकी थी।
[5:53] उसने अब डरते डरते गाड़ी के रेयर क्यूँ मिरर में देखा और ये क्या
[5:58] पीछे की सीट खाली थी, वह कोई नहीं था।
[6:01] ओह शिट ओह शर्ट। प्रदीप चिल्लाया, ब्रेक पे ज़ोर
[6:05] से पैर रखते हुए कार रुक गई। छे मुड़ कर देखा, सीट्स सच में
[6:12] खाली थी। दरवाज़े पर लॉक था और विंडोज भी
[6:16] बंद उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने अब डर कर सामने देखा और उसके
[6:22] शरीर में बिजली दौड़ गई। वो बूढ़ा अब उसके कार के बिलकुल
[6:26] सामने खड़ा था। उसकी आँखों में एक डरावनी सी चमक
[6:30] थी। क्या हुआ बेटा मुझे अस्पताल नहीं
[6:34] ले जाओगे। बूढ़े ने एक अजीब आवाज में कहा,
[6:42] प्रदीप 10 से अधमरासा हो गया था। उसके हाथ पैर में जैसे कोई ताकत
[6:47] ही नहीं थी, फिर भी हिम्मत जुटा कर उसने किसी तरह तुरंत गैर चेंज
[6:52] किया और एक्स्लेटर पर ज़ोर से पैर रखा था।
[6:55] तेजी से आगे बढ़ी लेकिन उस बूढ़े की अजीब सी आवाज़ अभी भी उसके
[7:00] कानों में गूंज रही थी। मुझे अस्पताल लेकर नहीं चलोगे,
[7:04] बेटा, मुझे अस्पताल ले चलो। ये आवाज अब बढ़ती ही जा रही थी
[7:16] मानो वो आदमी उसकी गाड़ी के बगल में बैठा हो।
[7:20] प्रदीप का सर चकरा रहा था उसके हाथ पसीने से भीख चूके थे और वो
[7:25] बस वहाँ से जितनी जल्दी हो सके, भागना चाहता था दूर बहुत दूर।
[7:31] अनाउंसमेंट टाइम गाइस एपिसोड 20 हमारे यानी स्पोक कास्ट के सीज़न
[7:36] 1 का फिनाले होने जा रहा है। बट डोन्ट वोर्री।
[7:39] हम अगले ही हफ्ते सीज़न 2 स्टार्ट करने वाले है जहाँ हर हफ्ते आप
[7:44] सुन सकते हैं एक नहीं दो एपिसोड एपिसोड।
[7:48] ओरिजिनल स्टोरी हर वेंस डे और एक सच्ची घटना हर फ्राइडे वीडियो
[7:52] स्टोर दट। आप सीज़न 2 को भी उतना ही प्यार
[7:55] देंगे जिन्दा आपने सीज़न 1 को दिया है।
[7:57] सुनते रहिये स्मोक कास्ट अवीक और मंजिला के साथ।
[8:02] नाउ बेक टु देर। प्रदीप ने गाडी बहुत तेज़ी से
[8:07] दौड़ाना शुरू किया। गाडी अब धीरे धीरे लहराने से लगी
[8:11] और प्रदीप नहीं रुका। थोड़ी दूर पहुँच कर जब वो आवाज़
[8:15] आनी बंद हो गयी तब प्रदीप ने गाडी शुरू की और रास्ते के साइड में
[8:19] रोके उसने बॉटल से पानी पिया, कुछ देर आग बंद कर कर बैठा रहा ये सोच
[8:25] कर की ये सब उसके साथ क्या हो रहा था कभी अचानक?
