# The Haunted Staircase | Real COVID Horror Story

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 1 Feb 2026, 27 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/114843630/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2026-1-1%2F417220644-44100-2-b805fab1de385.mp3

Ep 70 - AAPBEETI 19 by SPOOKCAST - 2 REAL HORROR STORIES | Real Stories | Sachi Ghatana | Story: In this EPISODE, enjoy these 2 creepy horror incidents shared by our lovely Listeners! Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana |Chakwa |Chakhwa |Chakva | Chalava | Brahmarakshas | Munjya |Brahadaitya |Ambulance Horror | Driver Story | Narrated by : Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com Sound Effect from Pixabay and Freesound.org Share your incidents with us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:11] मैं हूँ मंजला और आप सुन रहे हैं स्पूकास्ट।
[0:26] दोस्तों नमस्कार, मैं हूँ मंजुला एंड वेलकम बेक टु ए न्यू एपिसोड
[0:30] ऑफ़ आपबीती बाई स्पूकास्ट जहाँ हम कुछ ऐसी सची घटनाएं शेयर करते हैं
[0:35] जो स्पूकास्ट लिस्टनर्स ने हमारे साथ शेयर की हैं।
[0:39] आज के आपबीती के एपिसोड में हम दो यूनिक इन्सिडेंट्स शेयर करने वाले
[0:43] हैं जो आप लोगों ने हमारे साथ शेयर की हैं।
[0:46] पहली घटना एक ट्रैन की है जहाँ रात को किसी ने कुछ ऐसा देखा जो
[0:51] किसी को भी डरा देगा और आज की दूसरी घटना सिकंदराबाद के एक
[0:57] डॉक्टर की घटना है। जिन्होंने अपने एक इमरजेंसी कॉल
[1:01] पर कुछ ऐसा एक्सपीरियंस किया। दट विल शुरली कीप यू आउट सो पूठ
[1:07] ऑन युअर हेडफोन्स एंड गेट रेडी। क्योंकि आज के आर पीटी का एपिसोड
[1:13] शुरू होने जा रहा है। पहली घटना शुरू करने से पहले बस
[1:16] एक छोटा सा डिस्क्लेमर। आपबीती सीरीज में हम अपने लिसनर्स
[1:21] के द्वारा भेजे गए डरावने अनुभव आप तक लेकर आते हैं।
[1:25] इन घटनाओं पर विश्वास करना है या नहीं, ये पूरी तरह से ये आप पर
[1:30] निर्भर करता है। हमारा मकसद सिर्फ उनका अनुभव आप
[1:34] तक पहुंचाना है। ये पोडकास्ट स्वीसाइड, क्राइम्स,
[1:38] सुपरस्टीशन, ब्लाइंड बिलीव्स, तंत्र मंत्र, काला जादू, स्मोकिंग
[1:42] या ड्रिंकिंग को बिल्कुल प्रोमोट नहीं करता।
[1:45] थैंक यू ये पहली घटना में भेजी है बादाउ उत्तर प्रदेश से प्रफुल
[1:50] ठाकुर ने। ये घटना उनके अपने साथ घटी थी जब।
[1:54] एक बार वो ट्रैन से रात को ट्रैवेल कर रहे थे।
[1:57] अकेले उन्होंने जो देखा दट विल शोली क्रिप यू आउट?
