# Ep37- WOH BAND DARWAZA- Part 2 | Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 24 Feb 2025, 23 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/98956763/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-1-24%2F395449510-44100-2-b5932d4725e97.m4a

Story: In this Episode, will Ayesha discover the truth behind the closed door of the Wadaa? Listen to this original story to find out the truth. Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! Send your stories on our Whatsapp number 9767916545. Leave a msg or a voice note and we will get back to you. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Haunted Village | Haunted House | Haunted Flat | Narrated by : Manjila STORY and SOUND : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:02] हे गाइस वेलकम। टु थिस वीक्स एपिसोड ऑफ़ फोरकास्ट
[0:07] मैं हूँ मंजुला और आप सुनने वाले। हैं एक।
[0:10] फोरकास्ट ओरिजिनल स्टोरी सो आज मैं आपके।
[0:14] लिए पिछले हफ्ते पब्लिश की गई मेरी स्टोरी वो बंद दरवाजा।
[0:18] उसका दूसरा भाग लाई हूँ। अगर आपने पार्ट वॅन अब तक नहीं
[0:22] सुना है तो अभी जाइए, पहले उसे सुनिए तभी आप इस स्टोरी को एन्जॉय
[0:27] कर पाएंगे। तो चलिए आज की कहानी शुरू करते
[0:30] हैं मेरी ये कहानी। अगर अच्छी लगे तो रेटिंग्स देना
[0:34] मत भूलिए, फॉलो करना मत भूलिए पढ़ते हैं आज की कहानी की तरह।
[0:40] सुनते रहिए स्पूक कास्ट अभि और मंजिला के साथ।
[0:57] आशा की। आंख खुली रात के।
[1:01] 3:11 बज रहे थे, वो पसीने से तरबतर थी, उसने उठकर पानी पिया।
[1:09] उस भयानक रात के बाद से हर रात उसकी नींद दुबारा 311 को खुलने
[1:14] लगी थी। ठीक मुंबई की तरह उसने उस कमरे
[1:18] में अपनी नजर दौड़ाई। चारों तरफ अंधेरा था, हर तरफ
[1:23] दीवारों पर भगवान की पड़ी पड़ी फोटो फ्रेम्स लगी थी और जमीन पर
[1:28] लगे गद्दों पर उसके। एक तरफ पारस।
[1:31] और दूसरी तरफ पारस के आए बाबा सोए थे।
[1:35] उस हादसे को अब तक। 3 दिन बीत चूके थे पर आएशा और
[1:39] पारस। अब भी पारस के आये बाबा के कमरे।
[1:41] में ही सो रहे थे। डरे हुए छोटे बच्चों की तरह।
[1:45] जो आयशा को बिल्कुल ठीक। नहीं लग रहा था।
[1:48] आयशा के कहने पर भी पारस अपने कमरे में लौटने को राजी ही नहीं
[1:52] हो रहा था। आशा ने एक लंबी सास भरी।
[1:56] और दोबारा अपने बिस्तर। पर लेट कर पिछले कुछ दिनों के
[1:59] बारे में सोचने लगी। कुछ तो बहुत अजीब हो रहा था इस घर
[2:04] में जिसने घरवालों को डरा दिया था, इतना ज्यादा कि सब साथ मिलकर
[2:09] सो रहे थे। कोई कहीं अकेला नहीं जा रहा था,
[2:13] दिन में भी नहीं। पिछले तीन दिनों में उसे कोई अजीब
[2:17] आवाज या कुछ। डरावना नहीं दिखा था पर घर का
[2:20] खुशनुमा माहौल अब बिल्कुल बदल चुका था।
[2:24] हर वक्त सब दबी आवाज में फुसफुसाकर बातें करते रहते और
[2:29] जैसे ही आयशा आती। वो चुप हो जाते या बात बदल देते।
[2:33] सबसे अजीब बात ये। थी कि सेकंड फ्लोर पर जाने वाली
[2:37] सीढ़ियों के वहाँ किसी ने किले ठोककर कुच तार, एक लाल पोटली और
[2:43] एक लाल धागा बांध दिया था। आशा को सबकी आँखों में एक अनजान
[2:47] दर्द साफ। नजर आ रहा था।
[2:49] पर पूछने पर हर कोई बात। बदल देता।
[2:52] यहाँ तक कि पारस भी और यह बात उसे अंदर से खाये जा रही थी, सो उसने
[2:59] ये डिसाइड किया कि वो अपने कमरे में लौट जाएगी।
[3:03] अगर वो पारस के आये बाबा के कमरे में ही रही तो उसे।
[3:06] अपने किसी भी। सवाल का कोई जवाब?
