# Ep33- LAST METRO | ORIGINAL Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 24 Jan 2025, 18 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/97517254/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-0-24%2F393654469-44100-2-42daf79acac24.m4a

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## Transcript

[0:02] सुनते रहिए स्पूककास्ट, अवि और मंजिला के साथ।
[0:10] रात के 11:15 बज रहे थे। आज प्रियंका को ऑफिस से निकलने
[0:15] में काफी देर हो गई थी उसने। 11 फाइव की आखिरी मेट्रो पकड़ी
[0:21] ग्रीन पार्क स्टेशन पहुंचने में उसे करीब 45 मिनट्स लगने वाले थे।
[0:26] उसने कानों में हेडफोन्स लगाए और अपनी फेवरिट लो फाइव प्लेलिस्ट ऑन
[0:31] की और गाने सुनने लगी। एसी की हल्की हल्की ठंडी हवा से।
[0:36] उसकी आंखें थोड़ी भारी होती जा रही थी।
[0:40] चारों तरफ काफी ज्यादा शांति थी। वैसे भी वो जीस कम्पार्टमेंट में
[0:45] चढ़ी थी। वो बिल्कुल खाली था।
[0:48] पांच से छे लोगों के अलावा कोई नहीं दिख रहा था बस मेट्रो की
[0:52] छलनी। और बीच बीच में स्टेशन के नाम
[0:55] अनाउंस होने के अलावा और कोई आवाज नहीं आ रही थी।
[0:59] उसने अपनी आंखें बंद कर लीं। सिविल लाइन स्टेशन पर जब मेट्रो
[1:04] रुकी तो तीन लोग वहीं उतर गए। कम्पार्टमेंट अब और खाली हो चुका
[1:10] था। प्रियंका को काफी नींद आ रही थी।
[1:13] पर अपनी सेफ्टी के बारे में सोचकर उसने अपनी आंखें खुली रखीं।
[1:18] मेट्रो के दरवाजे बंद होने ही वाले थे कि तभी एक बूढ़ा आदमी
[1:23] लंगड़ते हुए धीरे धीरे कम्पार्टमेंट के अंदर घुसा।
[1:28] उसके हाथ में एक बड़ी सी लकड़ी थी शायद बैम्बू।
[1:33] जिसे वो बैसाखी की तरह यूज़ कर रहा था।
[1:36] प्रियंका से वो लगभग 20 हाथ की दूरी पर था।
[1:39] अगर ट्रैन में भीड़ होती या ज्यादा लोग होते तो वो शायद उस
[1:44] बूढ़े आदमी को नोटिस भी नहीं करती।
[1:47] अगर ट्रैन में अब चुनकर तीन चार लोग थे।
[1:51] इसलिए उसका ध्यान एकदम से उस आदमी पर चला गया।
[1:54] उस बूढ़े आदमी का हुलिया कुछ अजीब सा था।
[1:58] उसके कपड़े काफी गंदे और कुछ जगह से फटे हुए थे।
[2:02] वो काफी दुखी लग रहा था और बैठते ही अपने ख्यालों में खो गया।
[2:07] प्रियंका ने देखा कि उसका एक पैर नहीं था।
[2:12] बैंड आदि गायब थी। उस कटे हुए पैर से उसके बाल बिखरे
[2:17] हुए थे और वह काफी कमजोर लग रहा था।
[2:20] त्वचा पर जगह जगह ताजे घाव थे, जो शायद उसने साफ भी नहीं किए थे।
[2:25] बहुत दिनों से। गर्दन और पैरों पर कुछ काढ़ा
[2:29] ब्राउन कलर का चिपका हुआ था। शायद सूखा खून ये ख्याल प्रियंका
[2:35] के दिल में आते ही वो थोड़ा सहम उठी।
[2:39] इस 7075 साल के बूढ़े आदमी का ये हाल किसने किया होगा?
[2:44] किसी ने पीटा है या फिर उनका कोई अक्सीडेंट हुआ है?
