# Ep43 - AAPBEETI 6 by SPOOKCAST- 2 REAL HORROR STORIES | Real Stories | Sachi Ghatana |

An episode of [SPOOKCAST - A Hindi Horror Podcast](https://invisiblenetwork.ai/podcast/1767172215), 28 Apr 2025, 27 min.

Audio: https://anchor.fm/s/f51bcf74/podcast/play/101901451/https%3A%2F%2Fd3ctxlq1ktw2nl.cloudfront.net%2Fstaging%2F2025-3-28%2F399237580-44100-2-0d6ca2f7efad4.m4a

Story: 2 creepy horror incidents shared by our lovely Listeners! Send your stories on our Whatsapp number 9767916545. Leave a msg or a voice note and we will get back to you. Please don't forget to follow us on Spotify!! And also leave a rating for us. That would encourage us immensely! | SpookCast | Horror Story | Bhoot | Horror Kahaniya | Horror Podcast | Hindi Horror Podcast | Murdaghar | Haunted Hospital | Real Incidents | Sachi Ghatana | Narrated by : Manjila SOUND and Graphics : Manjila Send your stories to KahaniSTVO@gmail.com WhatsApp : 9767916545 Sound Effect from Pixabay Say hi to us on Instagram! We would love to connect with you guys! https://www.instagram.com/spookcastoriginals/ Listen to the new Episode of Faadu Friday on Spotify: https://open.spotify.com/show/5po5YbzaWDIOclOcOE8kq5 Find us on Youtube: https://www.youtube.com/@SpookcastOriginals

## Transcript

[0:02] दोस्तों नमस्कार, वेलकम बेक टु ए न्यू एपिसोड ऑफ आपबीती बस
[0:06] फोरकास्ट जहाँ हम कुछ ऐसी सच्ची घटनाएं शेयर करते हैं जो
[0:11] स्पूकास्ट लिसनर्स ने हमारे साथ व्हाट्सएप, ईमेल, यूट्यूब या
[0:16] इंस्टाग्राम पर शेयर की है। हमेशा की तरह आज के आपबीती के
[0:19] एपिसोड में भी हम दो यूनिक इन्सिडेंस शेयर करने वाले हैं।
[0:23] सो अगर आप एक जेन्यूइन बुककास्ट फन हैं तो अपनी स्टोरीज़ हमारे
[0:27] साथ शेयर करना मत भूलिए और हाँ हमें फॉलो करना और रेटिंग्स देना
[0:32] भी मत भूलिए। कहानी कैसे शेयर करनी है इसके
[0:35] डीटेल्स डिस्क्रिप्षन में हैं। सो पूठ ऑन युअर हेडफोन्स एंड गेट
[0:39] रेडी। क्योंकि आज के आपूर्ति का एपिसोड
[0:43] शुरू होने जा रहा है। सुनते रहिए स्पोक कास्ट अभी और
[0:49] मंजिला के साथ। आज की पहली घटना मुंबई से हमारे
[0:57] साथ करण ने व्हाट्सएप पर शेयर की है।
[0:59] उनके कुछ और इन्सिडेंट्स आपने पहले भी आपत्ति पर सुने हैं?
[1:03] इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की कोशिश
[1:07] करूँगी। वैसे ध्यान से सुनिएगा क्योंकि ये
[1:11] कोई कहानी नहीं एक। सच्ची घटना है।
[1:16] मेरा नाम करन है और आज मैं आपको एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रहा
[1:20] हूँ जो मेरे अपने परिवार से जुड़ी है।
[1:23] मेरे फूफा जी की ज़िन्दगी से यह बात तब की है जब मेरे फूफा जी की
[1:28] एज करीब 22 या 23 साल थी। आज वह लगभग 50 के आसपास है, लेकिन
[1:34] आज भी जब भी वह यह हादसा किसी को सुनाते हैं, उस रात का डर उनकी
[1:39] आँखों में साफ दिखाई देता है। उन दिनों वह दिल्ली के साइकिल
[1:44] मार्ट के पास 110 मंजिला बिल्डिंग में नाइट सिक्योरिटी गार्ड की
[1:48] नौकरी कर रहे थे। वह।
[1:50] एक पुरानी टूटी फूटी और 10 मंजिला बिल्डिंग थी, जिसमें कोई नहीं
[1:54] रहता था, न कोई काम करता था क्योंकि उसके पीछे एक कब्रिस्तान
[1:59] था। बस दो वॉचमैन रखे गए थे।
[2:02] उस बिल्डिंग की रखवाली के लिए एक थे मेरे फूफा जी और दूसरे थे एक
[2:06] चाचा जो उनसे उमर में काफी बड़े थे।