[3:09] कभी नहीं मिलने वाला था। कुछ दिन बाद पारस किसी काम से 2
[3:18] दिन के लिए बाहर जाने वाला था। सो आयशा ने मौका देखकर उस रात
[3:23] अपने कमरे में अकेले बिताने की सोंची।
[3:26] उसे डर तो लग रहा। था पर उसने बात।
[3:29] की तह तक जाने का मन बना लिया था। पारस के काम से निकलने के थोड़ी
[3:34] देर बाद आयशा ने अपना सामान बांधा और अपने कमरे में लौटने लगी।
[3:40] ये देख पारस के आई बाबा ने उसे बहुत रोकना चाहा।
[3:43] पर उसने। किसी की नहीं सुनी आई आप लोग।
[3:47] चिंता मत। करो ना प्लीज़?
[3:49] मुझे कुछ नहीं होगा मुझे बस। आपके कमरे में ठीक से नींद नहीं आ
[3:53] रही मैं अपने कमरे। में बस एक रात अच्छे से सोना
[3:56] चाहती हूँ। और कुछ नहीं अगर रात को कुछ हुआ।
[3:59] तो मैं आप लोगों को आवाज दे दूंगी, आप लोग चिंता मत करो।
[4:03] प्लीज़ यह कहकर आयशा ने बात को वहीं खत्म कर।
[4:06] दिया सबने एक दूसरे को। परेशान होकर देखा।
[4:10] उनकी आँखों का डर जैसे बाहर छलक रहा हो।
[4:13] आयशा ने भी तुरंत अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया।
[4:18] क्योंकि। वो अपना मन बना चूके थे।
[4:23] रात 311 को हर रोज़ की तरह आयशा की आंख खुली।
[4:28] चारों तरफ सन्नाटा था। दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे,
[4:34] आईशा बिल्कुल सतर्क। होकर सुनने लगी कि कहीं से कोई
[4:37] आवाज तो नहीं आ रही? थी पर चारों तरफ शांति।
[4:41] ही थी और तभी एक गंध आई जले हुए चमड़े की।
[4:49] वही गन जो उसे मुंबई के अपने फ्लैट।
[4:52] और 3 दिन पहले इस। वाडे में आई थी।
[4:56] आशा का दिल बिल्कुल। बैठ गया उसे।
[4:59] अब पीछे मुड़कर देखने को डर लग रहा था।
[5:02] क्या उसके पीछे कोई? खड़ा था।
[5:04] क्या कोई फिर से? दरवाजा खोल अंदर।
[5:07] आया था उसके कमरे में। उसने थोड़ी हिम्मत जुटाई और।
[5:10] धीरे धीरे पीछे। मुड़ी।
[5:13] पर ये क्या? कमरे का दरवाजा तो बंद था।
[5:16] वहाँ कोई नहीं था। उसके अलावा उसने एक राहत की सांस
[5:21] ली और उठकर रूम से अटैच वाशरूम में चली गई।
[5:24] वो बेसन के सामने खड़े होकर। खुद को।
[5:27] शीशे में देखने। लगी पिछले कुछ।
[5:29] दिनों में उसकी आँखों के नीचे काले गड्ढे बन गए थे।
[5:33] क्या वो सच? में ऐसे विमाचन कर रही थी।
[5:36] ये सोचते हुए वो अपने मुँह पर पानी मारने लगी।
[5:39] और तभी उसे एक आवाज। आई हल्की सी।
[5:44] मानो किसी ने बाथरूम के वेंटिलेटर वाली खिड़की को खोला हो।