[2:02] चलिए इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की
[2:07] कोशिश करूँगी। मेरा नाम प्रफुल है और मैं बताऊँ
[2:15] उत्तर प्रदेश से हूँ। आज मैं आप सबके साथ एक ऐसा
[2:19] इंसिडेंट शेयर करना चाहता हूँ जो ट्रैन के सफर के दौरान मेरे साथ
[2:23] हुआ था और जिसके बाद से मैं रात में ट्रैन से ट्रैवेल करना
[2:27] ऑलमोस्ट बंद कर चुका हूँ। ये बात तब की हैं जब मैं अपनी
[2:32] लॉन्ग डिस्टेंस गर्लफ्रेंड से मिलने जा रहा था।
[2:35] वो आज मेरी वाइफ हैं। ये इंसिडेंट 20 सेकंड डिसेंबर
[2:39] 2024 के आसपास का हैं। मैं दिल्ली से बैंगलोर जाने वाली
[2:44] एक डायरेक्ट ट्रैन में बैठा था और सफर लगभग 36 हज लंबा था।
[2:50] शुरू में सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल था, लोग अपनी जगह पर थे।
[2:54] कुछ लोग अपने फोन्स में बीज़ी थे, कुछ पढ़ रहे थे और ट्रेन अपनी
[2:58] स्पीड से चल रही थी। धीरे धीरे रात गहरी होने लगी।
[3:04] लाइन्स डिम्म होने लगे और लोग सोने की तैयारी में लग गए।
[3:08] लगभग 11:45 बजे मैं वाशरूम जाने के लिए उठा।
[3:12] मैंने अपना बेक साइड में रखा और वाशरूम की तरफ चला गया।
[3:16] उस वक्त ट्रेन एक सुनसान जंगल टाइप एरिया में रुकी हुई थी।
[3:21] शायद कोई छोटा स्टेशन था या आज सिग्नल का वेइट् कर रहे थे।
[3:25] हम लोग पता नहीं बाहर काफी अंधेरा था।
[3:28] बस जंगल की परछाईं दिख रही थी। वाशरूम यूज़ करके जब मैं बाहर
[3:32] निकला तो मैंने देखा की वाशरूम के बिलकुल बाहर एक बूढ़े आदमी खड़े
[3:37] थे। उनके सर पर राजस्थानी पगड़ी थी जो
[3:41] थोड़ी पुरानी और धूप में फेल्ड हो चुकी थी।
[3:44] हाथ में एक डंडा था। और वो लगातार खास रहे थे।
[3:49] उनकी खासी बिलकुल नॉर्मल नहीं थी। मैंने सोचा शायद कोई बीमार है।
[3:54] इस लिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
[3:56] बस उन्हें इग्नोर किया और वापस अपनी सीट पर जाकर बैठ गया।
[4:00] थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी और मैं सो गई।
[4:04] ट्रेन की आवाज और उसके हिलने का रिटर्न मुझे एक एक तरह से सुकून
[4:08] ले रहा था। लगभग 2025 मिनट बाद मेरी आंख एक
[4:12] झटके के साथ खुल गई, जब ट्रेन ने अचानक से ब्रेक लगाया।
[4:18] मेरे सामने वाली सीट पर एक आंटी बैठी थी।
[4:21] उनकी भी आंख खुली लेकिन उन्होंने मुझे देखा तक नहीं और वो फिर सो
[4:25] गई। मुझे थोड़ी प्यास लगी थी तो मैंने
[4:28] अपने बैग से पानी निकाला और पीने लगा।
[4:31] साथ ही अब भूख भी लग रही थी क्योंकि शाम से मैंने कुछ नहीं
[4:35] खाया था। मैंने कुछ स्टेशन्स पहले आधा किलो
[4:39] नॉन वेज बिरयानी पैक करवाया था। जो अब तक मेरे बैग में ही पड़ा
[4:42] था। मैंने बिरयानी का डब्बा खोला और
[4:46] फिर सोचा पहले जाकर हाथ धो लेता हूँ, सो उस बिरयानी को मैंने अपने
[4:51] सिर पर खुला ही छोड़ दिया और वाशरूम जाकर हाथ धोने लगा।
[4:55] बस एक या 2 मिनट ही लगे होंगे। मुझे मैं जल्दी जल्दी हाथ धोकर
[5:00] वापस अपनी सीट की तरफ जाने लगा, लेकिन जब मैं वापस अपनी सीट पर आ
[5:06] रहा था तो अचानक मुझे ठंडी लगने लगी।
[5:10] ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अचानक से एसी का टेम्परेचर एकदम बढ़ा
[5:14] दिया हो। जवाब मेरे सिर में भी दर्द होना
[5:18] शुरू हो गया। हल्का सा लेकिन बिल्कुल अचानक मैं
