# Ep36- WOH BANDH DARWAZA - Part 1 | ORIGINAL Horror Story | Hindi Horror Podcast | Bhoot | Horror Kahaniya |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 16 Feb 2025, 20 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/98573310/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-1-16%2F394970402-44100-2-729e8fa1d8b84.m4a

Story: What happens when Ayesha visits her Husband's Palace like Wada and finds a closed door and a floor where no one is allowed to go. Listen to the original story to find out the truth. Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! Send your stories on our Whatsapp number 9767916545. Leave a msg or a voice note and we will get back to you. | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Haunted Village | Haunted House | Haunted Flat Narrated by : Manjila STORY and SOUND : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:02] हे गाइज़ वेलकम टु एपिसोड 40 ऑफ़ स्पोककास्ट मैं हूँ मंजुला और आज
[0:09] हम सुनने वाले हैं एक स्पोककास्ट ओरिजिनल स्टोरी इट्स वैलेंटाइन्स
[0:14] वीक सो लेट मी आस्क यूए क्वेश्चन फर्स्ट क्या?
[0:18] हर लव स्टोरी का हमेशा हैप्पी एंडिंग होता है।
[0:21] ज़रा सोचिए तो नहीं ना एग्ज़ैक्ट्ली सो आज मैं आपके लिए
[0:27] एक ऐसी ही ओरिजिनल स्टोरी लायी हूँ, जिसकी शुरुआत तो एक बहुत ही
[0:32] नॉर्मल रिलेशन की तरह हुई थी। बट इट क्विकली टर्न्स इनटू ए
[0:36] टेरफाइइंग। हॉरर राइड दट यू कांट एस्केप तो
[0:40] चलिए आज की कहानी शुरू करते हैं मेरी यह कहानी।
[0:45] अगर आपको अच्छी लगे तो रेटिंग देना मत भूलिए, फॉलो करना मत
[0:48] भूलिए। बढ़ते हैं आज की कहानी की तरफ।
[0:53] सुनते रहिए स्पूकास्ट। अवि और मंजिला के साथ।
[1:03] आयशा काफी गहरी नींद में थी जब उसकी आँखें खुलीं।
[1:07] उसकी नजरें बेडसाइड टेबल पर रखी घड़ी पर पड़ी।
[1:12] रात के 3:11 बज रहे थे। पिछले चार दिनों से रोज़ हर रात
[1:19] ठीक 311 को उसकी नींद खुल जाती थी पर उठने पर उसे नींद टूटने का कोई
[1:25] कारण नहीं दिखता था। कमरा वैसा ही रहता अँधेरा सा
[1:30] विंडो से मुंबई की हल्की स्ट्रीट लाइट्स अंदर आते हुए।
[1:34] और बगल में पारस बेसुध नींद में बस उसे कुछ जलने की बदबू आती।
[1:42] एक तेज बदबू रोज़ बराज कुछ अलग था।
[1:48] जैसे ही उसकी नींद खुली उसे वो जलने की बदबू के साथ साथ अपने
[1:52] पीछे से। एक अजीब सी आवाज़ सुनाई दी,
[2:07] एक अजीब सी आवाज़ जो उसने पहले कभी नहीं सुनी थी मानो।
[2:13] मानो कोई दर्द से कराह रहा हो। आयशा की पीठ पारस की तरफ थी।
[2:19] उसने सोचा कि शायद पारस के गले से नींद में कोई आवाज निकल रही हो तो
[2:24] वो तुरंत पीछे मुड़ी पारस को देखने के लिए, पर उसे अपने ठीक
[2:29] ऊपर जो दिखा। उसे देख कर उसकी चीख गले में ही
[2:33] अटक गई। बेड के ऊपर एक काली जली हुई औरत
[2:40] का शरीर तैर रहा था जिसका मुँह आयशा की तरफ था।
[2:44] बस कुछ इंचेस ऊपर। उस औरत की स्किन बुरी तरह जली हुई
[2:50] थी। जगह जगह से मांस जलकर पिघला हुआ
[2:53] था। मांस बिगड़ने की वजह से शरीर कहीं
[2:56] से काला कहीं से गुलाबी रंग का दिख रहा था और एक बेहद गंदी बदबू
[3:01] आ रही थी उस औरत से जले हुए चमड़े की उसके होंठ गलकर।