[5:48] आयशा ने अपनी। बाई तरफ लगी उस वेंटिलेटर की तरफ
[5:51] देखा और वो वहीं जम गई। वो वेंटिलेटर की खिड़की जमीन से
[5:57] करीब। 10 से।
[5:58] 11 फिट ऊपर लगी थी। एक छोटी सी खिड़की।
[6:02] जो वह खुली हुई थी। और उस खिड़की की एक तरफ दीवार पर
[6:07] दो काले काले जले हुए पैरों के निशान थे।
[6:12] जैसे कोई दीवार। पर चला हो।
[6:13] तभी आयशा की नजर जैसे ही उस निशान पर पड़ी।
[6:17] उसका खून जम गया। डर से कांपने लगी क्योंकि जब।
[6:20] वो वाशरूम में घुसी थी तो वो विंडो बंद था।
[6:23] ना ही उस सफेद दीवार पर कोई निशान।
[6:25] थे। वह चिल्लाना चाहती थी।
[6:28] पर उसके गले में आवाज अटक गई थी। खिड़की से अब।
[6:32] एक हल्का। धुआं बाथरूम में घुसने लगा और चले
[6:35] हुए चमड़े की गंध और तेज हो गई। हायशा घासने लगी।
[6:45] अब धीरे धीरे नए काले पैरों के निशान दीवार।
[6:48] पर बन रहे थे। और उस बेसिन के पास आ रहे थे।
[6:53] हमेशा डर से रोने लगी वो पैरों के निशान अब उस बेसिन वाले आईने के
[6:58] बिल्कुल ऊपर। थे यानी।
[7:00] वो जो कोई भी था। पूरे बाथरूम की दीवार का चक्कर
[7:04] काटकर वो अब आयशा। के ठीक।
[7:05] ऊपर दीवार। पर था।
[7:07] हवा में लटकता हुआ आयशा को कोई नहीं।
[7:11] दिख रहा था। पर चले चमड़े की दुर्गन्ध आ रही।
[7:14] थी बहुत तेज। उसका शरीर डर से सून।
[7:17] पड़ चुका था। उसके दिमाग ने काम करना बंद कर
[7:20] दिया था। और तभी।
[7:22] तभी उसने अपने कानों के बिलकुल पास वही आवाज सुनी।
[7:31] ये आवाज जैसे ही उसके कानों में गूंजी।
[7:34] वो चीखते हुए बाथरूम से बाहर निकली और टकरा कर जमीन पर गिर गई।
[7:40] उसने अपना मुँह पर किया ये देखने के लिए की वो किस्से टकराई थी और।
[7:45] उसकी जान उसकी जान मानो वहीं निकल गई क्योंकि उसके सामने।
[7:51] वहीं जली हुई औरत। खड़ी थी जमीन से कुछ 1012 इंचेस
[7:57] ऊपर। उसकी त्वचा बुरी तरह जली।
[8:00] हुई थी शरीर जलकर सिकुड़। चुका था।
[8:04] जगह जगह से मांस। जलकर पिघला हुआ था और एक बेहद
[8:08] गंदी बदबू आ रही थी उस औरत से उसके।
[8:11] होंठ गलकर उसके गले पर चिपके। हुए थे और।
[8:14] उसके आधे काले जले हुए दांत दिख रहे थे।
[8:17] उसके गले से एक विभात से आवाज आ रही।
[8:20] थी जैसे वो बहुत। दर्द में हो?
[8:24] और वो आवाज करते हुए वो धीरे धीरे आयशा के करीबाती जा रही थी।
[8:31] आयशा डर। से काँप रही थी, वो दीवार के
[8:33] सहारे खड़ी हो गई। आपने कहा कोई रास्ता?