[2:47] वो ये सब सोचने लगे। वो आदमी साइड वाली सीट्स पर बैठा
[2:51] ही था कि अचानक उसने धीरे धीरे अपनी गर्दन मुड़ी और प्रियंका की
[2:57] तरफ देखने लगा। उसकी त्वचा मेट्रो की लाइट में और
[3:01] ज्यादा पेल लग रही थी। और फिर वो मुस्कराया और प्रियंका
[3:07] वहीं सीट पर जम गई। क्योंकि उस आदमी की आँखें बिल्कुल
[3:12] सफेद थी, बिल्कुल सफेद। उसमें कोई पुतलियां नहीं थी।
[3:19] प्रियंका को थोड़ा डर लगने लगा। वो खुद को समझा तो रही थी कि शायद
[3:23] उस आदमी को कैट ट्रैक है, पर अगर उसे कैट ट्रैक है तो फिर वो उसे
[3:27] देखकर मुस्कुरा कैसे रहा है? कैट ट्रैक में तो विज़न चली जाती
[3:31] है ना उसने अपना मुँह खिड़की की तरफ मोड़ लिया।
[3:35] पर कुछ ही मिनट बीते होंगे कि क्यूरियोसिटी के चलते प्रियंका ने
[3:39] फिर से उस आदमी की ओर देखा। और वो आदमी अभी भी उसी की ओर मुड़
[3:45] कर बैठा था और मुस्कुरा रहा था और सबसे अजीब बात अब उसकी गर्दन एक
[3:51] अजीब से एंगल से अपने लेफ्ट कंधे की ओर झुकी हुई थी।
[3:56] ये देख प्रियंका अब सहम उठी। धीरे धीरे उस आदमी के होंठ हिलने
[4:02] लगे थे, मानो वो कुछ कह रहा हो। प्रियंका को समझ नहीं आ रहा था कि
[4:08] वह क्या बोल रहा था और इससे पहले कि वह कुछ समझ भी पाती वह आदमी
[4:14] उठकर खड़ा हो गया और अपना पैर उस बैम्बू की बैसाखी के सहारे घसीटते
[4:19] हुए। उसकी ओर बढ़ने लगा।
[4:24] प्रियंका के अब पसीने छूटने लगे। इतनी रात को वह अकेली थी और वो
[4:30] अजीब सा आदमी जिसे वो एक बेचारा समझ रही थी, वो अब उससे बहुत
[4:34] ज्यादा डरावना लग रहा था। अभी भी उसके स्टेशन को आने में
[4:38] करीब 10 मिनट थे सो प्रियंका उठी ओर जाकर लास्ट वाली सीट पर बैठ
[4:44] गई। चाहे कपल बैठा था पर वो आदमी नहीं
[4:48] रुका, वो उसकी तरफ पड़ता रहा, वो अभी भी उसे घूरे जा रहा था।
[4:55] उसके होंठ हिल रहे थे मानो वो प्रियंका से अब भी कुछ कह रहा हो
[5:00] और उसकी वो रोंगटे खड़े कर देने वाली हँसी जब भी वो हँसी
[5:05] कम्पार्टमेंट में गूंजती प्रियंका सहमुक्ति क्योंकि का डर से गला
[5:10] सूख रहा था। और अजीब बात ये थी कि उसके बायीं
[5:14] तरफ जो एक कपल बैठा था, वह लोग तो उस आदमी की तरफ देख तक नहीं रहे
[5:18] थे। ये सब देख प्रियंका को और टेंशन
[5:22] होने लगी क्योंकि उसे पता था कि अगर कुछ हुआ तो उसे खुद को बचाना
[5:27] होगा इसलिए उसे तुरंत अपना हाथ बैग में घुसाया।
[5:31] और पेपर स्प्रे को हाथ में पकड़ लिया।
[5:34] वो तैयार थी उस आदमी ने कहा, पर प्रियंका ने उसकी तरफ नहीं देखा
[5:48] क्या पता? वो कोई बहाना कर रहा हो।
[5:51] वो आदमी अब उससे कुछ दूरी पर आकर रुक गया।
[5:55] उसके मुँह पर अब फिर से वही उदासी थी जो प्रियंका ने पहले देखी थी।
[6:00] वो कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा, फिर धीरे धीरे लंगड़ते हुए वापस अपनी
[6:06] सीट पर लौट गया। पर अपनी सीट पर पहुँच कर वो फिर
[6:10] से हंसने लगा। वहीं डरावनी हँसी जैसे ही उसका
[6:15] स्टेशन आया, प्रियंका झट से उठी और बिना वक्त गवाए तेजी से स्टेशन
[6:20] के बाहर निकलकर ऑटो स्टैंड की तरफ बढ़ने लगी।
[6:23] कुछ हादसा होने में देरी कितनी लगती है?