[3:07] नीचे चिपक गए थे और उसकी आधे जले हुए काले काले ताद दिख रहे थे।
[3:12] उसकी आँखें काली थी क्योंकि उसकी आँखें कल चुकी थी।
[3:17] मानो वहाँ गहरे काले गड्ढे हो। उसकी खली से एक ऐसी आवाज आ रही थी
[3:23] जिसे सुनकर आयशा थर थर कांप रही थी।
[3:29] वही आवाज़ जिसे सुनकर उसकी आज नींद खुली थी।
[3:33] फुहारें तब धीरे धीरे आयशा के पास आती जा रही थी।
[3:37] इतने पास की उसके लटक रहे लंबे लंबे बालों से आयशा का मुँह दोनों
[3:43] तरफ से ढक चुका था। उसका चेहरा।
[3:46] अब उस औरत के चेहरे को लगभग छूने लगा था आशा खत्म घुटने लगा वो
[3:51] चीखना चाहती थी, पारस को नींद से जगाना चाहती थी, पर उसका गला
[3:56] बिल्कुल सूख चुका था और वो एक आवाज भी नहीं कर पा रही थी।
[4:00] उस औरत ने अब अपने जले हुए हाथ से उसका गला दबाना शुरू किया।
[4:06] आयशा आयशा छटपटाने लगी। उसकी सांस से वो कर रही थी।
[4:10] सोरत के जले हुए हाथ से उसके गले पर कुछ कुर्दुरा और पिलपिल आशा
[4:15] चिपक रहा था। शायद उसका गला हुआ मांस पर इससे
[4:19] पहले की वो कुछ और करती आयशा के गले से एक चीक निकली।
[4:27] और वोट कर बैठ गई। उसने धीरे धीरे अपनी आँखें खोली।
[4:31] वारंट अब वहाँ नहीं थी। उसकी चीख सुन पारस एक दम से उठा।
[4:39] आशा आशा क्या? हुआ।
[4:43] कुछ बोलो ऐसा हुआ क्या? कोई सपना दिखा क्या तुमने?
[4:47] हायशा पर आयशा डर से कांप रही थी। कमरे में अब वो औरत नहीं थी पर
[4:55] उसे अब भी वो चले हुए। चमड़े की दुर्गंध आ रही थी तो
[5:00] क्या उसने जो देखा वो सपना था? पर?
[5:03] पर ये दुर्गंध? ये दुर्गंध अभी भी कैसे आ रही थी?
[5:08] आईशा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। अगर उसने सच में सपना देखा था तो
[5:13] कुछ ज्यादा ही रियल था और बहुत ज्यादा डरावना।
[5:16] वो रोने लगी और उसने परस को पूरी बात बताई।
[5:20] सिर्फ आज का सपना ही नहीं। बल्कि पिछले चार दिनों से हो रही
[5:24] सारी बातें पूरी बात सुनकर पारस का मुँह सफेद पड़ गया।
[5:31] शायद शायद वो भी रद्द किया था। ये सब सुनकर उसने उसे गेस्ट
[5:37] बैडरूम में चलकर सोने को कहा और ये भी कहा कि वो।
[5:41] घर पर फ़ोन कर कर सब कुछ बताएगा और फिर वो दोनों डिसैड करेंगे कि
[5:45] आगे क्या करना है। आईशा और पारस दोनों मुंबई के एक
[5:54] मॉडर्न कपल थे। वो दोनों कॉलेज के टाइम से डेट कर
[5:59] रहे थे। और फाइनली 2 साल के बाद उन दोनों
[6:02] ने शादी कर ली। दोनों एक दूसरे से बहुत ज्यादा
[6:05] प्यार करते थे। पारस सोलापुर डिस्ट्रिक्ट के गांव
[6:09] में पैदा हुआ था। उसका अक्सर अपने गांव के घर में
[6:12] आना जाना लगा रहता। कई बार वो वहाँ महीनों तक रहता।
[6:17] वहीं आयशा मुंबई में ही पली बड़ी थी।
[6:20] वो कभी किसी गांव में न रही थी तब घूमने गई थी।
[6:24] उनकी शादी को अब दो महीने हो चूके थे।
[6:27] सब कुछ अच्छा चल रहा था। पारस अपना फैम्ली बिज़नेस संभाल
[6:32] रहा था। वहीं आयशा की जॉब एक कॉर्पोरेट
[6:34] फर्म में लग गई थी और एक महीने बाद उसकी जॉइनिंग थी।
[6:38] पर बिना किसी चेतावनी के इस रात के आतंक ने अचानक उन दोनों को
[6:44] परेशान कर दिया था। उन दोनों की खुशनुमा जिंदगी में
[6:48] अचानक डर और चिंता का माहौल बन गया था।
[6:53] उस हादसे के बाद भारत ने 1 दिन। कहा अच्छा।
[6:57] मुझे अपने गांव के पुराने वाले का थोड़ा रेनोवेशन करना है, चलोगी?