[8:36] ही नहीं बचा था। वो औरत, वो औरत उसके बिलकुल सामने
[8:41] थी। आयशा को शायद पता चल चुका था कि
[8:44] उसका अंतिम क्षण पास आ चुका है। आज उससे कोई नहीं बचा पायेगा।
[8:51] कोई नहीं। वो औरत?
[8:54] वो औरत अब बिल्कुल उसके सामने। आकर रुक गई।
[8:57] उसने अपने जले उंगलियों से आयशा के गाल पर हाथ फेरा।
[9:05] घुरधुरे उंगलियों के अहसास से आयशा के रोंगटे खड़े हो गए।
[9:09] फिर उस औरत ने एक विभद से चितकार की।
[9:15] थर्सडे आयशा ने। अपनी आँखें बंद कर ली।
[9:18] कुछ सेकण्ड्स बाद। जब उसने धीरे।
[9:21] धीरे अपनी आँखें खोली उछली हुई औरत अब वहाँ नहीं थी।
[9:28] इससे पहले आयशा कुछ समझ पाती कि उसके साथ क्या हुआ था।
[9:32] एक। दर्दनाक चीख पूरे घर में गूंज।
[9:34] उठी ये आवाज। ये आवाज कमरे के बाहर कहीं दूर।
[9:40] से आ रही थी। आयशा दौड़ते हुए कमरे के बाहर गई।
[9:44] कहीं दूर किसी औरत के दर्द भरी चिपका से पूरा वाड़ा गूंज रहा था,
[9:49] पर कहाँ और ये कौन चिल्ला? रहा था।
[9:52] इतनी रात को आशा को समझने में देर नहीं।
[9:56] लगी की आवाज। दूसरे मंजिल से आ रही थी 1 मिनट न
[10:00] गवाते हुए। उसने खुद को संभालना और फिर उन
[10:03] अंधेरे सीढ़ियों पर लगे लाल धागों और।
[10:07] तार को तोड़ वो सेकंड फ्लोर। पर पहुंची।
[10:11] अब वो आवाज और ज्यादा ज़ोर से आ रही थी।
[10:15] कोई औरत। बेहद ही दर्दनाक तरीके से चीख।
[10:19] रही थी। जलने की बदबूभी अब तेज हो गई थी।
[10:23] आयशा ने आसपास देखा। उसे दूसरे मंजिल के उस बंद
[10:27] दरवाजे। के नीचे से कुछ।
[10:28] तेज रौशनी और धुआँ बाहर आते। हुए देखा तो वो दौड़कर उस कमरे के
[10:32] सामने पहुंची। वो चीखे उस दरवाजे के अंदर से आ
[10:37] रही थी शायद। शायद अंदर कोई जल रहा था, कोई औरत
[10:43] शायद वही मदद के लिए चिल्ला रही थी।
[10:49] भाई ने दरवाजे की तरफ देखा। आज उस पर कोई लाल।
[10:54] धागा या पूजा का सामान नहीं बना था।
[10:57] उसने उस दरवाजे की कुंडली को पकड़कर हिलाने की कोशिश की।
[11:00] पर वो इतना गर्म था कि उसे एक। ही सेकंड में उसके।
[11:04] हाथों पर शायद। छाले पड़ गए।
[11:07] उसने दरवाजे को लात मारी। उसे खोलने की कोशिश।
[11:10] की पर अंदर लगी आग। इतनी ज्यादा तेज थी कि वो लकड़ी
[11:14] का दरवाजा। तक गर्म हो चुका था।
[11:16] आशा कुछ नहीं कर पाई। वो बेबस होकर इधर।
[11:19] उधर देखने लगी उस औरत की चीखें उसके।
[11:22] रोने की आवाज। और चले हुए चमड़े की दुकान बस।
[11:26] बढ़ती जा रही थी। आशा को समझ नहीं आ रहा था की वो
[11:29] क्या करे? उसे किसी भी हालत में उस औरत को
[11:32] बचाना था। जब उसे कुछ समझ नहीं आया तो।
[11:35] वो भाग कर नीचे चली गई और घर वालों।
[11:38] को जगा दिया उसने। आई आई बाबा मोन काका मोन काका