[2:10] हर दिन की ड्यूटी काफी सिंपल होती थी।
[2:12] बिल्डिंग के कुछ राउंड्स बिल्डिंग के पीछे के साइड आग जलाकर बैठना,
[2:17] कुछ देर की बातचीत एक शांत रात और फिर सुबह का इंतजार।
[2:21] फूफा जी की ड्यूटी बिल्डिंग के पीछे वाले हिस्से में होती थी
[2:25] अरुण चाचा जी की आगे वाले हिस्से में लेकिन एक रात।
[2:30] सब कुछ बदल गया। फूफा जी आमतौर पर रात 10:00 बजे
[2:34] ड्यूटी पर पहुंचा करते थे लेकिन उस दिन ना जाने क्यों वो थोड़ा
[2:39] जल्दी करीब साढ़े 9:00 बजे ही बिल्डिंग के गेट पर पहुँच गए।
[2:42] जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा उन्हें तुरंत अजीब सा एक एहसास
[2:47] हुआ। चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था और
[2:50] सबसे हैरानी की बात ये थी कि उनके साथी वो चाचा जी कहीं भी नजर नहीं
[2:55] आ रहे थे। सोचते हुए फूफा जी बिल्डिंग के
[2:58] पीछे बने खुले हिस्से में चले गए जहाँ अक्सर वह लोग आग जलाकर बैठते
[3:03] थे। वह अकेले ही वहीं बैठ गए।
[3:05] और कुछ देर तक आग की आंच में हाथ सेकते रहे।
[3:09] करीब 10 मिनट बाद अचानक चाचा जी वहाँ आकर बैठ गए।
[3:13] जैसे कुछ हुआ ही ना हो वो ना थके हुए लग रहे थे ना अड़बड़ाये हुए
[3:18] चेहरा भी बिल्कुल सामान्य सतह फूफा जी ने थोड़ा हैरानी से उनसे
[3:22] कहा। चाचा जी आप?
[3:25] अब आये हो क्या? जब मैं अंदर आया था, आप तो कहीं
[3:28] नहीं दिखे। चाचा जी मुस्कुराए और बड़े सहज
[3:31] स्वर में बोले। अरे नहीं बेटा मैं तो पहले से ही
[3:35] आया था, तुम आज साढ़े 9:00 बजे आये थे ना मैंने तुम्हें आते हुए
[3:39] देखा था। फूफा जी कुछ पाल के लिए चुप रहे।
[3:43] क्योंकि उन्हें अच्छी तरह याद था कि जब वो बिल्डिंग में दाखिल हुए
[3:47] थे वहाँ कोई भी नहीं था। हर कोना खाली था, चारों तरफ
[3:52] सन्नाटा था तो फिर चाचा जी ने ही उन्हें आते हुए कैसे देख लिया, ये
[3:57] सवाल उनके मन में रह गया, लेकिन उन्होंने इसे ज़ाहिर नहीं किया।
[4:02] क्योंकि ड्यूटी पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी था।
[4:07] रात के करीब 1:00 बजे जब दोनों वॉचमैन आग के पास बैठे थे, तभी
[4:12] दूर कहीं से अचानक एक औरत के रोने की आवाज सुनाई देने लगी।
[4:20] एकदम तीखी। कप कप आने वाली और वो आवाज आ रही
[4:24] थी। बिल्डिंग के पास के पुराने
[4:27] कब्रिस्तान से। फूफा जी सहम गए।
[4:31] उन्होंने चाचा जी से पूछा। चाचा, आपने सुना कोई कोई औरत सू
[4:36] धू से रो रही है कब्रिस्तान में। उन्होंने हल्के से सर हिलाया और
[4:40] कहा। नहीं बेटा, मैंने तो कुछ नहीं
[4:44] सुना। फिर थोड़ी हल्की हँसी के साथ
[4:47] बोले। अगर तुने सुना है तो जादे का डर
[4:51] क्यूँ रहा है, भूत अगर तेरे सामने भी होगा तुझे वैसे भी पता नहीं
[4:56] चले। चाचा जी की ये बात सुनकर फूफा जी
[4:59] थोड़ा घबरा गए। चाचा जी की इस बात का क्या मतलब?
[5:03] लेकिन वो जवान थे और ड्यूटी से पीछे हटना उन्हें मंजूर नहीं था।
[5:07] उन्होंने टॉर्च उठाई और अकेले ही कब्रिस्तान की ओर चल पड़े।
[5:13] कब्रिस्तान का वो हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ था।
[5:16] और अंदर जाने पर ठंडी हवा के साथ एक अजीब सी नमी और सड़न की गम
[5:22] महसूस हो रही थी। हर कदम पर उन्हें लग रहा था कि
[5:25] कोई उन्हें छुप छुप कर देख रहा हो।
[5:28] कुछ दूर चलने के बाद अचानक उन्हें एक पेड़ के पीछे एक औरत नजर आई।
[5:36] सर झुकाकर वो रो रही थी, उसके कंधे हिल रहे थे जैसे वो सिसकियां
[5:42] ले रही हो। फूफा जी ने कुछ कदम उसकी और पढ़ाए
[5:46] और वो उस पेड़ के पास पहुंची पर ये क्या?