[5:23] अपनी सीट पर पहुंचा और जैसे ही मैं बैठने वाला था, मेरी नजर अपनी
[5:28] सीट पर गई और मैं? हैर ऑन हो गया वहाँ अब कोई
[5:33] बिरयानी नहीं थी। मैं अब कैफ्यूज हो गया एक सेकंड
[5:37] के लिए तो मैं सोचने लगा कि मैंने बैग से बिरयानी निकाला था या
[5:41] नहीं, सो मैंने बैग से किया पर उसमें कुछ नहीं था।
[5:46] मैं अब परेशान हो गया क्योंकि मुझे अच्छे से याद था।
[5:50] कि बस 2 मिनट पहले मैं यहाँ बिरियानी को खुला छोड़ कर गया था,
[5:55] मैं सोच ही रहा था कि क्या करूँ कि तभी मुझे एक अजीब सी आवाज
[6:01] सुनाई दे? ऐसा लग रहा था जैसे कोई थोड़ी दूर
[6:07] खड़ा हो कर कुछ आ रहा था। चारों तरफ सन्नाटा था, सब लोग सोए
[6:13] हुए थे और वो आवाज़ बिलकुल साफ सुनाई दे रही थी।
[6:17] मुझे ट्रेन उस वक्त एक छोटे से स्टेशन पर रुकी हुई थी और वो खाने
[6:24] वाली आवाज़ कम्पार्टमेंट के गेट की तरफ से आ रही थी।
[6:29] मैं किसी तरह हिम्मत करके उठा और खेत की तरफ गया जो मैंने वहाँ
[6:34] देखा उसने मुझे वहीं जमा दिया। ट्रैन के बाहर पटरी के पास एक
[6:41] आदमी और औरत थे, वहीं पगड़ी पहना हुआ बूढ़ा आदमी जिसे मैंने कुछ
[6:47] दिन पहले। मशरूम के बाहर देखा था और उसके
[6:50] साथ ही वो औरत जो मेरे सामने सो रही थी, अब तक वो खाने की आवाज
[6:57] उन्हीं के पास से आ रही थी। दोनों कुछ कुछ कर रहे थे, सो
[7:03] मैंने अपने फ़ोन की फ्लैशलाइट ऑन की।
[7:06] ताकि मैं अच्छे से देख सकूँ कि वो दोनों कर क्या रहे थे पर लाइट ऑन
[7:11] करते ही जो मुझे दिखा वो मैं मरते दम तक कभी नहीं भूल सकता।
[7:17] वो औरत जमीन पर छुपी हुई थी, उसके हाथ में मेरी बिरयानी का डब्बा
[7:23] था। वो बहुत गंदे तरीके से दोनों
[7:27] हाथों से उसे नोच नोच कर खा रही थी।
[7:30] मानो वो कहीं सालों से भूखी हो और उनके बगल में उनके बगल में वो
[7:37] पूरा आदमी भी कुछ खा रहा था। बिरयानी नहीं कुछ और।
[7:43] कुछ बहुत ही डरावना उस बूढ़े आदमी के हाथ में एक कटा हुआ कुत्ते का
[7:50] शरीर था। उन्होंने उसकी हाथ ही शरीर को हाथ
[7:55] से पकड़ा हुआ था और तू उसके हाथ से उसे नोच नोच कर खा रहा था।
[8:03] और ये देखते ही मेरी जान निकल गई। मैं थर्सडे कांपने लगा।
[8:09] मैं इतना डर गया की समझ ही नहीं पाया की मुझे करना क्या चाहिए?
[8:14] ना मैं कुछ बोल पाया ना कुछ कर पाया।
[8:16] सीधा अपनी सीट पर जाकर लेट गया। और आँखे बंद करके सोने की कोशिश
[8:22] करने लगा। मन में बस यही चल रहा था की शायद
[8:26] शायद मैंने कुछ गलत देखा था। शायद जब में आंख खोलुंगा तो सब
[8:31] कुछ ठीक हो जाएगा में इस चीज़ के बारे में भूल जाऊंगा।
[8:34] लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। तभी ट्रैन एक तेज़ झटके के साथ चल
[8:41] पड़ी और मुझे हल्के कदमों की आवाज़ सुनाई देने लगी।
[8:48] वो कदम धीरे धीरे मेरे पास आ रहे थे।
[8:52] मैंने अब ने हनुमान बाण का पाठ शुरू कर दिया।
[8:57] और दिल ही दिल में बजरंगबली को याद करने लगा और तब मेरे कान के
[9:02] बिल्कुल पास मुझे एक आवाज सुनाई दी।
[9:07] बिरयानी चन्नाग दे। इसका कन्नड़ लैंगुएज में मतलब है
[9:13] बिरयानी अच्छी थी। मेरा पूरा शरीर डर से अगड़ गया।
[9:20] मैंने अपनी आँखें बिल्कुल बंद ही रखीं और हनुमान चालीसा पढ़ता रहा
[9:26] और उसके बाद मुझे याद नहीं कब मेरी आग लग गई।
[9:30] मैं डर से बेहोश हुआ या सो गया पता नहीं?