[7:02] क्या मेरे साथ? मुझे लगता है हम दोनों को एक चेंज
[7:06] की जरूरत है, है ना? आयशा को लगा मानो भारत में उसके
[7:10] मन की बात बोलती हूँ। उससे भी इस घर से कुछ दिन दूर
[7:15] रहना था। उस रात के बाद कोई भी हादसा नहीं
[7:18] हुआ था। उसके साथ पर उसे उसका बैडरूम उस
[7:22] औरत की याद दिलाता रहता जिसका उसके पास कोई एक्सप्लनेशन नहीं था
[7:26] तो उसने मना नहीं किया और वह दोनों कुछ दिन बाद पारस के गांव
[7:31] चले गए। यह पहला ट्रिप था आयशा का।
[7:35] किसी गांव में गांव में जाते ही आयशा पारस का घर देखकर हैरान रह
[7:42] गए। ये कोई छोटा मोटा मिट्टी का घर
[7:46] नहीं था। ये एक भव्य मराठा स्टाइल दो
[7:50] मंजिला वाड़ा था, जो कई कमरों से भरा था।
[7:54] इसका कंस्ट्रक्शन काफी पुराना था और पुराने जमाने का आर्किटेक्चर
[7:59] चारों तरफ दिख रहा था। हर दीवार पर पुरानी तस्वीरें,
[8:04] लकड़ियों की मूर्तियां, गाविंग वाले खंभे मानो वो किसी पुराने
[8:08] महल में हों। आशा को ये सब बहुत अच्छा लग रहा
[8:12] था। उसे यहाँ की विंटेज वाइब्स बहुत
[8:15] पसंद आ रही थी। पहले कुछ दिन तो सब अच्छा था।
[8:18] हमेशा घर लोगों से भरा रहता, गांव वाले हमेशा मिलने आते, हँसी,
[8:23] मजाक, मेहमान नवाजी ये सब शाम तक चलता रहता।
[8:27] वह जैसे जैसे कुछ दिन बीतते गए, धीरे धीरे लोग।
[8:32] कम होते गए और चीजें बदलने लगी। एक चीज़ जो आईशा ने सबसे पहले
[8:39] नोटिस की वो ये थी कि कोई उस वाड़े के दूसरे फ्लोर पर नहीं
[8:44] जाता था। वहाँ की सीढ़ियों तक कोई नहीं
[8:47] चढ़ता था, जो बहुत अजीब था। जब उसने इस बारे में पारस से पूछा
[8:53] तो पारस ने उसे बताया कि सेकंड फ्लोज़ के पिनर कई जगह पर कमजोर
[8:57] हो चूके थे। वहाँ रहना रिस्की था।
[9:00] इसीलिए रेनोवेशन का काम हो रहा था।
[9:03] आईशा एक साइलेंट ऑब्सेवर थी तो उसने ज्यादा कुछ नहीं कहा और वो
[9:08] चुप रही। 1 दिन दोपहर को वह ऐसे ही बोर हो
[9:14] रही थी। पारस किसी काम से बाहर गया था और
[9:17] घर के लोग खाना खाकर रेस्ट कर रहे थे तो आयशा ने सेकंड फ्लोर को
[9:22] एक्सप्लोर करने की सोंची सेकंड फ्लोर पर जाने के लिए।
[9:26] घर के आंगन के कोने से एक सीढ़ी थी जो दोनों तरफ दीवारों से ढकी
[9:30] थी। जगह जगह पर मशाल लगाने की सुविधा
[9:34] तो थी वहाँ पर दिन में भी वहाँ बहुत ज्यादा अँधेरा था।
[9:38] आयशा ने अपने रूम से टॉर्च उठाया और वो उन सीढ़ियों पर चुपचाप
[9:42] चढ़ने लगी। चारों तरफ मकड़े के जाले थे मानो
[9:49] कई दिनों कई सालों से उन सीढ़ियों पर कोई नहीं चढ़ा हुआ।
[9:53] सीढ़ियों से चढ़कर वो एक प्लेटफार्म पर पहुंची जो घर के