[8:30] उसे अपने कंधे पर एक एहसास हुआ। उसने अपनी आंखें खोली और अपने
[8:36] कंधे की तरफ देखा। और उसकी आवाज गले में ही अटक गई।
[8:43] उसके। कंधे पर एक जला हुआ हाथ था, एक
[8:46] ताला सा हाथ जिसकी त्वचा बुरी तरह जल चुकी थी।
[8:49] प्रदीप ने छठ से पीछे देखा और उसकी कार के बेक साइड में वहीं
[8:53] जला हुआ बूरा आदमी बैठा हुआ था। खा हुआ बीठा तो मुझे अस्पताल नहीं
[9:01] ले जाओगे। ये सब देखकर प्रदीप के गले से
[9:08] भयंकर चीख निकल गई। वो किसी तरह गाड़ी से बाहर लपका
[9:12] और रास्ते पर गिर गया। उसे उस जले हुए मांग सिकन अभी भी
[9:16] आ रही थी। उस बुरे आदमी की बिवत से हँसी उसे
[9:19] अभी भी सुनाई दे रही थी। वो किसी तरह खिसकता हुआ खड़ा हुआ।
[9:24] पर ये क्या? उसकी गाड़ी में तो कोई नहीं था।
[9:28] प्रदीप ने अपना माथा पकड़ लिया और डर से उसके आंसू बहने लगे।
[9:33] उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे।
[9:36] वो गाड़ी के बाहर खड़ा सोच ही रहा था की अचानक उसे अपने पीछे से एक
[9:41] आवाज सुनाई दी। मुझे अस्पताल लेकर नहीं चलोगे,
[9:45] बेटा, मुझे अस्पताल ले चलो। प्रदीप के पैर वहीं जम गए।
[9:58] उसने डर डर के पीछे देखा। उसकी कुछ 10 फिट की दूरी पर वही
[10:02] जला हुआ बूढ़ा आदमी खड़ा था, वो गाड़ी की तरफ आगा एक्सेलेटर पर
[10:07] पैर रखा और किसी तरह उसने वहाँ से अपनी कार भगाई।
[10:11] उस बूढ़े आदमी की हँसी उसके कानों में मानो गूंज रही थी।
[10:16] पर वो इस बार नहीं रुका। उसने भगवान का नाम लेना शुरू किया
[10:21] और गाड़ी आगे भगाता गया। पूरे रास्ते थोड़ी देर बाद बाद
[10:25] उसे वो बूढ़ा आदमी रास्ते पर खड़ा दिखाई दे रहा था।
[10:29] हाथ हिलाते हुए गाड़ी रोकते और मदद मांगते।
[10:34] उस आदमी की डरावनी आवाज उसके कानों में गूंज रही थी।
[10:38] वो पसीने से लथपथ हो चुका था और उसे आप ऐसा लग रहा था कि कहीं उसी
[10:42] का अक्सीडेंट ना हो जाए लेकिन वो नहीं रुका।
[10:46] कुछ किलोमीटर बाद प्रदीप ने एक पेट्रोल पंप देखा जहाँ कुछ लोग थे
[10:50] उसने तुरंत कार वही रोकी और बाहर निकल गया।
[10:54] उसके पैर अभी भी कांप रहे थे और उसका चेहरा एकदम सफेद पड़ चुका
[10:59] था। पास में ही एक छोटा सा चाय का
[11:02] स्टॉल था। प्रदीप वहाँ पहुंचा और एक सिगरेट
[11:05] और चाय मांगी। वो एक के बाद एक तीन सिगरेट वहीं
[11:09] पी गया। चाय वाले ने उसकी ये हालत देखकर
[11:12] पूछा क्या हुआ भाई? इतना डरे हुए क्यों हो?
[11:15] प्रदीप पहले हिचकिचाया पर उसने अपनी पूरी कहानी चायवाले को बताई।
[11:20] उसकी ये घटना सुन चाय वाले का चेहरा भी सफेद पड़ चुका था।
[11:24] चायवाला ने धीमी आवाज में कहा। भाई, तुम बहुत लकी हो कि बच?