[9:37] मेरी आंख सीधे अगले दिन खुली तब तक ट्रेन बैंगलोर से सिर्फ 70
[9:42] किलोमीटर दूर थी। मेरे आसपास मोहम्मद लोग थे।
[9:46] सब अपने अपने काम में लगे हुए थे। मैंने तुरंत अपनी माँ को फ़ोन कर
[9:51] यह पूरी बात बताई। पूरी बात सुनकर उन्होंने मुझे
[9:54] बहुत डांटा क्योंकि मैंने एक अनजान जगह पर रात को नॉन वेज खाना
[9:59] खाने की कोशिश की थी। उन्होंने मुझे सलाह दी कि बैंगलोर
[10:04] पहुंचते ही पहले अच्छे से नहाना, सारे कपड़े चेंज करना।
[10:08] फिर किसी मंदिर में जाकर माथा टेकना और प्रसाद चढ़ाना और 5 दिन
[10:13] तक नॉन वेज बिल्कुल मत खाना। मैंने माँ की बात सुनी और बिल्कुल
[10:20] वही किया जिन्होंने मुझसे करने को कहा था।
[10:23] घर पहुंचते ही मैं पहले अच्छे से नहाया, फिर बजरंगबली की आरती और
[10:27] हनुमान चालिसा पड़ी। उसके बाद सब कुछ नॉर्मल हो गया।
[10:32] वो फीलिंग जो कॉन्स्टंट्ली थी की कोई मेरे पीछे है वो अब जा चुकी
[10:38] थी एक हफ्ते बाद। जब घर वापस जाने का समय आया मैंने
[10:43] डिसैड किया कि मैं दोबारा ट्रैन से ट्रैवेल नहीं करूँगा, कम से कम
[10:48] रात वाली ट्रैन से तो बिल्कुल नहीं आज भी जब उस हादसे के बारे
[10:53] में सोचता हूँ तो डर से काँप जाता हूँ पता नहीं मैंने उस दिन क्या
[10:58] देखा, वो जो भी था। मैं उसे अब कभी दोबारा नहीं देखना
[11:02] चाहता। हे प्रफुल फर्स्ट ऑफ़ ऑल थैंक यू
[11:11] फॉर शेयरिंग थिस विथ दी कम्यूनिटी ये इंसिडेंट बहुत ही अलग और
[11:15] डरावना था। आपने जो भी डिस्क्राइब किया उसे
[11:19] कोई भी देखकर डर जाता। स्पोकस के आपबीती में ट्रैन का
[11:23] शायद ये सेकंड इंसिडेंट था और ये भी काफी डरावना था।
[11:27] गाइस आई होप यू रियली एन्जॉयड लिसनिंग टु थिस दोस्तों अगर आपके
[11:31] पास भी कोई परानॉर्मल घटना है जिसका कोई एक्सप्लनेशन नहीं है
[11:36] आपके पास तो वो आप हमसे इंस्टाग्राम पर।
[11:39] आज स्पूकास्टो रीजनल शेयर कर सकते हैं।
[11:43] चलिए अब बढ़ते हैं आज की अगली घटना के तहत।
[11:47] यह दूसरी घटना हमें भेजी है सिकंदराबाद से अद्वय कुलकर्णी ने।
[11:52] उनकी माँ एक डॉक्टर है और यह घटना उनकी माँ के साथ एक इमरजेंसी कॉल
[11:57] पर घटी थी। जिसने उन्हें हिलाकर रख दिया।
[12:00] चलिए इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की
[12:05] कोशिश करूँगी। मेरा नाम अद्वय है।
[12:12] मैं आज जो घटना आप सबके साथ शेयर करने जा रहा हूँ वो मेरी माँ के
[12:17] साथ हुआ था। मेरी माँ एक डॉक्टर है और वो
[12:20] सुपरनैचरल चीजों पर कभी यकीन नहीं करती थी।
[12:24] पर इस हादसे ने उनका विश्वास बदल कर रख दिया।
[12:28] ये बात कोविड के सेकंड वेव के लगभग छः महीने बाद की है।
[12:33] हालत धीरे धीरे नॉर्मल हो रहे थे, शॉप्स खोल रहे थे।
[12:37] लोग बाहर निकल रहे थे लेकिन डॉक्टर्स के लिए मेंटली ये सब कुछ
[12:43] काफी हेवी था। डॉक्टर्स वो दिन याद करना भी नहीं
[12:47] चाहते थे जब हॉस्पिटल्स में जगह नहीं थी।
[12:50] ऑक्सीजन नहीं था और वो सब हर दिन इतनी मौत देख कर सोने की कोशिश
[12:56] करने पर भी। सो नहीं पाते थे।
[13:00] मेरी माँ एक प्राइवेट डॉक्टर है। उनका एक छोटा सा क्लिनिक है जो
