# FAADU FRIDAYS Ep2 | SpookCast | Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 11 Oct 2024, 13 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/92902833/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2024-9-11%2F387933286-44100-2-163ce4acbb33.m4a

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## Transcript

[0:01] दोस्तों आपका स्वागत है सीज़न 2 के इस नए सीरीज में।
[0:05] यह है फाडू फ्राइडेज जा हर फ्राइडे की रात 9:00 बजे हम आपको
[0:10] कुछ असली हॉरर एक्सपीरियंसेस और घटनाओं की दुनिया में ले जाएंगे।
[0:14] आज हम आपके साथ दो ऐसे इन्सिडेंट्स शेयर करेंगे।
[0:18] जो हमें ऑनलाइन कुछ फोरम्स पे मिली है बट प्राइवेसी मेंटेन रखने
[0:23] के लिए हमने करैक्टर्स और उनके जगहों के नाम चेंज कर दिए हैं।
[0:27] अब बिना किसी देरी के हम पढ़ते हैं हमारी पहली घटना की ओर और
[0:31] शुरू करते हैं आज का फाडू फ्राइडे सुनते रहिए क्नॉइस।
[0:38] फाडू फ्राइडेज कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि कोई चीज़ बिल्कुल ठीक
[0:48] लगती हो लेकिन फिर भी आपको उसमें कुछ अजीब महसूस होता है।
[0:54] आज मैं आपको अपने बचपन की एक ऐसी ही कहानी सुनाने वाली हूँ जो मुझे
[0:58] आज तक डराती है। ये मेरे घर के एक पुराने डॉल के
[1:02] बारे में है। जो सिर्फ एक खिलौना नहीं था,
[1:05] उसमें कुछ और भी था। मेरा नाम रेचल है।
[1:08] ये कहानी मेरे बचपन की है जब मैं 1012 साल की थी।
[1:12] और ये सब हमारे सालम के पुराने एक घर में हुआ था।
[1:16] मेरे घर के सभी बच्चों के जैसे ही मेरे पास भी एक डॉल थी लेकिन ये
[1:20] कोई आम डॉल नहीं थी। ये पुरानी फैम्ली की एक लीगेसी
[1:23] थी। मेरी नानी के टाइम से ही चली आ
[1:26] रही थी। इसे हम ऐंटीक मान सकते हैं मेरे
[1:29] घर के सभी बच्चों ने। कभी ना कभी इस डॉल के साथ खेला था
[1:32] और ये हमेशा हमारे स्टोर रूम में ही रखा रहता था।
[1:35] जब 1 दिन मैंने सोचा इसे निकाल के अपने कमरे में रख लेती हूँ।
[1:41] डॉल का नाम था एक बहुत ही पुराना वुडन डॉल जिसने एक ट्रेडिशनल सेट
[1:46] पहनी हुई थी। उसके हाथ हमेशा बिलकुल स्ट्रेट
[1:49] रहते थे। और चेहरे पर एक हल्की सी स्माइल
[1:52] नॉर्मल लगती थी। पर जब से मैंने उस डॉल को अपने
[1:55] कमरे में रखा, चीजें धीरे धीरे अजीब होने लगी।
[1:59] पहले पहले तो सब कुछ नॉर्मल चल रहा था जब तक एक रात मैंने एक
[2:03] अजीब सी चीज़ महसूस की। रात के करीब 2:00 बजे का वक्त था
[2:07] और मैं गहरी नींद में थी। तभी अचानक से मेरी नींद खुली।
[2:11] एक हल्की सी हँसी की आवाज़ पे पहले तो मैंने सोचा शायद मैं सपना
[2:15] देख रही हूँ पर जब मैंने आँखें खोली तब सब कुछ नॉर्मल लगा।