[9:57] बेकसाइड पर थी। उस प्लेटफार्म के दोनों तरफ टोटल
[10:01] छः कमरे थे, तीन तीन दोनों तरफ। और प्लेटफार्म के सामने एक रेलिंग
[10:07] थी, जो कमरों के सामने से होकर गुजर रही थी।
[10:10] उस रेलिंग से वाड़े के पीछे का बगीचा दिख रहा था।
[10:14] राइट साइड के कमरों की तरफ तो जाना मुश्किल ही था, क्योंकि
[10:17] तीनों कमरों के अंदर और बाहर पुराना टूटा फूटा सामान पड़ा था।
[10:23] दरवाजे खुले हुए थे। और चारों तरफ धूल और मकड़ी के
[10:26] जाले थे पर लेफ्ट साइड का गलियारा खाली था।
[10:30] पहले और आखिरी रूम के दरवाजे खुले हुए थे, उसमें भी धूल जले और
[10:35] पुराना सामान रखा था। पर दूसरा दरवाजा लॉक्ड था।
[10:42] आयशा ने उस दरवाजे को हिलाया। पर उसकी नजर दरवाजे की ऊपर गई।
[10:48] उस पर पुराने जमाने की चेन वाली कुंडी लगी थी।
[10:52] जीस पर एक मोटा सा ताला था और उस पर लाल कपड़ा बंधा हुआ था।
[10:58] उस लाल कपड़े के आसपास सिंदूर। सूखे हुए धान और अक्षदा के टुकड़े
[11:03] दिख रहे थे। उसे वो दरवाजा दूसरे दरवाजों के
[11:07] मुकाबले ज्यादा पुराना भी लग रहा था।
[11:11] ऐश इस दरवाजे को देख ही रही थी कि तभी उसे एक आवाज सुनाई दी अपने
[11:15] पीछे से। ताई आप यहाँ क्या कर रहे हो?
[11:18] ताई यहाँ ना बना है? तुमको पता है ना?
[11:22] वो मुड़ी पीछे मोहन काका खड़े थे उस घर के 30 साल पुराने बाबा जी
[11:29] को काका मैं मैं तो बस देख रही थी कि यहाँ क्या है, कुछ फोटोज
[11:34] खींचकर मैं लौट जाऊंगी काका, बस आधा घंटा लगेगा आप जाओ।
[11:40] चोको ठीक नहीं हैं यहाँ मत रुकिए आप खुशियों के बारे में किसी ने
[11:46] कुछ बताये नहीं क्या? उन्होंने उस बंद दरवाजे को देखते
[11:50] हुए कहा, आयशा ने ध्यान से मोहन काका को देखा।
[11:54] उनके चेहरे पर अब एक डर था, उसकी क्यूरिओसिटी और बढ़ गई।
[12:00] क्या बात है काका, इस इस कमरे में कुछ है क्या?
[12:04] ताई, इस बारे में आप बारस भाव से पूछो कुछ नहीं आप बस चलुया से
[12:10] चलुया से जमती आप तू बारे यहाँ कभी बताना कभी बताना यहाँ?
[12:17] मोहन काका के इस रिएक्शन ने आयशा को काफी हैरान कर दिया।
[12:21] वह समझ चुकी थी कि इस दरवाजे का कोई तो सीक्रेट था।
[12:26] इस ऊपर के फ्लोर का कोई सीक्रेट था जो मोहन काका उसे नहीं बता रहे
[12:31] थे। बाकी के सब दरवाजे खुले हुए थे पर
[12:35] वो? एक दरवाजा बंद था उसके लॉक पर
[12:39] पूजा का लाल कपड़ा बना हुआ था। मतलब जरूर यहाँ पर कुछ हुआ है या
[12:43] जरूर इस कमरे में कुछ है तो उसने पारस से पूछने की सोंची।
[12:52] रात को उसने पारस से इसके बारे में पूछा।
[12:55] पारस ने पहले उस पर गुस्सा किया की वो वहाँ क्यों गई थी?