[13:05] सिकंदराबाद के कैंटोनमेंट एरिया से थोड़ा दूर है।
[13:08] इस हादसे से पहले कभी कभी डिफेंस क्वार्टर और कैंटोनमेंट के पास
[13:12] से। उन्हें इमरजेंसी कॉल्स आया करती
[13:15] थी और अगर सिचुएशन सीरियस होता था या पेशेंट ज्यादा बीमार होता था
[13:20] तो वो खुद विजिट पर चली जाती थी। उन्हें लगता था कि उनका फर्ज है,
[13:25] खासकर उन लोगों के लिए जो डिफेंस से जुड़े हुए थे।
[13:32] एक शॉ लगभग 9:00 बजे के करीब माँ क्लिनिक बंद कर रही थी।
[13:36] दिन भर का काम खत्म हो चुका था, लास्ट पेशेंट भी जा चुका था और वो
[13:41] घर जाने ही वाली थी जब क्लिनिक का फ़ोन बजने लगा।
[13:48] फ़ोन की दूसरी तरफ एक आदमी था और उसकी आवाज बिल्कुल नॉर्मल नहीं लग
[13:52] रही थी। वो बहुत तेज तेज सांस ले रहा था
[13:56] जैसे वो बहुत घबरा गया हो। उसने बताया कि उसकी वाइफ की तबियत
[14:01] बहुत खराब थी, उसे सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी।
[14:05] ऑक्सीजन लेवल काफी डाउन हो चुका था।
[14:08] उसका और वो रेस्पॉन्ड नहीं कर रही थी।
[14:11] वो आर्मी बार बार मेरी माँ से आने की मिन्नतें कर रहा था।
[14:16] रो रहा था वो मेरी माँ ने पहले तो हेसिटेट किया क्योंकि 9:00 बज
[14:20] चूके थे, काफी रात हो चुकी थी। और लोकेशन भी काफी शांत और
[14:25] सेक्लूडेड एरिया पर था। उस एरिया में ज्यादातर डिफेंस
[14:29] पर्सनेल और उनकी फैमिलीज़ रहते थे और रात में वो जगह काफी सुनसान हो
[14:34] जाती थी। लेकिन जब वो आदमी रोता ही रहा और
[14:37] उसकी आवाज डेस्पिरिट और घबराई हुई लगने लगी तो मेरी माँ का दिल।
[14:44] और वो मान गयी। उन्होंने सोचा कि शायद सच में कोई
[14:48] सीरियस इमरजेंसी है और अगर वो नहीं गयी तो शायद किसी की जान जा
[14:52] सकती थी। उन्होंने एड्रेस नोट किया और उस
[14:55] एड्रेस पर जाने के लिए वो अपने कार से निकल पड़ी।
[15:00] वो जगह एक सुनसान रोड पर थी। उस वक्त तक ज्यादातर लोग अपने
[15:05] घरों में पहुँच चूके थे और बाहर बहुत ही कम लोग थे।
[15:09] सड़क पर रौशनी भी कम थी क्योंकि कुछ स्ट्रीट लाइट्स खराब थे और
[15:14] आसपास ज्यादा मूवमेंट नहीं थी। वो बिल्डिंग बहुत ही छोटी सी थी।
[15:18] पुरानी शायद सेवेंटीज़ या एटीस का कंस्ट्रक्शन था।
[15:23] सिर्फ एक स्टैकेस था और टोटल चार फ्लैट्स थे।
[15:26] हर फ्लोर पर तो मेरी माँ गेट से अंदर घुसी और उन्होंने सीढ़ियों
[15:32] चढ़ना शुरू किया। स्टैकेस में भी ज्यादा लाइट नहीं
[15:36] थी, बस एक पुराना सा येलो बल्ब चल रहा था।
[15:40] खचापुर फर्स्ट फ्लोर पर पहुंची। उन्हें कुछ बहुत ही अजीब दिखा
[15:47] सीढ़ियों पर बिल्कुल उस फ्लैट के बाहर जहाँ से शायद वह कॉल आया था
[15:52] एक आदमी खड़ा हुआ था, वह आदमी बनियान और शॉट्स में था जैसे अभी
[15:58] अभी सोकर उठा हो। बिखरे बाल, बड़ी बड़ी आँखें।
[16:02] उसका सिर एक तरफ़ झुका हुआ था, बिल्कुल अजीब एंगल में आँखें अजीब
[16:08] सी लग रही थीं जैसे सामने तो देख रहा था वो पर फोकस कहीं और था
[16:13] उसका जैसे वो किसी दूसरी दुनिया में खोया हुआ हो।
[16:20] मेरी माँ ने उससे पूछा। भाई साहब, आपने आपने फ़ोन किया था
[16:24] ना मैं मैं डॉक्टर। हूँ वैसे।
[16:27] पेशेंट कहाँ है आपकी बीवी बीमार थी राइट?