[5:50] जैसे ही फूफा जी उस पेड़ के पास पहुंचे अचानक सब शांत हो गया।
[5:55] अब ना कोई रोने की आवाज आ रही थी और ना ही उस पेड़ के पीछे कोई औरत
[6:02] थी। इससे पहले की फूफा जी समझ पाते की
[6:04] क्या हुआ है। अचानक दुबारा से रोने की आवाज
[6:07] सुनाई देने लगी पर इस बार आसपास से नहीं, फिर कहीं दूर, किसी पेड़
[6:14] के पास से। फूफा जी को अजीब लगा उन्होंने
[6:17] टॉर्च उठाए और फिर उस पेड़ की तरफ जाने लगे जहाँ से रोने की आवाज आ
[6:21] रही थी पर वो जैसे ही उस पेड़ के पास पहुंचे, वो औरत वहाँ नहीं थी।
[6:27] इससे पहले की वो दोबारा समझ पाते क्या हुआ फिर से रोने की आवाज आने
[6:31] लगी किसी दूसरे पेड़ के पीछे से। और ये सिलसिला कई बार दोहराता
[6:38] गया। वो औरत दिखाई देती।
[6:41] फूफा जी उसकी ओर बढ़ते फिर वो गायब हो जाती।
[6:45] फिर कहीं और से रोने की आवाज आने लगती।
[6:49] धीरे धीरे बिना एहसास हुए। फूफा जी कब्रिस्तान के बहुत ही
[6:53] अंदरूनी हिस्से में पहुँच चूके थे अंदर इतना गहरा अँधेरा था कि हाथ
[6:58] को हाथ नहीं सूज रहा था और तभी एक बहुत तेज भयानक चिकूँजी इत्तू
[7:07] भयानक की जैसे किसी ने। सीने में से किसी की जान खींच ली
[7:12] हो। फूफा जी घबराहट पे पलटे उन्हें
[7:16] तभी एहसास हुआ की वो बहुत ज्यादा अंदर आ चूके थे।
[7:20] डर के मारे खुद को संभाले हुए वो कब्रिस्तान के गेट की तरफ भागने
[7:25] लगे इस अंधेरे में। किसी तरह वो कब्रिस्तान के गेट के
[7:29] पास पहुंचे लेकिन जैसे ही वो गेट के पास पहुंचे एक ज़ोर की आवाज के
[7:34] साथ गेट अपने आप ज़ोर से बंद हो गया।
[7:39] फजी और डरते पहले इतना अँधेरा था, उसमें उस औरत की आवाज सुनाई दे
[7:44] रही थी और अब गेट बंद हो गया। उन्होंने आसपास देखा, पास ही में
[7:49] जो दीवार थी, उन्होंने उसे फांदी और किसी तरह वहाँ से बाहर निकले
[7:54] और अपने उस 10 मंजिला बिल्डिंग के अंदर पहुंचे।
[7:58] लेकिन अब वहाँ चाचा जी नहीं थे। करीब आधे घंटे तक फूफा जी अकेले
[8:05] बैठे रहे। खुद को शांत करते रहे।
[8:08] वो सोच रहे थे कि उनके साथ अभी कप्रिस्तान में क्या हुआ था?
[8:11] तभी अचानक उन्हें चाचाजी दिखे। बिल्डिंग की प्रीमाइसेज़ में अंदर
[8:16] आते हुए चाचाजी के हाथ में टिफिन था, कपड़े बदले हुए थे और चेहरे
[8:21] पर थकान थी। फूफा जी ने चौक कर उनसे कहा।
[8:24] चाचाजी। आप कहाँ गए थे?
[8:27] चाचा जी ने काफी सीरियस होकर जवाब दिया।
[8:29] आज थोड़ा लेट हो गया बेटा, मैं अभी आया हूँ।
[8:33] यह सुनकर फूफा जी वहीं जम गए। उनके पूरे शरीर में सिहरन दौड़
[8:37] गए। लेट।
[8:38] आप तो मेरे साथ साढ़े 9:00 बजे से है ना?
[8:41] चाचा जी ने हल्के से सर हिलाया। साढ़े 9:00 बजे से।
[8:45] नहीं नहीं मैं तो अभी आया हूँ देख ये रहा मेरा टिफ़िन।
[8:50] फूफा जी का चेहरा सफेद पड़ गया उनके मुँह पर एक अनजान ढरको देख
[8:55] चाचा जी ने उनसे पूछा। क्या हुआ तू तू?
[8:59] कहीं कब्रिस्तान तो नहीं गया था किले?
[9:01] पर फूफा जी ने झूठ बोल दिया। कब्रिस्तान ना ना।
[9:05] मैं नहीं गया था। वह लेकिन चाचा जी बोलते रहे।
[9:08] नहीं गया तो ही अच्छा वह कभी अकेले मत जाना, मैंने तुझे पहले
[9:13] बताया नहीं है पर अक्सर वह रात को एक औरत की रोने की आवाज सुनाई
[9:18] देती है। लोग कहते है वह एक औरत की आत्मा
[9:21] घूमती है जो अक्सर। छलावे से मर्दों को फंसाकर अंदर
[9:25] ले जाती है और अगर कोई अकेले अंदर चला गया तो उसकी सात अजीब चीजें
[9:30] होने लगती है। कुछ।
[9:32] लोग जो उसकी आवाज़ सुन पहले अंदर गए वो पागल हो गए या उनकी तबियत
[9:36] इतनी बिगड़ी की बड़ी मुश्किल से उन्हें बचाया जा सका?