[2:20] मैंने अपने रूम का एक क्विक स्कैन किया।
[2:23] सब कुछ ठीक ठाक लग रहा था लेकिन तभी मेरी नजर बेला पे पड़ी।
[2:28] जो मेरे बुक शेल्फ के एक कोने में बैठी हुई थी उसकी आँखें सीधा मुझे
[2:32] ही देख रही थी और एक अजीब सी फीलिंग थी जैसे की वो मेरी तरफ
[2:36] घूर रही हो। मैं ये सोच कर वो दुबारा सोने चली
[2:39] गई की ये मेरा वहम था, इमेजिनेशन था लेकिन ये पहला इंसिडेंट था और
[2:44] बाद में धीरे धीरे। चीज़े बद से बदतर होने लगी।
[2:49] अगली कुछ रातों में यही हँसी की आवाज़ मुझे बार बार सुनाई देने
[2:53] लगी। हर रात 2-3 बजे के बीच जब सब घर
[2:57] वाले सो रहे होते, मैं उसकी हँसी सुन पाती।
[3:01] पहले मैंने इग्नोर किया लेकिन एक रात मैंने डिसाइड किया।
[3:05] कि मुझे खुद ही यह चेक करना पड़ेगा।
[3:07] मैं बिट से उतर कर कमरे में घूम घूम के सारी चीज़े देख रही थी।
[3:11] सब कुछ ठीक लग रहा था लेकिन जब मैंने अपनी टॉर्च बेला की तरफ
[3:16] दिखाई तो एक चीज़ नोटिस की। उस डॉल का चेहरा बिल्कुल अलग लग
[3:20] रहा था जैसे कि वो स्माइल थोड़ी बड़ी हो गई हो।
[3:24] मेरे रोंगटे खड़े हो गए लेकिन मैंने अपने आप को कन्विंस किया,
[3:28] ये सब अब भी मेरा इमेजिनेशन ही होगा।
[3:32] लेकिन चीज़े तब और ज्यादा कृपी होने लगी।
[3:34] 1 दिन जब मैंने ये देखा कि उसके हाथ का अगल बदला हुआ ऐसा था जब
[3:40] मैंने पहली बार उसे रखा था। तो उसके हाथ सीधे थे जैसा कि
[3:43] मैंने पहले भी कहा था लेकिन अब वो थोड़े से ऊपर की ओर मुड़े हुए थे।
[3:50] मैंने अपने घर वालों को ये बात बताई पर सब ने इस बात को मजाक समझ
[3:55] कर डाल दिया। एक रात मेरी माँ मेरे कमरे में
[3:59] आई। और उन्होंने वो डॉल को देख कर
[4:00] मुझसे पूछा ये डॉल अभी भी यही क्यों रखी हुई है?
[4:03] जब मैंने उन्हें बताया की मैंने इसे रखा हुआ है तो उन्होंने सिर्फ
[4:07] इतना ही मेरे से पूछा की बेटी कुछ चीज़े पुरानी होती है और उनका एक
[4:11] स्थान होता है। मैं थोड़ी डर गयी पर मैंने डॉल को
[4:14] वापस नहीं रखा। शायद मेरी क्यूरियोसिटी कुछ
[4:17] ज्यादा ही थी। या फिर मैं देखना चाहती थी कि
[4:19] आखिर ये सब हो क्या रहा था? उसी रात सबसे अजीब इंसिडेंट हुआ।
[4:24] मैं रात को अपने पेट पर सो रही थी और तभी मुझे लगा कि जैसे कोई
[4:29] हल्के कदमों से मेरे रूम के अंदर चल रहा था।
[4:32] पहले तो मैंने इग्नोर किया। एस यूसुअल लेकिन।
[4:35] जब आवाज़ मेरे बेट के करीब आए तो मैंने आँखें खोली और झांक के
[4:40] देखने लगी। रूम में कोई नहीं दिखा, लेकिन फिर
[4:44] से वही हँसी की आवाज़ सुनाई दी। मैंने धीरे से अपनी टॉर्च उठाई और
[4:49] डॉल की तरफ टॉर्च घुमाई। इस बार अपनी पुरानी जगह से थोड़ा