[16:31] उन्होंने सोचा, शायद यही वो आदमी था जिसने फ़ोन किया था, लेकिन
[16:36] उसने। माँ के एक भी सवाल का जवाब नहीं
[16:40] दिया। वो बिलकुल चुप खड़ा रहा।
[16:43] उसके गले से एक भारी अजीब सी आवाज निकल रही थी जैसे वो करा रहा हो
[16:51] जैसे वो बहुत दर्द में हो। वहाँ रौशनी बहुत कम थी।
[16:56] रात का वक्त था पर वो आदमी बिल्कुल अजीब सा बर्ताव कर रहा
[17:00] था। माँ सोच ही रही थी इस सिचुएशन में
[17:04] वो क्या करे की तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे माँ अंदर तक कांप उठी,
[17:13] जिसने माँ को बुरी तरह से डरा दिया।
[17:16] वो आदमी अब तक तो वैसे ही अपना सर एक तरफ झुकाए खड़ा था।
[17:21] उसके गले से भी वो अजीब आवाज आ रही थी पर अब उसने अपनी जुबा अपनी
[17:27] जीभ बाहर निकालना शुरू किया, लेकिन किसी नॉर्मल तरीके से नहीं।
[17:34] ऐसे कोई। मजाक में करता हूँ बल्कि बहुत ही
[17:38] डरावनी और उन्नतुरल तरीके से उसकी जीभ काफी लम्बी और काली थी।
[17:45] वो अपनी पूरी जीभ धीरे धीरे बाहर निकाल कर माँ को देख रहा था।
[17:52] उसकी गर्दन टेढ़ी होने के कारण जीप भी एक तरफ लटक रही थी और अब
[17:58] उसके गले से उसके गले से और भी ज्यादा भयानक बहस आ रही थी।
[18:04] उस पर मेरी माँ को अंदाजा हो चुका था कि वहाँ कुछ तो गलत था।
[18:09] किसी भी जिंदा इंसान की जीभ इतनी काली और लंबी नहीं होती, सो वो
[18:15] बिना कुछ सोचे, बिना कुछ बोले पीछे मुड़ी।
[18:18] सीढ़ियों से जल्दी जल्दी नीचे उतरी और ऑलमोस्ट भागते हुए
[18:22] बिल्डिंग से बाहर निकलने लगी। उनके हाथ पैर कांप रहे थे पर वो
[18:27] पसीने से गीली हो चुकी थी, बाहर निकल गई।
[18:31] उनकी टक्कर एक आदमी से हुई जो शायद नीचे ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट
[18:36] में घुस रहा था। मेरी माँ ने उनसे हिचकिचाते हुए
[18:39] पूछा। भाई साहब, ऊपर ऊपर सेकंड फ्लोर पर
[18:43] कौन रहता है? कोई नहीं रहता मैडम ऊपर फर्स्ट
[18:46] फ्लोर पूरा खाली है। लेकिन मैंने मैंने सीढ़ियों पर
[18:50] अभी एक एक आदमी को देखा ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर बनियान और
[18:55] शॉर्ट्स में। ये सुनते ही उस आदमी का चेहरा
[18:59] बिल्कुल सफेद बढ़ गया। उसने इधर उधर देखा जैसे चेक कर
[19:03] रहा हो कि कोई सुन तो नहीं रहा। फिर वह मेरी माँ को थोड़ा साइड
[19:07] में ले गया और और भी पूरी बात बताई।
[19:10] उसने बताया कि कोविद के सेकंड वेव के दौरान फर्स्ट फ्लोर के उस
[19:15] फ्लैट में एक परिवार रहता था। हज्बंड, वाइफ और बेटी।
[19:19] वो आदमी डिफेंस सर्विसेज से जुड़ा हुआ था, एक सिविलियन एम्प्लोयी
[19:24] था। कोविद के सेकंड वेव के दौरान उनकी
[19:27] बीवी को कोविद हुआ था, वो घर पर ही थी।
[19:31] बहुत सीरियस कंडीशन में हॉस्पिटल्स सब फुल थे।
[19:35] ऑक्सीजन नहीं मिल रहा था। और डॉक्टर्स का भी कोई भरोसा नहीं
[19:39] था कि वो कब अवेलेबल होंगे। एक रात जब उनकी बीवी बहुत सीरियस
[19:44] हो गई तब उन्होंने लगातार डॉक्टर्स को फ़ोन करना शुरू किया।
[19:48] मदद मांगने के लिए उनकी एक छोटी सी बेटी थी चार 5 साल की।
[19:54] और वो उसे अकेला घर पर छोड़कर अपनी बीवी को हॉस्पिटल ले जाने की
[19:59] हिम्मत नहीं कर पा रहे थे। कोविद का नाम सुनकर तो वैसे ही
[20:04] कोई भी मदद करने आगे नहीं आ रहा था।