[12:59] पर जब आईशा उस रूम के बारे में बार बार पूछने लगी तब उसने कहा।
[13:04] अरे, उपज में से पुराना स्टूरम है आशा तुम भी ना हर चीज़ में
[13:10] मिस्ट्री ढूँढने लगती हो मोहन काका बूढ़े है, उन्हें सबकी
[13:14] श्रद्धा होती है। और उनके एक्सप्रेशंस, वो तो हमेशा
[13:18] ऐसे ही सीरियस होते हैं। इसका तुम कुछ अलग से मतलब मत
[13:21] निकालना, प्लीज़, वह कुछ नहीं है। पर आयशा की क्यूरियोसिटी अब पीक
[13:27] पर थी। स्टोरेरूम के लॉक पर पूजा का
[13:30] कपड़ा कौन बांधता है? वो समझ गई थी कि पारस झूठ बोल रहा
[13:34] था। उसे पता था हर परिवार के अपने कुछ
[13:38] राज़ होते हैं और उसने इस परिवार के इस राज़ को पता लगाने की सोंची
[13:46] पर आयशा को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ने वाली थी क्योंकि
[13:51] उस रूम का राज़ तो खुद ब खुद उसके सामने खुल रहा था।
[13:55] बस वो अब तक इस बात से अनजान थी। 2 दिन बाद जबाशा नहाकर अपने कमरे
[14:04] में आई। उसे ड्रेसिंग टेबल पर रखे अपने
[14:06] मॉइस्चराइजर के डब्बे पर कुछ काला नजर आया।
[14:10] उसने उसे उठाकर देखा। वो जली हुई राख थी।
[14:15] आयशा हैरान थी। इराक, इराक यहाँ कैसे आए?
[14:19] कमरा तो बंद था और पारस बाहर गया था।
[14:23] शाम को जब पारस लौटा, उसने उसे वो राग दिखाई पर उसने इस बात को हँसी
[14:29] में उड़ा दिया। उसका कहना था कि वो जब नहाने गई
[14:33] थी। तबशाद घर के किसी बच्चे ने गंदे
[14:36] हाथों से उसके मॉइस्चराइजर के डब्बे को पकड़ा था पर आयशा को
[14:40] उसकी बात बिल्कुल कन्विंसिंग नहीं लगी क्योंकि उनके रूप के दरवाजे
[14:44] के ऊपर चैन वाली गुंडी थी जहाँ बच्चों का हाथ पोछना इम्पॉसिबल
[14:49] था। पारस फिर को छुपा रहा था।
[14:53] वो चुप रही। उसे एक अंजानदार ने घेर लिया था
[14:57] क्योंकि उस राख को देखकर हायशा के दिमाग में मुंबई के अपने फ्लैट
[15:01] में देखी। उस जली हुई औरत की भयानक यादें
[15:04] वापस लौट चुकी थी और अगले ही रात जो हुआ।
[15:10] उसने आयशा के डर को फिर से जगा दिया।
[15:16] रात को वह और 12 कमरे में सो रहे थे।
[15:20] आयशा की नींद इन हादसों के बाद से थोड़ी कच्ची हो गई थी।
[15:24] अचानक उसने रात को अपने कमरे के दरवाजे के खुलने की आवाज सुनाई
[15:28] दी। उसने आँखें नहीं खोली और वो पलट
[15:32] कर सो गई। उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी, उसे
[15:36] लगा पारस बाथरूम से लौटा था। उसे पारस के धीरे धीरे अंदर आने
[15:41] की आवाज सुनाई दी पर वो अपने बेड साइड की तरफ नहीं गया।
[15:49] आयशा को पारस के पैर की आवाज अपनी तरफ आते सुनाई दी।
[15:54] फिर पारस उसके पीछे आकर खड़ा हो गया।
[15:57] चुपचाप उसके पेड़ के पास आयशा की आंखें अब तक बंद थी।
[16:03] पर वह अक्टीव्ली सुनने की कोशिश कर रही थी कि पारस उसके पीछे खड़ा
[16:07] होकर क्या कर रहा था? क्या वह उसका फ़ोन चेक कर रहा था
[16:11] पर उसे कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही थी?