[9:41] चाचा जी की ये बात सुनकर फूफाजी का मन हुआ कि वो सब छोड़कर उसी
[9:46] वक्त घर भाग जाए पर वो नहीं गए। उन्होंने शिफ्ट पूरी की और सुबह
[9:51] 7:00 बजे थके हुए घर लौटे पर घर लौटकर उन्होंने तुरंत अपनी बीवी
[9:58] को पूरी बात बताई। जैसे ही उनकी बीवी ने ये बात सुनी
[10:03] वो काफी परेशान हो गई। उन्होंने फूफाजी को उसी दिन किसी
[10:07] बाबाजी के पास चलने को कहा जब फूफाजी बाबाजी के पास पहुंचे और
[10:12] उन्होंने पूरी बात बताई। उनकी बात सुनकर उन बाबाजी ने
[10:16] उन्हें कुछ तावीज़ और कुछ मंत्र दिए और उनसे कहा।
[10:20] कि वह उस रात घर पर ही रहे। बाबा जी की बात के हिसाब से फूफा
[10:26] जी उस रात ड्यूटी पर नहीं गए। वह घर पर ही आराम करते रहे।
[10:31] रात के करीब 1:00 बजे जब वह सो रहे थे, अचानक उन्हें ऐसे लगने
[10:36] लगा मानो कोई उनके कमरे में। उनके सर के पास घूम रहा हूँ।
[10:43] जैसे ही उन्होंने आंख खोली, कमरे के कोने में हॉल के सामने उन्हें
[10:48] एक काली परछाई खड़ी दिखाई थी। उन्होंने तुरंत उस तरफ की लाइट
[10:52] जलाई पर वहाँ अब कुछ नहीं था। परछाई गायब हो चुकी थी।
[10:58] फूफा जी काफी डर गए पर धीरे धीरे बाबा जीके जो मंत्र थे उनका पाठ
[11:02] करते करते उन्हें नींद आ गई। लेकिन अगली सुबह फूफा जी भयंकर
[11:09] बुखार से तपने लगे। उनकी आँखों का रंग सफेद हो गया।
[11:12] आँखों की पुतलियां पूरी तरह से ऊपर चली गई।
[11:15] दांत एकदम कसके बंद थे। हाथों की मुठी पूरा शरीर इतना कसा
[11:21] हुआ था जैसे उनका शरीर लोहे का बना हो।
[11:24] एक ही दिन में उनका ये हाल देख उनकी बीवी काफी ज्यादा चिंता में
[11:29] पड़ गई। उन्होंने तुरंत बाबा जी को फ़ोन
[11:31] करके घर पर बुलाया। जब बाबा जी आए तब तक फूफा जी की
[11:35] हालत और खराब हो गई थी। उनके गले से अजीब अजीब आवाजें आ
[11:41] रही थी। पापा जी ने कुछ मंत्र पढ़े और वो
[11:44] शायद समझ गए। फूफा जी को आज क्या हो गया था।
[11:48] उन्होंने फूफा जीके सर पर हाथ रखा और पूछा।
[11:52] पता पता तू कहाँ से आयी है बोल? पहले फूफा जी ने कुछ नहीं कहा
[11:58] लेकिन दोबारा पूछने पर अचानक फूफा जीके गले से एक आवाज़ आई।
[12:06] उनकी आवाज़ अब उनकी आवाज़ नहीं थी।
[12:10] उनकी जुबान से एक भयानक औरत जैसी आवाज़ आ रही थी अब।
[12:13] हाँ। ये कब्रिस्तान आया था।
[12:17] और ये? मेरी खबर के ऊपर पैर रख के गया था
[12:21] मैं अब मैं इसे नहीं छोडूंगी, ये छोड़ूंगी इससे मैं।
[12:27] ये सुनकर सब परेशान हो गए। बाबा ने फिर से कहा।
[12:31] गलती हो गई है। इससे इसने जानबूझकर ऐसा नहीं
[12:34] किया। अँधेरा था इसीलिए शायद उसका पैर
[12:38] तेरी कमरे पर गलती से लग गया होगा।
[12:41] जाने दे इस बेचारे को जाने दे। पर मेरे फूफा जीके गले से फिर वही
[12:46] औरत जैसी भयंकर आवाज़ निकली। नहीं, अब मैं इसे अपने साथ ले
[12:52] जाउंगी, ले जाउंगी इसे मैं। और ऐसा कहते कहते मेरे फूफाजी का
[12:59] शरीर एक अजीब से अगल में मुड़ने लगा।
[13:03] शरीर ऊपर की ओर होने लगा मानो कोई हवा से उन्हें ऊपर की तरफ खींच
[13:08] रहा हो मानो उनका शरीर हवा में उड़ रहा हो।
[13:13] ये भयंकर दृश्य देख। उनकी बीवी और बाकी घर वाले बहुत
[13:17] घबरा गए। बाबा जी और ज़ोर ज़ोर से मंत्र
[13:19] पढ़ने लगे और फूफा जीके अंदर से और अजी बजीब आवाजें आने लगीं।
[13:25] फिर अचानक एक झटके से वो बिस्तर पर गिरे और सब शांत हो गया।
[13:31] बाबा जी ने मंत्र जाप बंद नहीं किया।
[13:34] उन्होंने कुछ और देर तक पूजा और हवन की और रक्षा के कुछ और उपाय
[13:39] बताकर वह चले गए। कुछ दिनों के बाद फूफा जी धीरे
[13:45] धीरे ठीक हुए पर वह नौकरी वह उन्होंने हमेशा के लिए छोड़ दी।
[13:52] सो ये थी घटना जो करण ने हमारे साथ शेयर की है।
[13:55] थैंक्स करण। ये काफी इंटरेस्टिंग इंसिडेंट है
[13:58] एंड वी अरे ग्लैड की आपके फूफाजी ठीक हो गए?