[11:46] उठू। आप लोग जल्दी चलिए, ऊपर वाले बंद
[11:49] कमरे में कोई जल रहा है, हम जैसे धुआँ निकल रहा है जल्दी चलिए
[11:53] प्लीज़ किसी औरत की चीखें सुनाई दे रही है वहाँ उसे मदद चाहिए।
[11:58] आई उठू आयशा की ये बात। सुनकर सबकी शक्ल पर सफेदी छा गई।
[12:03] सबूत बनकर वहीं खड़े हो गए। मानो कोई मदद के लिए ऊपर जाने को
[12:08] राजी ही नहीं हो रहा था। चलिए आप लोग यहाँ खड़े होकर वक्त
[12:12] आया मत कीजिए प्लीज़ जल्दी। चलिए ये कहकर आयेशा फिर से।
[12:16] सेकंड फ्लोर की सीढ़ियों की तरफ दौड़।
[12:17] पड़ी। इस बार उसके साथ मोहन।
[12:20] काका और बार उसके आए बाबा भी आए। मोहन काका ने जाकर उस दरवाजे को
[12:25] देखा। कहाँ है आग?
[12:27] उन्होंने पूछा, आयशा दौड़कर आगे बढ़ी पर उसने जो देखा उसने उसे
[12:33] वहीं रोक दिया क्योंकि उस दरवाजे के नीचे से अब कोई धुआं या।
[12:39] आग की रौशनी बाहर नहीं दिख रही थी।
[12:42] आग आग बूझ गई है। क्या फिर?
[12:45] कुंडी कुंडी देखो काका वो अभी भी गर्म होगा, ध्यान से खोलो।
[12:49] उसे मेरे हाथों। पर छाले पड़ गए उसे चुक कर वो
[12:52] बहुत गर्म है उस लड़की को हमें निकालना होगा जल्दी करो प्लीज़
[12:56] जल्दी करो काका पर। मोहन काका ने कुंडी की तरफ देखा
[13:01] और फिर आयशा को इशारा किया और आयशा हैरान रह गई।
[13:05] क्योंकि दरवाजे की कुंडी पर अब लाल धागा और पूजा का सामान बंधा
[13:09] हुआ था। आशा हैरान थी, उसे अपनी आँखों पर
[13:16] विश्वास ही नहीं हो रहा था। कुछ ही मिनटों पहले उसने कुंडी को
[13:20] छूआ था, वो बहुत। गर्म था।
[13:23] तब उस पर। पूजा का कोई सामान या कोई लाल
[13:25] धागा नहीं था। फिर ये सब कहाँ से आया?
[13:28] उसने तुरंत जाकर कुंडी को छुआ। फिर दरवाजे को।
[13:32] सब कुछ बिल्कुल ठंडा था, बिल्कुल ठंडा ना कहीं कोई धुआं।
[13:38] था ना कोई? जलने की गंध।
[13:41] बस एक सन्नाटा था चारों तरफ। पर पराई मैंने खुद हुआ देखा था,
[13:47] चलने की बदबू आ रही थी वो औरत कितना चिल्ला रही थी रो रही थी वो
[13:52] की ये हाथ देखो आप लोग मेरे हाथ देखो कितने लाल है?
[13:57] देखो उस गर्म। कुंडी को छूने की वजह से हुआ था
[14:00] मुझे। मुझे नहीं पता ये सब इतना जल्दी
[14:02] कैसे ठंडा हो गया। इट्स इट्स नॉट पॉसिबल।
[14:05] यहाँ कुछ अजीब हो रहा हैं, कुछ तो अजीब हो रहा हैं यहाँ आयशा को।
[14:09] अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था।
[14:12] सब शान थे सबके। चेहरे पर।
[14:15] खौफ साफ नजर आ रहा था। आयशा बेटा तुमने कोई सपना देखा
[14:20] होगा। तुम चलो नीचे अब चलो बेटा, इसलिए
[14:24] मैंने कहा था तुम अकेले मत सोना पर तुम नहीं मानी।
[14:27] आइए एक सेकंड। ये दरवाजा बंद?