[6:27] पर जैसे जैसे प्रियंका ऑटो स्टैंड के पास पहुंची, वोटर से कांप उठी
[6:34] क्योंकि ऑटो स्टैंड के पास एक पेड़ के नीचे वही बूढ़ा आदमी खड़ा
[6:40] था, लंगड़ा सफेद आँखों वाला और वो।
[6:46] प्रियंका को ही देख रहा था उसकी पड़ी पड़ी सफेद आँखों को दीप
[6:51] प्रियंका का दिल दहल उठा उसके दिल की धड़कन मानो रुक सी गई वो आदमी
[6:57] वो बूढ़ा आदमी आ इतनी जल्दी कैसे आया?
[7:01] वो फुथुल लंगड़ा है। प्रियंका के दिमाग में अब टार ने
[7:06] घर कर लिया था तभी उसे वही शब्द फिर से सुनाई दिए और फिर उस बूढ़े
[7:18] आदमी की हँसी वह गूंजने लगी। प्रियंका काँपते काँपते किसी तरह
[7:24] एक ऑटो की सीट पर बैठी और तुरंत घर के लिए निकल गई।
[7:29] उसकी सासे उसकी सासे बहुत तेज़ थी और माथा पसीने से भीग चुका था।
[7:35] फ़ोन बार बार हाथों से गिर रहा था।
[7:38] ऑटो वाले भैया ने उससे पूछा भी कि उसकी तबियत ठीक तो है पर उसने
[7:43] किसी तरह बात डाल दी। क्या पता ऑटो वाला उस बूढ़े आदमी
[7:47] को जानता हो? वो बस किसी तरह अपने घर पहुंची।
[7:56] प्रियंका अपनी बहन के 711 बी एच के में रहती थी।
[8:01] उसको इतना ज्यादा डरा देख उसकी बहन प्राजक्ता ने उससे पूछा भी पर
[8:06] वह चुप रही और अपने कमरे में चली गई।
[8:10] थोड़ी देर बाद जब प्राजक्ता ने डिन्नर लगाया तब प्रियंका ने उसे
[8:15] पूरी बात बताई। राजा ने पूरी बात ध्यान से सुनी
[8:20] और फिर कहा कि मेट्रो स्टेशन के बाहर ऐसे बहुत से भिकारी घूमते
[8:24] हैं। शायद उसने ऑटो स्टैंड पर किसी और
[8:28] को देखा होगा। प्रियंका ने भी खुद को यही समझाया
[8:32] और वो सोने चली गई। पर उस आदमी की वो आँखें।
[8:36] और वो हँसी वो अपने दिमाग से नहीं निकल पाई।
[8:43] रात के करीब 2:30 बजे होंगे। जब प्रियंका की नींद खुली, कुछ
[8:50] आवाज आ रही थी शायद नौकरी की आवाज कोई।
[8:55] कहीं पर नाक कर रहा था, शायद प्रियंका उठ कर बैठ गई।
[9:00] उसकी बहन प्रजक्ता हॉल में सो रही थी।
[9:03] वो अपने रूम में अकेली थी। उसने ध्यान से सुना वो आवाज कहीं
[9:10] और से नहीं बल्कि उसके रूम की ही खिड़की के बाहर से आ रही थी।
[9:14] और वह सिक्स्थ फ्लोर पर रहती थी। प्रियंका के पैर अब ठंडे हो गए,
[9:26] उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?
[9:29] वह खुद को समझा ही नहीं पा रही थी की आवाज कहीं और से आ रही थी।
[9:34] क्योंकि हर नाक के साथ वो कांच की खिड़कियों का हिला भी सुन पा रही
[9:38] थी। वो बिस्तर से उतरकर डर डरकर
[9:41] खिड़की की ओर पड़ी। फिर उसने पर्दे को हल्का सा हटाया
[9:47] पर खिड़की के बाहर कोई नहीं था। उसने एक राहत की सांस भरी।
[9:55] उसने स्लाइडिंग विंडो को खोला और बाहर देखने लगे।
[9:59] उसे अपने आप पर अब हँसी आ रही थी। भला सिक्स्थ फ्लोर के विंडो पर
[10:05] कोई कैसे नोक कर सकता है? सीरियसली?