[4:55] आगे आ चुकी थी, जैसे उसे किसी ने हिलाया हो।
[4:59] मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा था पर मैंने तुरंत
[5:03] अपना ब्लैंकेट अपने सिर तक खींच लिया और अपनी आँखें बंद कर ली।
[5:07] उस रथ ने मुझे पूरा हिला दिया था। अगली सुबह मैंने अपने मम्मी पापा
[5:12] को ये सब बताया। इस बार उन्होंने मुझे लाइट्ली
[5:15] नहीं लिया। हमने डिसाइड किया की हम उस डॉल को
[5:17] वापस स्टोर रूम में ही रख देंगे। हमने उस डॉल को वहीं छुपा दिया और
[5:21] डोर लॉक कर दिया। स्टोर रूम से वापस आने के बाद मैं
[5:25] अपने कमरे में आ गई। मेरा दिल अभी भी तेजी से धड़क रहा
[5:29] था। तभी जब मैं अपने बेड पर बैठी हुई
[5:32] थी, फ़ोन की घंटी बजी लेकिन लाइन में सिर्फ एक अजीब सी हँसी सुनाई
[5:36] दे रही थी। वहीं हँसी जो हर रात मैं सुनती आ
[5:42] रही थी, आज तक मुझे ये नहीं समझ में आया कि वही डॉल का सर था या
[5:47] सिर्फ मेरा इमेजिनेशन। मेरे दिमाग में आज भी वही हँसी
[5:53] गूंजती है। दोस्तों आपको क्या लगता है क्या
[6:00] ये रेचल की इमेजिनेशन थी या वाकई में वह डॉल्पसेस् थी?
[6:04] अगर आप उसकी जगह होते तो क्या करते कॉमेंट्स में बताए आगे बढ़ते
[6:08] हैं। हमारी दूसरी घटना की तरफ सुनते
[6:12] रहिये फाडू फ्राइडेज़ मेरा नाम राहुल है।
[6:19] ये कहानी मेरे और मेरे तीन दोस्तों के साथ घटी थी।
[6:22] हम लोग मध्य प्रदेश के भोपाल से हैं।
[6:24] हर वीकेंड हम दो लोग एक एड्वेंचर पे निकलते थे, कभी नाइट राइड्स तो
[6:28] कभी पुरानी बिल्डिंग्स एक्सप्लोर करना, ये हमारा शौक था पर एक रात
[6:32] हमने जो एक्सपीरियंस किया वो हमेशा के लिए हमारे दिमाग में बस
[6:35] गया। उस रात हम लोग बाइक पे निकल रहे
[6:38] थे। रात के करीब 11:00 बज रहे थे।
[6:41] शहर के बाहर एक कब्रिस्तान है जहाँ ज्यादा लोग आते जाते नहीं
[6:44] थे। हमने सोचा कि हम थोड़ा थ्रिल के
[6:47] लिए वहाँ जाएंगे, हमेशा की तरह कुछ मस्ती के लिए।
[6:50] पर वो रात सिर्फ मस्ती तक सीमित नहीं रही।
[6:55] हम बाइक्स को कब्रिस्तान के गेट के पास पार्क करके अंदर जाने लगे।
[6:58] कब्रिस्तान के आसपास कुछ पुराने पेड़ थे, जो अंधेरे में और भी
[7:02] ज्यादा डरावने लग रहे थे। हमने अपने टॉर्च साइन किये और
[7:06] अंदर चल दिए। पहले तो सब कुछ नॉर्मल सा लग रहा
[7:09] था, लेकिन एक अजीब सी खामोशी थी जो हम सब को थोड़ा अनेजी फील करा
[7:13] रहे थे। हवा भी एक दम ठंडी हो गयी थी।
[7:16] और ऐसे लग रहा था जैसे कि कोई हमारे आस पास था।
[7:20] तभी मेरे दोस्त अमान की नजर कब्रिस्तान के एक कोने में गई और
[7:23] उसने हमसे धीमी आवाज में पूछा कि उसे कोई वहाँ पे दिख रहा है क्या?