[14:01] ऐसे दोस्तों, कब्रिस्तान, शमशान ऐसी जगहों पर शायद इसीलिए रात को
[14:06] अकेले जाने से मना किया जाता है और अगर आप में से किसी के पास।
[14:11] कब्रिस्तान या श्मशान रिलेटेड कोई स्टोरी है तो हमारे साथ जरूर शेयर
[14:15] करें। शेयर कैसे करना है इसके डीटेल्स
[14:18] आपको डिस्क्रिप्षन में मिल जाएंगे।
[14:19] नाउ मूविंग ऑन टु दी सेकंड इंसिडेंट फॉर टुडे ये दूसरी घटना
[14:24] कोलकाता से हमारे साथ नंदिता ने व्हाट्सएप पर शेयर की है।
[14:27] आई लव्ड हौ शी रोट दी इंसिडेंट विथ सो मच डीटेल्स।
[14:31] इस घटना को अब मैं उनके शब्दों में आपके सामने रखने की कोशिश
[14:34] करूँगी। मेरा नाम नंदिता है।
[14:38] मेरे दादू का घर एकदम शानदार था। बड़ा भव्य पांच मंजिला पुरानी
[14:44] हवेली जैसा पर एक जगत ही उस घर में जो हमेशा वीराना लगती थी।
[14:51] पोथा घर का फोर्थ फ्लोर कोई वहाँ नहीं जाता था।
[14:55] बचपन से ही मुझे और मेरे बाकी कजीन्स को स्ट्रिक्टली बोला गया
[14:59] था कि वहाँ कभी अकेले मत जाना। किसी चीज़ को हाथ मत लगाना पर
[15:04] रीज़न कभी प्रोपरली नहीं बताया गया था।
[15:08] हम में से कोई वहाँ कभी अकेले जाने की हिम्मत सच में नहीं कर
[15:12] पाया। ऐसा नहीं था कि हम लोगों ने कुछ
[15:14] देखा या फिर कुछ सुना था। 25 क्न्सर्न और सीरियसनेस के साथ
[15:19] घर के बड़े बुजुर्ग। कुछ दिन बाद बाद ये बात हमसे
[15:23] दोहराते रहते, शायद उसी ने। हम सबके दिमाग में एक अंजान डर
[15:29] पैदा किया था उस कमरे के लिए, उस फॉर्थ फ्लोर के लिए।
[15:33] पर हम सबके बहुत बार पूछने पर भी हमें कभी नहीं बताया गया कि वहाँ
[15:38] क्या हुआ था? सो मैंने वो टॉपिक नहीं छोड़
[15:42] दिया, पर जब मैं टेंथ के बोर्ड एग्ज़ैम्स के बाद वह अपनी गर्मी
[15:46] की छुट्टियों में गई, तब पहली बार मैंने उस कमरे की कहानी सुनी या
[15:52] फिर कहूं मैंने देखा उस कमरे से सबको इतना डर क्यों था?