[10:08] वो क्या सोच रही थी उसने? कुछ लंबी साँसें भरी खुद को शांत
[10:13] करने के लिए और फिर दोबारा सोने जाने के लिए वो जैसे ही मुड़ी उसे
[10:19] वो नॉकिंग की साउंड फिर से सुनाई दी, ठीक उसके पीछे से और अगले ही
[10:27] पल हवा में एक हँसी गूंज उठी। वहीं हँसी जिसने आज उस मेट्रो में
[10:35] सुनी थी उस बूढ़े आदमी की प्रियंका का गला एकदम से सूख गया,
[10:43] वो पीछे मुड़ी खिड़की अभी भी आंधी खुली हुई थी।
[10:47] हवा में वो आदमी की डरावनी हँसी गूंज रही थी।
[10:51] अब प्रियंका किसी तरह खिड़की के पास गई और उसने नीचे देखा नीचे
[10:57] उसके बिल्डिंग के बाहर जो सड़क थी वो पूरा आदमी उसके किनारे खड़ा
[11:02] था। आंखें बिल्कुल सफेद।
[11:06] एक कटा हुआ पैर और गर्दन टेढ़ी प्रियंका की ओर देखते हुए और वो
[11:13] हंस रहा था। उसे देख प्रियंका के गले से एक
[11:19] चिपका निकल गई पर वो आदमी वहीं खड़ा रहा।
[11:25] फिर अचानक उसकी हँसी एकदम से गायब हो गई और वो वहीं शव दोहराने लगा
[11:37] और अगले ही पल वो प्रियंका की ओर देखते हुए उसके बिल्डिंग की गेट
[11:42] की तरफ लंगड़ लंगड़ कर पढ़ने लगा। प्रियंका का डर से हाल बेहाल था।
[11:52] वो भागकर हॉल में गई और उसने रोते हुए अपनी बहन को उठाया।
[11:57] प्रजक्ता प्रजक्ता उठ वो मेट्रो स्टेशन वाला आदमी।
[12:03] वो मेट्रो स्टेशन वाला आदमी हमारे बिल्डिंग के नीचे वो ऊपर आ जाएगा
[12:09] प्राजक्ता वो वो शायद ऊपर आ रहा था जगता उठ।
[12:13] प्रियंका, प्रियंका काम डाउन तुने कोई सपना देखा हे क्या क्या हुआ?
[12:21] नहीं। नहीं, यार, मैंने उसे सच में।
[12:24] देखा खिड़की। पर नॉकिंग के आवाज़ आ रही थी,
[12:28] मैंने मैंने खिड़की खोली तो वो तो वो बाहर खड़ा था बिल्डिंग के नीचे
[12:35] और वो हंस रहा था उसकी वो सफेद आके और कटी हुई टांग और फिर।
[12:42] और फिर वो पानी भी मांगने लगा। मुझे बहुत डर लग रहा है।
[12:45] प्राजक्ता मुझे बहुत डर लग। रहा है वो।
[12:49] कोई आत्मा तो नहीं मेरे पीछे कोई आत्मा पड़ रही।
[12:52] है क्या? शिट शिट।
[12:56] ये कहते कहते वो बेहोश हो गई। प्राजक्ता ने उसे किसी तरह अपने
[13:07] बेड पर सुलाया। फिर उसने जाकर प्रियंका के रूम के
[13:11] खिड़की के बाहर देखा। वहाँ बिल्डिंग के नीचे या गेट पर
[13:15] कोई नहीं था। ये प्रियंका क्या बोल रही थी?
[13:20] अगर उस लंगड़े भिखारी ने उसे फॉलो भी किया होगा तो फिर?
[13:24] वो सिक्स्थ फ्लोर की खिड़की पर नॉक कैसे कर सकता है?
[13:27] वो भी कॅन्फ्यूज्ड थी। उसने खिड़की को चेक किया और उसे
[13:32] जो दिखा वो भी हिल गई। खिड़की के बाहर कांच पर जो हल्की
[13:38] धूल जमी थी, उस पर किसी के उंगलियों के निशान थे।
[13:45] चार उँगलियों के धुंधले से जैसे बार बार नॉक करने पर बनते हैं।
[13:52] उसने झट से खिड़की लॉक किया और आकर प्रियंका के पास बैठ गई।
[13:56] प्रियंका का शरीर बुखार से तप रहा था।
[13:59] प्राचक अब खुद परेशान थी। कुछ तो अचीव सच में देखा था।
[14:03] शायद प्रियंका ने उसने अब अपना फ़ोन निकाला, ऐक्सिडेंट्स ऑन येलो
[14:08] लाइन सर्च करने लगी और उसे एक ऐसा आर्टिकल दिखा जिसे पढ़कर उसके
[14:14] पसीने छूट गए। तीन महीने पहले 170 साल का बूढ़ा
[14:20] आदमी। रात की आखिरी मेट्रो पकड़ने के
[14:23] लिए सिविल लाइन स्टेशन पर खड़ा था।
[14:26] आसपास के लोगों ने बताया कि वह अकेला था और काफी परेशान लग रहा
[14:31] था। जैसे ही ट्रैन प्लेटफार्म के पास
[14:33] पहुंची वह एकाएक मेट्रो के सामने कूद पड़ा।
[14:38] उस अक्सीडेंट में उस आदमी का एक पैर?