[7:28] हमें भी वहाँ कोई दिख रहा था? हम सबने देखा कि एक आदमी ये औरत
[7:33] जमीन पर लेटी हुई थी। लेकिन अंधेरे के कारण ठीक से
[7:37] दिखाई नहीं पड़ रहा था। पहले तो हमने इग्नोर किया लेकिन
[7:40] जब हम थोड़ा और आगे बढ़े तो उसका चेहरा थोड़ा सा दिखने लगा।
[7:45] कुछ तो अजीब था। उस चेहरे में अंधेरे और कम रौशनी
[7:48] की वजह से कुछ ज्यादा नहीं समझ आ रहा था पर ऐसा लग रहा था जैसे वो
[7:53] कोई इंसान ना हो। उसका चेहरा थोड़ा धुंधला सा दिख
[7:58] रहा था, लेकिन इतना साफ था कि हम समझ सके कि यह नॉर्मल नहीं था।
[8:03] हम सोच रहे थे कि क्या करें? लेकिन तभी अचानक से वो एकदम से
[8:07] उठकर बैठ गया। हम सब एक बल के लिए एकदम शॉक में
[8:11] थे। पहले तो हमने सोचा की ये कोई
[8:14] बेचारा आदमी या औरत थी जो की वो गलती से आ गयी थी, लेकिन जब हमे
[8:19] घूरकर देखने लगा, तब हमे समझ में आया की कुछ तो गड़बड़ है।
[8:23] हम सब यही सोचने लगे की यार ये कोई इंसान जैसा लग ही नहीं रहा है
[8:28] और हमे यहाँ से निकल जाना चाहिए। हम सब ने एग्री किया।
[8:31] पर जैसे ही हम मुड़ने लगे, वो धीरे धीरे हमारे पीछे चलने लगा।
[8:36] अभी हमे समझ में आया की ये कोई आदमी नहीं, कोई औरत थी।
[8:40] ये देखते ही हम सब के चेहरे का रंग उड़ गया।
[8:43] उसका चलना नॉर्मल नहीं था, जैसे की कोई इंसान नहीं बल्कि कोई इसको
[8:48] एक गुड़िया के जैसे कंट्रोल कर रहा था।
[8:51] हमारे सारे इन्स्टंट कह रहे थे की हमें तुरंत वहाँ से भाग जाना
[8:56] चाहिए लेकिन हम इतने शॉक्ड थे की हम हिल भी नहीं पा रहे थे।
[9:01] जब वो औरत हमारे और करीब आती गई तो उसका चेहरा अब और भी क्लियर हो
[9:05] गया था। उसकी आंखें जैसे खोखली थी और उसके
[9:09] गाल। अंदर तक धसे हुए थे।
[9:11] हमारा पूरा का पूरा शरीर एक जगह जम गया था।
[9:15] जैसे हमने अपने हाथ पैर ही खो दिया हो।
[9:18] हमें ऐसा लग रहा था की जैसे की वो हमारी तरफ बढ़ते हुए कुछ कह रही
[9:22] है लेकिन हमें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
[9:25] हम में से किसी के गले की आवाज तक नहीं निकल रही थी।
[9:28] उस औरत का धुंधला सा चहरा देख कैसा लग रहा था?