[14:29] क्यों है? यह क्या है?
[14:31] चारों तरफ लाल धागे लगे हुए हैं, सीढ़ियों पर भी।
[14:35] सबके चेहरे पर हमेशा डर लगा। रहता है यहाँ आने के पहले।
[14:38] और उस जली हुई औरत का बार बार दिखना काली राग।
[14:41] जलने की बदबू। मैं मैं बीफकूफ नहीं हूँ।
[14:45] इस रूम का कोई राज़ है जो आप लोग मुझसे छुपा रहे हो।
[14:49] आप लोग मुझे नहीं बता रहे कि हाँ क्या हुआ था?
[14:52] प्लीज़ बताओ मुझे आई प्लीज़ मैं भी इस घर का हिस्सा हूँ।
[14:56] पारस के आई ने अपने। पति को परेशान होकर देखा।
[14:59] फिर आयशा से कहा कोई राज़ नहीं है बेटा।
[15:02] अच्छा सुनो। कुछ साल पहले हमारे यहाँ काम करने
[15:06] वाली एक औरत थी जिसकी मौत। छत गिरने की वजह से उस कमरे में
[15:10] हुई थी। उसके बाद से रिपेरिंग करने के लिए
[15:12] फ्लोर को बंद करके रखा हुआ था। परस ने तुम्हें बताया तो था
[15:16] रेनोवेशन के बारे में। बस इस मौत के बारे में हमने
[15:19] तुम्हें नहीं बताया, तुम डर जाओगी ये सोचकर यहाँ कोई नहीं जला है
[15:23] बेटा ये सब तुम्हारा एक सपना है अब चलो चलो नीचे।
[15:28] सबको अपनी नींद पूरी करनी है। यह कहकर।
[15:31] पारस की आई आयशा और बाकी सबको लेकर नीचे चली गई और फिर सब एक
[15:36] साथ सोने चले गए। अगले दिन नाश्ता कर आयशा गांव के
[15:43] मंदिर में गई। उसका।
[15:45] मन। बहुत ज्यादा आसान था।
[15:47] कल रात की घटना ने उसे हिला कर रख दिया था।
[15:50] उसकी भारत से बात भी नहीं हुई थी। अब तक जब उसने शांत मन से इस बारे
[15:55] में सोचा, उसे समझने में देर नहीं लगी कि उसकी सास उसे झूठ बोल रही
[16:00] थी। अगर वो सपना ही देख रही थी तो
[16:02] उसके हाथों पर छाले कैसे पड़े? वो काले पैरों के निशान और काली
[16:06] राग। वो तो परस ने भी देखे।
[16:08] थे। कुछ तो था जो अभी भी।
[16:11] छुपाया जा रहा था उससे। अरे ताई, आप यहाँ क्या कर रहे हो?
[16:16] मोहन का कहा मैं बस ऐसे ही आई थी यहाँ घर पर मुझे बहुत पीजिया नहीं
[16:20] हो रही थी। काका।
[16:22] मैं आपसे एक बात कहूं बेटा, आप। आप जितनी जल्दी हो सके यहाँ से
[16:27] चली जाओ और दुबारा दुबारा कभी मत आना यहाँ पर।
[16:32] क्यों आप? ऐसा क्यों बोल रहे हो काका?
[16:36] हर घर के कुछ राज़ होते हैं। ताई इस वाड़े के भी हैं।
[16:41] उस बारे में जितना कम जानो उतना। च।
[16:44] और काका यहाँ से? चले जाने से भी क्या होगा?