[15:58] उस दिन क्या हुआ था ये बताने से पहले मैं उस कमरे की हिस्टरी
[16:03] बताती हूँ। मेरे मम्मी के दो भाई थे और वो
[16:07] रूम वो फोर्थ फ्लोर अक्चवली मेरे छोटे मामा का था घर का सबसे बड़ा
[16:13] और सबसे बेस्ट रूम उस जमाने के हिसाब से उनके रूम में वो सब था
[16:19] जो हर स्कूल जाने वाले बच्चे का सपना होता था और वो जो चाहते।
[16:24] साधु उन्हें खरीद कर देते क्योंकि छोटे मामा उनके सबसे ज्यादा
[16:29] प्यारे थे। छोटे मामा को टेबल टेनिस का बहुत
[16:32] शौक था और दादाजी ने उनके लिए उस फोर्थ फ्लोर पर एक प्रॉपर टीटी
[16:36] सेटअप तक बनवा रखा था। वो पूरा फोर्थ फ्लोर छोटे मामा का
[16:41] अकेले का था। और उनसे बिना पूछे वहाँ कोई आए या
[16:45] उनके किसी सामान को छुए? उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं था और
[16:49] सब उनकी इन बातों का बुरा भी नहीं मानते थे।
[16:52] वो सबसे छोटे और सबसे लाड़ले जो थे पर फिर 1 दिन सब कुछ बदल गया।
[16:58] छोटे मामा के बोर्ड एग्ज़ैम्स का रिसाल्ट निकला।
[17:02] उसमें उनके नंबर काफी खराब आए। उनका रिसाल्ट देख दादू ने उन्हें
[17:07] बहुत डांटा और बस सब कुछ खत्म हो गया।
[17:12] छोटे मामा बहुत सेंसिटिव थे, बहुत जल्दी हर बात का उन्हें बुरा लग
[17:16] जाता था। दादू की डाँट को वह नहीं बर्दाश्त
[17:19] कर पाए और उसी कमरे में उन्होंने सुसाइड कर लिया।
[17:28] अगली सुबह बड़े मामा को उनकी बॉडी पंखे से लटकी मिली।
[17:34] सब लोग हिल गए। घर में एक बहुत ही दुख का माहौल
[17:38] छा गया। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा
[17:40] था। क्यों सबका लाडला अब इस दुनिया
[17:43] में नहीं रहा? पर असली बात यहाँ से शुरू होती
[17:47] है। उनके क्रियाकर्म के कुछ दिन बाद
[17:50] से पड़ोसी लोग कहने लगे कि रात के समय कभी कभी उस फॉर्थ फ्लोर के
[17:55] कमरे से अजीब अजीब सी आवाजें आ रही थीं।
[18:00] मानो कोई रात को 2:03 बजे टेबल टेनिस खेल रहा हो।
[18:06] पड़ोसियों को बॉल के टपकने की आवाज, किसी के हाथ में बैठ होने
[18:10] की हल्की सी ठक ठक ये सब आवाजें रोज़ सुनाई देने लगीं।
[18:16] बात फैलने में देर नहीं हुई और बहुत जल्द सब कहने लगे कि छोटे
[18:20] मामा की आत्मा रात को उस कमरे में दिखाई देती है।
[18:23] आसपास के बिल्डिंग वालों ने दादू के घर की तरफ खुलने वाली
[18:27] खिड़कियों को रात को बंद करना शुरू कर दिया।
[18:30] पड़ोसियों का डर देख दादू के घर में नौकरों और आने वाले गेस्ट में
[18:35] भी डर का माहौल फैल गया। दादू के घर में किसी ने छोटे मामा
[18:39] के मरने के बाद उन्हें वहाँ नहीं देखा था, ना कोई आवाज सुनी थी, पर
[18:43] इतनी सारी कंप्लेंट्स से सबको डर लगने लगा था।
[18:47] फाइनली छोटे मामा के रूम से सब फर्निचर और वो फन भी निकाल लिया
[18:52] गया। यह सोचकर कि आवाजें आना बंद हो
[18:55] जाएंगी पर पड़ोसियों के कंप्लेंट्स बंद नहीं हुए, बस
[18:59] थोड़ी कम हो गई। सब ये बात मान चूके थे कि वो रूम
[19:04] वो फॉर्थ फ्लोर अब हॉंटेड था। उसके बाद वह कमरा बंद हो गया।
[19:09] कोई वहाँ नहीं जाता था, सिर्फ कभी कभी सफाई होती थी।
[19:14] बस पर जो पड़ोसी लोग कहानियों सुनाते थे, वह सुनकर सबको डर लगता
[19:19] था। अब लौटते हैं मेरे टेंथ बोर्ड
[19:24] एग्ज़ैम्स के बाद की गर्मी की छुट्टियों में।
[19:26] जब मैंने खुद महसूस किया था उस कमरे का डर, छोटे मामा का डर उन
[19:32] गर्मियों की छुट्टियों से पहले मेरे बड़े मामा के यहाँ बेटा पैदा
[19:35] हुआ था और उसको संभालने के लिए उन लोगों ने एक आया रखी थी।
[19:39] आशा मैं भी तब वहीं थी। आशा बहुत दूर से रोज़ लोकल करके
[19:44] सुबह काम पर आती। और शाम को 7:00 बजे लोकल से अपने
[19:47] घर लौट जाती। सब कुछ स्मूथ चल रहा था जब तक
[19:50] अचानक बिन मौसम बारिश शुरू नहीं हुई।
[19:55] बिन मौसम बारिश की वजह से बच्चे के कपड़े, बालकनी में सुखाने में
[19:59] दिक्कत होने लगी। ये प्रॉब्लम को देखकर मामी ने आशा
[20:03] को चौथे फ्लोर वाले खाली रूम का यूज़ करने को कहा कपड़े सुखाने के
[20:07] लिए क्योंकि वहाँ स्पेस भी थी और नया फन भी।
[20:11] आशा को वैसे भी कुछ नहीं पता था उस कमरे के बारे में तो उसने बिना
[20:16] किसी टेंशन के वहाँ जाना शुरू कर दिया।
[20:18] पहले 2 दिन तक तो सब नॉर्मल था, फिर तीसरे दिन।
[20:22] आशा ने अचानक मामी से आकर कंप्लेन की।
[20:27] आशा ने कहा कि फोर्थ फ्लोर के रूम में जो लड़का था, वह पिछले 2 दिन
[20:32] से उसे बहुत घूर रहा था और उसने आशा से कहा था कि वह उसके कमरे
[20:36] में ना जाए पर आशा ने उससे कहा कि।
[20:39] मामी ने उसे वहाँ कपड़े सुखाने की परमिशन दी है तो वो मामी से
[20:43] डाइरेक्टली बात कर ले क्योंकि उसे रोज़ रोज़ उस लड़के से तर्क नहीं
[20:47] करना था। आशा की ये बात सुनकर मामी शान पड़
[20:51] गई क्योंकि उस कमरे में कोई नहीं रहता था।
[20:54] मामी ने जब आशा से पूछा कि कौन सा लड़का था जो उन्हें घूर रहा था?