[9:31] मानो वो हमे देख के हंस रही थी और सुमन ही मन शायद सोच रही थी की की
[9:36] आज तुम यहाँ आ तो गए हो लेकिन जा नहीं पाओगे।
[9:40] हम सब फिर भी यही सोच रहे थे की शायद ये कोई पागल औरत है जो हमारे
[9:44] साथ मजाक कर रही है, लेकिन तभी। जब हम पीछे मुड़कर वापस जाना
[9:48] चाहते थे, हमने देखा की कब्रिस्तान का गेट बंद हो चुका
[9:51] था। हम सब वहाँ से निकलने के लिए
[9:53] भागने लगे, लेकिन जितना हम उस गेट की तरफ भागते उतना ही हमे ऐसा लग
[9:58] रहा था की औरत हमारे और करीब आती जा रही थी।
[10:02] हम भागते रहे लेकिन वो गेट जैसे हमसे दूर और दूर।
[10:06] होता गया। मैं आज भी जब इस घटना के बारे में
[10:09] सोचता हूँ तो मुझे ऐसा लगता है की शायद हम किसी मेज़ में फंस गए थे।
[10:14] अब जब वो फिगर हमारे और करीब आये तो उसका चेहरा पहले से ज्यादा साफ
[10:17] दिख रहा था। पहले जो सिर्फ एक सा इम्प्रेशन लग
[10:21] रहा था अब एक क्लियर इमेज बन चूका था।
[10:24] गाल एक दम अंदर तक धंसे हुए थे जैसे उसमें कोई खून ही न हो और
[10:29] आँखें खोखली लग रही थीं। कुछ था ही नहीं।
[10:33] वहाँ ऐसा लग रहा था की जैसे कोई जिंदा इंसान नहीं बल्कि एक इंसानी
[10:37] चेहरे का मास्क पहना हुआ था। अंधेरे में उसका रंग और ज्यादा
[10:43] सफीद जैसा लग रहा था और हर स्टेप जो वो हमारी तरफ बड़ा रही थी,
[10:48] उसके साथ साथ हवा और ठंडी होती जा रही थी।
[10:51] हम सब एक दम से जमे हुए थे। पता नहीं क्यों?
[10:53] लेकिन लग रहा था की जैसे हमारे हाथ पैर रेस्पॉन्ड ही नहीं कर रहे
[10:57] थे। बॉडी एकदम नम्ब हो गई थी।
[10:59] जैसे कोई इनविजिबल फोर्ट्स ने हम सब को वहाँ रोक रखा हो।
[11:05] हर एक पल के साथ वो फिगर हमारे और करीब आती जा रही थी।
[11:08] उसके कदमों की आवाज़ या कोई हरकत कुछ भी सुनाई नहीं दे रही थी।
[11:12] बस एक भारी सन्नाटा जो हमारे अंदर और भी गहराता जा रहा था रात के
[11:18] अंधेरे में। सिर्फ वो और उसका कुर्ता चेहरा
[11:23] जिसे बस देखने से ही वो हमें अंदर तक खा जाएगी।
[11:27] मैं ये डिस्क्रैब भी नहीं कर सकता कि उस वक्त हमारे दिल में क्या चल
[11:31] रहा था, हिलने की ताकत भी नहीं थी।
[11:33] सिर्फ उस औरत की आँखों में खुद को देख कर एक ही थॉट आया ये क्या है?
[11:38] ये हमारे साथ क्या हो रहा है? हमें ऐसा लग रहा था कि हम अब
[11:42] उनमें शामिल होने वाले हैं। फिर एकदम से सब कुछ खामोश हो गया।
[11:47] सब कुछ वैसा ही था जैसा हमने पहले पाया था।
[11:50] हमने एक दूसरे को देखा और बिना एक शब्द बोले बाइक पर चढ़ गए।
[11:54] हम सब वहाँ से सीधा घर भाग गए। अब तक हमें समझ नहीं आ रहा था कि
[11:59] जो भी हमने देखा या फील किया वो सब सच था या हम सब के दिमाग का
[12:04] भ्रम लेकिन एक बात पक्की थी। हमने कब्रिस्तान के पास कभी
[12:09] दोबारा कदम नहीं रखा। सो यही खत्म होता है हमारा एपिसोड
[12:17] फाडू फ्राइडेज का। अगले फ्राइडे हम वापस मिलेंगे।
[12:21] फाडू फ्राइडे के अगले एपिसोड में और भी ऐसे ही दिलचस्प कुछ किस्से
[12:27] लेके। आप शेयर कर सकते हैं आपकी
[12:29] कहानियों आपकी एक्सपीरियंसेस हमें ईमेल करके थैंक यू, थैंक यू गुड
[12:34] नाइट सुनते रहिए स्पोक कास्ट अभी और मंजिला के साथ।

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