[16:47] कल जो औरत मुझे दिखी थी वो मुझे मुंबई के घर में भी दिखी थी।
[16:51] एक। बार इसका मतलब जो भी बात।
[16:54] है। सिर्फ इस वाड़े तक सीमित नहीं है,
[16:56] वो आप आप तो इतने सालों से यहाँ पर काम कर रहे हो, आपको तो सब पता
[17:02] होगा। अब आप ही मुझे बताओ ना काका।
[17:04] प्लीज़ है। ना मुंबई जाकर अगर वो।
[17:07] औरत मुझे वापस दिखी, इस बार मैं पक्का पागल हो।
[17:10] जाउंगी। ऐसा मत बोलो ताई ठीक है, मैं
[17:14] बताता हूँ पर मैं जो आपको बताऊँगा उस पर शायद ही आपको यकीन होगा।
[17:20] पर यही सच है। आपको बस मुझे वादा करना होगा कि
[17:24] आप कभी किसी को ये नहीं बताओगी कि आपको इस बारे में किसने बताया?
[17:29] वरना मेरा हर्ष भी बहुत बुरा होगा।
[17:34] ठीक है काका, अब आप बताओ की क्या बात?
[17:36] है। पारस जब 6 साल का था।
[17:39] उसका रिश्ता तभी से चंदनपुर गांव के अध्यक्ष की बेटी कुसुम के साथ
[17:44] तय था। वो जब 18 साल का हुआ उसकी शादी उस
[17:47] लड़की से कराई थी। क्या पारस की पहले शादी हो चुकी
[17:52] है? मैं मैं उसके पहली बीवी नहीं हूँ।
[17:56] आयशा को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था।
[17:59] हाथ आई पर शादी करके जो इस परिवार ने पाप किए वो अपनी शादी छुपाने
[18:05] के जन्म से कहीं ज्यादा बदतर है। आज उसकी शादी तो हो गई पर उसके
[18:09] माँ बापों को दहेज का बहुत लालच था।
[18:13] हर महीने वो कुसुम के पिता से कुछ न कुछ मांग करते।
[18:16] पारस भी अपने माता पिता की बातों का साथ देता और धीरे धीरे इस दहेज
[18:21] की भूख ने कुसुम और उसके परिवार को खोखला कर दिया।
[18:26] इस फूज की वजह से कुछ दिन बाद उसके पिता जल बसे।
[18:30] जब दहेज आना बंद हो गया तब वो लोग कुसुम को मारने पीटने लगे।
[18:36] पिट पिट कर मना कर दिया। उन लोगों ने उसे खाना नहीं देते
[18:40] थे, उसे कमरे में बंद करके रखते थे वो लोग।
[18:44] और पारस वो कुछ नहीं करता था कुसुम को बचाने के लिए।
[18:48] पारस वो अगर कुछ करता तो कुसुम की मौत नहीं होती थी।
[18:52] ताई? 1 दिन उसे बहुत पीटा गया और उसे
[18:56] उस कमरे में बंद कर दिया गया। 3 दिन तक ना अनाज का एक दाना ना
[19:02] पानी का एक बूंद दिया गया उसे तब अंदर स्टोरेज में रखी केरोसीन के
[19:06] स्टोव का तेल अपने पर डालकर उसने खुद को जला लिया।
[19:11] उसे किसी ने बचाया नहीं। और अतपारस उसने होने किस्से लिया।
[19:17] पता नहीं था ही पारस घर पर ही था जब उसकी बीवी जल रही थी।
[19:22] मुझे आज भी याद है रात के 3:11 बज रहे थे, पूरे घर में धुआँ भर गया
[19:28] था। कुसुम की चीखें सुनकर।
[19:31] खून जम रहा था। सबका पर किसी ने कुछ नहीं किया।
[19:34] बारिश ने भी नहीं। उसने तो सबको ऊपर जाने से भी रोका
[19:38] और अगले दिन अगले दिन खुद उस जली हुई लाश को पीछे बगीचे में गाड़
[19:44] दिया। उसने।
[19:45] बारिश ने। पर काका, वो तो मेरे साथ बहुत
[19:49] अच्छे से रहता है। मुझे आपकी बातों पर यकीन नहीं हो
[19:52] रहा, भारत ऐसा क्यों करेगा? काका?