[14:41] पूरी तरह से कटकर अलग हो गया। उसकी गर्दन भी टूट गई पर उसकी जान
[14:47] तभी नहीं गई। वो कुछ देर तक जिंदा रहा, पानी
[14:52] मांगता रहा पर इससे पहले कि लोग उसे पानी पीला पाते।
[15:01] ब्लीडिंग और बाकी इंजरीज की वजह से वो जल बसा।
[15:07] पुलिस एन्क्वारी से बाद में पता चला कि उस आर्मी को कैटरैक हो गया
[15:12] था। दोनों आँखों में जीस वजह से उसकी
[15:15] विजन ऑलमोस्ट जा चुकी थी। उमर हो गई थी।
[15:19] और देखरेख करने के लिए कोई नहीं था।
[15:21] मेडिकल बिल्स के उधार चुकाने के लिए लोग बार बार उसे परेशान कर
[15:26] रहे थे तो उसने सुइसाइड कर लिया। प्राजक्ता चुप थी कैटरैक्ट यानी
[15:33] सफेद आंखें, उसका एक पैर कटा होना।
[15:38] मुड़ी हुई गर्दन, शरीर पर सूखे हुए घाव, सूखा खून और वो उसका बार
[15:44] बार पानी मांगना, ये सब सोच कर वो सहम उठी क्योंकि उसे अब प्रियंका
[15:49] की बात पर यकीन हो रहा था। उसने अपने आप को संभालना और
[15:54] डॉक्टर को फ़ोन किया। अगले कुछ दिन प्रियंका की तबियत
[15:59] काफी डाउन रही, उसके घर वाले भी आ गए और पूरी घटना सुनने के बाद
[16:04] पूजा करवाई गई। प्रियंका के साथ और कुछ नहीं हुआ,
[16:09] बस उसने आखिरी मेट्रो लेना छोड़ दिया पर सुना है।
[16:16] आज भी येलो लाइन की आखिरी मेट्रो में कुछ लोगों को एक बूढ़ा आदमी
[16:22] दिखता है। एक बूढ़ा आदमी जिसका एक कटा हुआ
[16:26] पैर गर्दन मुड़ी हुई और आंखें सफेद वो लोगों से पानी मांगता है।
[16:39] और अगर कोई उसे पानी नहीं देता तो फिर?
[16:58] हे गाइज़ कैसे है आपका होप यू लाइक तोडयस स्टोरी वैसे थैंक यू
[17:04] टू एव्रीवन वॉज़ पर्सनली रीचड आउट टू एस ऑन वॉटसैप एंड इंस्टाग्राम
[17:08] टू टेल एस की उनको मुर्दा घर वाली कहानी बहुत अच्छी लगी।
[17:12] आई एम सो ग्लैड बिकॉज़ इट टुक मी हेल लॉट ऑफ ए टाइम टू राइट दिस वन
[17:16] गाइज़। सो थैंक यू हमारे पास आप लोगों की
[17:20] कुछ बहुत ही ऑसम स्टोरीज़ आई हैं, जो हम अगले दो वीक में आपके लिए
[17:25] लाने वाले हैं और हाँ, पोल्स में भी आप में से बहुतों ने कहा था कि
[17:30] यू हॅव सम क्रीपी इन्सिडेंट्स टु शेयर, सो रीच आउट टु उस गाइस।
[17:35] आप हमें इंस्टाग्राम पर एटीएम कर सकते हैं या व्हाट्सएप पर भी एक
[17:38] वौइस् नोट भेज सकते हैं। नंबर है 9767916545।
[17:45] डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में हैं। वैसे हमें रेटिंग्स देना मत भूलिए
[17:48] बिकॉज़ इट्स इम्पोर्टेन्ट एस दट। इस हौ ए पोडकास्ट विल बी पुश्ड
[17:52] फॉर्वर्ड। और हमारे दूसरे पोडकास्ट फाडू
[17:55] फ्राइडे का लिंक भी डिस्क्रिप्षन में है डू शो युअर लव ऑन दट।
[17:58] अगले हफ्ते हमारे लिसन स्टोरीज़ के साथ विल बी पैक्ड मैं हूँ
[18:03] मंजिला और आप सुन रहे हैं स्पोक कास्ट अवि और मंजिला के साथ।
[18:09] सुनते रहिए स्पोक कास्ट। अवि और मंजिला के साथ।

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