[16:13] उसके साँसों की आवाज के अलावा और तभी तभी आयशा को एक ऐसी आवाज
[16:19] सुनाई थी जो उसने पहले भी सुनी थी।
[16:30] जैसे ही आयशा को समझ आया वो आवाज़ किसकी थी?
[16:33] वो एक झटके से उठी और जो उसने देखा उसने उसे और भी डरा दिया
[16:38] क्योंकि पारस उसके पीछे नहीं। उसके साइड में था गहरी नींद में
[16:46] तो फिर उसके पीछे उसके पीछे कौन खड़ा था?
[16:49] इतनी देर से हाइशा डर से कांपने लगी।
[16:52] उसने लाइट ऑन की रूम में कोई नहीं था, बस उनके रूम का दरवाजा जो वो
[16:58] लॉक करके सोई थी वो खुला था और जमीन पर।
[17:02] जमीन पर काली राग से बने पैरों के निशान थे।
[17:07] दरवाजे से उसके पेट तक यह देखकर आयशा के गले से एक चितकार निकल गई
[17:18] और वो बहुत ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।
[17:21] पारस नींद से जग गया जब आयशा ने उसको खुला हुआ दरवाजा और वो राख
[17:26] से बने पैरों के निशान दिखाए। पारस की जैसे हवाईयां उड़ गई,
[17:31] उसका मुँह डर से सफेद पड़ गया पर उसने कोई भूत देख लिया हो।
[17:36] वो पैनिक करने लगा। और उसने आशा को तुरंत रूप से चलकर
[17:40] किसी दूसरे कमरे में चलने को कहा। भारत का रिएक्शन देख आशा हैरान हो
[17:45] गई। ये ये पारस से इतना क्यों डर रहा
[17:48] था? उसने तो कुछ देखा भी नहीं था या
[17:52] फिर या फिर उसे कुछ ऐसा पता था जो अभी तक वह आयशा से छुपा रहा था?
[17:58] वो सोचने लगी जब वो दोनों कमरे से निकले तब पारस के 1000 मना करने
[18:04] के बावजूद आयशा ने उन पैरों के निशानों का पीछा किया और उसने
[18:09] देखा कि वो पैरों के निशान दूसरी मंजिल की सीढ़ियों पर जाकर मिल
[18:15] रहे थे। इसका मतलब वो जो कोई भी थी वो
[18:20] दूसरे मंजिल से उनके कमरे में आई थी।
[18:23] पर कौन क्या किस वाड़े में कोई आत्मा थी या फिर कोई आयशा और पारस
[18:29] को डराने की कोशिश कर रहा था? वो डरावनी आवाज, वो डरावनी आवाज
[18:34] आयशा को फिर आज क्यों सुनाई दी थी?
[18:37] और उस दरवाजे के पीछे उसके पीछे क्या राज़ छुपा था?
[18:41] इन सवालों का सच जानने के लिए अगले हफ्ते इस कहानी का दूसरा भाग
[18:46] जरूर सुनिए आज की कहानी बस यहीं तक।
[18:53] होप यू गाइस लाइक्ड इट। अगर कहानी अच्छी लगी है तो अपने
[18:56] फ्रेन्डस एंड फैम्ली के साथ जरूर शेयर करिए और अगर आप अपना कोई
[18:59] एक्सपीरियंस हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो हमें इंस्टाग्राम पे
[19:03] डीएम करिए या व्हाट्सएप पर एक मैसेज करिए।
[19:06] डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में हैं। फालूफ्रेड का नया एपिसोड भी आ
[19:10] चुका है कई सो गो चेक इट आउट। अगले हफ्ते इस कहानी के दूसरे भाग
[19:16] के साथ विल बी बेक मैं हूँ मंजिला और आप सुन रहे हैं इस पूककास्ट,
[19:21] अवि और मंजिला के साथ। सुनते रहिए पूककास्ट, अवि और
[19:27] मंजिला के साथ।

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