[11:29] गए वो बूढ़ा। उसकी कहानी बहुत पुरानी और
[11:34] दर्दनाक है। प्रदीप ने कॅन्फ्यूज्ड होकर चाय
[11:37] वाले की तरफ देखा। चायवाला कंटिन्यू करता है।
[11:42] कुछ साल पहले एक बूढ़ा आदमी सच में इसी हैवे के पास वाले गांव
[11:46] में रहता था। एक रात उसकी झोपड़ी में आग लग गई।
[11:50] वो बुरी तरह जल गया, लेकिन किसी तरह जिंदा।
[11:53] बच गया उसकी। झोपड़ी गांव से थोड़ी दूर थी
[11:58] इसलिए किसी को पता नहीं चला। वो किसी तरह इस हैवे तक पहुंचा और
[12:02] मदद मांगने लगा लेकिन कोई नहीं रुका।
[12:06] सारी रात वो यहाँ खड़ा रहा। मदद के लिए हाथ हिलाता रहा लेकिन
[12:12] कोई नहीं। रुका सुबह तक।
[12:15] वो मर चुका था। प्रदीप चुपचाप खड़ा ये सब सुनता
[12:20] रहा। तब से बहुत से ट्रक और कार
[12:24] ड्राइवर्स ने उसे देखा है और बहुत लोग इस छलावे का शिकार बने हैं।
[12:29] वो उन्हीं से मदद मांगता है जिन्हें वो जानता है कि उनकी मदद
[12:33] करेगा और फिर। चाय वाले ने लाइन पूरी खत्म नहीं
[12:38] की। दोनों के बीच एक भयानक सन्नाटा
[12:41] सजा गया। प्रदीप आप समझ चुका था कि उसने
[12:45] क्या देखा था? उसके दिमाग में उस बूढ़े आदमी की
[12:49] वो अजीब से मुस्कुराहट, वो चली हुई चमड़ी और वो डरावनी आवाज बार
[12:54] बार घूम रही थी। तो मुझे अस्पताल ने लेके जाओगे।
[13:05] प्रदीप के जश्न में एक बार फिर कंपकपी दौड़ गई।
[13:08] उसके सामने अब तक जो कुछ हुआ था वो एक हॉरर मूवी से कम नहीं था
[13:12] लेकिन ये मूवी नहीं हकीकत थी। एक ऐसी हकीकत जिसे वो कभी नहीं
[13:17] भूल पाएगा। उस रात के बाद प्रदीप ने कभी उस
[13:21] रास्ते से अकेले सफर नहीं किया और उस रात के बारे में सोचने पर
[13:26] प्रति दर से सहन जाता क्योंकि वो जानता था।
[13:30] कहीं उस अंधेरी सड़क पर वो बूढ़ा अब भी खड़ा है।
[13:34] मदद का इंतजार करते हुए और शायद अगली बार वो किसी और को अपने साथ
[13:40] ली जाने की कोशिश करेगा। आज के एपिसोड यहीं खत्म होता है।
[13:47] दोस्तों हमें जरूर बताएं। आपको ये कहानी कैसी लगी?
[13:52] क्या आप ऐसी सड़क पर रुकना चाहोगे?
[13:55] कॉमेंट्स में पता है? अपने फ्रेन्डस और फैम्ली के साथ
[13:58] ज्यादा से ज्यादा हमारी ओरिजिनल स्टोरीज़ शेयर करें।
[14:01] इससे हमें बहुत। एंकरेजमेंट मिलती है।
[14:04] आप कॉमेंट्स या वोट करके भी हमें सपोर्ट कर सकते हैं और अगर आप
[14:08] अपनी कोई घटना हमसे शेयर करना चाहते हैं।
[14:10] तो आप हमें इंस्टाग्राम में डी एम कर सकते हैं ऐट स्पोक टी वि
[14:15] इंडिया। और अगले हफ्ते हम एक और खौफनाक और
[14:19] भयानक स्टोरी के साथ वापस आएँगे। सुनते रहिए हर शुक्रवार रात।
[14:25] 9:00 बजे स्पोक कास्ट, अवी और मंजिला के साथ क्नॉइस।

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