[20:07] उस पड़ोसी के मुताबिक वो पूरी रात फ़ोन करते रहे लेकिन कोई डॉक्टर्स
[20:12] अवेलेबल नहीं थे। और फिर उनकी बीवी उसी घर में उस
[20:17] रात मर गई, उनके सामने तड़पते हुए और वो और उनकी बेटी बस रोते रोते
[20:26] ये सब देखते रहे। इसके बाद कुछ ही हफ्तों में उनकी
[20:31] बेटी को भी गोविद हो गया। और कुछ ही दिनों में उसकी भी मौत
[20:36] हो गई और इन हादसों की वजह से वो बिल्कुल बदल गए।
[20:42] उन्होंने लोगों से बात करना बंद कर दिया।
[20:46] ज्यादातर चुप रहने लगे। वो अक्सर सीढ़ियों पर या अपने
[20:50] फ्लैट से बाहर बैठे दिखाई देते चुपचाप।
[20:54] अकेले शायद वो डिप्रेशन में चले गए थे और फिर कुछ हफ्तों बाद
[20:59] उन्होंने उसी फ्लैट में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया।
[21:05] जब उनकी बॉडी मिली वो बनियान और शॉर्ट्स में थे।
[21:09] कला एक तरफ झुका हुआ था फांसी की वजह से।
[21:13] और सुबह बाहर निकली हुई थी। तब से फर्स्ट फ्लोर के दोनों घर
[21:19] खाली हैं क्योंकि अब वहाँ कोई नहीं रह पाता था।
[21:22] मैडम उसके बाद से लोग कहते हैं कि रात को कभी कभी उस घर के बाहर एक
[21:29] आदमी दिखाई देता है बनियान और शॉर्ट्स में।
[21:33] शायद वही मुझे लगता है आपने आपने भी उसी को देखा है।
[21:40] उस पर मेरी माँ को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था।
[21:44] वो बस कार में बैठी और वहाँ से निकल गई।
[21:53] घर आकर उनकी हालत बिल्कुल खराब थी।
[21:56] उन्होंने हमें भी ये बात बताई। उनके हाथ पैर कांप रहे थे।
[22:00] उन्हें अपने क्लिनिक पर आया वो फ़ोन कॉल अच्छे से याद था।
[22:05] बाद में जिसने कॉल किया था वो भी तो ऐसा ही कुछ कह रहा था।
[22:09] की उसकी बीवी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।
[22:13] वो बहुत सीरियस थी, वो आदमी मदद मांगते मांगते कितना रो रहा था।
[22:19] इस हाथ से ने माँ को काफी डरा दिया।
[22:22] उस दिन के बाद मेरी माँ ने कैंटोनमेंट और डिफेंस क्वार्टर्स
[22:26] में अकेले रात की इमरजेंसी कॉल्स लेना पूरी तरह से बंद कर दिया।
[22:31] उन्हें पहले सुपरनैचरल चीजों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।
[22:35] वो हमेशा कहती थी कि ये सब दिमाग का खेल है, डर का असर है, पर उस
[22:40] हादसे के बाद। वो अब ये नहीं कहते कि उन्हें इन
[22:43] चीजों पर विश्वास नहीं है। अगर कोई पूछता है तो वो बस चुप हो
[22:48] जाती हैं। यार टॉपिक बदल देती हैं, शायद मन
[22:52] ही मन वो भी जानती हैं कि जो उन्होंने देखा वो कुछ और ही था।
[22:57] कुछ ऐसा जो साइंस या लॉजिक से। समझाया नहीं जा सकता।
[23:02] हम लोग भी माँ को उस रात इतना डराते काफी परेशान हो गए थे।
[23:07] पता नहीं उन्होंने सच में क्या देखा, क्या कोई उनके साथ प्रैंक
[23:11] कर रहा था? या उन्होंने सच में कुछ सुपरनैचरल
[23:15] एक्सपीरियंस किया? बस जो भी था उसने मेरी माँ की
[23:19] थिंकिंग को हमेशा के लिए बदल दिया।
[23:28] हे अतवा है, थैंक यू फॉर शेयरिंग थिस विथ थिस बुक कास्ट कम्यूनिटी
[23:33] जब मैं आपका ईमेल पढ़ रही थी, मुझे वो सीढ़ियों वाली बात इमेजिन
[23:37] करके भी डर लग रहा था। स्पेशल वो पार्ट जब वो आदमी जो भी
[23:42] था वो अपनी जीभ बाहर निकालना शुरू करता है एंड उसके गले से वो