[19:55] माना कि उसके माँ बाबा पुराने ख्यालात के हैं पर वो तो मुंबई
[19:58] में इतने साल से है, वो ऐसा क्यों करेगा?
[20:03] भाई परस, अपनी पूरी ज़िन्दगी। गांव में रहा।
[20:06] है। उस हादसे के बाद सवालों से बचने
[20:09] के लिए उसे मुंबई भेजा गया था। तीन 4 साल कुछ वक्त बाहर पड़ने से
[20:13] इंसान की सोच थोड़ी ना बदल जाती है और अगर उसके मन में चोर नहीं
[20:17] था तो उसने ये बात। आपसे छुपाई क्यों?
[20:20] है। आप मुझे बताओ, मैं बस आपसे एक ही
[20:23] बात कहूंगा, आप वापस चली जाओ। इससे पहले कि इन सबको लगे कि उनका
[20:29] सच बाहर आने वाला है और वो आपके साथ कुछ करे, आप चली जाओ, ताई चली
[20:35] जाओ। इसी में आपकी और सबकी भलाई है।
[20:38] चले जाओ ताई। ये कहकर मोहन काका वहाँ से चले
[20:42] गए। आयशा स्तब्ध थी ये पूरी बात
[20:45] सुनकर। कुछ देर बाद वो घर।
[20:48] लौटे जब दोपहर को सब सो। रहे थे।
[20:51] उसने चुपचाप अपना सामान पैक किया और वो वहाँ से निकल गई।
[20:58] मुंबई पहुँचकर अगले कुछ दिनों में उसने तीन आखिरी काम।
[21:03] किए पहला एक। एनोनिमस फ़ोन कॉल कर।
[21:07] उसने पुलिस को वाडे के पीछे बगीचे में।
[21:09] दबी लाश के बारे में बताया और उस बंद दरवाजे।
[21:12] के पीछे छुपे सबूतों को? इकट्ठा करने को भी कहा।
[21:16] दूसरी चीज़। आयशा ने गांव।
[21:19] में फ़ोन कर कुसुम के चंदरपुर में रहने वाले परिवार का नंबर लिया।
[21:24] और उसके घर पर फ़ोन। करके उनकी मिसिंग बेटी और पुलिस
[21:27] केस के बारे में बताया। और तीसरा, उसने।
[21:30] पारस को डिवोर्स पेपर भेज दिए। शायद कुसुम की आत्मा भी।
[21:35] यही चाहती थी क्योंकि उस दिन के बाद आयशा।
[21:38] को कोई जली। हुई औरत ना काले पैरों के छाप।
[21:43] और ना कोई काली राख दिखी। आज की कहानी बस ही तक होप यू लाइक
[21:51] दी स्टोरी गाइस अगर आपको ऐसी ही कहानियों और सुनी हैं तो वो जरूर।
[21:55] कीजिएगा। कहानी अच्छी लगी तो अपने।
[21:58] फ्रेन्डस एंड फैम्ली के साथ भी शेयर करना मत भूलिए।
[22:01] अगर आप अपना कोई एक्सपीरियंस? शेयर करना चाहते हैं तो डीएम एस।
[22:05] ऑन इंस्टाग्राम या हमें व्हाट्सएप करें।
[22:08] डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में हैं। और हाँ फडू फ्राइडिस का?
[22:11] नया एपिसोड आ चुका। है गो चेक?
[22:14] इट आउट गाइस अगले हफ्ते। आप बीती के।
[22:17] एक नए एपिसोड के साथ हम लौटेंगे। मैं हूँ मंजुला।
[22:21] और आप सुन रहे हैं स्पूकास्ट अवि और मंजुला के साथ सुनते।
[22:27] रहिए स्पूकास्ट, अवि और मंजुला के साथ।

Shows are listed from Apple Podcasts' charts and directory, and Podcast Index where it is used. Every show and episode belongs to its publisher and plays from the publisher's own feed; this site hosts none of them.