[20:58] तब आशा ने कहा कि वह लड़का कुछ 1516 साल का था, मोटी फ्रेम का
[21:03] काला चश्मा पहनता था, उसके हाथ में छोटा सा बैट था, गोल सा शायद
[21:09] टीटी वाला बैट और वह लड़का पिछले 2 दिन से उन्हें रोज़ कह रहा था
[21:14] कि वह उस फॉर्थ फ्लोर में रहता है।
[21:18] ये सब सुनकर मामी के पैर के नीचे से जमीन घिसक गई क्योंकि मेरे घर
[21:23] में सिर्फ छोटे मामा ही थे जो काले रंग की मोटी फ्रेम का चश्मा
[21:28] पहनते थे। मामी ने आशा को कुछ नहीं कहा, बस
[21:32] अगले दिन से वहाँ जाने को मना कर दिया।
[21:35] वो आशा को सच बताकर डराना नहीं चाहते थे।
[21:38] क्या पता फिर वो काम ही छोड़ते। मामी ने फिर शायद पूरे घर वालों
[21:42] को भी इस बारे में बताया और पूरे घर में डर का माहौल फैल गया।
[21:46] सब लोग तभी आवाज में बात करने लगे और फिर सबको दुबारा कहा गया कि
[21:52] कोई फॉर्थ फ्लोर में। अकेला ना जाए पर होने को कौन टाल
[21:57] सकता है। 2 दिन बाद मामी किसी काम से बाहर
[22:00] गई थी और अचानक बारिश शुरू हो गई। जब फिर से बारिश की वजह से कपड़े
[22:06] सूखाने की जगह नहीं थी, तब आशा ने बिना बोले चुपचाप खुद ही।
[22:11] फोर्थसोर पर जाने का डिसीजन लिया। हम सब दोपहर का खाना खाकर बात कर
[22:17] रहे थे की आशा रोते हुए दौड़ते दौड़ते हमारे कमरे में घुसी, उसके
[22:23] बाल बिखरे थे, एक हाथ पैर चोट लगी थी उसकी वो हालत देख हम सब परेशान
[22:29] हो गए। जब मेरी मौसी ने उससे पूछा कि उसे
[22:31] क्या हुआ था, उसने कहा कि आज फिर बारिश हो रही थी तो वो कपड़े
[22:36] सुखाने उस कमरे में गई थी, मामी बाहर गई थी तो वो बिना बताए वहाँ
[22:41] चली गई। उसने जो वहाँ पहले रस्सी बांधी थी
[22:44] वो आज जमीन पर पड़ी थी। ये देखकर वो एक चेयर पर चढ़ी।
[22:49] रस्सी बांधने के लिए। पर जैसे ही उसने वो रस्सी का एक
[22:54] छोर बांधा, वो लड़का एकदम से गुस्से से फुफकारता हुआ रूम में
[22:58] आया और उसने आशा से कहा मैंने तुझे मना किया था ना मेरे?