[23:46] डरावनी आवाज आने लगती है नो डाउट युअर मॉम गॉट स्केयर प्रैंक हो या
[23:51] कुछ भी हो एक अंधेरे स्टेकेस में कुछ ऐसा एक्सपीरियंस करना मुझे
[23:55] लगता है ये किसी को भी डरा देगा। ये इंसिडेंट जितना स्केयरी है।
[24:00] ऐट दी सेम टाइम इसकी हिस्टरी भी बहुत सैड है।
[24:04] कोविद का टाइम याद करती हूँ तो आज सीरियसली आज भी रोंगटे खड़े हो
[24:08] जाते हैं। आई रियली होप एंड प्रे की बस हमें
[24:12] और आपको ही नहीं किसी को भी इस तरह की कोई भी मेडिकल इमरजेंसी ना
[24:16] फेस करनी पड़े। ना ही कभी अपनी फैमिली को इस तरह
[24:20] किसी सिचुएशन से गुजरते देखना पड़े।
[24:23] व्हाट दट मैन वेन्ट थ्रू इस रियली वेरी सैड कोविद का टाइम मैं गॉड
[24:29] आई जस्ट होप इट नेवर कम्ज़ बेक एनीवेज बेक टु दी एपिसोड।
[24:33] अगर आपके पास भी कोई पैरानॉर्मल या हंटिंग एक्सपीरियंस है जो आप
[24:37] सबके साथ शेयर करना चाहते हैं तो हमें इंस्टाग्राम पर टी एम कर
[24:42] सकते हैं। ऐट फोरकास्ट ओरिजिनल्स अगर आपकी
[24:46] घटना यूनिक और डरावनी हुई तो हम उसे जरूर फीचर करेंगे।
[24:50] हमारे आपबीती सीरीज में। चलिए अब जल्दी से बढ़ते हैं।
[24:54] आज के शूटआउट सेशन की तरफ इस हफ्ते का पहला शूटआउट जाता है
[24:59] हल्द्वानी से अनुराग जायसवाल को, जिन्होंने हमें इंस्टाग्राम पर
[25:03] कॅाटाक्ट किया। इन्हें मेरी ओरिजिनल स्टोरीज़ और
[25:05] नैरेशन काफी पसंद है। एंड लाल संदूक इनका फेवरेट एपिसोड
[25:09] है अब तक का और ये बहुत दिनों से इस पुकार सुन रहे हैं हे अनुराग
[25:14] थैंक यू सो मच फॉर रीचिंग अप आप ऐसे ही हमारे साथ जुड़े रहिएगा
[25:18] प्लीज़ थैंक यू आपके सपोर्ट के लिए और इस ग्रोइंग कम्यूनिटी का
[25:22] हिस्सा बने रहने के लिए। इस हफ्ते का दूसरा आउट जाता है
[25:26] कीर्ति आनंद को, जिन्होंने हमें इंस्टाग्राम पर कॅाटाक्ट किया
[25:30] उन्हें पोपकास्ट और फाड़ू फ्राइडेज हमारे दोनों पोडकास्ट
[25:34] बहुत ही पसंद है और उन्होंने हमारी सारी स्टोरी सुनकर खत्म कर
[25:38] ली है। इन्हें अवि और मेरा नैरेशन स्टाइल
[25:41] काफी अच्छा लगता है। एंड शी ईगर्ली वेज़ फॉर आवर
[25:44] एपिसोड हे कीर्ति थैंक यू सो मच फॉर सपोर्टिंग उस आपका मैसेज
[25:48] पढ़कर मुझे और अवि हम दोनों को बहुत अच्छा लगा आई होप हमें आपके
[25:53] जैसे और लिसनर्स मिलते रहे। एंड फाइनली आज का लास्ट आउट आउट
[25:57] जाता है। महाराष्ट्र से हरती को हनी ने भी
[26:01] हमें इंस्टाग्राम पर कॅाटाक्ट किया।
[26:03] वह कुछ महीनों से हमें सुन रही है एंड शी लाइक्स मैं नैरेशन स्टाइल
[26:07] शी हैज़ ऑल्सो आस्क्ड मी टू डू सम स्टोरी अबाउट कोंकण एंड हनी आई एम
[26:12] वर्किंग ऑन समथिंग सो फर्स्ट ऑफ ऑल थैंक यू फ़ॉर सपोर्टिंग एसआइ
[26:16] एम सो ग्लैड व्हेन आई गेट लिस्टनर्स लाइक यू जो बस कहानी
[26:19] सुनकर चले नहीं जाते दे स्टे इन टच थैंक यू फ़ॉर दैट एंड आई होप
[26:24] वी गेट मोर लिस्टनर्स लाइक यू एंड विथ दिस।
[26:27] आज का एपिसोड यहीं खत्म होता है का भी नया एपिसोड आ चुका है।
[26:32] उसका लिंक भी डिस्क्रिप्षन में है।
[26:34] सो गो चेक इट आउट नाउ अगले हफ्ते मैं लौटूँगी एक और एपिसोड के साथ
[26:38] तब तक अपना ध्यान रखिए देखते हैं गाइस।
[26:52] मैं हूँ मंजुला और आप सुन रहे हैं स्पूकास्ट।

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