[23:03] कमरे में ये सब नहीं करने के लिए। इससे पहले की आशा को जवाब दे
[23:08] पाती। उस लड़के ने उसकी चेयर को एक
[23:11] धक्का मारा, अब उसे चेयर से नीचे गिरा दिया, फिर फुसका हुआ।
[23:18] उसके पीछे दौड़ा। आशा इतना डर गई कि वो रोते हुए
[23:22] दौड़ते भागते हमारे पास आ गई। उस वक्त दोपहर के करीब 3:00 बज
[23:27] रहे थे। मोसी और मैं एक दूसरे को आतंक भरी
[23:30] नजरों से देख रहे थे क्योंकि हम दोनों थर्ड फ्लोर पे थे और
[23:33] सीढ़ियों हमारे कमरे से बिल्कुल बाहर थी।
[23:36] हमने किसी तरह आशा को शांत किया और उसे घर भेजा, फिर भगवान का नाम
[23:42] लेते लेते। हम नीचे दौड़े।
[23:44] ग्राउंड फ्लोर पर पूरी बात दादू को बताई।
[23:48] घर में सब शांत थे, सब के चेहरे पर डर था।
[23:51] दिन दहाड़े दोपहर को 3:00 बजे ऐसी एक घटना का घटना हम सबके लिए बहुत
[23:57] शॉकिंग था। यानी इतने दिनों से जो पड़ोसी
[24:00] कहते थे वो सच था। छोटे मामा अभी भी उस रूम में थे।
[24:04] और आज भी कोई उनके रूम में जाए या वहाँ कुछ छुए उन्हें पसंद नहीं
[24:09] था। उस दिन सबको समझ आ गया कि कुछ तो
[24:12] गलत था। वहाँ दादू ने तुरंत एक बड़ा हवन
[24:16] कराया, वो गया गया और जाकर वहाँ छोटे मामा का पिंड दान करवाया गया
[24:21] और घर में एक प्रॉपर पूजा भी की गई।
[24:23] उसके बाद। वो आवाज ही आना बंद हो गई।
[24:26] पड़ोसियों ने भी कहना छोड़ दिया कि रात को आवाज आती है पर अब भी
[24:31] कोई फोर्थ फ्लोर पे अकेले जाने की हिम्मत नहीं करता।
[24:35] इस बात को कितने साल हो गए हैं? अब तो इस रूम का पूरा रेनोवेशन भी
[24:41] हो गया है। पर आज भी।
[24:43] उस कमरे में कोई नहीं रहता। बस जब बड़ी गदरिंग्स होती हैं तब
[24:47] सब चुन्न बनाकर वहाँ जाते हैं। अकेले जाने की हिम्मत आज भी किसी
[24:52] में नहीं हैं। वहाँ थिस वास् ट्रूली ए वेरी
[24:56] स्केरियन से नंदिता और जो बात सबसे डरावनी हैं वो ये हैं की ये
[25:00] सब। आप लोगों के साथ दोपहर को हुआ
[25:03] व्हिच इस सुपर स्केयरी सो थैंक्स फॉर शेयरिंग थिस विथ उस इस तरह के
[25:07] हौंटेड घरवाले इन्सिडेंट्स अगर 200 आप में से भी किसी के पास है
[25:11] तो हमारे साथ जरूर शेयर करें। वी फाइन्ड थिस वेरी इंटरेस्टिंग
[25:15] एंड वी वुड लव टु पूठ इट अक्रॉस ऑन आपिती और इसके साथ आज का
[25:19] एपिसोड यही समाप्त होता है। अब बर्थडे हैं आज के शौत आउट सेशन
[25:23] की ओर आज का पहला शौत आउट जाता है।
[25:25] विशाल को हूँ रीचड आउट टु उस थ्रू इंस्टाग्राम सो उन्हें स्पूकास
[25:30] पसंद है एंड ही रीचड आउट टु उस फॉर सम गाइडेंस एंड वी हाड ए गुड
[25:35] चाट सो थैंक यू फॉर रीचिंग आउट टु उस विशाल।
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[25:42] यूट्यूब पर रीच आउट किया था और उन्हें हमारा नैरेशन स्टाइल और
[25:46] हमारी स्टोरीज़ काफी ज्यादा पसंद है।
[25:48] सो थैंक यू विकास फॉर रीचिंग आउट टु उस आई ऍम सो ग्लैड टु नो कि आप
[25:52] हमारी ईच एंड एवेरी स्टोरी को सुन रहे है।
[25:55] लिटरल्ली सो थैंक यू सो मच फॉर दट और हमारा फाइनल।
[25:58] पता है दी रनिंग अडिक्ट को जिन्होंने हमे यूट्यूब पर
[26:01] कॅाटाक्ट किया था ही सेस दट चैनल इस लिटरल्ली ए फ्रेश ब्रेथ ऑफ़
[26:05] रिलीफ एंड ही लव्स हर कॅन्टेंट सो दट्स ए रियली नाइस कमेंट दी,
[26:09] रनिंग अडिक्ट सो थैंक यू सो मच इफ यू अरे लिसनिंग एंड गाइस, थैंक यू
[26:13] सो मच फॉर एव्रीवन जो भी हमे रीच आउट करते हैं एंड हूँ राइट सच
[26:16] अमेजिंग थिंग्स फॉर उस एंड विथ थिस आज का एपिसोड यहीं खत्म होता
[26:20] हैं गाइस अगले हफ्ते हम भैरव पार्ट थ्री के साथ लौटेंगे।
[26:23] सेंड उस युअर यूनिक एंड स्केयरी इन्सिडेंस यू कैन रीच उस ऑन
[26:27] व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ईमेल और यूट्यूब सारे डीटेल्स
[26:30] डिस्क्रिप्षन में हैं। अगले हफ्ते फिर मिलेंगे मैं हूँ
[26:33] मंजुला और आप सुन रहे हैं स्पूकास्ट अवि और मंजुला के साथ
[26:39] सुनते रहिए स्पूककास्ट, अवि और मंजिला के साथ।

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